मौसमी बुखार या वायरल फीवर (Viral Fever) के लिए घरेलू उपाय

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बदलते मौसम के साथ हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिसके कारण बुखार, खाँसी, सर्दी जैसे रोग हमारे शरीर को जकड़ने लगते हैं।बदलते मौसम के साथ मौसमी बुखार, जिसे अंग्रेजी में वायरल फीवर (Viral fever) कहते है, होने की सम्भावना सबसे अधिक होती है।मौसमी बुखार आम बुखार जैसा ही लगता है, लेकिन इसके होने पर शरीर का तापमान जल्दी कम नहीं होता और लगभग पांच से छै घंटे के अंतराल में बुखार लौटकर आता है।मौसमी बुखार होने पर शरीर का तापमान तेजी से बढ़कर 100 से 103 डिग्री तक हो जाता है। इस तरह का बुखार होने पर व्यक्ति बहुत थकान महसूस करता है।किसी प्रकार के जीवाणु या संक्रमण के कारण इस तरह का बुखार हो सकता है।ठंडा लगने पर भी इस तरह का बुखार हो सकता है। मौसमी बुखार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है।इस प्रकार का बुखार होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण देखे जाते हैं, जैसे :

  • इस बुखार के प्रभावस्वरूप जीभ का स्वाद चला जाता है।
  • इस तरह के बुखार में सिर में तेज दर्द होता है।
  • मांसपेशियों और हड्डियों के जोड़ों में भी दर्द होता है।
  • मौसमी बुखार होने पर खाँसी, जुकाम, उल्टी, दस्त जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

मौसमी बुखार के लिए घरेलू नुस्खें

Fever

  1. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : मौसमी बुखार होने पर सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते। तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो मौसमी बुखार के उपचार के लिए उत्तम है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें।अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।इसी काढ़ेमें शहद डालकर उसका हर दो घंटे में सेवन करें। इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  2. धनिया की चाय : धनिया में मौसमी बुखार जैसे रोग को खत्म करने की क्षमता है।धनिया में मौजूद प्रतिरोधक तत्व शरीर को बुखार से लड़ने की शक्ति देता है।मौसमी बुखार में धनिया की चाय बहुत ही असरदार औषधि है।एक मध्यम आकर के बर्तन में एक गिलास पानी लें और उसमें एक बड़े चम्मच धनिया के दानें या बीज डालकर उबालें। फिर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में दूध और चीनी डालें।फिर इसका गरम-गरम चाय की तरह सेवन करें। इस कारगर घरेलू नुस्खें से मौसमी बुखार में आराम मिलेगा।
  3. चावल का स्टार्च(Starch) :चावल का स्टार्च शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र को बढ़ाकर शरीर को स्वस्थ रखता है। यह एक पारंपरिक उपाय है।मौसमी बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए यह विशेष रूप से एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय माना जाता है।चावल का स्टार्च बनाना कोई बहुत मुश्किल कार्य नहीं है।लगभग हर किसी के घर में चावल पकता है।चावल पकने के बाद जिस पानी को छानकर फेंक दिया जाता है, वही पानी स्टार्च है जो बुखार में लाभदायक होता है।चावल पकने के बाद पके हुए चावल के पानी को एक बर्तन में छान लें।अब उसमें स्वाद अनुसार नमक डालकर, यदि आप चाहे तो काली मिर्च भी डाल सकते हैं, उसका गरम-गरम सेवन करें. इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  4. सूखी अदरक का मिश्रण : अदरक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो मौसमी बुखार के लक्षणों को कम करता है।बुखार से पीड़ित व्यक्ति के लिए सूखी अदरक का सेवन करना लाभदायक है।एक बर्तन में एक कप पानी डालकर उसमें दो मध्यम आकर के सूखे अदरक के टुकड़े या उसी परिमाण में सौंठ का चूर्ण डालकर उबालें। इसके बाद उस उबलते हुए पानी में एक-एक करके पीसी हुई हल्दी और काली मिर्च डालकर थोड़ी-देर के लिए फिर से उबालें। उसके बाद आँच से उतारकर उसमें शहद डालकर दिन में चार बार थोड़ा-थोड़ा करके पीने से बुखार में आराम मिलेगा।
  5. मेथी का पानी :मेथी के बीज रसोईघर में आसानी से उपलब्ध एक मसाला है। किन्तु इसमें विशेष प्रकार के औषधीय गुण हैं जो मौसमी बुखार में राहत दिलाती हैं।आधा कप पानी में एक बड़ा चम्मच साफ मेथी के बीज रातभर भीगोकर रखें।सुबह उसी पानी को छानकर दो घंटे के अन्तराल पर पीने से बुखार मेंआराम मिलेगा।
  6. सिरके का प्रयोग :सिरके के प्रयोग से भी बुखार को कम किया जा सकता है।आप अपने नहाने के पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर नहा सकते हैं, इससे आपके शरीर का तापमान कम होगा।इसके अलावा आप आलू के तीन-चार टुकडों को सिरके में डूबोकर अपने माथे पर रख सकते हैं, इससे भी शरीर का तापमान नियंत्रित होगा और बुखार में आराम मिलेगा।
  7. लहसुन :लहसुन के तेल को लगाने से बुखार में आराम मिलता है।एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो-तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल से रोगी के हथेली, पैरों, छाती पर अच्छे से मालिश करें, इससे बुखार में आराम मिलेगा। इसके अतिरिक्त आप किसी भी प्रकार के ठोस या तरल भोजन में लहसुन का प्रयोग करके उसका सेवन भी कर सकते हैं। दिन में दो बार यदि गर्म पानी के साथ दो से तीन लहसुन की कलियों का सेवन किया जाये तो बुखार में फर्क पड़ेगा। लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) तत्व हैं जो शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है और बुखार को कम करने में मदद करता है।
  8. शहद और लौंग : शुद्ध शहद में औषधीय गुण है जो बुखार के लिए लाभदायक है। शहद में लौंग के चूर्ण को मिलाकर लेने से बुखार कम होता है। दो से चार लौंग को गर्म तवे पर रख कर थोड़ा-सा भून लें, फिर उसे पीसकर चूर्ण बना लें।अब एक चम्मच शुद्ध शहद में आधा चम्मच लौंग का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार उसका सेवन करें।इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  9. पानी की पट्टी : मौसमी बुखार होने पर शरीर का तापमान रह-रहकर बढ़ जाता है, और जल्दी कम नहीं होता। ऐसे में ठन्डे पानी में साफ कपड़ा भीगोकर उसे सिर पर रखने से और बारी-बारी बदलते रहने से बुखार कम हो जाता है और शरीर का तापमान संतुलित रहता है।
  • डॉक्टर की सलाह लें :यदि बुखार चार से पाँच दिनों में भी न उतरे तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और उपयुक्त जांच करवानी चाहिए। कभी-कभी मौसमी बुखार जैसे दिखने वाले बुखार का कारण कुछ और भी हो सकता है।डेंगू, टाइफाएड या अन्य कोई संक्रमण भी बुखार का कारण हो सकता है।ऐसे में डॉक्टर से जांच करवाना जरुरी है।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर मौसमी बुखार को कम किया जा सकता है और इन नुस्खों के प्रयोग से बुखार में आराम भी मिलाता है।मौसमी बुखार मूल रूप से सात दिनों का मेहमान होता है जो शरीर को कमजोर कर देता है। ऐसे में आपको कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए जिससे आप स्वस्थ और तंदरुस्त रहें और दूसरों में बुखार का जीवाणु न फैले, जैसे :

  • मौसमी बुखार होने पर दूध के उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।
  • इस बुखार में लाल मांसऔर ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि बुखार में इस तरह के खाद्य को पचाना मुश्किल होता है, और इससे पेट की समस्या या दस्त हो सकता है।
  • बुखार होने पर तंबाकू, शराब, धूम्रपान से बचना चाहिए।
  • इस समय शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए नियमित समय के अन्तराल में पानी पीना आवश्यक होता है।पानी पीने से शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।यदि सादा पानी पीने में अच्छा न लगें तो आप पानी में चीनी और नमक डालकर घोल तैयार करके भी पी सकते हैं अथवा मेडिकल स्टोर(Medical store) में उपलब्ध ओ.आर.एस (O.R.S)पाउडर को पानी में मिलाकर भी पी सकते हैं।
  • ठन्डे पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। बुखार में ठंडा पानी, दही आदि का सेवन न करें, इससे तकलीफ और भी बढ़ जाती है।
  • खाली बदन या खाली पैर नहीं घूमना चाहिए, इससे बुखार बढ़ सकता है।
  • बुखार होने पर ज्यादा से ज्यादा समय शरीर को आराम देना चाहिए।
  • मौसमी बुखार होने पर जीभ का स्वाद नष्ट हो जाता है और खाने की इच्छा भी नहीं रहती, लेकिन बुखार में उपयुक्त भोजन का सेवन जरुर करें, क्योंकि भोजन न करने से शरीर कमजोर हो जाता है और बुखार कम नहीं होता।
  • बिना किसी चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवाई नहीं लेनी चाहिए। बहुत से लोग सोचते हैं कि बुखार होने पर बुखार कम करने की कोई भी दवाई लेने से बुखार ठीक हो जायेगा।लेकिन दवाई के मामले में चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है, क्योंकि यह जानना भी जरुरी है कि हमारे शरीर के लिए कौन-सी दवाई उपयुक्त है, अन्यथा चिकित्सक के पैसे बचाने या खुद चिकित्सक बनने के चक्कर में आपका शरीर क्षतिग्रस्त भी हो सकता है।
  • चूँकि मौसमी बुखार एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है, इसलिए रोगी को अलग कमरे में सुलाएं, उनके पास जाने से पहने मास्क पहन लें, रोगी द्वारा इस्तेमाल किये गए चीजों का प्रयोग न करें, रोगी का जूठन भी न खायें, साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।

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