हिचकी रोकने के घरेलू उपाय

हिचकी आना आम बात है। हालाकि हिचकी आना कोई गंभीर समस्या नहीं है किन्तु कई बार लोगों को इतनी अधिक हिचकी आती है कि वे परेशान हो जाते हैं।भारत में परम्परानुसार यह बात चली आ रही हैं कि जब भी किसी को हिचकी आती है तब उसे कोई याद कर रहा होता है और सही नाम लेने पर हिचकी रुक जाती है। इसी तरह एक और लोकप्रचलित विश्वास है कि जब किसी को हिचकी आये तब अचानक उसे किसी तरह का शारीरिक या मानसिक झटका देने से हिचकी रुक जाती है। पीड़ित का ध्यान बंटाने के लिए खोजे गए पारंपरिक उपाय के रूप में यह ठीक है। पर इसके पीछे जो वैज्ञानिक कारण है उसे जान लेना आवश्यक है।हमारी छाती और पेट के बीच एक पर्दा है जिसे डायाफ्राम (Diaphragm) कहते है।साँस लेते समय फेफड़ों में हवा आती-जाती है और यदि यह प्रवाह गड़बड़ा जाती है तो डायाफ्राम फड़कने लगता है और हिचकी आने लगती है।डायाफ्राम को नियंत्रित करने वाली नाड़ियों में जब कुछ उत्तेजना होती है तब डायाफ्राम बार-बार सिकुड़ता है और हमारे फेफड़े तेजी से हवा को अन्दर खींचते हैं जिसके कारण हिचकी आने लगती है।हिचकी की समस्या वैसे तो खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है मगर कई बार हिचकी इतनी अधिक बढ़ जाती है कि उसे रोकने के लिए अनेक प्रयत्न करने पड़ते हैं। हिचकी आने के कुछ कारण हैं।जैसे,जल्दी-जल्दी खाना, व्याकुलता, धूम्रपान और मद्यपान, जरुरत से ज्यादा खाना, मसालेदार खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन, अधिक तीखे खाने का सेवन, अचानक गर्म या ठन्डे मौसम के कारण, अचानक गर्म या ठन्डे खाने का सेवन, जठरांत्र की स्थिति, तंत्रिका तंत्र में कोई संक्रमण आदि।

हिचकी रोकने के घरेलू नुस्खें

Hiccups

  1. साँस को थामकर रखना : साँस को कुछ समय के लिए रोककर हिचकी बंद करने की विधि प्राचीन काल से अपनाई जाती रही है।इससे खून मेंकार्बनडाइऑक्साइड (Carbon dioxide) की मात्रा बढ़ जाती है और पीड़ित का ध्यान भी हिचकी से दूसरी तरफ चला जाता है, जिसके फलस्वरूप हिचकियाँ बंद हो जाती है। एक गहरी साँस लें और फिर उसे तब तक थामे रखें जब तक आप रख सकते हैं। अब धीरे-धीरे साँस को छोड़े। इस प्रक्रिया को फिर से दोहराएँ और तब तक दोहराएँ जब तक हिचकी बंद न हों।
  2. चीनी : चीनी हिचकी का एक बहुत ही अच्छा इलाज है, खास तौर से छोटे बच्चों के लिए। चीनी को निगलने से हिचकी बंद हो जाती है।एक चम्मच में सफेद या भूरी चीनी लें और मुँह में डालें। पांच सेकंड (Second) चीनी को अपने मुँह में ही रखें। चीनी को बिना चबाये मुँह में ही घुलने दें।फिर एक घूंट पानी पीकर उसे निगल लें।बड़े भी इस उपचार को कर सकते हैं पर जिन्हें मधुमेह है वो इस उपचार को न करें।
  3. सिरका: सिरका हिचकी दूर करने का एक प्रभावी उपाय है। इसके खट्टे स्वाद के कारण पीड़ित का ध्यान भटक जाता है और हिचकी बंद हो जाती है।आधा चम्मच सिरके को पानी में घोलकर पी लें। इससे हिचकी बंद हो जायेगी। आप सेब के सिरके का प्रयोग भी कर सकते हैं।
  4. मूंगफली या बादाम का मक्खन (Peanut butter): मूंगफली या बादाम का मक्खन चिपचिपा होता है जिसे खाने से हिचकी बंद हो जाती है। एक चम्मच मूंगफली या बादाम के मक्खन को मुँह में डालें और कुछ समय के लिए अपने मुँह में रखकर निगल लें। जरुरत पड़ने पर इसके बाद एक गिलास पानी भी पी सकते हैं।इस उपचार से हिचकी बंद हो जायेगी।
  5. नींबू : हिचकी को रोकने में नींबू बहुत ही कारगर है। नींबू का खट्टा स्वाद उत्तेजित नसों को शांत करके हिचकी को बंद कर देता है। आधा चम्मच नींबू का रस बिना पानी मिलाये अपने मुँह में डाल दें।आपको लगेगा कि उसे जल्द ही निगल जाएँ, पर कोशिश करें नींबू के रस को कुछ समय के लिए अपने मुँह में रखने की, फिर कुछ देर बाद उसे निगल लें।इससे आपकी हिचकी तुरंत बंद हो जायेगी।इसके अलावा आप आधे नींबू में नमक छिड़ककर भी चूस सकते हैं।इस तरह भी आपको हिचकी से राहत मिलेगी।अथवा एक चम्मच नींबू के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर चाटने से भी हिचकी की समस्या से राहत मिलेगी।
  6. इलाइची :इलाइची हिचकी को रोकने में मदद करती है। एक चम्मच इलाइची के चूर्ण को एक गिलास गर्म पानी में घोल लें। पंद्रह मिनट के बाद उस पानी को छानकर पी लें।इस उपचार से हिचकी बंद हो जायेगी।
  7. हथेली को अंगूठे से दबायें : हिचकियाँ आने पर अपनी दायीं हाथ की हथेली को बाएँ हाथ के अंगूठे से दबाएँ फिर बायीं हाथ की हथेली को अपने दायें हाथ से दबाएँ। आप अपने बाएँ हाथ के अंगूठे की गोलाई को भी दबा सकते हैं।इससे आपकी नसों पर प्रभाव पड़ेगा और इससे होने वाले दर्द से आपका ध्यान बंट जायेगा और हिचकियाँ बंद हो जायेगी।
  8. ठंडा पानी : हिचकियाँ आने पर ठन्डे पानी का सेवन करें।इससे आपके शरीर के अवयवों को झटका लगेगा और हिचकियाँ रुक जायेंगी।इसके अलावा आप ठन्डे पानी से गरारा भी कर सकते हैं।अथवा आप एक छोटा बर्फ का टुकड़ा लेकर चूस भी सकते हैं।इन सभी प्रकियाओं से आपको हिचकियों से राहत मिलेगी।
  9. पानी : सामान्य तौर पर पानी पीने से हिचकियाँ बंद हो जाती है। पानी पीने से डायाफ्राम (Diaphragm) अपने निश्चित स्थान पर पहुँच जाता है और हिचकियाँ रुक जाती हैं।आप साँस रोककर भी पानी पी सकते हैं, इससे भी आपकी हिचकियाँ ठीक हो जाएँगी।
  • अदरक : हिचकियों का प्रभावी उपचार करने के लिए ताजे अदरक के टुकड़ों को चूसना कारगर है। इससे तत्काल लाभ मिलता है।
  1. कागज के बने बैग (Bag) में साँस लें :हिचकी दूर करने के लिए कागज के बने बैग में मुँह डालकर साँस लें। ऐसा करने से शरीर में कार्बनडाइऑक्साइड (Carbon dioxide) की मात्रा बढ़ जाती है, फलस्वरूप साँस लेने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और उससे पेट जल्दी-जल्दी अन्दर-बाहर होने लगता है जिसके प्रभाव डायाफ्राम (Diaphragm) पर पड़ता है और हिचकी बंद हो जाती है।एक छोटे से कागज के बैग को अपने मुँह के चारों तरफ इस प्रकार बांध लें जिससे बाहर की हवा अंदर न जाये।अब धीरे-धीरे गहरी साँस लें।इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएँ जब तक कि आपकी हिचकी बंद नहीं हो जाती। दिल के मरीज इस उपचार को बिल्कुल न करें।
  2. काली मिर्च : हिचकी रोकने के लिए काली मिर्च भी फायदेमंद है।काली मिर्च के तीन दानों को आधा तोड़कर थोड़ी-सी चीनी या मिश्री के कुछ दानों के साथ अपने मुँह में रखकर चूसने से हिचकियाँ बंद हो जायेगी।
  • टमाटर : हिचकी की समस्या को रोकने का आसान उपाय टमाटर है।जब भी आपको हिचकी आये तो आप एक टमाटर को धोकर अपने दाँतों से काटे और खायें।इससे आपको हिचकी से राहत मिलेगी।
  • दही : दही का खट्टा स्वाद हिचकी को रोकने में मदद करता है। एक कप दही में थोड़ा-सा नमक मिलाकर धीरे-धीरे उसका सेवन करें।इस उपचार से हिचकी बंद हो जायेगी।
  • सरसों के दाने और घी या मक्खन : हिचकी रोकने के लिए आधे चम्मच सरसों के दानों को आधे चम्मच शुद्ध घी या मक्खन के साथ मिलाकर निगल जायें।इस उपचार से हिचकी तुरंत रुक जायेगी,पर सरसों के दानों को सावधानी से निगले, ताकि वे गले से आसानी से उतर जाये।
  1. शहद :शहद हिचकी को बंद करने का कारगर उपाय है।हिचकी रोकने के लिए एक चम्मच शहद को गले में रखकर बिना निगले नौ तक गिने फिर शहद को निगल लें। इससे हिचकी बंद हो जायेगी।
  • कानों को बंद करें : हिचकी रोकने के लिए अपने कानों को हाथों से बीस से पच्चीस सेकंड (Second) के लिए बंद करें।इसके अलावा अपने कानों के मुलायम भाग जिसे इयरलोब (Ear lob) भी कहते है, उसे कुछ देर के लिए दबाकर रखें। इससे हिचकी से राहत मिलेगी।
  • ब्रेड (Bread) या पाव :हिचकी रोकने के लिए ब्रेड या पाव को सूखा चबाकर निगल जायें। इससे हिचकी तुरंत बंद हो जायेगी।
  • मिश्री : हिचकियाँ आने पर मिश्री के दानों को मुँह में रखकर तब तक चूसे जब तक मिश्री आपके लार से मिलकर एकदम घुल न जाये। इसके बाद एक गिलास पानी पी लें। इससे हिचकियाँ बंद हो जायेगी।जिन्हें मधुमेह की बीमारी हैं वे इस उपचार को न अपनाएँ।
  • जीभ बाहर निकालकर रखें : हिचकियों को जल्दी रोकने के लिए अपनी जीभ को कुछ देर बाहर निकालकर रखें।इससे गले के बीच के भाग को आराम मिलता है और वह भाग अच्छे से खुल जाता है जिसके कारण आपको साँस लेने में आसानी होगी।इस प्रक्रिया से आपकी हिचकियाँ आनी बंद हो जायेगी।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर हिचकी से छुटकारा मिल सकता है।यदि तंत्रिका या जठरांत्र आदि से जुड़ी किसी समस्या के कारण हिचकी आ रही हो तो तुरंत किसी चिकित्सक की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाएं।हिचकी रोकने के लिए घरेलू नुस्खों के साथ कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक हैं, जैसे :

  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • जल्दबाजी में न खायें।
  • जरुरत से ज्यादा न खायें।
  • मानसिक तनाव और चिंता से दूर रहें।
  • अधिक तीखा और मसालेदार खाना न खायें।

बहुत अधिक गर्म और बहुत अधिक ठन्डे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

स्वप्नदोष (Nightfall) से बचने के लिए घरेलू उपाय

अपने नाम के विपरीत स्वप्नदोष (Nocturnal Emission or Wet Dream) कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है जिसके अंतर्गत एक पुरुष को नींद के दौरान वीर्यपात (स्खलन) हो जाता है । सामान्य अवस्था में स्त्री और पुरुष के सम्मिलन की चरमावस्था पर पुरुष का वीर्य स्खलित होता है या यह कहा जा सकता है कि सम्भोग की चरम सीमा पर पुरुष का वीर्य स्खलित होता है । लेकिन स्वप्नदोष एक ऐसी अवस्था या प्रक्रिया है जिसमें पुरुष केवल स्वप्न में स्त्री की उपस्थिति को महसूस करके कल्पना में ही सम्भोग करता है और उस मानसिक सम्भोग की पूर्णता से पहले अथवा पूर्णता पर वीर्य का स्खलन हो जाता है । इस असामान्य दशा को स्वप्नदोष कहते है । इस प्रक्रिया में चाहे पुरुष का लिंग तना हुआ हो या न हो, वीर्य लिंग से अपने-आप ही बाहर निकल जाता है । प्रायः अविवाहित युवकों तथा किशोरों को रात में सोते समय स्वप्न में वीर्यपात हो जाता है ।

वास्तव में स्वप्नदोष कोई रोग नहीं है पर जब इसके कारण व्यक्ति के दिमाग में तनाव घिर जाता है तब यही आगे चलकर रोग का रूप धारण कर लेता है । स्वप्नदोष में रोगी शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से सम्भोगावास्था में होता है किन्तु कभी-कभी यही स्थिति व्यक्ति को मानसिक रूप से दुर्बल और कुंठित कर देती है । शुरू-शुरू में यह रोग स्वप्न से संबंधित होता है, परन्तु कुछ समय बाद मानसिक स्थिति इतनी कमजोर हो जाती है कि वैसे ही सोये रहने पर लिंग उत्तेजित हो जाता है और बिना स्वप्न के ही वीर्य स्खलन होने लगता है । स्वप्नदोष बड़े होने का स्वाभाविक हिस्सा है । कुछ लोगों को हफ्ते में कई बार स्वप्नदोष होता है और कुछ को अपनी पूरी जिंदगी में केवल कुछ ही बार स्वप्नदोष होता है । जैसे-जैसे व्यक्ति उम्र में बड़ा होता जाता है, स्वप्नदोष होने की संभावना उतनी ही घट जाती है । यह प्रक्रिया महीने में अगर एक या दो बार ही हो तो वह सामान्य बात है ।

किन्तु यदि यह इससे ज्यादा बार या रोजाना हो तो वीर्य या शुक्र की हानि होती है और व्यक्ति को कमजोरी महसूस होती है । स्वप्नदोष के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; किशोरावस्था एवं युवावस्था में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण, कामुकता, हस्तमैथुन, अश्लील साहित्य व अश्लील चलचित्रों का अवलोकन, अत्यधिक गर्म पदार्थों का निरंतर सेवन, व्यायाम न करना आदि । स्वप्नदोष के कारण पुरुषत्व की हानि नहीं होती और न ही यौन संबंधी कोई दुर्बलता होती  है । हालाकि स्वप्नदोष कोई रोग नहीं है पर यदि स्वप्नदोष के बाद सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, शिथिलता आदि दिखाई दे, तो इसके इलाज की ओर उन्मुख होना चाहिए ।

स्वप्नदोष से बचने के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. धनिया : धनिया के दाने व मिश्री के दानों को बराबर मात्रा में लेकर अच्छे से पीसकर चूर्ण बना लें । अब उसी चूर्ण में से पाँच ग्राम लेकर एक गिलास पानी में मिलाये और सुबह उसी पानी को पीयें । लगभग एक सप्ताह तक रोजाना इस उपचार को करने से स्वप्नदोष की समस्या खत्म हो जाती है ।
  2. लौकी का रस : लौकी का रस पाचन तंत्र को ठीक रखता है और स्वप्नदोष की समस्या को दूर करता है । रात को सोने जाने से पहले आधा गिलास लौकी का ताजा रस पीने से स्वप्नदोष में फायदा होगा ।
  3. आँवला : आंवला आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है । आंवले में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) शरीर के खराब तत्व या टोक्सिन (Toxin) को बाहर निकाल देता है । स्वप्नदोष से बचने के लिए रोजाना एक से दो गिलास आंवले का रस पी सकते या एक गिलास पानी में एक से दो चम्मच आँवले का चूर्ण मिलाकर भी ले सकते हैं । बेहतर परिणाम के लिए आप आंवले के रस या उसके चूर्ण के साथ एक चम्मच शहद और थोड़ी-सी हल्दी भी मिला सकते हैं । इसके निरंतर सेवन से स्वप्नदोष की समास्या दूर हो जायेगी ।
  4. लहसुन : लहसुन में आवश्यक तत्व है जो स्वप्नदोष को नियंत्रित करने में मदद करता है । सोने जाने से पहले तीन से चार लहसुन की कलियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर एक गिलास पानी के साथ मिलाकर उसका सेवन करें । रोजाना इसके सेवन से स्वप्नदोष की समस्या दूर हो जायेगी ।
  5. प्याज : यह प्रमाणित हो चुका है कि जो व्यक्ति अधिक मात्रा में प्याज का सेवन करता है उसे स्वप्नदोष की समस्या नहीं होती क्योंकि प्याज स्वप्नदोष की संभावना को कम कर देता है । इसलिए स्वप्नदोष से बचने के लिए कच्चे प्याज का सेवन करें । अपने रोजाना के खाद्य के साथ कच्चे प्याज का सेवन कर सकते है या सलाद (Salad) में भी कच्चे प्याज को शामिल कर सकते हैं ।
  6. अनार : अनार स्वप्नदोष का एक बेहतरीन उपचार है । इस फल में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है और यह रक्त के प्रवाह को बेहतर करता है । स्वप्नदोष से बचने के लिए अनार का रस या साबुत अनार का सेवन करें । रोजाना और निरंतर एक या दो महीने तक इसके सेवन से स्वप्नदोष की समस्या दूर हो जायेगी ।
  7. दही : दही स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है और यह स्वप्नदोष को भी नियंत्रित करने में मदद करता है । रोजाना दिन में दो से तीन बार एक कटोरी दही का सेवन करें । इसके निरंतर सेवन से कुछ ही दिनों में फर्क दिखने लगेगा ।
  8. अच्छी किताबें पढ़े : रात को सोने जाने से पहले कोई अश्लील किताब नहीं बल्कि अच्छी किताबों को पढ़े । अश्लील किताबों को पढ़ने या अश्लील तस्वीरें देखने से वही चीजे आपके दिलों-दिमाग में बैठ जाती है और वही स्वप्नदोष का कारण बन जाता है । अच्छी किताबों को पढ़ने से आप शान्ति से सो पायेंगे और स्वप्नदोष की समस्या भी नहीं होगी ।
  9. अश्लील फिल्में न देखे : स्वप्नदोष का सबसे बड़ा कारण है अश्लील फिल्में देखना । रात को सोने जाने से पहले अश्लील फिल्में बिल्कुल न देखें क्योंकि इस तरह की फिल्में आपको उत्तेजित करते हैं और इसके कारण स्वप्नदोष की समस्या हो सकती है ।
  10. सोने से पहले नहाये : स्वप्नदोष से बचने के लिए सोने से पहले नहाकर सोये । नहाने के टब में जैस्मिन (Jasmine) या लैवेंडर (Lavender) के तेल का प्रयोग कर सकते हैं । इससे आपका शरीर और दिमाग ठंडा रहेगा और नींद भी अच्छी होगी ।
  11. सेलरी (Celery) के पत्तों का रस : सेलरी के पत्तों का रस स्वप्नदोष से निजात दिलाने में मदद करता है । कुछ ताजे सेलरी के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें । दो चम्मच सेलरी के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर रात को सोने जाने से पहले लेने से स्वप्नदोष की समस्या दूर हो जाती है । रोजाना निरंतर एक महीने तक इसका सेवन करने से फर्क दिखेगा ।
  12. मेथी के पत्तों का रस : सेलरी के पत्तों की तरह आप मेथी के पत्तों का रस बनाकर भी पी सकते हैं । इसके सेवन से भी स्वप्नदोष की समस्या से निजात मिलेगी । दो चम्मच मेथी के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर रात को सोने जाने से पहले लेने से स्वप्नदोष की समस्या में फर्क पड़ेगा ।
  13. पालक : पालक के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें । रोजाना सुबह खाली पेट पालक के इसी रस को पीने से स्वप्नदोष की समस्या दूर हो जायेगी । इस उपचार को एक हफ्ते तक करें, आपको फर्क महसूस होगा ।
  14. बादाम (Almond) का दूध : बादाम के दूध में कई मिनरल (Mineral), विटामिन (Vitamin) और एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ स्वप्नदोष से भी निजात दिलाता है । 6-7 बादाम को कुछ घंटों तक पानी में भीगोकर रखें ताकि उसके छिलकों को आसानी से निकाला जा सके । अब उन सारे बादाम को पीसकर उसे एक गिलास गर्म दूध के साथ मिलायें, साथ ही उसमें आधा चम्मच शहद मिलाये । रात को सोने जाने से आधे घंटे पहले इस दूध का सेवन करें । इसके निरंतर सेवन से स्वप्नदोष की समस्या से दूर हो जायेगी ।
  15. जामुन : जामुन के बीज या गुठली को सुखाकर उसे पीस लें । लगभग पंद्रह दिनों तक रोजाना चार ग्राम की मात्रा में जामुन की गुठलियों के चूर्ण का सेवन करने से स्वप्नदोष की समस्या नहीं रहेगी और शरीर में स्फूर्ति बरकरार रहेगी । इस चूर्ण के सेवन के दौरान खट्टे पदार्थों का सेवन न करें ।
  16. केला : सुबह उठकर केले की फली पर एक चम्मच शहद डालकर खाने से स्वप्नदोष की समस्या से भी निजात मिलता है और साथ ही अनेक वीर्य संबंधी रोग भी समाप्त हो जाते है ।
  17. इलायची : आधा ग्राम छोटी इलायची के दाने, तीन ग्राम धनिया के दाने और दो ग्राम मिश्री को अच्छे से पीस लें । रोजाना सुबह एक चम्मच इसी चूर्ण को पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष की समस्या दूर हो जायेगी ।
  18. नीम के पत्ते : रोजाना नीम को ताजे पत्तों को चबाकर खाने से स्वप्नदोष जड़ से खत्म हो जायेगा ।
  19. तुलसी के बीज : स्वप्नदोष से बचने के लिए दो चम्मच तुलसी के बीज को बारीक पीसकर पानी के साथ उसका सेवन करें ।
  20. व्यायाम : व्यायाम आपके शरीर को स्वस्थ रखता है । व्यायाम करके भी स्वप्नदोष से मुक्ति मिल सकती है । भुजंगासन, सर्वांगासन, वज्रासन, पद्मासन, सूर्य नमस्कार, अश्विनी मुद्रा आदि कई योग हैं जिन्हें करके स्वप्नदोष को जड़ से खत्म किया जा सकता है । किसी अच्छे विशेषज्ञ से योग सीखकर नित्य योग या व्यायाम करने से स्वप्नदोष जैसी समस्या से छुटकारा मिलता है ।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर स्वप्नदोष से राहत मिल सकती है । इस बात को हमेशा याद रखें कि स्वप्नदोष कोई रोग नहीं है । कुछ आदतों को बदलने से ही इससे छुटकारा मिल सकता है । लेकिन इन नुस्खों के साथ कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरुरी हैं, जैसे :

  • ऐसे पदार्थों का सेवन न करें जिससे कि आपका पेट गर्म हो या गैस की समस्या हो ।
  • धूम्रपान, मद्यपान से परहेज करें ।
  • अश्लील तस्वीरों, फिल्मों या साहित्य का अवलोकन न करें । अपने विचारों और मन में शुद्धता लायें ।
  • रात को मूत्र त्याग की इच्छा होने पर आलस्य न करें ।
  • कोशिश करें पीठ या पेट के बल न सोने की ।
  • बुरी आदतों को त्यागकर अच्छी आदतों को ग्रहण करें ।
  • रात को सोने जाने से पूर्व ठन्डे पानी से अपने हाथ और पांव को अच्छे से धो लें ।
  • सोने से दो से तीन घंटे पहले भोजन कर लें ।

साइनस के लिए घरेलू उपचार

साइनस नाक का एक रोग है।नाक बंद होना, सिर में दर्द होना, आधे सिर में बहुत तेज दर्द होना, नाक से निरंतर पानी बहना, आँखों के ऊपरी पलकों या दोनों किनारों पर दर्द होना, चेहरे पर सूजन आदि इस रोग के लक्षण हैं। साइनस के मरीज के नाक और गले में कफ जमता रहता हैं।यह रोग होने पर नाक के अन्दर की हड्डी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है, जिससे श्वास लेने में तकलीफ होती है। इससे पीड़ित व्यक्ति ठंडी हवा, धूल या धुआँ सहन नहीं कर पाता।साइनस ही आगे चलकर अस्थमा और दमा जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।चिकित्सकों के अनुसार साइनस मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती हैं, जो हमारे सिर को हल्कापन और श्वास वाली हवा लाने में मदद करती है।श्वास लेते समय अन्दर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है।इस थैली में हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल और दूसरे तरह की गंदगियों को रोकती है और बाहर फेंक दी जाती है।साइनस का मार्ग जब रुक जाता है अर्थात बलगम निकलने का मार्ग जब रुक जाता है तब ‘साइनोसाइटिस’ नामक बीमारी हो सकती है। वास्तव में साइनस का संक्रमण होने पर साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। सूजन की वजह से साइनस में हवा की जगह मवाद या बलगम आदि भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं।इसके कारण माथे पर, गालों और ऊपर के जबाड़ो में दर्द होने लगता है।इस रोग में सर्दी बनी रहती है और कुछ लोग इसे सामान्य सर्दी समझकर इसका इलाज नहीं करवाते हैं।यदि वक्त रहते इसका इलाज न कराया जाए तो ऑपरेशन की नौबत भी आ सकती है।कुछ घरेलू उपायों से साइनस से निजात पाया जा सकता है।

साइनस के लिए कुछ घरेलू नुस्खें

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  1. भाँप : उबलते हुए पानी में नमक डालकर उसे आँच से उतार ले।उसके बाद अपना सिर और उस पानी के बर्तन को एक कपड़े से ढक ले और दस मिनट तक उस गर्म पानी का भाँप ले।इस बात का ध्यान रखे कि इस दौरान पंखा, ए.सी या कूलर बंद रहे।इसके बाद लगभग बीस मिनट तक हवा में न जाएँ।इस प्रक्रिया से साइनस में फर्क पड़ता है।
  2. नाक साफ करना :साइनस में नाक में कफ जम जाता है, ऐसे में जरुरी है कि नाक को साफ रखे।कई लोग शर्म के कारण अपने नाक का बलगम अन्दर की ओर खींच लेते हैं, पर ऐसा करने से नाक बंद हो जाता है, और साँस लेने में असुविधा होती है।इसलिए साइनस के मरीज के लिए अपना नाक साफ रखना आवश्यक है।
  3. दालचीनी : साइनस पैदा करने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं के लिए दालचीनी बहुत ही प्रभावशाली है। एक गिलास गरम पानी में एक छोटी चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में एक बार पियें।लगातार दो हफ्ते तक इसे पीने से साइनस में फर्क पड़ता है।
  4. नींबू : एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर दो से तीन हफ्तें तक रोजाना सुबह खाली पेट पीने से साइनस की समस्या कम होती है। नींबू में साइनस के दर्द को दूर करने की क्षमता होती है साथ ही यह नाक की नली को भी साफ करता है।
  5. अदरक : अदरक में प्रतिजीवाणु पाये जाते हैं, जो साइनस के दर्द को मिटाने में सहायक होते हैं।दो से तीन कप पानी में एक अदरक का एक टुकड़ा बारीक काटकर उबाल ले, फिर उसे छानकर औरथोड़ा ठंडा करके पीने से साइनस में राहत मिलती है।
  6. हल्दी :हल्दी को गर्म दूध के साथ लेने से श्वास संबंधी बीमारियों में लाभ मिलता है।यह मसाला शरीर में गरमाहट लाता है, इसलिए साइनस में इसके सेवन से जकड़न से तुरंत राहत मिलती है।एक गिलास दूध में एक छोटी चम्मच हल्दी और एक छोटा चम्मच शहद मिलाकर दो हफ्तें तक पीने से साइनस में काफी फायदा होता है।
  7. लहसुन : साइनस में लहसुन एक बेहतरीन उपाय है।इसमें मौजूद एलिसिन एंजाइम साइनस के जीवाणु को खत्म करने में मदद करता है।साइनस से बचने के लिए लहसुन रामबाण दवा है। रोजाना कच्चे लहसुन की एक कली खाने से साइनस संक्रमण में राहत मिलती है।
  8. विटामिन ई और विटामिन ए : विटामिन ई से भरपूर खाद्द पदार्थों का सेवन करने से साइनस की समस्या दूर हो जाती है।सूरजमुखी के बीज, बादाम, काजू, अखरोट, सरसों, ब्रोकोली जैसे खाद्द पदार्थों में विटामिन ई की मात्रा पायी जाती है जो साइनस के लिए फायदेमंद हैं।विटामिन ए से युक्त खाद्द पदार्थ जैसे गाजर, पालक, अंडा, मीठा आलू आदि भी साइनस में फायदा पहुंचाता है।
  9. नारियल पानी : नारियल पानी में पोटेशियम (Potassium) पाया जाता है जो साइनस के मरीजों के लिए लाभदायक है।इससे गले की तकलीफ में आराम मिलता है।
  10. गाजर का रस :साइनस में गाजर बहुत ही लाभकारी होता है।आप गाजर का रस निकालकर पी सकते है, या फिर गाजर के रस को चकुंदर के रस के साथ भी ले सकते है अथवा पालक के पत्तियों के रस के साथ भी ले सकते है।
  • काला जीरा : साइनस में कालेजीरे से तुरंत राहत मिलता है।थोड़ा-सा काला जीरा लेकर एक कपड़े में बाँध ले, फिर उसे नाक के करीब ले जाकर जोर-जोर से साँस ले।ऐसा करने से बंद नाक खुल जाता है और तुरंत राहत मिलती है।
  1. प्याज : प्याज का रस नाक में डालने से साइनस के सिरदर्द से तुरन्त राहत मिलती है।
  2. शहद : रोजाना सुबह शुद्ध शहद का सेवन करने से साइनस से होने वाली परेशानियों से राहत मिलती है।इसके अलावा एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और एक चौथाई चम्मच नमक डालकर उस घोल को ड्रॉपर की सहायता से दो बूंद नाक में डालने से साइनस में राहत मिलती है।
  3. यूकेलिप्टस तेल : साइनस होने पर अक्सर सिरदर्द की समस्या होती रहती है।यूकेलिप्टस का तेल साइनस के सिरदर्द से तुरंत राहत देने वाला नुस्खा है। इसके लिए एक बर्तन में थोड़ा पानी लेकर उसमें यूकेलिप्टस तेल की कुछ बूंदें डालकर उस पानी को ढककर उबाल ले, और उसी गर्म पानी का भाँप ले।ऐसा करने से साइनस से होने वाली सिरदर्द में फर्क पड़ता है।
  4. चिकेन सूप : साइनस के मरीज को चिकेन सूप पीना चाहिए क्योंकि इसमें पाये जाने वाले एमिनो सिस्टीन से नाक बहने लगती है जो साइनस ठीक होने का संकेत है।
  5. मेथी : साइनस में मेथी दाना भी फायदेमंद है।एक बर्तन में एक गिलास पानी और उसमें दो से तीन चम्मच मेथी के दानें डालकर लगभग पांच मिनट तक अच्छे से उबाल कर छान ले, और उस पानी को चाय की तरह पिये। दिन में एक बार इसे पीने से साइनस में फर्क पड़ता है।
  6. त्रिकुट : त्रिकुट (सौंठ, पीपल और काली मिर्च) साइनस में बहुत ही लाभदायक है।सौंठ, पीपल और काली मिर्च का पाउडर बनाकर बराबर मात्रा में मिला ले।त्रिकुट के इस मिश्रण की थोड़ी-सी मात्रा सब्जी में मिलाकर खाने से साइनस का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
  7. जौ : जौ नाक के रोगों को दूर करता है।कफ, सूजन, बलगम को नष्ट करने के गुण जौ में मौजूद हैं।इसलिए साइनस के मरीज को जौ से बना भोजन जैसे जौ के आटे की रोटी, हलवा आदि अधिक मात्रा में लेना चाहिए।
  8. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना : साइनस से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में पानी का अभाव हो जाता है, ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो और मरीज को इस संक्रमण के कारण परेशानी भी न हो।
  9. खारे पानी से कुल्ला : साइनस के रोगी को खारे पानी से कुल्ला करना चाहिए।ऐसा रोजाना करने से साइनस की समस्या बहुत हद तक खत्म हो जाती है।
  10. साइनस दूर करने के लिए योगा : साइनस की समस्या योगा द्वारा भी दूर हो सकती है।निरन्तर योगा करने से साइनस से उत्पन्न परेशानियाँ खत्म हो जाती हैं।योगा में साँस को विभिन्न तरीकों से नियंत्रित करना पड़ता है। इससे न सिर्फ आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है बल्कि साँसों से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।साइनस की समस्या में योगा एक कारगर उपाय है।आप किसी अच्छे योगा विशेषज्ञ से इस बीमारी के लिए योगा सीख सकते है।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों से साइनस की समस्या में राहत मिलेगी। लेकिन कुछ खाद्द पदार्थों को त्यागकर और कुछ सावधानियाँ बरतने से इस समस्या से निजात मिल सकता है,जैसे :

  • साइनस के मरीज को धूल से काफी परेशानी होती है, इसलिए घर का वातावरण साफ रखना चाहिए।यदि वह व्यक्ति बाहर भी जाता है तो उसे अपने नाक पर मास्क (Mask) पहनकर निकलना चाहिए।साइनस से पीड़ित व्यक्ति को धूम्रपान या अन्य तरह के धुएं से बचना चाहिए।
  • साइनस होने पर कैफीन युक्त पेय जैसे कॉफी, चाय, हॉट चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि से बचना चाहिए। इस तरह के पेय पदार्थों से शरीर में पानी की कमी हो जाती है जो कि नाक को जाम कर सकता है। बंद नाक के कारण साइनस की बीमारी और भी कष्टदायक हो जाता है।
  • साइनस में ठन्डे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।दही, आइसक्रीम, कोल्ड कॉफी, ठंडा पानी आदि से परहेज करना चाहिए।इस तरह के पदार्थ साइनस के संक्रमण को बढ़ा सकता है।
  • साइनस के मरीज को शराब से भी दूर रहना चाहिए।शराब पीने से नाक बंद हो जाता है और इससे साइनस की तकलीफ बढ़ जाती है।
  • कभी-कभी मसालेदार खाना खाने से भी नाक बंद हो जाता है।साइनस से पीड़ित व्यक्ति के लिए मसालेदार खाना समस्या उत्पन्न कर सकता है। इसलिए ऐसे खाने से परहेज करना ही उचित है।
  • इसके अलावा साइनस की बीमारी यदि आपको ज्यादा तकलीफ दे रही है, तो आप डॉक्टर से संपर्क करके उनकी सलाह जरुर ले। डॉक्टर द्वारा सुझाए गए दवाइयों का उपयोग करे।

साँसों की दुर्गन्ध दूर करने के घरेलू उपाय

साँसों की दुर्गन्ध एक ऐसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या है जो कई लोगों में पाई जाती है।साँसों की दुर्गन्ध या बदबू का कारण मुँह में मौजूद बैक्टीरिया (Bacteria) होती है। इस बैक्टीरिया से निकलने वाले सल्फर कम्पाउंड (Sulphur Compound) की वजह से मुँह में बदबू पैदा होती है। साँसों की दुर्गन्ध के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • धूम्रपान, मद्यपान या तंबाकू का सेवन
  • मसूड़े के रोग
  • अच्छी तरह से मुँह साफ न करना अर्थात ब्रश न करना
  • शुष्क मुँह
  • गले का संक्रमण अर्थात टोंसिल या साइनस की समस्या
  • दांतों का संक्रमण जैसे पाईरिया
  • अम्लता या एसिडिटी (Acidity)

साँसों की दुर्गन्ध या मुँह की बदबू दूर करने के घरेलू नुस्खें

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  1. नियमित रूप से ब्रश करें : रोजाना नियमित रूप से दिन में दो बार ब्रश करना अत्यावश्यक है। ऐसा करने से आपकेदांत और मुँह साफ रहते हैं। खाना खाने के बाद मुँह में खाद्य के कुछ न कुछ कण रह ही जाते हैं, जिन्हें अच्छी तरह से साफ न करने से उसमें जीवाणु पनपते हैं और साँसों की बदबू का कारण बनते हैं।अतः रोजाना सुबह नींद से उठकर और रात को सोने जाने से पहले ब्रश करना जरुरी है।
  2. जीभ को साफ रखें : भोजन करने के बाद यदि मुँह ठीक से साफ न किया जाये तो मुँह में, खासकर जीभ के ऊपर जीवाणु जमा हो जाते हैं और मुँह में बदबू पैदा करते है।इसलिए दाँतों को साफ करने के साथ जीभ को साफ करना भी जरुरी है ताकि किसी भी तरह से जीवाणु मुँह के अन्दर न रह जाये।
  3. पुदीना या धनिया : पुदीना या धनिया के ताजे पत्ते चबाने से साँसों की दुर्गन्ध दूर होती है और मुँह में ताजगी भी बनी रहती है। आप सलाद के साथ या ऐसे भी पुदीना या धनिया के ताजे पत्तों का सेवन कर सकते है। लहसुन और प्याज के कारण उत्पन्न साँसों की दुर्गन्ध को भी दूर करने में पुदीना या धनिया के पत्ते सहायक है।
  4. सूरजमुखी के बीज : सूरजमुखी के बीजों में फाइबर (Fiber), प्रोटीन (Protein) और विटामिन-ई (Vitamin E) भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।सूरजमुखी के बीजों को चबाने से मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है और दाँतों में सड़न नहीं होती।इन बीजों को चबाकर एक गिलास पानी पी लें। इस प्रक्रिया को निरंतर करने से साँसों की दुर्गन्ध दूर हो जायेगी।
  5. हल्दी : हमारे खाने को सही रंग देने वाली हल्दी भी हमारी साँसों की दुर्गन्ध दूर करने में सहायक होती है। पीसी हुई हल्दी, थोड़ा-सा नमक और सरसों का तेल मिलाकर एक लेप तैयार करके सुबह ब्रश या उंगली की सहायता से अपने दाँतों और मसूड़ों में लगाकर उसे कुछ देर तक छोड़ दे, फिर थोड़ी देर बाद कुल्ला करके अच्छे से मुँह साफ कर ले।इस मिश्रण के प्रयोग से पाईरिया जैसी समस्या उत्पन्न नहीं होती और साँसों की बदबू भी खत्म हो जाती है।
  6. खाने का सोडा (Baking Soda) : घर में इस्तेमाल होने वाला खाने का सोडा (Baking Soda) मुँह की बदबू दूर करने का एक बेहतरीन उपाय है।हफ्ते में एक बार सुबह थोड़ा-सा खाने का सोडा लेकर उँगली के सहारे उसे दाँतों पर रगड़ने के बाद गुनगुने पानी से मुँह धो ले, इससे आपके मुँह में जीवाणु उत्पन्न नहीं होंगे।वैकल्पिक तौर पर हफ्ते में एक बार सुबह ब्रश करते समय अपने मंजन (Toothpaste) में थोड़ा-सा खाने का सोडा डालकर ब्रश कर सकते है। इससे भी साँसों की दुर्गन्ध दूर हो जायेगी। इसके अतिरिक्त एक कप पानी में खाने का सोडा और हाइड्रोजन परऑक्‍‌साइड‌ (Hydrogen Peroxide) मिलाकर माउथवॉश (Mouthwash) की तरह भी उसका इस्तेमाल कर सकते है।
  7. नींबू : नींबू मुँह की लार (Saliva) में वृद्धि करता है और इसलिए शुष्क मुँह के कारण होने वाली साँसों की दुर्गन्ध को दूर करने में नींबू मदद करता है।एक कप पानी में एक चम्मच नींबू का रस और एक चुटकी नमक मिलाकर खाने के बाद उससे कुल्ला करें।यह उपाय रोज करने से साँसों की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।इसके अतिरिक्त आप नींबू के पानी में रातभर नीम के दाँतून को भीगोकर रखे और सुबह उसी दाँतून का इस्तेमाल करे। इससे दांत तथा मसूड़े स्वस्थ और मजबूत होंगे और मुँह की बदबू भी दूर हो जायेगी।यदि प्रतिदिन दाँतून करना संभव नहीं तो सप्ताह में एक बार दाँतून जरुर करे। इसके अलावा नींबू के छिलकों को धूप में सुखाकर पीस ले और उसमें बराबर मात्रा में फिटकिरी मिलाकर उस मिश्रण से मंजन करें। इससे दाँतों और मसूड़ों की समस्या तो दूर होती ही है साथ ही साँसों की दुर्गन्ध भी दूर हो जाती है।
  8. टी ट्री ऑयल (Tea tree oil) :यह एक शक्तिशाली कीटाणु नाशक है तेल है, जो मुँह में पैदा होने वाले जीवाणुओं को खत्म करके साँसों की दुर्गन्ध को दूर करने में मदद करता है। आप अपने मंजन में टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें डालकर उससे दांत साफ कर सकते है। वैकल्पिक तौर पर टी ट्री ऑयल, नींबू का रस और पेपरमिंट ऑयल (Peppermint oil) को बराबर मात्रा में मिलाकर उस मिश्रण का माउथवाश (Mouthwash) की तरह भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके निरंतर प्रयोग से आपके मुँह में ताजगी बनी रहेगी और बदबू भी दूर हो जायेगी।
  9. सौंफ : सौंफ साँसों की दुर्गन्ध से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। खाने के बाद थोड़ा-सा सौंफ लेकर चबाकर खाने से मुँह की बदबू दूर हो जाती है और मुँह में ताजगी बरकरार रहती है।सौंफ में जीवाणुओं से लड़ने की क्षमता भी होती है।
  • पार्सले (Parsley) : पार्सले मुँह की बदबू को दूर करने में मदद करता है।ताजे पार्सले की पत्तियों को सिरके में कुछ देर के लिए भीगोकर रखें उसके बाद उन्हीं पत्तियों को चबाकर खाने से मुँह में ताजगी फैल जायेगी और दुर्गन्ध भी दूर हो जायेगी।इसके अलावा आप पार्सले की पत्तियों का रस बनाकर भी पी सकते है।पार्सले पेट के पाचन तंत्र को सही रखता है और गैस एवं अम्लता जैसी समस्याओं को भी दूर करके उससे उत्पन्न होने वाली साँसों की बदबू को भी दूर करता है।
  1. दालचीनी : दालचीनी में खासकिस्मकातेल पाया जाता है जो न केवल मुँह की बदबू को खत्म करता है बल्कि मुँह में उत्पन्न होने वाले खराब बैक्टीरिया (Bacteria) को भी नष्ट करता है।एक मध्यम आकर का बर्तन लेकर उसमें एक कप पानी डालकर उबालें, फिर उसमें एक-एक करके दो से तीन हरी इलायची और एक तेजपत्ता डालकर अच्छे से उबाल लें।फिर उस मिश्रण को छानकर पानी को गुनगुना होने तक छोड़े और उससे कुल्ला करें। इससे आपकी साँसों की बदबू दूर हो जायेगी और आपको मुँह में ताजगी का अनभव होगा।
  • सेब का सिरका : सांसों की दुर्गन्ध से निजात पाने के लिए सेब के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है।एक चम्मच जैतून के तेल में सेब का सिरका मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके उसमें ब्रश डूबोकर दाँतों पर हलके हाथों से घुमाएँ।इस नुस्खे को अपनाने से दाँत भी साफ होंगे और साँसों की दुर्गन्ध भी दूर होगी।इसके अतिरिक्त आप एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर खाने से एक घंटे पहले उसका सेवन भी कर सकते हैं। इससे पाचन तंत्र भी सही रहता है और मुँह की बदबू भी दूर होती है।लेकिन इस बात का जरुर ध्यान रखे कि सिरके से आपको कोई ऐलर्जि (Allergy) न हो।
  • लौंग : लौंग में जीवाणु प्रतिरोधक गुण हैं जो सांसों की दुर्गन्ध दूर करने में सहायक है। आप खाने के बाद दो से तीन लौंग मुँह में रखकर धीरे-धीरे चबा सकते हैं।लौंग से निकलने वाला तेल आपकी लार के साथ मिलकर बदबू को पैदा करने वाले जीवाणुओं को खत्म करता है। कुछ ही मिनटों में आपको ताजगी का अनुभव होगा और मुँह की बदबू भी चली जायेगी। इसके अलावा आप लौंग की चाय का सेवन भी कर सकते है या उससे कुल्ला भी कर सकते हैं।एक कप पानी को उबालकर उसमें एक चम्मच पीसी हुई लौंग डालकर उसे पाँच से दस मिनट तक धीमी आँच पर पकाएं, फिर उसे छानकर चाय की तरह पी सकते हैं या उस पानी को थोड़ा ठंडा करके उससे कुल्ला भी कर सकते हैं।ऐसा नियमित रूप से करने से साँसों की बदबू कुछ ही दिनों में दूर हो जायेगी।
  • तुलसी :तुलसी की ताजी पत्तियों को चबाकर खाने से मुँह की बदबू दूर होती है और मुँह का घाव भी ठीक हो जाता है।पाईरिया जैसी समस्या को दूर करने में भी तुलसी मदद करता है।

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उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के प्रयोग द्वारा आप साँसों की दुर्गन्ध से निजात पा सकते हैं। यदि इनके प्रयोग के बावजूद भी साँसों की दुर्गन्ध दूर नहीं होती है तो किसी अच्छे दन्त चिकित्सक से अपना इलाज करवायें।किसी  संक्रमण के कारण भी आपके मुँह में बदबू पैदा हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी है।मुँह में बदबू पैदा न हो इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी हैं, जैसे :

  • खूब सारा पानी पिये. पानी आपके दाँतों में फंसे खाद्य कणों को निकालकर मुँह को साफ रखता है।
  • सही भोजन का सेवन करें। अपने रोजाना के खाद्य में हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों को शामिल करें।विटामिन ए (Vitamin A) से भरी ब्रोकोली, गाजर, कद्दू, ककड़ी जैसी सब्जियाँ प्राकृतिक रूप से दाँतों की सफाई करने के साथ दाँतों की जड़ो को भी मजबूत बनाती हैं।नाशपाती, सेब, अमरुद, केला जैसे फल मसूड़ों के लिए काफी अच्छे हैं।विटामिन सी (Vitamin C) से भरे स्ट्रॉबेरी, कीवी जैसे फल भी मसूड़ों को मजबूत बनाते हैं।
  • धूम्रपान, मद्यपान, तंबाकू के सेवन से परहेज करें।
  • अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रखें।अत्यधिक मात्रा में बाहर का खाना एवं मसालेदार खाना पाचन तंत्र को बिगाड़ सकता है और उससे अम्लता, गैस जैसी समस्या हो सकती है, जिससे मुँह में बदबू पैदा हो सकतीहै।
  • दाँतों को ब्रश करने की तरह फ्लॉस (Floss)भी करें। एक धागे की मदद से दाँतों के बीच फंसे खाद्य कणों को बाहर निकालना जरुरी होता है ताकि वोखाद्य कण मुँह में सड़कर बदबू पैदा न कर सके।
  • अतिरिक्त मात्रा में चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, मिठाई, चॉकलेट आदि का सेवन ना करें। इसके अत्यधिक सेवन से दांतों और मसूड़ों की समस्या हो सकती है।

सर्दी और खाँसी से निजात के लिए घरेलू उपाय

सर्दीऔर खाँसी की समस्या बहुत ही आम समस्या है लेकिन इसके कारण आपके स्वास्थ्य को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।यह किसी भी उम्र में हो सकता है।सर्दी-खाँसी होने पर सरदर्द, लगातार नाक बहना, बदन दर्द, यहां तक कि बुखार भी हो सकता है।यदि सही समय पर सर्दी और खाँसी का सही इलाज न किया जाएँ तो आगे चलकर वो साइनस का रूप भी ले सकती है।सर्दी और खाँसी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • मौसम में परिवर्तन होने के कारण सर्दी और खाँसी की समस्या होती है।
  • धूल, धुआँ, प्रदूषण के कारण भी इस तरह की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • ठन्डे पदार्थों जैसे, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, फ्रिज का पानी आदि का सेवन करने से जुकाम और खाँसी की समस्या हो सकती है।
  • सर्दियों के मौसम में भी ये समस्या उत्पन्न हो सकती है।

सर्दी खाँसी के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. दूध और हल्दी : दूध और हल्दी सर्दी और खाँसी के सबसे असरदार इलाजों में से एक है।एक गिलास दूध को गर्म करके उसमें एक चम्मच हल्दी का पाउडर मिलाकर उसका सेवन करें। इसके सेवन से आपका शरीर अन्दर से गर्म रहता है और सर्दी-खाँसी जैसी समस्या भी दूर हो जाती है।
  2. ब्रांडी (Brandy) और शहद : सामान्य सर्दी और खाँसी को ठीक करने के लिए आप ब्रांडी और शहद का सेवन भी कर सकते है।हर मेडिकल स्टोर (Medical Store) में डॉक्टर्स ब्रांडी (Doctors Brandy) उपलब्ध है। एक चम्मच ब्रांडी में एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से सामान्य सर्दी और खाँसी की समस्या से निजात पाया जा सकता है। ब्रांडी छाती को गर्म रखता है और शहद में बलगम से लड़ने का प्राकृतिक गुण है।इन दोनों का मिश्रण सर्दी और खाँसी को प्रभावी रूप से दूर करता है।
  3. आंवला :आंवला विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा होता है।आँवले के नियमित सेवन सेरक्त का संचार अच्छी तरह से होता है।यह आपके प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर सर्दी, जुकाम और खाँसी जैसी बीमारियों को ठीक करता है।जिन्हें अक्सर सर्दियों में जुकाम और खाँसी की समस्या होती रहती है उन्हें रोजाना एक आँवले का सेवन जरुर करना चाहिए, इससे सर्दी और खाँसी की समस्या से हमेशा के लिए छूटकारा पाया जा सकता है।
  4. नींबू और शहद : नींबू के रस में शहद मिलाकर लेने से जुकाम और खाँसी की समस्या से निजात पाया जा सकता है। एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस निचोड़ लें और फिर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर उसका सेवन करें।इससे सर्दी और खाँसी की समस्या में आपको आराम मिलेगा।
  5. अजवाइन : अजवाइन में जीवाणुओं से लड़ने की क्षमता होती है।जुकाम और खाँसी के उपचार के लिए सरसों के तेल को गर्म कर लीजिए, उसमें अजवाइन डालकर उस तेल को नहाने से पहले अपनी नाक, छाती और शरीर पर लगाईये, इससे बंद नाक और सर्दी की समस्या में राहत मिलती है।आप रात को सोने जाने से पहले भी इस तेल का प्रयोग कर सकते है।
  6. अदरक : सर्दी और खाँसी की समस्या में अदरक एक प्रभावी उपाय है। अदरक के टुकड़े को पानी में मिलाकर उसे उबाल लें, फिर उसे छानकर एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है।रात को सोने जाने से पहले अदरक के इस चाय का सेवन करने से रात की नींद भी अच्छी होती है और जुकाम एवं खाँसी से छुटकारा भी मिलता है।इसके अलावा आप सुबह और शाम की चाय में भी अदरक का टुकड़ा डालकर लें सकते हैं। इससे भी सर्दी-खाँसी की समस्या में फर्क पड़ता है।
  7. भाँप : सर्दी और खाँसी की समस्या से बचने के लिए सबसे आसान तरीका है भाँप लेना। इस उपचार के अंतर्गत आपको सिर्फ गर्म पानी और एक तौलिए की आवश्यकता होगी। सबसे पहले एक मध्यम आकार का एक पात्र लें और उसमें पानी लेकर उबालें।जैसे ही पानी उबलने लगे, उसे आँच से उतार ले।फिर उस पात्र को एक टेबल या स्टूल पर रखें और एक कुर्सी लेकर उसके सामने बैठ जाये।उसके बाद एक बड़े तौलिए से अपने सिर और उस पानी के बर्तन को एक साथ ढक ले और दस मिनट तक उस गर्म पानी का भाँप ले। इस बात का ध्यान रखे कि इस दौरान पंखा, ए.सी या कूलर बंद रहे। इसके बाद लगभग बीस मिनट तक हवा में न जाएँ। इस प्रक्रिया से बंद नाक की समस्या और बहते नाक की समस्या तो दूर होगी ही साथ ही बलगम की समस्या में भी फर्क पड़ता है।आप चाहे तो इस प्रक्रिया में पेपरमिंट तेल का भी प्रयोग कर सकते है।भांप लेने से पहले गर्म पानी में पेपरमिंट तेल की कुछ बूंदें डालकर भांप लेने से सर्दी और खाँसी में अच्छा परिणाम मिलता है।
  8. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : सर्दी और खाँसी में सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते। तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें।अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।फिर इस काढ़े को छानकर एक कप या गिलास में डालें और उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करने से बलगम की समस्या भी खत्म हो जाती है और सर्दी में भी राहत मिलती है।
  9. लहसुन : लहसुन के तेल को लगाने से जुकाम और खाँसी में आराम मिलता है। एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो से तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल को अपनी हथेली, छाती और नाक पर अच्छे से लगायें। इससे सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होगी।
  • गुड़, काली मिर्च और जीरा : गुड़, काली मिर्च और जीरे का मिश्रण सर्दी और खाँसी की समस्या को दूर करने में मदद करता है।एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच पीसी हुई काली मिर्च, एक चम्मच पीसा हुआ जीरा और एक चम्मच गुड़ मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके उसका सेवन करने से जुकाम और सर्दी की समस्या दूर हो जाती है। यह मिश्रण छाती में जमे बलगम को निकालने के साथ सर्दी और खाँसी का भी अच्छा उपचार है।
  • मसाला चाय :सर्दी और खाँसी के लिए घर पर बने मसाला चाय बहुत ही उपयोगी है।मसाला तैयार करने के लिए एक तवे पर एक चौथाई कप धनिये का बीज, डेढ़ चम्मच जीरे का बीज, डेढ़ चम्मच सौंफ और एक चौथाई चम्मच मेथी के बीज को सूखा भून लें और फिर उसे अच्छे से पीसकर चूर्ण बना लें। उसके बाद एक जगह एक कप पानी उबालें और उसी उबलते हुए पानी में डेढ़ चम्मच वही चूर्ण डालें और साथ ही डेढ़ चम्मच मिश्री मिलाकर धीमी आँच पर तीन से चार मिनट तक रखें, उसके बाद उसमें दो चम्मच दूध मिलाकर उसे उबालें ताकि सभी मसाले अच्छे से घुल जाएँ।फिर उस चाय को छानकर पीयें।इससे सर्दी और खाँसी में बहुत राहत मिलेगी। रोजाना दिन में दो बार पीने से जुकाम और खाँसी की समस्या दूर हो जायेगी।
  • चिकेन सूप (Chicken Soup):चिकेन सूप में आवश्यक पोषक तत्व हैं जो सामान्य सर्दी और खाँसी की समस्या में राहत दिलाती है। इसमें पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant), जीवाणु से लड़ने में मदद करता है।बेहतर परिणाम के लिए घर पर ही तरह-तरह की सब्जियों से चिकेन सूप बनाकर उसमें काली मिर्च डालकर गरम-गरम पीने से सामान्य सर्दी और खाँसी जैसी समस्या से निजात पाया जा सकता है साथ ही यह आपके शरीर को तंदरुस्त भी रखता है।
  • च्यवनप्राश : जिन लोगों को हमेशा सर्दियों में जुकाम और खाँसी होती रहती है, उन्हें सुबह एक चम्मच च्यवनप्राश का सेवन जरुर करना चाहिए। च्यवनप्राश प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और जीवाणुओं से लड़ने में मदद करता है।
  • खारे पानी से कुल्ला : खाँसी चाहे सुखी हो या बलगम वाली, खारे पानी से कुल्ला करने से फर्क पड़ता है, साथ ही बंद नाक की समस्या में भी राहत मिलती है।सर्दी और खाँसी की समस्या होने पर खारे पानी से कुल्ला करने से आराम मिलता है।
  • व्यायाम या योग : व्यायाम या योगा द्वारा सर्दी और खाँसी की समस्या दूर हो सकती है।योगा में साँस को विभिन्न तरीकों से नियंत्रित करना पड़ता है। इससे न सिर्फ आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है बल्कि साँसों से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। शरीर की विभिन्न समस्याओं में योगा एक कारगर उपाय है।आप किसी अच्छे योगा विशेषज्ञ से योगा सीखकर जुकाम और खाँसी की समस्या से हमेशा के लिए निजात पा सकते है।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप सर्दी और खाँसी को दूर कर सकते है। यदि इन उपायों से भी दो दिनों में कोई फर्क न पड़े तो आप जल्दी ही किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जांच करवायें।कुछ सावधानियां बरतने से सर्दी और खाँसी की समस्या को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं, जैसे :

  • प्रदूषण और धूल से बचे।आवश्यकता पड़ने पर मास्क का प्रयोग करें।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • मद्यपान और धूम्रपान से परहेज करें।
  • ठन्डे पदार्थों का सेवन अधिक न करें।
  • ऐसे पदार्थों का सेवन करें जिसमें विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा अधिक हो।

सफेद बालों को काला करने के घरेलू उपाय

घने काले बाल हर किसी की चाहत है।परन्तु उम्र बढ़ने के साथ हमारे बाल सफेद होने लगते हैं। लेकिन आजकल केवल उम्र बढ़ने के कारण ही नहीं बल्कि असमय भी बाल सफेद हो रहें हैं। आज की भाग-दौड़ वाली जिंदगी में अनियमित खान-पान, पोषण का अभाव, तनाव, चिंता आदि के कारण भी कम उम्र में ही बाल सफेद हो रहें हैं जिससे आज का युवा वर्ग त्रस्त हैं।आज के युवा वर्ग के सम्मुख अन्य समस्याओं के साथ बालों का सफेद होना भी एक समस्या बन चुकी है।कुछ लोग इस समस्या से निजात पाने के लिए पार्लर जाते हैं तो कुछ सफेद बालों को छिपाने के लिए बाजार में बिकने वाली रसायन युक्त बालों के रंगों का प्रयोग करते हैं जो बालों के लये हानिकारक हैं।पार्लर में भी हेयर ट्रीटमेंट (Hair treatment) के नाम पर बालों का नुकसान ही करते हैं।बेहतर यही है कि बालों को सेफद करने के लिए घरेलू और प्राकृतिक नुस्खों का प्रयोग करें, इससे आपके बाल काले, घने और लम्बे होंगे और बालों का कोई नुकसान भी नहीं होगा।

असमय बाल सफेद होने के कारण

  • जैसा कि पहले ही कहा गया है कि आज के भाग-दौड़ और व्यस्त जिंदगी में बहुत से लोग हैं जो समय पर खाना नहीं खाते और अधिक समय बाहर का खाना ही खाते हैं, इससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है और शरीर में पोषण का अभाव भी हो जाता है जिसका प्रभाव हमारे शरीर के विभिन्न भागों पर पड़ता है।हमारे बाल भी इस पोषण के अभाव में सफेद हो जाते है।
  • आजकल बाजार में बिकने वाले शैम्पू और बालों के तेल में रसायन की मात्रा अधिक होती है इसलिए बहुत ज्यादा शैम्पू और तेल लगाने से भी उन रसायनों के प्रभावस्वरूप बाल सफेद हो जाते हैं।
  • आज की व्यस्तता भरी जिंदगी में तनाव ने सभी को घेर रखा है।लेकिन यही तनाव और चिंता बाल सफेद होने के कारण हैं।
  • अधिक मात्रा में धूम्रपान और मद्यपान करना भी बाल सफेद होने के कारण हैं।
  • प्रदूषण के कारण भी बाल असमय सफेद हो जाते हैं।
  • कभी-कभी आनुवंशिता भी बाल सफेद होने का कारण हैं।

सफेद बाल काले करने के घरेलू नुस्खें

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  1. मेहँदी : अपने बालों की आवश्यकतानुसार ताजी मेहँदी का लेप तैयार करें, फिर उसमें तीन चम्मच करोंदे का चूर्ण और एक चम्मच कॉफी थोड़े से पानी के साथ मिलाकर डालें और अच्छे से मिलाएं। फिर उस लेप को अपने बालों में लगाकर दो घंटे तक छोड़ दें।इसके बाद बालों को धोकर किसी अच्छे शैम्पू से दुबारा बालों को धो लें। यह बालों को रंगने का एक बहतरीन और प्राकृतिक उपाय है, साथ ही इसके निरंतर प्रयोग से बाल सफेद नहीं होंगे।

इसके अतिरिक्त आप ताजी मेहँदी और आंवला के चूर्ण को चाय के पानी में मिलाकर रातभर भीगोकर रखें। अगली सुबह उसमें ब्राह्मी का चूर्ण, भृंगराज का चूर्ण, एक अंडा, उसी अनुपात में दही और नींबू का रस मिलाएं और इससे अपने पूरे बालों और जड़ों में मालिश करें और आधे घंटे बाद अच्छे से धो लें। इससे आपके बाल घने, काले और चमकदार बनेंगे।इसके अलावा आप मेहँदी का प्रयोग कुछ इस तरह भी कर सकते हैं। ताजी मेहँदी में कुछ मेथी के दानों को पीसकर मिला लें। फिर उसमें तुलसी का रस और सुखी चाय की पत्तियों को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और उसे अपने बालों पर लगाकर दो घंटे के लिए छोड़ दें। फिर किसी अच्छे शैम्पू से अपने बालों को धो लें।ऐसा करने से भी सफेद बालों की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा।

  1. चाय : पर्याप्त मात्रा में पानी और चाय की पत्ती लें।पानी को गर्म करके उसमें चाय की पत्ती मिलाएं।फिर पानी को ठंडा करके अपने बालों में लगायें और एक घंटे तक छोड़ दें।एक घंटे बाद अपने बालों को अच्छे शैम्पू से धो लें।इस प्रयोग से बाल लम्बे समय तक घने और काले रहेंगे।
  2. लौकी : लौकी के कुछ टुकडों को सुखाकर उसे तीन दिनों तक नारियल के तेल में भीगोकर रखें।उसके बाद उस तेल को गर्म करें और उस गर्म तेल से ही बालों की जड़ों में मालिश करें, इससे बालों की खोयी हुई मेलानिन (Melanin) वापस आ जाती है और बाल चमकदार, मजबूत, घने और काले बनते हैं।
  3. बालों की जड़ों में अधिक गर्मी का प्रयोग न करें : अत्यधिक गर्मी भी बालों को नुकसान पहुँचता है। कुछ लोग खासकर लड़कियां, बालों के फैशन (Fashion) के लिए हीटिंग आयरन (Heating Iron) का प्रयोग करती हैं जिससे बाल क्षतिग्रस्त होते हैं।शुरुआत में शायद कोई फर्क महसूस न हो या आपको अच्छा भी लग सकता है लेकिन इसके निरंतर प्रयोग से आपके बाल सफेद हो सकते हैं।अतः इस बात को सुनिश्चित करें कि ऐसे किसी स्टाइलिंग उत्पाद का प्रयोग ना करें जो आपके बालों को गर्मी प्रदान करें।
  4. नींबू और आंवला :एक नींबू के रस में चार चम्मच आँवले का चूर्ण और थोड़ा-सा पानी मिलाईये और इसे अपने बालों के जड़ों में लगाकर बीस से पच्चीस मिनट तक छोड़ दें।फिर निर्धारित अवधि के बाद अच्छे से अपने बाल धो लें।इस बात का ध्यान रहें कि उसी दिन आप शैम्पू न करें।हफ्ते में चार दिन इसका प्रयोग करने से कुछ ही महीनों में आपके सफेद बाल काले हो जायेंगे साथ ही बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा।
  5. शुद्ध देशी घी : शुद्ध देशी घी से बालों की जड़ों में मालिश करने से सफेद बालों से छुटकारा मिलता है और बाल भी घने और मजबूत बनते हैं। हफ्ते में दो दिन शुद्ध देशी घी का प्रयोग अपने बालों पर करें।
  6. तिल का तेल : एक जगह लगभग 75 मिली लीटर तिल का तेल लेकर उसमें लगभग 25 मिली लीटर लौकी का रस मिलाएं और थोड़ी देर के लिए धूप में रखें।रात को सोने जाने से पहले इस तेल को अपने बालों में लगाकर हलके हाथों से मालिश करें और सुबह अच्छे से बाल धो लें।इस तेल का प्रयोग करने से सफेद बाल काले और लम्बे हो जाते हैं।
  7. प्याज : प्याज बालों के लिए बहुत उपयोगी है।दो प्याज अच्छे से पीसकर एक पेस्ट बना लें और उसका प्रयोग अपने बालों पर करें।लगाने के एक घंटे बाद बालों को अच्छे शैम्पू से धो लें।इसका निरंतर एक महीने तक प्रयोग करने से सफेद बाल से निजात पाया जा सकता है और बाल भी घने और मजबूत बनते हैं।
  8. नारियल का तेल : नारियल का तेल बालों के लिए बहुत उपयोगी है और यदि उसमें अश्वगंधा और भृंगराज मिला दी जाए तब इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। बालों की आवश्यकतानुसार नारियल का तेल लें और उसमें थोड़ी-सी मात्रा में भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें मिलाकर एक पेस्ट बना लें।अब अपने बालों की जड़ों में पंद्रह मिनट तक उसी पेस्ट से मालिश करें।तीस से चालीस मिनट बाद अच्छे से बाल और सिर धो लें।इस प्रयोग से आपके बाल काले होने लगेंगे।
  • आंवला : बालों को कालाकरने का एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय है आंवला। सबसे पहले एक आँवले को पानी में अच्छी तरह से उबाल लें। उसके बाद पानी से आँवले को निकालकर उसे पीस लें। उसी पीसे हुए आँवले को अपने बालों की जड़ों में लगायें और लगभग तीस मिनट तक लगा रहने दें और फिर अच्छे से अपने बाल धो लें।महीने में चार बार इसका प्रयोग करने से आपके सफेद बाल प्राकृतिक रूप से काले, घने और चमकदारहो जायेंगे।
  1. कलौंजी : सफेद बालों को काला करने के लिए कलौंजी भी लाभदायक है। एक लीटर पानी में पचास ग्राम कलौंजी को अच्छे तरह से उबाल लें और फिर उस पानी को छानकर ठंडा कर लें और उसी पानी से अपने बाल धोएं। लगभग हर दूसरे दिन ऐसा करने से कुछ महीनों के अन्दर ही आपके बाल काले, घने और लम्बे हो जायेंगे।
  2. अदरक : अदरक बालों के लिए लाभदायक है।अपने बालों के आवश्यकतानुसार अदरक लें और उसे कद्दूकस करके उसमें शुद्ध शहद मिलाकर उसका प्रयोग अपने बालों पर करें। हफ्ते में दो बार इसका प्रयोग करने से बालों का पकना कम हो जायेगा।
  • टमाटर : टमाटर को हाथों से मसलकर उसका रस निकाल लें, अब उसमें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दही, नींबू का रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं और उसका प्रयोग अपने बालों पर करें। इस प्रयोग से बाल घने और काले बनेंगे।

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उपर्युक्त घरेलू और प्राकृतिक नुस्खों को अपनाकर आप सफेद बालों की समस्या से निजात पा सकते हैं।असमय या कम उम्र में होने वाले सफेद बाल यदि इन नुस्खों के प्रयोग से भी काले न हों, तो आप किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लें और चिकित्सा करवाएं। खुद की देखभाल का जिम्मा हमी पर है, इसलिए यदि कुछ बातों पर ध्यान देंगे तो हम खुद को आकर्षक और खुबसूरत बना सकेंगे।बालों का मसला हों तो इन बातों का ध्यान रखन आवश्यक हैं, जैसे :

  • अत्यधिक तेल, मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए।
  • बाहर का खाने से परहेज करें, जितना हो सके घर का बना खाना ही खाएं।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • शैम्पू के बाद कंडीशनर (Conditioner) का प्रयोग जरुर करें, ध्यान रहें कंडीशनर सिर्फ बालों पर ही लगायें, जड़ों में नहीं।
  • तनाव और चिंता कम करें।
  • अपने सिर और बालों को हमेशा साफ रखें, धूल और गंदगी जमा न होने दें।
  • गीले बालों में कंघी कभी न करें।
  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें। फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें।
  • रसायन युक्त शैम्पू और तेल से बचें।
  • दिनभर में सात से आठ गिलास पानी जरुर पीयें।

वजन बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय

आज एक ओर जहाँ बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं वहीँ दूसरी ओर ऐसे भी लोग हैं जो दुबलेपन या वजन कम होने की समस्या से जूझ रहें हैं। चाहे वजन ज्यादा हो या कम, लेकिन ये दोनों ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनता हैं।वजन कम होने का अर्थ है शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव होना जो आपके पारिवारिक और सामाजिक जीवन को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं।वजन कम करने की तरह ही वजन बढ़ाना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।वजन बढ़ाने के लिए ऐसे आहार लेने चाहिए जिसमें सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), प्रोटीन (Protein), फैट (Fat) और मिनरल (Mineral) हो। कुछ लोग सोचते हैं कि तला और वसायुक्त आहार लेने से वजन आसानी से बड़जायेगा, लेकिन वास्तव में वजन बढ़ाने के लिए सही आहार और व्यायाम की आवश्यकता होती हैं।

दुबलेपन के कारण :

  • ज्यादा उपवास करने से पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और खाने की इच्छा नष्ट हो जाती है।
  • पौष्टिक आहार ग्रहण न करने से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव हो जाता है जिसके कारण वजन घटने लगता है।
  • खाने के प्रति अरुचि होने से सही और उपयुक्त खाद्य शरीर को नहीं मिलता जिससे वजन कम हो जाता है।
  • मानसिक एवं भावनात्मक तनाव और चिंता की वजह से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है।
  • व्यायाम न करना भी दुबलेपन का कारण हो सकता है।
  • कई बीमारियाँ भी दुबलेपन का कारण हो सकती हैं, जैसे, खून की कमी (Anaemia), टी.बी (Tuberculosis), हायपर थाइरोइड (Hyper Thyroid), क्रोनिक डायरिया(Chronic Diarrhoea), मधुमेह (Diabetes)आदि।

दुबलेपन से निजात पाने और वजन बढ़ाने के लिए घरेलू नुस्खें :

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  1. सूखे मेवे : सूखे मेवे को कैलोरी (Calorie), वसा (Fat), कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) और फाइबर (Fibre) का अच्छा स्रोत माना जाता हैं। इसलिए दुबलेपन के त्रस्त लोगों को अपने आहर में किशमिश, बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, अंजीर जैसे सूखे मेवे को शामिल करना चाहिए।
  2. चीज़ (Cheese) : चीज़ में भरपूर मात्रा में वसा (Fat) होता है और ये वजन बढ़ानेके लिए उपयोगी है।आप अपने खाने में चीज़ का प्रयोग कर सकते हैं, इससे आपका खाना भी स्वादिष्ट होगा और चीज़ में पायी जाने वाली कैलोरी (Calorie), प्रोटीन (Protein), कैल्शियम (Calcium) से आपका वजन भी बढ़ेगा तथा आपको दुबलेपन की समस्या से छुटकारा भी मिल जायेगा।
  3. पीनट बटर (Peanut Butter) : पीनट बटर प्रोटीन (Protein) और वसा (Fat) का एक समृद्ध स्रोत है तथा उन लोगों के लिए उपयुक्त हैं जो अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं साथ ही इसमें पाये जाने वाले आवश्यक पोषक तत्व ह्रदय के लिए के अच्छा होता है।
  4. आलू : आलू एक सामान्य सब्जी, लेकिन यह कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), स्टार्च (Starch) और फाइबर (Fibre)का समृद्ध स्रोत है तथा वजन बढ़ाने में सहायक है। अतः अपने खाद्य में आलू को शामिल करें क्योंकि यह वजन बढ़ाने का एक आसान उपाय है।
  5. पास्ता (Pasta) : पास्ता एक स्वादिष्ट और कैलोरी (Calorie) से भरा हुआ आहार है। यह कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) का भी अच्छा स्रोत है।एक कप मैकरोनी (Macaroni) में लगभग 390 कैलोरीज़ (Calories) होती है।आप पास्ता में चीज़, तरह-तरह की सब्जियां डालकर भी खा सकते हैं।यह वजन बढ़ाने में सहायक होता है।
  6. मक्खन (Butter) :मक्खन या बटर में भरपूर मात्रा में वसा (Fat) है जो वजन बढ़ाने में सहायक है।आप भोजन बनाने में बटर का प्रयोग कर सकते है, ब्रेड या तले हुए पदार्थों के साथ भी बटर का सेवन कर सकते है।
  7. फल : आम, पका हुआ पपीता, केला, अनानस, खरबूजा, अनार, तरबूजजैसे फल वजन बढ़ाने में सहायक हैं।इन फलों में प्राकृतिक शर्करा होती है जो ऊर्जा का अच्छा स्रोत है।आप सलाद में, मिठाई में या साबुत फलों का सेवन भी कर सकते हैं।इसके अतिरिक्त दूध के साथ केले व आम का शेक (Shake) बनाकर भी पी सकते हैं।
  8. अंडे : अंडे कैलोरी (Calorie) से समृद्ध होते हैं तथा इनमें प्रोटीन (Protein) और पोषक तत्व की प्रचुर मात्रा होती हैं।एक अंडे में लगभग 70 कैलोरीज़ (Calories) तथा 5 ग्राम वसा (Fat) होती है। अंडा ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega 3 fatty acid) से भी समृद्ध है और इसमें अच्छे कोलेस्ट्रोल (Good Cholesterol) की मात्रा अधिक होती है।अतः रोजाना सुबह नाश्ते में एक अंडा खाने से तेजी से वजन बढ़ता है।
  9. मांस : मांस प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है।इसे पकाकर या भुनकर खाने से वजन तेजी से बढ़ता है।आप बिना चर्बी के लाल मांस (Red Meat) का भी सेवन कर सकते है।
  10. बीन्स (Beans) : यदि आप शाकाहारी हैतो शरीर में प्रोटीन (Protein) की मात्रा बढ़ाने के लिए आप बीन्स का सेवन कर सकते है। एक कटोरी बीन्स में 300 कैलोरी (Calorie) होती हैं।बीन्स बहुत ही पौष्टिक सब्जी है जो आपको स्वस्थ रखने के साथ आपके वजन को भी बढ़ाता है।
  11. अदरक : अदरक पाचन तंत्र में गर्मी पैदा करके शरीर के भीतर खून के बहाव को तीव्र करता है जिससे भूख बढ़ जाती है।इसलिए अदरक वजन बढ़ाने का एक कारगर उपाय है। अदरक का रस बहुत ही लाभदायक है। आप रोजाना अदरक की बनी चाय भी पी सकते हैं या अदरक का एक टुकड़ा मुँह में रखकर उसका रस भी चूस सकते है। ऐसा करने से आपकी खाने की इच्छा तीव्र होगी।
  12. अवोकाडो (Avocado) : यह एक बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी होने के साथ वसा (Fat) का एक अच्छा स्रोत भी है।इसमें अधिक मात्रा में पोटैशियम (Potassium), फोलिक एसिड (Folic acid) और विटामिन ई (Vitamin E) पाया जाता हैं।आप इस सब्जी को सलाद (Salad) के साथ, मांस के साथ या घर पर बने पिज्ज़ा के साथ भी ले सकते हैं।
  13. दही :दही में प्रोटीन (Protein) की मात्रा अधिक होती है। वजन बढ़ाने के लिए आप मलाई युक्त दही का सेवन कर सकते है या दही में विभिन्न फलों को मिलाकर भी उसका सेवन कर सकते है।दुबले-पतले लोगों को अपने रोज के खाद्य दही को शामिल करना चाहिए।
  14. सोयाबीन्स (Soybeans) :सोयाबीन्स में भरपूर प्रोटीन (Protein), कैल्शियम (Calcium), फाइबर (Fibre), कैलोरीज़ (Calories), आयरन (Iron), विटामिन बी (Vitamin B), एमिनो एसिड (Amino acid) पाया जाता है। वैसे सोयाबीन्स वजन घटाने और बढ़ाने, दोनों ही क्षेत्रों में फायदेमंद हैं।
  15. राजमा : राजमा में प्रोटीन (Protein) की मात्रा अधिक होती है, इसलिए जो लोग शाकाहारी हैं वे मांस-मछली-अंडे की जगह राजमा का सेवन भी कर सकते है। राजमा के सेवन से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति होती हैं और यह वजन बढ़ाने में भी सहायक होता है।
  16. पनीर : दूध के उत्पादों में से पनीर भी एक है जिसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन (Protein) और कुछ मात्रा में कैलोरी (Calorie) भी होती है।पनीर के सेवन से भी दुबलेपन की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
  • दाल : अपने रोजाना के खाद्य में दाल को शामिल करें। दाल में पाई जाने वाली प्रोटीन (Protein), कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), फाइबर (Fibre) वजन को संतुलित रखता है। ये ज्यादा वजन वाले और कम वजन वाले लोगों के लिए लाभदायक है।
  1. नारियल का दूध : नारियल का दूध एक तरफ जायके को बढ़ाकर भोजन को स्वादिष्ट बनाता है तो दूसरी तरफ इसमें भरपूर मात्रा में पाई जाने वाली कैलोरी (Calorie)वजन को बढ़ाने में सहायक होता है।
  2. दूध में शहद : शहद वजन को संतुलित रखता है।यदि आपका वजन अधिक है तो तो शहद उसे कम करता है और यदि कम है तो उसे बढ़ाता है। रोज रात को सोने जाने से पहले या नाश्ते में दूध में शहद मिलाकर पीने से वजन बढ़ता है साथ ही इससे पाचन तंत्र भी स्वस्थ रहता है।
  • अश्वगंधा और शतावरी :अश्वगंधा और शतावरी वजन बढ़ाने का आयुर्वेदिक उपाय हैं. अश्वगंधा और शतावरी के चूर्ण को मिलाकर, उसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिला लीजिए। रात को सोने जाने से पहले या व्यायाम के बाद पहले एक चम्मच इस चूर्ण को मुँह में डालें फिर उसे अच्छे से खाने के बाद एक गिलास गर्म दूध पी लें। रोजाना इसका सेवन करने से एक महीने में ही शरीर का रूप-रंग और डील-डौल बदल जायेगा।
  • च्यवनप्राश : च्यवनप्राश स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा है ही साथ ही यह वजन बढ़ाने में भी सहायक है।सुबह-शाम दूध के साथ च्यवनप्राश का सेवन करना दुबले-पतले लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद है।
  • व्यायाम और योग क्रियाएं : व्यायाम सिर्फ वजन घटाता ही नहीं है बल्कि बढ़ाता है।दुबले-पतले लोगों को वजन बढ़ाने के लिए रोजाना व्यायाम करना चाहिएक्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। यदि आप दुबलेपन की समस्या से त्रस्त है तो आप पुश अप, रोल डाउन जैसे व्यायाम कर सकते हैं।योग क्रियायों के द्वारा भी वजन बढ़ाया जा सकता हैं। योग से शारीरिक और मानसिक विकास होता हैं।सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, श्वासन योग क्रियायों द्वारा भी दुबलेपन की समस्या से निजात पा सकते है।व्यायाम और योग आपकी भूख को बढ़ाता है और आपको स्वस्थ रखता है।अतः वजन बढ़ाने के लिए रोजाना व्यायाम करना जरुरी है।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को आजमाकर आप अपना वजन बढ़ा सकते हैं।यदि इन नुस्खों का प्रयोग करके भी कोई फर्क नहीं पड़ता या किसी बीमारी के कारण वजन घटता है, तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लें।किसी अच्छे आहार विशेषज्ञ (Dietician) द्वारा बताये गए आहार चार्ट (Diet Chart) के अनुसार ही अपना आहार ग्रहण करें।कुछ सावधानियों को बरतने से दुबलेपन की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी, जैसे :

  • किसी भी प्रकार के तनाव या चिंता से दूर रहना चाहिए।
  • पर्याप्त नींद शरीर के लिए आवश्यक है. दिन में कम से कम 7-8 घंटे तक सोना चाहिए।
  • पौष्टिक आहार लेना चाहिए।
  • कोई बीमारी होने पर तुरंत उसका इलाज करवाना चाहिए।

रुसी हटाने के घरेलू उपचार

रुसी सिर की एक आम समस्या है जो जीवाणु और फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection) के कारण होती है । मलास्सेज़िया (Malassezia) नामक फंगस (Fungus) के कारण रुसी की समस्या उत्पन्न होती है । रुसी एक ऐसी समस्या है जो बालों की जड़ों में सफेद रंग की एक परत को उत्पन्न करता है । यह परत मृत कोशिकाएं होती हैं जिससे सिर में खुजली होती है । सिर को निरंतर खुजलाने से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती है और बाल झड़ने लगते हैं । रुसी दो तरह के होते हैं : एक जब सिर की त्वचा रुखी होती है और दूसरा जब सिर की त्वचा तैलीय होती है । रुसी की समस्या बहुतों को होती हैं । रुसी होने पर वे झड़कर कपड़ों पर भी गिरते हैं जिससे व्यक्ति को शर्मिंदगी होती है साथ ही यह उसके व्यक्तित्व को भी प्रभावित करता है । रुसी के कारण कुछ अन्य समस्या भी उत्पन्न होते हैं, जैसे, बालों का पतला होना, अधिक खुजलाने से बालों की जड़ों में दाने पड़ना, मुंहासे आदि । रुसी होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • हमारे सिर की त्वचा में नई कोशिकाएं निरंतर उत्पन्न होती रहती है और यदि सिर की त्वचा को साफ न रख जाये तब वहा मृत कोशिकाएं इकट्ठी हो जाती है जो रुसी का रूप ले लेती है ।
  • आज के फैशन (Fashion) के अनुरूप कई लोग, खासकर युवा पीढ़ी अपने बालों में तरह-तरह के प्रयोग करते हैं जिसके कारण रुसी की समस्या उत्पन्न होती है । जैसे, हेयर स्प्रे (Hair spray) का प्रयोग, रंगों का प्रयोग, हेयर स्ट्रेटनिंग (Hair straightning), हेयर ड्रायर (Hair dryer) का अत्यधिक प्रयोग आदि ।
  • उपयुक्त खान-पान न होने के कारण हमारा पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और उसका प्रभाव हमारे शरीर के विभिन्न भागों पर पड़ता है । बालों पर भी उसके प्रभाव को देखा जा सकता है और इसके कारण रुसी की समस्या उत्पन्न हो सकती है ।
  • अत्यधिक चिंता और एक्जिमा (Eczema) एवं त्वचा संबंधी बीमारी के कारण रुसी की समस्या उत्पन्न हो सकती है ।

रुसी हटाने के घरेलू नुस्खें

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  1. धनिया : धनिया में बालों के लिए आवश्यक प्रोटीन (Protein) और विटामिन (Vitamin) होता है जो न केवल बालों को गिरने से बचाता है बल्कि नए बालों की वृद्धि में मदद करता है । ताजे धनिया के पत्तों को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और फिर उसी लेप को अपने सिर और बालों में लगायें । लगभग पैंतालीस मिनट बाद किसी अच्छे शैम्पू (Shampoo) से बालों को धो लें । इसके निरंतर प्रयोग से रुसी की समस्या भी खत्म हो जायेगी और बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा ।
  2. प्याज : प्याज में मौजूद सल्फर (Sulphur) सिर में रक्त के प्रवाह को तेज करता है बालों के परिमाण के अनुरूप प्याज लेकर उसे अच्छे से पीसकर रस निकाल लें । उसी रस को अपने सिर और बालों में लगाकर सूखने तक इंतजार करें, फिर किसी अच्छे शैम्पू (Shampoo) से बालों को धो लें । इससे रुसी की समस्या भी नहीं रहेगी और बाल भी मजबूत होंगे ।
  3. नीम : जीवाणु विरोधक नीम रुसी की समस्या से निजात दिलाने में कारगर है साथ ही यह बालों का झड़ना भी कम करता है । चार कप पानी में नीम के 10 से 15 पत्तों को उबालें । फिर पानी को ठंडा करके छान लें । उसी पानी से अपने बालों को धोये । हफ्ते में दो से तीन बार इस उपचार को करने से फर्क दिखेगा ।
  4. जैतून का तेल : रुखी सिर की त्वचा के उपचार के लिए जैतून के तेल का प्रयोग किया जा सकता है । यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर (Moisturizer) की तरह है जो सिर की त्वचा को नमी प्रदान करता है । पहले जैतून के तेल को गर्म कर लें, फिर उसी गर्म तेल से अपने सिर की मालिश करें । फिर अपने सिर को गर्म तौलिए से अच्छे से ढक लें । पैंतालीस मिनट बाद अपने बालों में शैम्पू (Shampoo) कर लें और कंडीशनर (Conditioner) लगा लें । इस उपचार को निरंतर करने से सिर की त्वचा में नमी बनी रहेगी और रुसी की समस्या भी नहीं रहेगी एवं बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा ।
  5. बेकिंग सोडा (Baking soda) : बेकिंग सोडा मृत कोशिकाओं को हटाता है और सिर की त्वचा से अत्यधिक तेल को निकाल देता है । यह उस फंगस (Fungus) को भी उत्पन्न नहीं होने देता जो रुसी का कारण है । पहले अपने बालों को थोड़ा गीला कर लें और फिर अपने बालों की जड़ों में बेकिंग सोडा लगायें । पाँच मिनट बाद अपने बालों को गुनगुने पानी से अच्छे से धो लें । इस उपचार के बाद शैम्पू (Shampoo) न करें । निरंतर एक महीने तक और हफ्ते में एक बार इस उपचार को करने से रुसी की समस्या दूर हो जायेगी ।
  6. सेब का सिरका : सेब का सिरका रुसी से छुटकारा दिलाने में कारगर है । यह प्राकृतिक रूप से बालों को साफ करके रोमछिद्रों को खोलने में मदद करता है । दो चम्मच सेब का सिरका लें और उसमें बराबर मात्रा में पानी और टी ट्री आयल (Tea tree oil) की 15 से 20 बूंदे मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें । इसी मिश्रण को अपने सिर पर लगाकर हलके हाथों से मालिश करें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करें । इसके निरंतर प्रयोग से कुछ ही दिनों में रुसी की समस्या दूर हो जायेगी और बाल झड़ना भी कम हो जायेगा ।
  7. नारियल का तेल : नारियल का तेल अपने फंगस (Fungus) विरोधी गुण के कारण रुसी को दूर करने में मदद करता है । यह सिर की त्वचा को पोषण देता है और खुजली से राहत दिलाता है । दो से तीन चम्मच नारियल का तेल लेकर उसमें एक से डेढ़ चम्मच नींबू का रस मिलायें । उस मिश्रण को अपने बालों की जड़ों में लगाकर हलके हाथों से मालिश करें । करीबन बीस मिनट बाद अपने बालों को धो लें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करें । कुछ ही दिनों में रुसी भी दूर हो जायेगी और बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा ।
  8. दही : बालों के लिए दही बहुत ही उपयोगी है । यह रुसी की समस्या को दूर करने में भी कारगर है । दही को अच्छे से फेंट लें, फिर उसे अपने बालों और उसके जड़ों पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें । सूखने के बाद पहले पानी से बालों को धो लें फिर बालों में शैम्पू (Shampoo) कर लें । इसके अलावा आप दही में मेथी मिलाकर भी अपने बालों में लगा सकते हैं । रातभर मेथी के दानों को पानी में भीगोकर रखें । सुबह उन्हीं मेथी के दानों को पीस लें फिर उन्हें दही के साथ मिलाकर एक लेप तैयार कर लें । फिर उसी लेप को अपने बालों और उसके जड़ों में लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें । निर्धारित समय के बाद अपने बालों को पहले पानी से धो लें फिर बालों में शैम्पू कर लें । इन दोनों तरीकों से आप दही का इस्तेमाल कर सकते हैं । इसके निरंतर प्रयोग से रुसी की समस्या दूर हो जायेगी, बाल झड़ने कम हो जायेंगे और साथ ही आपके बाल आकर्षक दिखेंगे ।
  9. मेथी : मेथी के बीजों में प्रोटीन (Protein) पाया जाता है जो बालों की जड़ों में पोषण पहुँचाता है । मेथी को बीजों को रातभर पानी में भीगोकर रखें । सुबह उन बीजों को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और उसी लेप को अपने सिर पर अच्छे से लगा लें । एक घंटे बाद अपने सिर और बालों को शैम्पू (Shampoo) से अच्छे-से धो लें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में असर दिखने लगेगा । इसके अलावा आप मेथी के बीजों को नारियल के तेल में भुन लें । फिर उस तेल को छानकर मेथी को अलग कर लें और उसी तेल को अपने बालों की जड़ों में लगाकर धीरे-धीरे मालिश करें । एक महीने तक इसके निरंतर प्रयोग से रुसी की समस्या दूर हो जायेगी और बाल झड़ने कम हो जायेंगे ।
  10. नींबू : नींबू रुसी के लिए रामबाण औषधि है । दो से तीन चम्मच नींबू के रस में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर अपने बालों की जड़ों में लगायें । इसके अलावा आप एक कप अरंडी के तेल या बादाम के तेल में दो नींबू का रस मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके एक बोतल में रख दें । रात को सोने जाने से पहले उसी मिश्रण से अपने सिर पर मालिश करें । सुबह अपने बालों को अच्छे से धोने के बाद शैम्पू (Shampoo) कर लें । इससे रुसी की समस्या तो दूर होगी ही साथ ही बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा और बाल आकर्षक दिखने लगेंगे ।
  11. एलोवेरा (Aloe Vera) : बालों की समस्या के लिए एलोवेरा बहुत ही कारगर है । एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसके अन्दर के रस को निकालकर एक छोटी-सी कटोरी में रख लें । फिर उसी रस को बालों की जड़ों में लगाकर अच्छे से मालिश करें । यह बालों की जड़ों में बंद हुए छिद्रों को खोल देता है । इसके निरंतर प्रयोग से रुसी की दूर हो जायेगी और बाल झड़ने भी कम हो जायेंगे ।

Aloe-Vera-leaves

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर रुसी की समस्या से निजात पाया जा सकता है । यदि किसी बीमारी के परिणामस्वरूप रुसी की समस्या हो तो किसी त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाएं । रुसी से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक हैं, जैसे :

  • रुसी होने पर किसी अच्छे रुसी विरोधी शैम्पू (Shampoo) का प्रयोग करें । अपने सिर की त्वचा को हमेशा साफ रखें ।
  • अपने बालों को अच्छे से कंघी करें ताकि रुसी बालों से झड़कर गिर जाये ।
  • अधिक मात्रा में पानी पीयें जिससे शरीर से टोक्सिन (Toxin) बाहर निकल जाये ।
  • विटामिन बी (Vitamin B), जिंक (Zinc) और ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty acid) समृद्ध आहार का सेवन करें । अपने खाद्य में हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें. बाहर के खाने से परहेज करें ।
  • मानसिक चिंता और तनाव से दूर रहें । पूरी नींद ले, कम-से-कम आठ घंटों तक सोये ।
  • बाहर निकलते समय अपने सिर को ढक लें ताकि सिर की त्वचा और बालों को प्रदूषण, धूप और धूल से बचाया जा सकें ।
  • अपने बालों में रासायनिक तत्वों का प्रयोग न करें ।
  • दूसरों की कंघी का प्रयोग न करें और न ही अपनी कंघी दूसरों को दें ।
  • शैम्पू (Shampoo) करने के बाद कंडीशनर (Conditioner) का प्रयोग करें ।
  • गीले बालों को न ही कंघी करें और न ही बांधकर रखें ।

मोटापा घटाने के घरेलू उपाय

मोटापा एक ऐसी बीमारी है जो स्त्री, पुरुष व बच्चे, किसी को भी हो सकती है। मोटापे के कारण व्यक्ति की सुन्दरता प्रभावित होती है।ऐसे बहुत से लोग हैं जो मोटापे की समस्या से त्रस्त है।मोटापे के कारण लोगों को चलने, साँस लेने और बैठने में परेशानी होती है।शरीर में दो तरह की वसा कोशिकाएं होती हैं, सफेद वसा (White Fat) और भूरी वसा (Brown Fat)।सफेद वसा कोशिकाएं शरीर में अतिरिक्त कैलोरी (Calorie) को जमा रखती हैं जबकिभूरी वसा होर्मोन (Hormone) और जींस (Genes) की क्रियाशीलता से गर्मी उत्पन्न करके वसा (Fat) को जलाकर उसे ऊर्जा (Energy) के रूप में परिवर्तित कर देती है।इसलिए मोटापा कम करने के लिए शरीर में भूरी वसा की मात्रा को बढ़ाना चाहिए।मोटापे को विभिन्न बीमारियों का जनक माना जाता है, जैसे, दिल की बीमारी, जोड़ों में दर्द, गठिया रोग, मधुमेह, रक्तचाप, दमा आदि।

मोटापे के कारण

  • मोटापे का कारण है फास्टफूड (Fast food), चॉकलेट (chocolate), आइसक्रीम (Ice cream) , कोल्डड्रिंक (Cold drink), मद्दपान (Alcohol), अधिक चर्बीयुक्त आहार आदि का सेवन करना।
  • व्यायाम न करना, परिश्रम न करना भी मोटापे का कारण है।शारीरिक क्रियाएं सही ढंग से न होने पर शरीर में चर्बी जमा हो जाती है, जो मोटापे का लक्षण है।
  • वंशानुगतकारणसेभी कुछ लोग मोटे होते हैं।
  • कुछ लोग तनाव से राहत पाने के लिए भूख न लगने पर भी खाना खाते रहते है, जिससे वजन बढ़ जाता है।
  • कभी-कभी स्टेरॉयड (Steroid), नींद की गोली (Sleeping Pills) जैसी दवाइयों के प्रभावस्वरूप भी मोटापे की समस्या उत्पन्न होती है।

मोटापा कम करने के घरेलू नुस्खें

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  1. तेज हरी मिर्च : तेज हरी मिर्च खाने से शरीर की मेटाबोलिक (Metabolic) क्रियाशीलता बढ़ती है और शरीर में जमी चर्बी घटती है।तेज मिर्च में कैप्सिनोइड्स पाया जाता है जो ब्राउन फैट (Brown Fat) या भूरी वसा उत्पन्न करने में सहायक होता है। भूरी वसा के उत्पन्न होने से मोटापा कम होता है।
  2. हल्दी : हल्दी के कई गुणों में से एक गुण यह भी है कि यह शरीर के वसा (Fat) को जलाने का काम करती है।हल्दी शरीर में वसा को पनपने नहीं देती, अतः मोटापा कम करने के लिए भोजन में इसका प्रयोग आवश्यक है।
  3. पुदीना : पुदीने के पत्तों से बनी चाय पीकर वजन घटाया जा सकता है। पुदीने से हाजमा सही रहता है और यह वसा (Fat) को कम करने में मदद करती है।इसका एक और गुण यह भी है कि यदि कुछ भी खाने से पहले पुदीने के पत्तों को सूंघा जाये तो इससे भूख कम हो जाती है और कम खाने से वजन भी कम होता है।
  4. खाने से पहले पानी : पानी वजन घटाने में सहायक होता है। पानी पीने से 1-2 घंटों के अन्दर 24%-30% कीमेटाबोलिज्म (Metabolism) में वृद्धि होती है, जिससे कैलोरीज़ (Calories) घटता है।खाना खाने से करीब आधा घंटा पहले पानी पीने से कैलोरीज की मात्रा कम होती है, खाना अच्छे से पचता है, व्यक्ति को भूख कम लगती है जिसके कारण वो कम खाता है और वजन भी घटता है।
  5. सेब : सेबभूरी वसा ( Brown Fat) के उत्पादन में सहायक होता है और शरीर से अतिरिक्त चर्बी को दूर रखता है।दिन में एक या दो सेब खाने से वजन घटता है।
  6. सुबह का नाश्ता कभी न छोड़े : मोटापा कम करने के लिए सुबह के नाश्ते को कभी न छोड़े, ऐसा करने से शरीर को काफी नुक्सान पहुँचता है और साथ ही वजन भी बढ़ता है।नाश्ता न करने पर आपका दिमाग प्राकृतिक रूप से ऐसे भोजन की तरफ आकर्षित होता है जो कैलोरी(Calorie) से भरा होता है, इससे न केवल स्वास्थ्य भी खराब होता है बल्कि वजन भी बढ़ता है।
  7. ग्रीन टी : ग्रीन टी के सेवन से वजन घटता है और मोटापा कम होता है।ग्रीन टी में थोड़ी-सी मात्रा में कैफीन (Caffeine) होती है जिससे मेटाबोलिज्म (Metabolism) में वृद्धि होती है।इसके अतिरिक्त इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स (Anti-Oxidants) कैफीन के साथ काम करके शरीर की वसा (Fat) को जलाने मेंमदद करता है।इस बात का ध्यान रखें कि इसमें चीनी और कैलोरी युक्त अन्य उत्पाद न मिलायें।
  8. कॉफी :बिना चीनी, दूध या कैलोरी युक्त अन्य उत्पाद के कॉफी (Coffee) का सेवन फायदेमंद होता है। कॉफी में मौजूद कैफीन (Caffeine) से शरीर का मेटाबोलिज्म (Metabolism) काफी हद तक बढ़ जाता है और इससे शरीर की वसा (Fat) जल जाती है।
  9. अतिरिक्त मात्रा में चीनी का सेवन न करें : खानपान में अतिरिक्त चीनी का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।अतिरिक्त चीनी के सेवन से मोटापे के अलावा मधुमेह तथा ह्रदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।यदि आप वजन घटना चाहते हैं तो अतिरिक्त चीनी का सेवन बंद कर दे।
  • भरपूर मात्रा में फल और सब्जियों का सेवन : वजन घटाने के लिए पर्याप्त मात्रा में फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इनमें कैलोरी (Calorie) की मात्रा कम होती है और ये आमतौर पर फाइबर (Fiber) से भरपूर होती हैं, जो वजन घटाने में सहायक होते हैं।
  1. जामुन : जामुन एंटी ऑक्सीडेंट्स (Anti Oxidants) से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा होता ही है साथ ही यह फैट कटर (Fat cutter) भी है अर्थात इसके सेवन से चर्बी काफी हद तक कम हो जाती है।जामुनशरीर की चर्बी की कोशिकाओं में मौजूद जींस (Genes) की कार्यशीलता को प्रभावित करता है जिससे वजन नहीं बढ़ता।
  • नींबू पानी : हर सुबह उठकर एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस मिलाकर एक घोल तैयार करें और उसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर उसका सेवन करें।नींबू के औषधीय गुण के कारण वजन कम होगा और मोटापे की समस्या भी नहीं रहेगी।
  1. दिनचर्या : यदि आप मोटापे की समस्या से त्रस्त हैं तो आपके लिए यह जरुरी है कि आप अपनी दिनचर्या में बदलाव लायें।हर सुबह जल्दी उठकर लगभग पैंतालीस मिनट तकबाहर टहलने के लिए जायें या फिर आधा घंटा दौड़े, ऐसा करने से आपकी कैलोरी घटेगी और आपका मोटापा भी कम होगा। घर लौटने पर एक से दो गिलास पानी पिये फिर आधे घंटे बाद नाश्ता करें।ध्यान रहें नाश्ते में अधिक कैलोरी वाले खाद्य का सेवन न करें, और नाश्ते में केला छोड़कर अन्य फल जरुर खायें। ज्यादा पेट भरकर नाश्ता न करें. आप अपना खाद्य एक-दो घंटें के अन्तराल में लेते रहियें। दोपहर के भोजन के साथ सलाद जरुर लें।सलाद भोजन को पचाने में मदद करता है और वजन भी कम करता है।शाम को बहुत अधिक कुछ न खायें।रात का खाना जल्दी खायें, कोशिश करें कि लगभग रात के नौ बजे के भीतर आप अपना रात का खाना खा लें, और खाने के लगभग तीन घंटे के बाद आप सोने जाएँ, ऐसा करने से आपका खाना अच्छे से पचेगा।
  2. व्यायाम करें :व्यायाम करने से पसीना होता है जिससे शरीर का फैट कम होता है और मोटापा की समस्या से निजात पाया जा सकता है।आप जिम या व्यायाम केंद्र जाकर भी व्यायाम कर सकते है, अथवा घर पर भी व्यायाम कर सकते हैं।सेतुबंध, भेकासन, धनुरासन, उत्तानपदासन, सूर्य नमस्कार जैसी योग क्रियाएं करके आप अपना मोटापा कम कर सकते हैं।
  • मशरूम : मशरूम मोटापा कम करने का एक प्रभावी उपाय है। मशरूम में अधिक मात्रा में पानी और प्रोटीन होता है जो वजन को कम करता है।आप मशरूम की सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं या मशरूम का रस निकालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं।
  1. पत्तागोभी : पत्तागोभी वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।आप पत्तागोभी का सूप बनाकर भी उसका सेवन कर सकते हैं या पत्तागोभी की सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं अथवा इसे सलाद में भी शामिल कर सकते है।
  2. पपीता :पपीता अतिरिक्त चर्बी को कम करता है। नियमित रूप से पपीता खाने से वजन कम होता है।पर इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि गर्भवती महिलाएं पपीता बिल्कुल न खाएँ, इससे गर्भ को नुक्सान पहुँच सकता है।
  3. छाछ : मोटापा कम करने के लिए छाछ पीना बहुत ही लाभदायक होता है।आप छाछ का सेवन आँवले और हल्दी के चूर्ण के साथ भी कर सकते है अथवा ऐसे भी बिना चीनी के छाछ का सेवन कर सकते है।इससे मोटापा कम होता है।
Saturated Fat
Saturated Fat

मोटापा कम करना एक प्रतिस्पर्धात्मक कार्य है।अत्यधिक मोटापे के कारण व्यक्ति को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं।उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप अपना वजन और मोटापा कम कर सकते हैं।मोटापा कम करने के लिए सही और उपयुक्त आहार (Diet) की जरुरत है, इसलिए आप किसी अच्छे आहार विशेषज्ञ (Dietician)की सलाह लेकर एक डायट चार्ट (Diet Chart) बना लें और उसी के अनुसार अपना खाद्य ग्रहण करें, ऐसा करने से आपका वजन और मोटापा कम हो जायेगा। कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देने से न ही वजन बढ़ेगा और न ही मोटापे की समस्या होगी, जैसे :

  • स्नैक्स, फास्टफूड, शराब, चीनी, घी, मक्खन, कोल्डड्रिंक, आलू जैसे अत्यधिक कैलोरी वाले खानपान से परहेज करें।
  • अपना खाना चबाकर खाए और खाने के लगभग आधे घंटे बाद पानी पिये, इससे पाचन तंत्र सही रहता है और वजन भी नियंत्रण में रहता है।
  • अधिक मात्रा में ठंडा पानी पीने और ठंडाआहार ग्रहण करने से भी वजन बढ़ता है।अतः ठन्डे खानपान से परहेज करें।
  • दिन में कम से कम आठ घंटे तक सोयें। नींद पूरी न होने पर भूख भी ज्यादा लगती है और व्यक्ति अस्वस्थ भी हो जाता है।
  • तनाव और चिंता से दूर रहें। ऐसा देखा गया है कि अत्यधिक चिंता के कारण व्यक्ति अधिक खाता है जिससे उसका वजन बढ़ जाता है।
  • कोशिश करें आईने के सामने बैठकर खाने की, ऐसा करना से आप खुद को देख पायेंगे और आपका खाना भी कम हो जायेगा।
  • प्रोटीन से भरपूर भोजन करने से आपके शरीर में मेटाबोलिज्म की मात्रा बढ़ेगी।प्रोटीन युक्त खाद्य खाने से आपका पेट भी भरेगा और आपको संतुष्टि भी मिलेगी साथ ही आप हर रोज 441 कैलोरी कम लेंगे।
  • मलाई रहित दही का सेवन करें जिससे आपके शरीर में कैल्शियम की बढ़ोत्तरी भी होगी साथ ही आपका वजन भी कम होगा।

मौसमी बुखार या वायरल फीवर (Viral Fever) के लिए घरेलू उपाय

बदलते मौसम के साथ हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिसके कारण बुखार, खाँसी, सर्दी जैसे रोग हमारे शरीर को जकड़ने लगते हैं।बदलते मौसम के साथ मौसमी बुखार, जिसे अंग्रेजी में वायरल फीवर (Viral fever) कहते है, होने की सम्भावना सबसे अधिक होती है।मौसमी बुखार आम बुखार जैसा ही लगता है, लेकिन इसके होने पर शरीर का तापमान जल्दी कम नहीं होता और लगभग पांच से छै घंटे के अंतराल में बुखार लौटकर आता है।मौसमी बुखार होने पर शरीर का तापमान तेजी से बढ़कर 100 से 103 डिग्री तक हो जाता है। इस तरह का बुखार होने पर व्यक्ति बहुत थकान महसूस करता है।किसी प्रकार के जीवाणु या संक्रमण के कारण इस तरह का बुखार हो सकता है।ठंडा लगने पर भी इस तरह का बुखार हो सकता है। मौसमी बुखार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है।इस प्रकार का बुखार होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण देखे जाते हैं, जैसे :

  • इस बुखार के प्रभावस्वरूप जीभ का स्वाद चला जाता है।
  • इस तरह के बुखार में सिर में तेज दर्द होता है।
  • मांसपेशियों और हड्डियों के जोड़ों में भी दर्द होता है।
  • मौसमी बुखार होने पर खाँसी, जुकाम, उल्टी, दस्त जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

मौसमी बुखार के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : मौसमी बुखार होने पर सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते। तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो मौसमी बुखार के उपचार के लिए उत्तम है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें।अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।इसी काढ़ेमें शहद डालकर उसका हर दो घंटे में सेवन करें। इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  2. धनिया की चाय : धनिया में मौसमी बुखार जैसे रोग को खत्म करने की क्षमता है।धनिया में मौजूद प्रतिरोधक तत्व शरीर को बुखार से लड़ने की शक्ति देता है।मौसमी बुखार में धनिया की चाय बहुत ही असरदार औषधि है।एक मध्यम आकर के बर्तन में एक गिलास पानी लें और उसमें एक बड़े चम्मच धनिया के दानें या बीज डालकर उबालें। फिर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में दूध और चीनी डालें।फिर इसका गरम-गरम चाय की तरह सेवन करें। इस कारगर घरेलू नुस्खें से मौसमी बुखार में आराम मिलेगा।
  3. चावल का स्टार्च(Starch) :चावल का स्टार्च शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र को बढ़ाकर शरीर को स्वस्थ रखता है। यह एक पारंपरिक उपाय है।मौसमी बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए यह विशेष रूप से एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय माना जाता है।चावल का स्टार्च बनाना कोई बहुत मुश्किल कार्य नहीं है।लगभग हर किसी के घर में चावल पकता है।चावल पकने के बाद जिस पानी को छानकर फेंक दिया जाता है, वही पानी स्टार्च है जो बुखार में लाभदायक होता है।चावल पकने के बाद पके हुए चावल के पानी को एक बर्तन में छान लें।अब उसमें स्वाद अनुसार नमक डालकर, यदि आप चाहे तो काली मिर्च भी डाल सकते हैं, उसका गरम-गरम सेवन करें. इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  4. सूखी अदरक का मिश्रण : अदरक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो मौसमी बुखार के लक्षणों को कम करता है।बुखार से पीड़ित व्यक्ति के लिए सूखी अदरक का सेवन करना लाभदायक है।एक बर्तन में एक कप पानी डालकर उसमें दो मध्यम आकर के सूखे अदरक के टुकड़े या उसी परिमाण में सौंठ का चूर्ण डालकर उबालें। इसके बाद उस उबलते हुए पानी में एक-एक करके पीसी हुई हल्दी और काली मिर्च डालकर थोड़ी-देर के लिए फिर से उबालें। उसके बाद आँच से उतारकर उसमें शहद डालकर दिन में चार बार थोड़ा-थोड़ा करके पीने से बुखार में आराम मिलेगा।
  5. मेथी का पानी :मेथी के बीज रसोईघर में आसानी से उपलब्ध एक मसाला है। किन्तु इसमें विशेष प्रकार के औषधीय गुण हैं जो मौसमी बुखार में राहत दिलाती हैं।आधा कप पानी में एक बड़ा चम्मच साफ मेथी के बीज रातभर भीगोकर रखें।सुबह उसी पानी को छानकर दो घंटे के अन्तराल पर पीने से बुखार मेंआराम मिलेगा।
  6. सिरके का प्रयोग :सिरके के प्रयोग से भी बुखार को कम किया जा सकता है।आप अपने नहाने के पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर नहा सकते हैं, इससे आपके शरीर का तापमान कम होगा।इसके अलावा आप आलू के तीन-चार टुकडों को सिरके में डूबोकर अपने माथे पर रख सकते हैं, इससे भी शरीर का तापमान नियंत्रित होगा और बुखार में आराम मिलेगा।
  7. लहसुन :लहसुन के तेल को लगाने से बुखार में आराम मिलता है।एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो-तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल से रोगी के हथेली, पैरों, छाती पर अच्छे से मालिश करें, इससे बुखार में आराम मिलेगा। इसके अतिरिक्त आप किसी भी प्रकार के ठोस या तरल भोजन में लहसुन का प्रयोग करके उसका सेवन भी कर सकते हैं। दिन में दो बार यदि गर्म पानी के साथ दो से तीन लहसुन की कलियों का सेवन किया जाये तो बुखार में फर्क पड़ेगा। लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) तत्व हैं जो शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है और बुखार को कम करने में मदद करता है।
  8. शहद और लौंग : शुद्ध शहद में औषधीय गुण है जो बुखार के लिए लाभदायक है। शहद में लौंग के चूर्ण को मिलाकर लेने से बुखार कम होता है। दो से चार लौंग को गर्म तवे पर रख कर थोड़ा-सा भून लें, फिर उसे पीसकर चूर्ण बना लें।अब एक चम्मच शुद्ध शहद में आधा चम्मच लौंग का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार उसका सेवन करें।इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  9. पानी की पट्टी : मौसमी बुखार होने पर शरीर का तापमान रह-रहकर बढ़ जाता है, और जल्दी कम नहीं होता। ऐसे में ठन्डे पानी में साफ कपड़ा भीगोकर उसे सिर पर रखने से और बारी-बारी बदलते रहने से बुखार कम हो जाता है और शरीर का तापमान संतुलित रहता है।
  • डॉक्टर की सलाह लें :यदि बुखार चार से पाँच दिनों में भी न उतरे तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और उपयुक्त जांच करवानी चाहिए। कभी-कभी मौसमी बुखार जैसे दिखने वाले बुखार का कारण कुछ और भी हो सकता है।डेंगू, टाइफाएड या अन्य कोई संक्रमण भी बुखार का कारण हो सकता है।ऐसे में डॉक्टर से जांच करवाना जरुरी है।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर मौसमी बुखार को कम किया जा सकता है और इन नुस्खों के प्रयोग से बुखार में आराम भी मिलाता है।मौसमी बुखार मूल रूप से सात दिनों का मेहमान होता है जो शरीर को कमजोर कर देता है। ऐसे में आपको कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए जिससे आप स्वस्थ और तंदरुस्त रहें और दूसरों में बुखार का जीवाणु न फैले, जैसे :

  • मौसमी बुखार होने पर दूध के उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।
  • इस बुखार में लाल मांसऔर ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि बुखार में इस तरह के खाद्य को पचाना मुश्किल होता है, और इससे पेट की समस्या या दस्त हो सकता है।
  • बुखार होने पर तंबाकू, शराब, धूम्रपान से बचना चाहिए।
  • इस समय शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए नियमित समय के अन्तराल में पानी पीना आवश्यक होता है।पानी पीने से शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।यदि सादा पानी पीने में अच्छा न लगें तो आप पानी में चीनी और नमक डालकर घोल तैयार करके भी पी सकते हैं अथवा मेडिकल स्टोर(Medical store) में उपलब्ध ओ.आर.एस (O.R.S)पाउडर को पानी में मिलाकर भी पी सकते हैं।
  • ठन्डे पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। बुखार में ठंडा पानी, दही आदि का सेवन न करें, इससे तकलीफ और भी बढ़ जाती है।
  • खाली बदन या खाली पैर नहीं घूमना चाहिए, इससे बुखार बढ़ सकता है।
  • बुखार होने पर ज्यादा से ज्यादा समय शरीर को आराम देना चाहिए।
  • मौसमी बुखार होने पर जीभ का स्वाद नष्ट हो जाता है और खाने की इच्छा भी नहीं रहती, लेकिन बुखार में उपयुक्त भोजन का सेवन जरुर करें, क्योंकि भोजन न करने से शरीर कमजोर हो जाता है और बुखार कम नहीं होता।
  • बिना किसी चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवाई नहीं लेनी चाहिए। बहुत से लोग सोचते हैं कि बुखार होने पर बुखार कम करने की कोई भी दवाई लेने से बुखार ठीक हो जायेगा।लेकिन दवाई के मामले में चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है, क्योंकि यह जानना भी जरुरी है कि हमारे शरीर के लिए कौन-सी दवाई उपयुक्त है, अन्यथा चिकित्सक के पैसे बचाने या खुद चिकित्सक बनने के चक्कर में आपका शरीर क्षतिग्रस्त भी हो सकता है।
  • चूँकि मौसमी बुखार एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है, इसलिए रोगी को अलग कमरे में सुलाएं, उनके पास जाने से पहने मास्क पहन लें, रोगी द्वारा इस्तेमाल किये गए चीजों का प्रयोग न करें, रोगी का जूठन भी न खायें, साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।