बंध्यता या बांझपन दूर करने के घरेलू उपचार

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बंध्यता या बाँझपन प्रजनन प्रणाली की एक समस्या है जिसके कारण महिला के गर्भधारण में विकृति आ जाती है।गर्भधारण की प्रक्रिया कई बातों पर निर्भर करती हैं, जैसे, पुरुष द्वारा स्वस्थ शुक्राणु तथा महिला द्वारा स्वस्थ अण्डों का उत्पादन होना, अबाधित गर्भ नलिकाएँ ताकि शुक्राणु बिना किसी रुकावट के अण्डों तक पहुँच सके, अण्डों को निषेचित करने की शुक्राणु की क्षमता, निषेचित अंडे का महिला के गर्भाशय में स्थापित होने की क्षमता, गर्भाशय का स्वस्थ होना तथा भ्रूण के विकास के लिए महिला के होर्मोन (Hormone) का अनुकूल होना।इनमें से किसी एक में विकृति आने का परिणाम बांझपन हो सकता है।पुरुषों में कमी के कारण भी महिलाओं में बाँझपन की समस्या को देखा जा सकता है।लेकिन अक्सर भारतीय समाज में देखा जाता है कि जब भी किसी दम्पत्ति को संतान नहीं होती तो सबसे पहले पत्नी को ही दोषी ठहराया जाता है, और उन्हें बाँझ कहकर ताने दिए जाते हैं, यहाँ तक कि कभी-कभी तलाक तक दे दिया जाता है।

जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO ) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में नपुंसकता के मामले बढ़े हैं।यदि कोई दम्पत्ति नियमित रूप से एवं बिना किसी गर्भ-निरोधक का उपयोग करते हुए सम्बन्ध बनाते है और उसके बावजूद भी महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है तो उसे बाँझपन या बंध्यता से जुड़ी समस्या माना जाता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गर्भावस्था बनाये रखना और एक जीवित बच्चे को जन्म न दे पाने की असमर्थता भी बाँझपन में ही सम्मिलित होता हैं। स्त्रियों में प्रजनन क्षमता विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकती हैं, जैसे, पॉलीसिस्टिक ओवरीयन सिंड्रोम(Polycystic ovarian syndrome or PCOS), गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids), एनीमिया (Anaemia), थायरॉएड (Thyroid), श्रोणी सूजन की बीमारी (Pelvic inflammatory disease), अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब (Blocked fallopian tubes), कैंडिडा और यौन संचरित रोग (Candida and sexually transmitted diseases or STDs)आदि।

आज की वर्तमान जीवन शैली ने स्त्री और पुरुष दोनों को ही अत्यधिक प्रभावित किया है।अधिक मात्रा में मद्यपान और धूम्रपान करना, ड्रग्स लेना, ज्यादा उम्र होना (35 वर्ष से अधिक), मोटापा, अत्यधिक तनाव, अनियमित मासिक होना, अतिरिक्त शारीरिक श्रम, अनियमित और अस्वास्थ्यकर खान-पान भी महिलाओं के बाँझपन का कारण हो सकते हैं। महिलाओं के लिए बंध्यता एक ऐसी समस्या है जिसके कारण वे चिंता, उदासी, अकेलेपन का शिकार होती हैं।आज इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In vitro fertilizationor IVF) जैसी तकनीक निःसंतान दम्पत्ति के लिए वरदान साबित हुई है और इसके कारण कुछ हद तक बंध्यता की समस्या का समाधान भी हुआ है।लेकिन इस तरह की तकनीक बहुत ही महँगी होती है जो हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है।इसलिए यहाँ कुछ ऐसे प्राकृतिक और घरेलू उपाय पेश हैं जो बाँझपन के मूल कारणों से लड़ने और गर्भवती होने की संभावनाओं को बढ़ाने में मददगार हैं।

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बाँझपन दूर करके गर्भधारण करने के घरेलू उपाय

  1. अश्वगंधा :अश्वगंधा हार्मोनल संतुलन को बनाये रखने और प्रजनन अंगों के समुचित कार्य क्षमता को बढ़ाने में मददगार है।यह जड़ी-बूटी बार-बार हुए गर्भपात के कारण शिथिल गर्भाशय को समुचित आकार में लाकर उसे स्वस्थ बनाने में मदद करती है। हलके गर्म पानी में एक चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर दिन में दो बार उसका सेवन करने से गर्भाशय की क्षमता बढ़ती है और बाँझपन की समस्या दूर होती है।
  2. गाजर : गाजर में पाये जाने वाले आवश्यक पोषक तत्व शरीर को भीतर से स्वस्थ रखता है और गर्भाशय की दुर्बलता को दूर करता है।रोजाना सुबह नियमित रूप से एक गिलास गाजर का रस पीने से बंध्यता की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
  3. जायफल :जायफल में गर्भाशय की दुर्बलता को दूर करने की क्षमता है। जायफल को महीन पीसकर उस चूर्ण को बेहद बारीक कपड़े में से छानकर अलग कर लें। इसके पश्चात् अलग किये गए जायफल के बारीक चूर्ण में बराबर मात्रा में पीसी हुई शक्कर मिलाकर एक साफ डब्बे में रख लें। मासिक स्राव के बाद तीन दिन तक लगभग आधा चम्मच इसी चूर्ण को अपनी हथेली में रखकर खायें। इसके साथ दूध व भात (पका हुआ चावल) का पथ्य लें। इस उपचार से गर्भ ठहरने की संभावना रहती है।
  4. सिंघाड़ा : सिंघाड़े के सेवन से गर्भाशय की दुर्बलता दूर हो जाती है तथा गर्भाशय की क्षमता में वृद्धि होती है।
  5. खजूर : खजूर गर्भधारण करने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।खजूर में विटामिन ए (Vitamin A), विटमिन बी (Vitamin B), विटामिन ई (Vitamin E) आयरन (Iron) जैसे पोषक तत्व हैं जो शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है।10-12 खजूर के बीज निकालकर उसे अच्छे से पीस लें, फिर उसमें दो चम्मच कटे हुए धनिया पत्ती डालकर एक मिश्रण तैयार कर लें। अब उसमें तीन-चौथाई कप गाय का दूध मिलायें और उसे कुछ देर के लिए पकायें। आँच से उतारकर, ठंडा करके इसका सेवन करें।अपने मासिक स्राव के बाद एक सप्ताह तक रोजाना इसका सेवन करें।इसके अलावा आप रोजाना नाश्ते में दूध के साथ 6-8 खजूर खा सकते हैं या दही के साथ भी खजूर का सेवन कर सकते हैं।
  6. अनार :रोजाना अनार का सेवन करने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है और शरीर भी स्वस्थ रहता है।इसके सेवन से गर्भाशय के रक्त प्रवाह में वृद्धि होता है।यह गर्भाशय के दीवारों को मोटा करके गर्भपात की संभावना को कम करने में सहायक है, साथ ही यह भ्रूण के स्वस्थ विकास में भी मदद करता है।अनार की बीजों और अनार के छाल को बारीक पीस लें। फिर इन दोनों चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर एक साफ और वायुरोधी डब्बे में डालकर रखें। रोजाना दिन में दो बार आधा चम्मच उस चूर्ण को एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर उसका सेवन करें।इससे आपको फायदा होगा।इसके अलावा आप चाहे तो अनार का रस पी सकते हैं या फिर साबुत अनार का सेवन भी कर सकते हैं।
  7. दालचीनी : दालचीनी, डिम्ब-ग्रंथि के सही रूप में कार्य करने में मदद करता है साथ ही बाँझपन की समस्या को दूर करने में भी सहायक है। इसके अलावा यह पॉलीसिस्टिक ओवरीयन सिंड्रोम (Polycystic ovarian syndrome or PCOS) का एक बेहतरीन इलाज है।2007 के एक शोध लेख में यह बताया गया है कि दालचीनी महिलाओं के अनियमित मासिक स्राव को नियमित करने में मदद करता है।एक कप गर्म पानी में एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर पीने से फायदा होता है।कुछ महीनों तक नियमित रूप से इसका सेवन करें। इसके अलावा आप अपने खाद्य में भी दालचीनी का इस्तेमाल कर सकते हैं।लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि एक दिन में दो चम्मच से अधिक दालचीनी के चूर्ण का सेवन न करें।
  8. विटामिन डी (Vitamin D) : विटामिन डी गर्भावस्था के लिए और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए आवश्यक है।वास्तव में विटामिन डी की कमी, बाँझपन और गर्भपात का कारण हो सकती है।इसलिए विटामिन डी युक्त खाद्य का सेवन करें जैसे, कुकुरमुत्ता (Mushroom), चीज़ (Cheese), अंडा, मछली आदि।
  9. अलसी के बीज (Flax seed) : अलसी के बीजग्रीवा बलगम को बढ़ाने में मदद करता है, साथ ही यह शुक्राणुओं को अधिक समय तक जीवित रखकर उसे गर्भाशय ग्रीवा में पहुंचाकर गर्भधारण में मदद करता है। आप अण्डोत्सर्ग के बाद ग्रीवा बलगम को बढ़ाने के लिए एक चम्मच अलसी के बीज या उसके तेल का सेवन कर सकते हैं।
  10. बैगन : बैगन पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता से जुड़ी समस्या का एक आसान उपचार है।एक बैगन को पहले आप अच्छे से पका लें। फिर पके हुए बैगन में थोड़ी-सी छाछ मिलाकर उसे अच्छे से मसल लें और उसका सेवन करें।रोजाना नियमित रूप से एक महीने तक इसका सेवन करने से बंध्यता की समस्या दूर हो जायेगी।
  • बरगद का पेड़ : बरगद के पेड़ का मुलायम जड़ पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता से जुड़ी समस्या को दूर करने का एक प्राकृतिक उपचार है। यह पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता संबंधी जन्मजात दोष को दूर करता है। बरगद के पेड़ के मुलायम जड़ों को अच्छे से सुखाकर उसका चूर्ण बना लें।एक गिलास दूध में इसी चूर्ण का करीबन 20 ग्राम मिलाकर लगातार तीन दिनों तक उसका सेवन करें।महिलाएँ इस उपचार का प्रयोग अपने मासिक स्राव के आठवें या नवें दिन से करें।
  • योगा या व्यायाम :योगा या व्यायाम से आपके शरीर का अतिरिक्त वसा (Fat) घटता है और होर्मोन (Hormone) का स्तर भी ठीक रहता है। विभिन्न प्राणायाम की मदद से प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। किसी अच्छे योग विशेषज्ञ से योग सीखकर ही रोजाना नियमित रूप से योग या व्यायाम करें।इससे न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि यह मानसिक तनाव को दूर करने में भी मदद करता है।पुरुषों और महिलाओं दोनों को ही योगा करना चाहिए।
  • सही और स्वस्थ संतुलित खान-पान : सही, स्वस्थ और संतुलित खान-पान हॉर्मोन (Hormone) को नियंत्रित करता है और आपके प्रजनन तंत्र को स्वस्थ रखता है। इससे आपके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होता है।

उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के द्वारा बंध्यता से जुड़ी समस्याओं का निवारण किया जा सकता है।लेकिन कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह लेना और उपयुक्त जाँच करवाना जरुरी है।यह सही है कि आज की जीवन शैली, अत्यधिक तनावयुक्त जीवन और काम के दबाव के कारण न केवल महिलाओं में बंध्यता से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को देखा जा रहा हैं बल्कि पुरुषों में भी नपुंसकता की समस्या बढ़ी हैं। इसलिए इस संदर्भ में महिलाओं और पुरुषों के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी हैं, जैसे :

  • पुरुष हो या स्त्री, सभी के लिए बाहर का अस्वास्थ्यकर खाद्य बहुत ही हानिकारक है।इससे वजन बढ़ता है जो बंध्यता का कारण हो सकता है।
  • पुरुषों और महिलाओं को धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करना चाहिए। इसके कारण भ्रूण के विकास में समस्या उत्पन्न हो सकती है और गर्भपात होने की आशंका रहती है।
  • प्लास्टिक में लपेटें खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल अच्छा नहीं होता। प्लास्टिक में टोक्सिन (Toxins) होता है जो खाने के साथ आपके शरीर में प्रवेश करके बंध्यता या नपुंसकता की समस्या को उत्पन्न कर सकता हैं।
  • नकली मीठा करने वाले पदार्थों (Artificial Sweeteners) का सेवन भी पुरुषों और महिलाओं में बंध्यता से जुड़ी समस्या को उत्पन्न कर सकता है।
  • अत्यधिक मात्रा में कैफीनयुक्त (Caffeine) पेय का सेवन भी गर्भपात का कारण हो सकता है।

 


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