मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) के लिए घरेलू उपचार

वर्तमान जीवन शैली में मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) बड़ी तेजी से फैल रहा है।संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, विशेष रूप से भारत में।मधुमेह एक ऐसा घातक रोग है जो कई असाध्य रोगों का जन्मदाता है, जैसे, दिल की बीमारी या दिल का दौरा पड़ना, गुर्दा खराब होना, अंधापन आदि। मधुमेह रोग तब उत्पन्न होता है जब आहार से अवशोषित शर्करा, कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाती है और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने लगता है। रक्त में शर्करा का स्तर तभी बढ़ता है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन (Insulin) उत्पन्न नहीं कर पाता या जब शरीर की कोशिकाएं उत्पन्न हो रही इन्सुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करती।इन्सुलिन एक हॉर्मोन (Hormone) है जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) और वसा (Fat) के मेटाबोलिज्म (Metabolism) को नियंत्रित करता है।

मेटाबोलिज्म वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर खाने को पचाता है ताकि शरीर को ऊर्जा (Energy) मिल सके और उसका सही विकास हो सके।हम जो खाना खाते है वो पेट में जाकर ऊर्जा में बदल जाता है जिसे ग्लूकोज़ (Glucose) कहते है। इस ग्लूकोज़ को हमारे शरीर में मौजूद लाखों कोशिकाओं के भीतर पहुँचाने का कार्य हमारा अग्न्याशय (Pancreas) करता है जो पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन उत्पन्न करता है। बिना इन्सुलिन के ग्लूकोज़ कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता और कोशिकाओं के अन्दर ग्लूकोज़ के पहुँचने के बाद हमारी कोशिकाएं उसी ग्लूकोज़ को जलाकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। जब यह सम्पूर्ण प्रक्रिया सामान्य रूप से नहीं हो पाती तो व्यक्ति मधुमेह रोग से ग्रस्त हो जाता है।मधुमेह रोग के कुछ लक्षण होते हैं, जैसे, बार-बार पेशाब लगना, अधिक प्यास लगना, शरीर में घाव होने पर जल्दी ठीक न होना, बिना काम किये ही थकान महसूस करना, त्वचा में संक्रमण होना या खुजली होना, चीजों का धुंधला नजर आना, अचानक वजन घट जाना आदि। यदि इनमें से कुछ लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत रक्त में शर्करा की जाँच करवाएं।मधुमेह के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • यह रोग आनुवांशिक है। माता-पिता या परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्य से यह रोग दूसरी पीढ़ी में आ सकता है।
  • कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) या वसा (Fat) युक्त खाद्य पदर्थों जैसे, चीनी, गुड़, मिठाई, चॉकलेट, चावल, आलू, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, तला और मसालेदार खाना, घी, मक्खन, लाल मांसआदि का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह रोग हो सकता है।
  • मद्यपान और धूम्रपान भी मधुमेह रोग का कारण है।
  • अनुचित दिनचर्या और जीवन शैली इस रोग के कारण हो सकते हैं। परिश्रम न करना, व्यायाम न करना, मानसिकतनाव, चिंता भी इस रोग के कारण हैं।

मधुमेह के कुछ प्रकार हैं, जैसे :

  • टाइप 1 डायबिटीज़ : यह तब होता है जब शरीर इन्सुलिन (Insulin) बनाना बंद कर देता है।ऐसे में मरीज को डॉक्टर की सलाह से इन्सुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है।इसे इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज़ मेलिटस कहते है (Insulin dependent diabetes mellitus or IDDM)।
  • टाइप 2 डायबिटीज़ : यह तब होता है जब शरीर की कोशिकाएं उत्पन्न हो रही इन्सुलिन (Insulin) पर प्रतिक्रिया नहीं करती।इसे नॉन-इन्सुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज़ मेलिटस कहते है (Non-insulin-dependent diabetes mellitus or NIDDM)।
  • जैस्टेशनल डायबिटीज़ (Gestational diabetes) : यह मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं को होता है। ऐसा नहीं है कि इन महिलाओं को पहले से ही यह बीमारी हो, लेकिन गर्भावस्था के दौरान खून में ग्लूकोस की मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाने के कारण मधुमेह हो जाता है।2-3 प्रतिशत गर्भावस्था में ऐसा होता है।इसके दौरान गर्भावस्था में मधुमेह से संबंधित जटिलताएं बढ़ जाती हैं तथा भविष्य में माता और संतान को भी मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है।

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मधुमेह के लिए घरेलू नुस्खें : मधुमेह होने पर इसे जड़ से दूर करना मुश्किल हो जाता है पर कुछ घरेलू नुस्खों के द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. मेथी दाना :मेथी के दाने में प्रचुर मात्रा में फाइबर (Fibre) होता है जो मधुमेह के लिए बहुत ही उपयोगी है।रातभर एक से दो चम्मच साफ मेथी के दाने पानी में भीगोकर रखें। सुबह खाली पेट दानों के साथ उसी पानी का सेवन करें। इसके अलावा मेथी का प्रयोग अपने खाद्य पदार्थों में भी कर सकते हैं या फिर मेथी के दानों को पीसकर चूर्ण बनाकर हल्के गर्म दूध या पानी के साथ भी ले सकते हैं। कुछ महीनों तक नियमित रूप से मेथी के दानों का सेवन करने से शर्करा का स्तर कम हो जाता है।
  2. व्यायाम : व्यायाम से रक्त में शर्करा स्तर कम हो जाता है तथा ग्लूकोज़ का उपयोग करने के लिए शारीरिक क्षमता पैदा होती है।इसके अलावा प्रतिघंटा 6 कि.मी. की गति से चलने पर 30 मिनट में 135 कैलोरी (Calorie) घटता है और साईकिल चलाने से लगभग 200 कैलोरी घटती है। इसलिए मधुमेह होने पर रोजाना नियमित रूप से व्यायाम करना, चलना और हो सके तो साईकिल चलाना अत्यावश्यक हैं।
  3. आंवला : आंवला विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध है जो अग्न्याशय (Pancreas) की कार्यक्षमता को बढ़ाकर इन्सुलिन के उत्पन्न होने में मदद करता है।आँवले का बीज निकालकर उसे पीस लें और उसका रस निकाल लें। फिर एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच आँवले का रस मिलाकर पीयें।इसके अलावा एक कप करेले के रस में एक चम्मच आँवले का रस मिलाकर भी पी सकते हैं।रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।
  4. हरी चाय या ग्रीन टी (Green Tea) : रोजाना खाली पेट हरी चाय पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।हरी चाय में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) होता है जो शरीर के टोक्सिन (Toxin) को दूर करने में मदद करता है साथ ही रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में भी सहायक है।
  5. जामुन : जामुन मधुमेह का एक बेहतरीन उपचार है।जामुन के पेड़ का हर भाग इस रोग के लिए बहुत ही लाभदायक हैं।जामुन के पेड़ के पत्ते, छाल, फल, बीज, सभी शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखता है।आप साबुत जामुन खा सकते हैं अथवा जामुन के पत्तों या उसके बीजों कोपीसकर चूर्ण बनाकर एक गिलास गुनगुने पानी के साथ लें सकते हैं।
  6. तुलसी :तुलसी मेंएंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो शरीर को स्वस्थ रखता है, साथ ही इसमें आवश्यक तत्व हैं जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। रोजाना खाली पेट दो चम्मच ताजे और साफ तुलसी के पत्तों का रस पीने से मधुमेह में फायदा होता है।
  7. आम के पत्ते : आम के पत्ते मधुमेह का एक और बेहतरीन उपचार है।15 ताजे और साफ आम के पत्तों को एक गिलास पानी में रातभर भीगोकर रखें। सुबह उसी पानी को छानकर खाली पेट पीने से शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।इसके अलावा आप आम के कुछ पत्तों को छाँव में सुखाकर उसे पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना दिन में दो बार डेढ़ चम्मच उस चूर्ण का सेवन करने से मधुमेह में फर्क पड़ेगा।
  8. करेला :करेला मधुमेह को नियंत्रित रखने का बहुत ही अच्छा उपचार है।यह अग्न्याशय (Pancreas) से इन्सुलिन(Insulin)के स्राव को बढ़ाता।एक करेले का बीज निकालकर उसे पीसकर रस निकाल लें और उसमें थोड़ा-सा पानी मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट पीयें।नियमित रूप से कम-से-कम दो महीनों तक इसका सेवन करें।इसके अलावा आप अपने रोजाना के डाइट (Diet) में करेले की सब्जी को शामिल कर सकते हैं।
  9. नीम :नीम रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।रोजाना एक गिलास नीम के पत्तों का रस पीने से मधुमेह में फर्क पड़ता है।
  • दालचीनी : दालचीनी इन्सुलिन के कार्य को गति प्रदान करने में मदद करता है। इसमें बायोएक्टिव (Bioactive) तत्व हैं जो मधुमेह को नियंत्रित करता है।लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि अत्यधिक मात्रा में दालचीनी का सेवन करने से लीवर को क्षति पहुँच सकता है।इसलिए पूरे दिन में एक से दो चाय चम्मच (Teaspoon) से अधिक दालचीनी का सेवन न करें। एक कप गुनगुने पानी में डेढ़ चाय चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर रोजाना नियमित रूप से सेवन करें। इसके अलावा तीन से चार साबुत दालचीनी एक कप पानी के साथ उबालें और 20 मिनट तक उसे धीमी आँच पर पकाएं।फिर थोड़ा ठंडा होने पर उसे पीयें।इस पेय को रोजाना दिन में एक बार तब तक पीयें जब तक शर्करा का स्तर कम न हो।
  • करी पत्ता : करी पत्ता में मौजूद आवश्यक तत्व शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।मधुमेह होने पर रोजाना 10-12 साफ और ताजे करी पत्ते का सेवन करने से फर्क पड़ता है।आप अपने खाद्य पदार्थों में भी करी पत्ता डाल सकते हैं या 15 हफ़्तों तक करी पत्ते के चूर्ण का सेवन भी कर सकते हैं।
  • ब्रोकोली : विटामिन ए और सी से समृद्ध ब्रोकोली रक्त में उच्च शर्करा के स्तर को कम करने और नियंत्रित रखने में मददगार है। ब्रोकोली की सब्जी बनाकर खा सकते हैं या सूप आदि के साथ भी इसका सेवन कर सकते हैं।
  • राजमा :राजमा में आवश्यक मिनरल (Minerals) हैं। इसके नियमित सेवन से मधुमेह और उसके दुष्प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता हैं।
  • बीन :बीन इन्सुलिन उत्पन्न करने में अग्न्याशय (Pancreas) की क्षमता को बढ़ा देता है। मधुमेह के शिकार लोगों को रोजाना बीन की सब्जी खानी चाहिए।

उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के द्वारा रक्त में शर्करा के स्तर को कम करके मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता हैं।इसके अलावा मधुमेह के रोगी के लिए अच्छे चिकित्सक की सलाह लेना भी आवश्यक है, क्योंकि यह रोग होने पर कुछ दवाइयों का सेवन करना जरुरी है।इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे :

  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • मीठी चीजों, वसा (Fat) और कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) युक्त भोजन, बाहर का अस्वास्थ्यकर खाना न खायें। चावल, आलू, लाल मांस, मयदा जैसे पदार्थों का सेवन न करें।
  • फलों का सेवन करें पर आम, केला जैसे फलों का सेवन न करें।
  • समय पर खाना खायें।
  • बहुत अच्छा हो यदि किसी अच्छे खाद्य विशेषज्ञ से अपना डाइट चार्ट (Diet chart) बनाकर, उसके अनुरूप खाना खायें।
  • नियमित रूप से रक्त की जाँच करवाते रहें, हो सके तो खून में शर्करा का स्तर जांचने की मशीन खरीद कर घर पर ही रख लें और समय-समय पर खुद ही रक्त की जाँच करते रहें।
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