बच्चों की सर्दी-खाँसी के लिए घरेलू उपाय

0

सर्दी और खाँसी किसी भी उम्र में हो सकती है।बच्चों को अगर सर्दी-खाँसी हो जाती है, तो वो बहुत ही परेशान हो जाते हैं क्योंकि बच्चे तो अपनी समस्याओं को ठीक से बयां भी नहीं कर पाते।अक्सर शिशुओं में सर्दी और खाँसी की समस्या देखी जाती है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होती है।संक्रमित वायु के कारण या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण, ठंड लगने के कारणछोटे बच्चों में सर्दी और खाँसी की समस्या हो सकती है।जन्म लेने के बाद प्रायः सभी बच्चे इस समस्या के शिकार होते हैं।सर्दी और खाँसी से त्रस्त शिशु को बेचैनी-सी होती रहती है, यहां तक कि उसे स्तनपान करने में भी तकलीफ होती है।छोटे बच्चों को जब सर्दी और खाँसी की समस्या होती है तब उसमें कई सारे लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे :

  • 101 डिग्री तक बुखार होना।
  • आँखें लाल हो जाना।
  • गले में खराश होना।
  • जबड़ो और कान में दर्द होना।
  • निरंतर नाक बहना।
  • उल्टी होना।
  • भूख न लगना।
  • चिड़चिड़ापन और बेचैनी।

common_cold

बच्चों की सर्दी-खाँसी को दूर करने के घरेलू नुस्खें

  1. हल्दी : सर्दी और खाँसी के लिए हल्दी बहुत ही स्वस्थ और विश्वसनीय उपाय है। यदि बच्चा बहुत ही छोटा है और स्तनपान करता है तो उसे दूध पिलाते वक्त अपने स्तन पर थोड़ी-सी हल्दी का पाउडर लगा लें।इस तरह शिशु हल्दी वाले दूध का सेवन कर लेगा। यदि बच्चा बोतल से या गिलास से दूध पीता है तो या तो उसके बोतल में या फिर उसके गिलास में थोड़ी-सी मात्रा में हल्दी का पाउडर मिलाकर पिलायें।दिन में दो बार हल्दी वाला दूध पिलाने से बच्चे को सर्दी-खाँसी में राहत मिलेगी।
  2. भाँप : सर्दी और खाँसी में भाँप बेहतरीन उपाय है।गरम भाँप बलगम को दूर करता है।शिशु को भाँप दिलाने के लिए आप अपने बाथरूम को चारों तरफ से बंद करके उसमें गरम शावर (Shower) चला दें।जब बाथरूम में भाँप बन जाये तब शिशु को लेकर पंद्रह मिनट के लिए बाथरूम में बैठ जाये।इस तरह भाँप आपके शिशु के फेफड़े को साफ कर देगा और बंद नाक की समस्या भी खत्म हो जायेगी।यदि बच्चा थोड़ा बड़ा हो और खुद से भाँप ले सकता हो तो उसके लिए आप एक बर्तन में गर्म पानी करके उसके सिर और बर्तन को एक बड़े तौलिए से ढक दें और उसे जोर-जोर सेश्वास लेने को कहें।इससे बच्चे को सर्दी और खाँसी की समस्या में राहत मिलेगी। दिन में दो बार इस प्रक्रिया को करने से बच्चा जल्द ही ठीक हो जायेगा।
  3. स्तनपान : 6 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए माँ का दूध ही सर्दी-खाँसी की समस्या से छुटकारा दिलाता है।माँ का दूध शिशु को किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ने की शक्ति देता है।
  4. अजवाइन : अजवाइन में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो सर्दी और खाँसी को दूर करने में मदद करता है। एक कपड़े के टुकड़े में थोड़ी-सी अजवाइन लेकर एक पोटली बना लें और उस पोटली को तवे पर रखकर हल्का गर्म कर लें। फिर उस पोटली को अपने बच्चे की छाती पर रखकर उससे गर्म भाँप दें।दो बातों का धयान रखें, एक यह कि भाँप देते बच्चे का बदन पूरी तरह से ढका हुआ हो और दूसरा यह कि पोटली इतनी गर्म न हो कि बच्चे की मुलायम त्वचा जल जाये। इस प्रक्रिया को दो से तीन दिनों तक दोहराने से सर्दी-खाँसी में फर्क पड़ेगा।गर्म अजवाइन का गंध बलगम को दूर करता है।इसके अतिरिक्त आप सरसों के तेल में अजवाइन मिलाकर भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए पहले एक कटोरी में थोड़ा-सा सरसों का तेल गर्म कर लें, फिर आँच बंद करके उसी गर्म तेल में थोड़ी-सी मात्रा में अजवाइन मिला दें।उस दौरान उठने वाला भाँप बच्चे को दें, उससे बहुत फर्क पड़ेगा, साथ ही अजवाइन युक्त सरसों के तेल से बच्चे की हथेली, छाती, पैर और पूरे बदन में मालिश करें, इससे बच्चे को बंद नाक, बलगम, जुकाम, खाँसी की समस्या में राहत मिलेगी। दिन में दो बार इसी तेल से मालिश करने से दो से तीन दिनों में ही फर्क दिखेगा।
  5. गर्म सूप (Soup) :बच्चा यदि थोड़ा बड़ा हो, अर्थात केवल स्तनपान पर ही न हो और अन्य खाद्य पदार्थों का भी सेवन करता हो, तो आप उसे गर्म सूप पिला सकते है।सब्जियों का सूप या चिकेन (Chicken) सूप पिलाने से जुकाम और खाँसी में फर्क पड़ेगा साथ ही बच्चे की प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होगी और वो तंदरुस्त रहेगा।
  6. अदरक :सर्दी और खाँसी की समस्या में अदरक एक प्रभावी उपाय है। 6 कप पानी में आधा कप बारीक कटा हुआ अदरक और दालचीनी के दो छोटे टुकड़े डालकर बीस मिनट तक धीमी आँच पर पकाएं। उसके बाद उसे छानकर उसमें एक चम्मच शहद या एक चम्मच मिश्री का चूर्ण डालकर बच्चे को पिलायें।एक साल से अधिक उम्र के बच्चे को दिन में तीन से चार बार थोड़ा-थोड़ा करके पिलाने से उसे सर्दी और खाँसी में राहत मिलेगी।रात को सोने जाने से पहले अदरक के इस चाय का सेवन कराने से बच्चे की रात की नींद भी अच्छी होगी और जुकाम एवं खाँसी से छुटकारा भी मिलेगा।
  7. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : एकसाल से अधिक उम्र के बच्चे को तुलसी के पत्ते का काढ़ा भी पिला सकते हैं।सर्दी और खाँसी में सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते।तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें। अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।फिर इस काढ़े को छान लें फिर आधे कप काढ़े में दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार अपने बच्चे को पिलायें।इससे बलगम की समस्या भी खत्म हो जाती है और सर्दी में भी राहत मिलती है।
  8. लहसुन : लहसुन के तेल को लगाने से जुकाम और खाँसी में आराम मिलता है। एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो से तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल को बच्चे की हथेली, छाती और नाक पर अच्छे से लगायें।इससे सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होगी।
  9. गुड़, काली मिर्च और जीरा : तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को गुड़, काली मिर्च और जीरे के मिश्रण का सेवन कराने से सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होती है। एक गिलास गर्म पानी में आधी चम्मच पीसी हुई काली मिर्च, आधा चम्मच पीसा हुआ जीरा और एक चम्मच गुड़ मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके बच्चे को उसका सेवन कराने से जुकाम और सर्दी की समस्या दूर हो जाती है। यह मिश्रण छाती में जमे बलगम को निकालने के साथ सर्दी और खाँसी का भी अच्छा उपचार है।
  • नींबू और शहद :सर्दी और खाँसी की समस्या में आप बच्चे कोनींबू के रस में शहद मिलाकर पिला सकते हैं।इससे जुकाम और खाँसी की समस्या दूर होती है और बच्चे को आराम मिलता है।यदि बच्चा एक साल से अधिक उम्र का हो तो आप एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस निचोड़ लें और फिर उसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को पिलायें।यदि बच्चा एक साल से कम उम्र का हो तो एक चम्मच नींबू के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पिलायें।नींबू में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा अधिक होती है जो सर्दी और खाँसी के जीवाणुओं से लड़ने में सक्षम है और शहद बलगम हो हटाकर छाती को साफ करता है।
  • पानी : इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आपके बच्चे के शरीर में पानी का अभाव न हो। इसलिए समय-समय पर उसे पानी पिलाते रहें।पानी मल-मूत्र के द्वारा बच्चे के शरीर से हर तरह के जीवाणु को निकालकर उसे बंद नाक, बलगम, छाती जमने आदि की समस्या से बचाता है।आप पानी को हल्का गर्म करके भी अपने बच्चे को पिला सकते हैं।
  1. डॉक्टर की सलाह : बच्चे को अगर सर्दी-खाँसी के कारण साँस लेने में दिक्कत हो रही हो या वो अत्यधिक मात्रा में उल्टी कर रहा हो अथवा उसके शरीर का तापमान कम न हो रहा हो तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और उपयुक्त जाँच करवायें।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप बच्चे को सर्दी और खाँसी की समस्या से निजात दिला सकते हैं। वैसे तो विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को पहले दो से तीन सालों में आठ से दस बार जुकाम और खाँसी हो सकता है, इसलिए सर्दी-खाँसी की समस्या बच्चों में आम है।ऐसी स्थिति में बच्चे की तकलीफ को कम करने के लिए कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक हैं, जैसे :

  • बच्चे को जुकाम और खाँसी होने पर उसकी छाती को खुला न रखें और उसके शरीर को ढक कर रखें ताकि किसी भी तरह से उसे ठंड न लगें।
  • यदि आपके घर में कोई बीमार हो या जुकाम और खाँसी का शिकार हो तो उसे बच्चे के पास न जाने दें।
  • अगर आपके घर में कोई धूम्रपान करता हो तो उसे बाहर जाने को कहें, बच्चे के सामने बिल्कुल धूम्रपान न करें।
  • बच्चे का नाक बंद होने पर आप डॉक्टर की सलाह लेकर नेसल ड्रॉप (Nasal Drop) का प्रयोग कर सकते हैं।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.