चेचक के घरेलू उपचार

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चेचक एक सर्वविदित और संक्रामक रोग है जिसे कई लोग त्वचा पर पड़ने वाले खास किस्म के दाने या लाल फुंसियों के कारण पहचानते है । चेचक वैरिसेला जोस्टर (Varicella Zoster) नामक वायरस (Virus) के कारण होता है । यह एक व्यक्ति से दूसरे में बहुत जल्दी फैलता है । यह रोग हवा के माध्यम से या एक संक्रमित व्यक्ति के माध्यम से भी फैल सकता है । चेचक होने पर सिर में दर्द, शरीर में दर्द, बुखार, खाँसी, नाक बहना, थकान, कमजोरी, खुजली, भूख की कमी आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है । चेचक होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; दूषित खान-पान, हवा में मौजूद चेचक के वायरस या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, माँ के दूध पर रहने वाले छोटे बच्चों को एकाएक माँ का दूध छोड़कर अन्य खाद्य पदार्थ खिलाना आदि । सामान्य तौर पर इस रोग के जीवाणु थूक, मल-मूत्र और नखुनों आदि में पाये जाते हैं । इस रोग के जीवाणु हवा में घुल जाते हैं और श्वसन के समय ये जीवाणु शरीर के अन्दर प्रवेश कर जाते हैं ।

इस रोग को ठीक होने में दस से पंद्रह दिन लग जाते हैं । यह रोग अधिकतर वसन्त ऋतु तथा ग्रीष्मकाल में होता है । इस रोग के तीन प्रकार हैं; 1. रोमांतिका या दुलारी माता, 2. मसूरिका या छोटी माता, 3. बड़ी माता । जब किसी को चेचक का रोमांतिका रूप हो जाता है तो इसके दाने रोमकूपों पर निकलने लगते हैं । यह रोग बारह वर्ष से कम आयु के बच्चों को अधिक होता है । कुछ सावधानियां बरतने से ही यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है । इस रोग में रोगी के चेहरे पर लाल रंग के दाने निकलने लगते हैं और जब ये दाने निकलते हैं तब रोगी को बुखार हो जाता है और बेचैनी होने लगती है । यह दाने दो से तीन दिनों के बाद फफोलों का रूप ले लेते हैं तथा कुछ ही दिनों के बाद ये सूखकर झड़ने लगते हैं ।

दूसरे, चेचक के मसूरिका रूप से पीड़ित रोगी के शरीर पर मसूर की दाल के बराबर दाने निकलने लगते हैं । इस चेचक को ठीक होने में कम-से-कम ग्यारह से बारह दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है । इस रोग में रोगी को खाँसी हो जाती है और छींके आने लगती है । इस रोग में दाने कभी-कभी बिना बुखार आये भी निकलने लगते हैं । तीसरे, चेचक के तीसरे प्रकार बड़ी माता से पीड़ित व्यक्ति को बहुत अधिक परेशानी होती है । इस रोग को ठीक होने में कम-से-कम पंद्रह से बीस दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है । इस रोग में दाने बड़े-बड़े फफोलों के रूप में शरीर पर निकलने लगते हैं । इन दानों के फूटने से उनमें से पानी निकलने लगता है और कभी-कभी तो उनमें मवाद भी भर जाता है और बदबू आने लगती है । इस चेचक के दाग गहरे होते हैं ।

चेचक के लिए घरेलू नुस्खें

Baking-Soda-True-Enemy-Of-The-Pharmaceutical-Industry-

  1. बेकिंग सोडा (Baking Soda) : बेकिंग सोडा चेचक से पीड़ित रोगी को खुजली और जलन से राहत दिलाने में मदद करता है । एक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलायें । अब उसी पानी में साफ और नर्म कपड़े को भीगोकर चेचक पर हलके हाथों से लगायें । अब कुछ देर के लिए सूखने दें और फिर उसे दुबारा पोंछ दें ।
  2. हरी मटर : हरी मटर में पाये जाने वाले आवश्यक गुण चेचक के उपचार के लिए सहायक है । दो सौ ग्राम हरी मटर को पानी में उबालें, फिर उस पानी को छानकर मटर को अलग कर लें । फिर उन उबले हुए मटर को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और रोगी के शरीर के प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें और सूखने तक छोड़ दें । फिर पानी से धीरे-धीरे पोंछ लें । इस उपचार को निरंतर करने से रोगी को जलन और दर्द से छुटकारा मिल जायेगा ।
  3. नीम : नीम की पत्तियों में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है और यह चेचक के जीवाणु को दूर करने में मदद करता है । रोगी को गर्म लगने पर आप नीम के पत्ते-सह टहनियों को एक करके रोगी को हवा करें । इससे न केवल रोगी को आराम मिलेगा बल्कि नीम के गुण के कारण जीवाणु का प्रभाव भी धीरे-धीरे कम हो जायेगा । रोगी के बिस्तर के चारों ओर नीम के पत्ते फैलाकर रखें । यहां तक की रोगी को जब भी नहलाएं तो पानी के बाल्टी में नीम के पत्ते डाल दें या फिर नीम के पत्तों को गर्म पानी में उबालकर रोगी को नहला सकते हैं । इससे रोगी का दर्द और खुजली कम हो जायेगा ।
  4. शहद : शहद में भी जीवाणु प्रतिरोधक गुण है को चेचक के जीवाणु को खत्म करने में कारगर है । शहद के प्रयोग से खुजली और दर्द कम हो जायेंगे । इसके रोजाना प्रयोग से चेचक के निशान भी नहीं बनते । एक कटोरी में पर्याप्त मात्रा में शहद लेकर चेचक पर लगायें । बीस से पच्चीस मिनट तक लगाकर रखने के बाद पानी से जगह को धीरे-धीरे धो दें । दिन में दो से तीन बार इस उपचार को करें ।
  5. गाजर और धनिया : गाजर में विटामिन ए (Vitamin A) और धनिया में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा पायी जाती है जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं । एक पात्र में एक गिलास पानी उबालें और उसमें एक कप कटे हुए गाजर और डेढ़ कप धनिया के पत्ते डाल दें । आँच को धीमा करके पंद्रह मिनट तक गर्म करें । उसमें थोड़ा-सा नमक मिलायें । फिर पानी को छानकर रोगी को पिलायें । एक महीने तक रोगी को इस पानी का सेवन करायें । आप रोगी को उबले हुए गाजर और धनिया पत्ती भी खिला सकते हैं ।
  6. एलोवेरा : एलोवेरा में कई सारे आवश्यक गुण पाए जाते हैं जो कई तरह के जीवाणुओं को दूर करने में मदद करता है । यह त्वचा को नर्म रखता है और दाग या निशान से मुक्ति दिलाता है । एक एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसके रस को बाहर निकाल लें । अब उसी रस को चेचक पर लगायें । ऐसा रोजाना करने से रोगी को खुजली से राहत मिलेगी और बाद में चेचक के निशान भी नहीं बनेंगे । इस बात का ध्यान रखें कि एलोवेरा के पत्ते से निकलने वाले पीले रंग के रस का प्रयोग बिल्कुल न करें, केवल सफेद वाला रस ही लगायें ।
  7. तुलसी : तुलसी में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व चेचक के जीवाणु को खत्म करने में कारगर है । एक कप पानी को उबालें और उसमें एक मुट्ठी ताजे तुलसी के पत्ते डाल दें । अब आँच कम करके तीन मिनट तक पानी को उबालें । फिर आँच से उतारकर पानी को दस मिनट के लिए छोड़ दें ताकि तुलसी के पत्ते के रस पानी में अच्छे से घुल जाये । पानी को छानकर फ्रिज में रख दें । कुछ देर बाद उसी पानी को निकाल लें और एक साफ कपड़े को तुलसी के पानी में भीगोकर चेचक पर धीरे-धीरे लगायें । इससे रोगी को आराम मिलेगा और खुजली भी कम हो जायेगी । रोजाना दिन में एक बार इस उपचार को करने से जल्द ही चेचक से राहत मिलेगी ।
  8. सेंधा नमक : सेंधा नमक में पाये जाने वाले मैग्नीशियम (Magnesium) और सल्फेट (Sulphate) नामक मिनरल (Mineral) दर्द को कम करने में सहायक है । एक बाल्टी हलके गर्म पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर अच्छे से घोल दें । फिर उसी पानी में साफ कपड़े को भीगोकर चेचक पर हलके हाथों से सिकाई करें । ऐसा रोजाना करने से चेचक से पीड़ित व्यक्ति को आराम मिलेगा और दर्द से भी छुटकारा मिल जायेगा । रोजाना दिन में दो बार इस उपचार को करने से जल्द ही चेचक से राहत मिल जायेगी ।
  9. अदरक : अदरक में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व चेचक के रोग में होने वाली खाँसी और बुखार को ठीक करने में मदद करता है । एक कप पानी को अच्छे से उबालें और उसमें एक चम्मच महीन कटे हुए अदरक को डाल दें । अब आँच को धीमा करके पानी को पांच मिनट तक उबालें । फिर पानी को छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोगी को पिलायें । दिन में दो से तीन बार इस पेय को पीने से चेचक से जल्द ही राहत मिलेगी । इसके अलावा थोड़े-से सूखे अदरक को पीसकर पाउडर बना लें या फिर ताजे अदरक के छोटे-से टुकड़े को नहाने के गर्म पानी में डाल दें और बीस से पच्चीस मिनट के लिए छोड़ दें । फिर उसी पानी से रोगी को नहलाएं ।
  10. दलिया : दलिया चेचक के उपचार के लिए सबसे सुरक्षित घरेलू उपचारों में से एक है । दो कप दलिया को पीसकर पाउडर बना लें । दो लीटर गुनगुने पानी में उस दलिया के चूर्ण को मिला दें और पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें ताकि दलिया अच्छे से पानी में घुल जाये । अब उसी पानी में साफ और नर्म कपड़े को भीगोकर रोगी के प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें । इससे खुजली और दर्द कम हो जायेगा । रोजाना दिन में दो बार इस उपचार को करने से रोगी को आराम मिलेगा और जल्द ही चेचक से राहत मिल जायेगी ।  

Ginger-Root-Benefits

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर चेचक की बीमारी से राहत मिल सकती है । बहुत अधिक कष्ट होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ और उपयुक्त जाँच  करवाएं । चेचक रोग के होने पर निम्नलिखित सावधानियाँ बर्तें :

  • चेचक के रोगी को अधिक मसालेदार, तेलयुक्त भोजन न दें ।
  • चेचक होने पर रोगी को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए ।
  • चेचक के रोगी को जब भी नहलायें तब हलके गर्म पानी का प्रयोग करें ।
  • इस बात का ध्यान रखें की रोगी शरीर पर आये छालों या फोड़ों को बिल्कुल न खरोचें, वर्ना यह रोग और भी फैल सकता है और दर्द भी बढ़ सकता है और बाद में निशान भी पड़ सकता है । फोड़ों को किसी भी तरह ढक कर न रखें ।
  • रोगी के चारों तरफ साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें ।
  • रोगी को अलग कमरे में लिटायें ताकि यह रोग किसी और में न फैले ।
  • चेचक की बीमारी से बचने के लिए बाहर का दूषित खाना न खायें और न ही दूषित पानी पीयें । चेचक के रोगी के संपर्क में न जाएँ, और यदि किसी कारणवश रोगी की सेवा हेतु रोगी के पास जाना पड़ता है तो सावधानियां बर्तें । रोगी के मल-मूत्र, त्वचा से निकलने वाले छालों, बलगम आदि से दूर रहें ।
  • वैरिसेला वैक्सीन (Varicella Vaccine) या चेचक का टीका वैरिसेला वायरस से होने वाले चेचक के लिए प्रतिरोधक के रूप में कार्य करता है । इस टीके को बहुत ही सुरक्षित माना गया है । टीके की एक खुराक से चेचक की गंभीर बीमारी से छुटकारा मिलता है । छोटे बच्चों को यह टीका लगवाना जरुरी है ।

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