देशभक्ति शायरी हिंदी में- Desh Bhakti Par Kavita

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देशभक्ति शेरो शायरी। देशभक्ति शायरी हिंदी में। देश भक्ति पर छोटी कविता। देशभक्ति कविता बच्चों के लिए। देश भक्ति पर नारे। देशभक्ति नारे। देश प्रेम पर कविता। देश भक्ति शायरी हिन्दी। Desh Bhakti Par Kavita

 

देशभक्ति शेरो शायरी

 

मिटा दिया है वजूद उनका जो भी इनसे भिड़ा है,
देश की रक्षा का संकल्प लिए जो जवान सरहद पर खड़ा है।

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे

शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे

बची हो जो एक बूंद भी लहू की

तब तक .भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज आएगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा

यहाँ आरती है अज़ान है, हिन्दू हैं मुसलमान हैं,
है गर्व मुझे इस देश पर क्यूंकि ये मेरा हिन्दुस्तान है।

मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए

बस अमन से भरा यह वतन चाहिए

जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए

और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये

 

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मर मिटनेवालों का बाकी यही निशां होगा

 

दिल से मर कर भी ना निकलेगी वतन की उल्फ़त,
मेरे मिट्टी से भी खुशबू-ए-वतन आएगी.

आजाद, भगत सिंह जैसे, इस देश में जन्में वीर यहाँ,
कुर्बानी की इनकी गाथाएं गाता है ये सारा जहाँ।

जो अब तक ना खौला वो खून नही पानी हैं,
जो देश के काम ना आये वो बेकार जवानी हैं.

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा

ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए

कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये

भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे पापों का जब पतन होगा,
हो जाएगा खुशहाल ये जीवन खुशहाल ये मेरा वतन होगा।

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं,
देखना हैं जोर कितन बाजू-ए-कातिल में हैं,
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमां,
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में हैं

हाथ जोड़कर नमन जो करते, मत समझो कि कमजोर हैं हम
उठाओ कथायें इतिहास की तो छाये हुए हर ओर हैं हम।

खून से खेलेंगे होली,

अगर वतन मुश्किल में है

सरफ़रोशी की तमन्ना

अब हमारे दिल में है,

अनेकता में एकता ही इस देश की शान है,
इसीलिए मेरा भारत महान है

सच्चाई की राह पर चलते, नहीं मन में कोई बुरी भावना
उन्नत हो ये देश हमारा, अपनी तो बस यही कामना।


देश भक्ति पर छोटी कविता

 

तिरंगा हमारा हैं शान- ए-जिंदगी
वतन परस्ती हैं वफ़ा-ए-ज़मी
देश के लिए मर मिटना कुबूल हैं हमें
अखंड भारत के स्वपन का जूनून हैं हमें..!!

हर रोज नया दिन, हर रोज नया पर्व है,
विविधताओं से भरे इस देश पर मुझे गर्व है।

लड़ें वो बीर जवानों की तरह,
ठंडा खून फ़ौलाद हुआ,
मरते-मरते भी की मार गिराए,
तभी तो देश आज़ाद हुआ.

 

दे सलामी इस तिरंगे को
जिस से तेरी शान हैं,
सर हमेशा ऊँचा रखना इसका
जब तक दिल में जान हैं

मैं भारतवर्ष का हरदम अमिट सम्मान करता हूँ
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ। @देशभक्ति शायरी

उत्तर में है खड़ा हिमालय, दक्षिण में सागर मचल रहा,
पूरब से सूरज निकला देखो, पश्चिम प्रगति में बदल रहा।

 किसी को लगता हैं हिन्दू ख़तरे में हैं,
किसी को लगता मुसलमान ख़तरे में हैं,
धर्म का चश्मा उतार कर देखो यारों,
पता चलेगा हमारा हिंदुस्तान ख़तरे में हैं.

स्वतंत्रता दिवस पर शायरी

कुछ नशा तिरंगे की आन का है,

कुछ नशा मातृभूमि की मान का है,

हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,

नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है

ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता ,
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता

कुछ नशा तिरंगे की आन का है,
कुछ नशा मातृभूमि की मान का है,
हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,
नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है !!

ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता ,
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता

खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,
मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,
करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,
तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है…

न तीर से न तलवार से हम समझाएं पहले प्यार से हम,
जो टकराता है फिर भी हमसे, मिटा दें उसको पहले वार से हम।


देशभक्ति कविता बच्चों के लिए

 

यह तिरंगा झंडा अपना ,
ऊँचा उड़ता रहे गगन में,
केसरिया रंग इसकी शोभा,
शांति मार्ग पर बढ़ते रहना,
खुशहाली का रंग हरा हैं.
चक्र प्रगति का प्रतीक हैं.
देश का झंडा हमको प्यारा,
इसकी रक्षा करे हमेशा,
तीन रंग हैं इसकी शान |
हमको हैं इस पर अभिमान|
वीरो का उत्साह बढ़ाता |
श्वेत रंग सबको सिखलाता |
मेहनत से खुशहाली आती |
गति ही मंजिल तक ले जाती |
न्यौछावर हैं इस पर प्राण |
आजादी की यह हैं, शान ||

वंदे मातरम,
वंदे मातरम
सुजला सुफला मलयज-शीतलाम
शश्य-शामलाम मातरम
वंदे मातरम

शुभ्र-ज्योत्स्ना-पुलकित यामिनी
फुललकुसुमित-द्रुमदल शोभिनी
सुहासिनीं सुमधुर भाषिनीं
सुखदां वरदां मातरम
वंदे मातरम

– बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय

आज़ादी की अर्द्धशती
मत सोना पहरेदार।
खुले हैं आँगन, देहरी, द्वार।।

बीते वर्ष पचास, आस अब तक न हो सकी पूरी
जन-जन के अंतर्मन की अभिलाषा रही अधूरी
बदल गया माली
लेकिन है ज्यों की त्यों अनुहार।
खुले हैं आँगन, देहरी, द्वार।।

जिस मंज़िल के हित हम सब ने बाँधे थे मंसूबे
भटकी मंज़िल थके बटोही सपने हुए अजूबे
जमती गईं परत पर परतें
परतें अपरंपार।
खुले हैं आँगन, देहरी, द्वार।।

भाषा की जिस कश्ती पर हम समर लाद कर लाए
तट के पास कहीं उस तरणी को ही हम खो आए
अभी समय है शेष
उठा लो हाथों में पतवार।
खुले हैं आँगन, देहरी, द्वार।।

जोश-जोश में होश नहीं खो देना मेरे भाई
पाँव ज़मीं पर रहें अन्यथा होगी जगत हँसाई
खुशी-खुशी में गँवा न देना
जीने का अधिकार।
खुले हैं आँगन, देहरी, द्वार।।

डॉ. जगदीश व्योम
१३ अगस्त २०१२

ईश्वर हमारे, यही हमारी चाह,
तुम दिखाना हमे वह राह,
कभी न करे किसी से डाह,
मिलकर करे वाह ! वाह !

माता पिता हो हमारे साथ,
हम माने उनकी सब बात,
मिल-जुलकर रहे हम सब साथ,
उच्च निचे की करे न बात |

प्रभु, हमको दो यह वरदान,
पढ़ लिखकर हम बने महान,
झूट को कभी न दे मान,
सच्चाई का करे सम्मान |

वीर जवानों, मेरे देश के शानों
सम्पूर्ण भारत ये कहता पुकार के
इस देश को रखना वीरों तुम संभाल के
वीर जवानों, मेरे देश के शानों


देश भक्ति पर नारे-देशभक्ति नारे

 

“भारतवर्ष को तलवार के बल पर जीत गया था और तलवार के बल पर ही उसने ब्रिटानी कब्जे में रखा जाएगा”
– लार्ड एल्गिन

“सारे जहां से अच्‍छा हिन्‍दोस्‍तां हमारा”
-Iqbal इकबाल

“जय जवान जय किसान”
– लाल बहादुर शास्त्री

“मेरे सिर पर लाठी का एक-एक प्रहार, अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील साबित होगा”
-लाला लाजपत राय

“साइमन कमीशन वापस जाओ”
-लाल लाजपत राय

 

बड़ा ही गहरा दाग़ है यारों जिसका ग़ुलामी नाम है, उसका जीना भी क्या जीना जिसका देश ग़ुलाम है!

बड़ा ही गहरा दाग़ है यारों जिसका ग़ुलामी नाम है, उसका जीना भी क्या जीना जिसका देश ग़ुलाम है |

किसकी राह देख रहा, तुम खुद सिपाही बन जाना, सरहद पर ना सही , सीखो आंधियारो से लढ पाना |

पहले हम खुद को पहचाने फिर पहचानें अपना देश, एक दमकता सत्य बनेगा, नहीं रहेगा सपना देश |

हर तूफान को मोड़ दे जो हिन्दोस्तान से टकराए, चाहे तेरा सीना हो छलनी तिरंगा उंचा ही लहराए |

धरती हरी भरी हो आकाश मुस्कुराए, कुछ कर दिखाओ ऐसा इतिहास जगमगाए |

वीर चले है देखो लड़ने, दुश्मन से सरहद पर भिड़ने |

इतना ही कहेना काफी नही भारत हमारा मान है, अपना फ़र्ज़ निभाओ देश कहे हम उसकी शान है |

बंद करो ये तुम आपस में खेलना अब खून की होली, उस मा को याद करो जिसने खून से चुन्नर भिगोली |

दोनों ही करते है कुर्बान, माँ ममता को, जान को जवान इसीलिए तो है मेरा भारत महान |

कुछ कर गुजरने की गर तमन्ना उठती हो दिल में, भारत मा का नाम सजाओ दुनिया की महफिल में |

 

 


 देश प्रेम पर कविता

 

अमरपुरी से भी बढ़कर के जिसका गौरव-गान है-
तीन लोक से न्यारा अपना प्यारा हिंदुस्तान है।
गंगा, यमुना सरस्वती से सिंचित जो गत-क्लेश है।
सजला, सफला, शस्य-श्यामला जिसकी धरा विशेष है।
ज्ञान-रश्मि जिसने बिखेर कर किया विश्व-कल्याण है-
सतत-सत्य-रत, धर्म-प्राण वह अपना भारत देश है।

जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है
जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है
जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है
– अभिषेक मिश्र

जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है…
जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है……

वेदों के मंत्रों से गुंजित स्वर जिसका निर्भ्रांत है।
प्रज्ञा की गरिमा से दीपित जग-जीवन अक्लांत है।
अंधकार में डूबी संसृति को दी जिसने दृष्टि है-
तपोभूमि वह जहाँ कर्म की सरिता बहती शांत है।
इसकी संस्कृति शुभ्र, न आक्षेपों से धूमिल कभी हुई-
अति उदात्त आदर्शों की निधियों से यह धनवान है।।

अपने धर्म, देश, भाषा की, जो इज़्ज़त करते हैं,
धर्म, देश और भाषा प्रेमी, सब उनको कहते हैं।

हिंदू, हिंदी, हिंदोस्तान, ये पहचान हैं मेरी,
तीनों ही मुझमें रहते हैं, तीनों जान हैं मेरी,
जहाँ भी रहता हूँ ये मेरे, साथ-साथ रहते हैं।

अपनी सभ्यता, संस्कृति से, मैंने वो पाया है,
इस धरती से, उस अंबर तक, जो सबसे प्यारा है,
जिसको पाने की कोशिश में, सारे ही मरते हैं।

भारत कह लो, इंडिया कह लो, या फिर हिंदोस्तान,
मेरी आँखें उसी तरफ़ हैं, उसी तरफ़ है ध्यान,
तन से रूह, उसके गुण गाते, उसमें ही बसते हैं।

 

जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है….
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है………..

योग-भोग के बीच बना संतुलन जहाँ निष्काम है।
जिस धरती की आध्यात्मिकता, का शुचि रूप ललाम है।
निस्पृह स्वर गीता-गायक के गूँज रहें अब भी जहाँ-
कोटि-कोटि उस जन्मभूमि को श्रद्धावनत प्रणाम है।
यहाँ नीति-निर्देशक तत्वों की सत्ता महनीय है-
ऋषि-मुनियों का देश अमर यह भारतवर्ष महान है।

जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है…..
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है…………

जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है……
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है……………..

क्षमा, दया, धृति के पोषण का इसी भूमि को श्रेय है।
सात्विकता की मूर्ति मनोरम इसकी गाथा गेय है।
बल-विक्रम का सिंधु कि जिसके चरणों पर है लोटता-
स्वर्गादपि गरीयसी जननी अपराजिता अजेय है।
समता, ममता और एकता का पावन उद्गम यह है
देवोपम जन-जन है इसका हर पत्थर भगवान है।

ओ विप्लव के थके साथियों
विजय मिली विश्राम न समझो
उदित प्रभात हुआ फिर भी छाई चारों ओर उदासी
ऊपर मेघ भरे बैठे हैं किंतु धरा प्यासी की प्यासी
जब तक सुख के स्वप्न अधूरे
पूरा अपना काम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

पद-लोलुपता और त्याग का एकाकार नहीं होने का
दो नावों पर पग धरने से सागर पार नहीं होने का
युगारंभ के प्रथम चरण की
गतिविधि को परिणाम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

तुमने वज्र प्रहार किया था पराधीनता की छाती पर
देखो आँच न आने पाए जन जन की सौंपी थाती पर
समर शेष है सजग देश है
सचमुच युद्ध विराम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

इतने व्यस्त हो गए तुम, कि तुम्हारा देशप्रेम साल में 2 बार जगता है
उन सैनिकों के बारे में सोचो, जिनके जीवन का पल-पल देश के लिए लगता है
कोई देश के लिए शान से मरता है………….

आज जीत की रात
पहरुए! सावधान रहना
खुले देश के द्वार
अचल दीपक समान रहना


देश भक्ति शायरी हिन्दी

 

ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई ,
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता ,
नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई ,
मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता.

हर रोज नया दिन, हर रोज नया पर्व है,
विविधताओं से भरे इस देश पर मुझे गर्व है।

उत्तर में है खड़ा हिमालय, दक्षिण में सागर मचल रहा,
पूरब से सूरज निकला देखो, पश्चिम प्रगति में बदल रहा।

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे
बची हो जो एक बूंद भी लहू की
तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

जशन आज़ादी का मुबारक हो देश वालो को,
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को…

न तीर से न तलवार से हम समझाएं पहले प्यार से हम,
जो टकराता है फिर भी हमसे, मिटा दें उसको पहले वार से हम।

चले आओ मेरे परिंदों लौट कर अपने आसमान में,
देश की मिटटी से खेलो, दूर-दराज़ में क्या रक्खा है

खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,

मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,

करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,

तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है…!!!

सारा संसार ये जानता है हमारी जो भी पहचान है,
संस्कृत से संस्कृति हमारी हिंदी से हिन्दुस्तान है।

वो तिरंगे वाली डीपी हो तो लगा लो जरा…bhai ji
सुना है कल देशभक्ति दिखाने वाली तारीख है. . . !

ये बात हवाओं को बताये रखना,
रौशनी होगी बस चिरागों को जलाये रखना,
लहू देकर जिसकी हिफाज़त हमने की,
ऐसे तिरंगे को सदा दिल में बसाये रखना…

लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा
मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,
मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ,

यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,

मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,

तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ…!!!

मेरे मुल्क की हिफाज़त ही मेरा फ़र्ज है और मेरा मुल्क ही मेरी जान है ,
इस पर कुर्बान है मेरा सब कुछ , नही इससे बढ़कर मुझको अपनी जान है।।

गद्दार थे वो लोग जिन्होंने सरहद पर रेखा खींची है,
यूँ ही नहीं मिली आज़ादी हमको, इसे शहीदों ने खून से सींची है।

मेरा “हिंदुस्तान” महान था,
महान है और महान रहेगा,
होगा हौसला बुलंद सब के ड़ों में बुलंद
तो एक दिन पाक भी जय हिन्द कहेगा…

जन्म लिया जिस देश में मैंने. ह्रदय से उसको नमन हो,
ख्वाहिश बस इतनी है मुझको, मरते वक़्त तिरंगा मेरा कफ़न हो।

देशभक्ति शेरो शायरी। देशभक्ति शायरी हिंदी में। देश भक्ति पर छोटी कविता। देशभक्ति कविता बच्चों के लिए। देश भक्ति पर नारे। देशभक्ति नारे। देश प्रेम पर कविता। देश भक्ति शायरी हिन्दी। Desh Bhakti Par Kavita


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