Gharelu Upchar

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डेंगू के लिए घरेलू उपचार

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हर साल करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वालेविभिन्न वायरल (Viral) रोगों में डेंगू सबसे खतरनाक रोग है।इस रोग के वायरस (Virus) चार प्रकार के होते हैं जिन्हें सिरोटाइप कहा जाता है।जब कोई रोगी डेंगू के बुखार से ठीक हो जाता है तब उसे उस विशेष प्रकार के डेंगू वायरस से लम्बे समय तक प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है लेकिन अन्य तीन प्रकार के डेंगू वायरस से दोबारा डेंगू होने का डर रहता है। दूसरी बार होने वाला डेंगू काफी गंभीर हो सकता है जिसे डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic fever) कहते है।डेंगू हवा, पानी, साथ खाने से या छूने से नहीं फैलता।

यह रोग एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) नामक मादा मच्छर के काटने से होता है।डेंगू के वायरस का प्रसार एक चक्र के अंतर्गत होता है।जब मादा एडीज एजिप्टी मच्छर संक्रमित या डेंगू के शिकार व्यक्तिको काटता है तो उसके अन्दर वही वायरस चला जाता है और जब यही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तब यह वायरस उस स्वस्थ व्यक्ति में चला जाता है और इसी तरह यह चक्र निरंतर चलता रहता है।एडीज एजिप्टी मच्छर की कुछ खास विशेषताएं होती हैं, जैसे; यह दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं, इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं, ये ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते, ठन्डे या छाँव वाले जगहों पर रहते हैं, घर के अन्दर रखे हुए साफ पानी में प्रजनन करते हैं, अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की दूरी के अन्दर ही उड़ते हैं,

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गटर या रास्ते में जमा प्रदूषित पानी में कम प्रजनन करते हैं, पानी के सूखने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनों तक जीवित रह सकते हैं।डेंगू के लिए कोई निश्चित दवाई नहीं है।हर साल भारत में इस बीमारी के कारण कई लोगों की मृत्यु हो जाती हैं।डेंगू के मरीजों की मृत्यु खून में प्लेटलेट (Platelet) की कमी के कारण होती है।कभी-कभी बाहर से भी प्लेटलेट चढ़ाया जाता है ताकि खून में प्लेटलेट की मात्रा सही रहें। डेंगू के वायरस का काम ही होता है खून में प्लेटलेट की संख्या को कम करना।डेंगू के लक्षण तीन से सात दिनों के अन्दर विकसित होते हैं। डेंगू के लक्षण निम्नलिखित हैं :

  • अचानक तीव्र ज्वर या बुखार
  • सिर और आँखों में दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में भयानक दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते बनना
  • ठंड लगना
  • भूख न लगना
  • गले में खराश
  • दस्त लगना
  • उल्टी होना
  • असामन्य रूप से कान, मसूड़ों और पेशाब आदि से खून निकलना

डेंगू के लिए घरेलू नुस्खें

source: stylecraze.com
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  1. पपीते की पत्ती : डेंगू के बुखार के लिए पपीते की पत्तियां बहुत ही असरदार हैं। पपीते के पत्तों में मौजूद पपैन एंजाइम (Papain enzyme) खून में प्लेटलेट (Platelet) की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। डेंगू के उपचार के लिए कुछ पपीते की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें।वही रस दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच रोगी को देते रहें।
  2. मेथी के पत्ते :मेथी के पत्ते डेंगू के बुखार को ठीक करने में सहायक हैं। मेथी के कुछ साफ पत्तों को पानी में उबाल लें, फिर उस पानी को छानकर चाय की तरह रोगी को पिलाये।इसके सेवन से शरीर के विषाक्त पदार्थ निकल जाते है और डेंगू का वायरस (Virus) भी खत्म हो जाता है। इसके अलावा मेथी के दाने के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर भी रोगी को दे सकते हैं।
  3. संतरा : विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध संतरा पाचन शक्ति को ठीक करता है और साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। डेंगू के रोगी के लिए संतरे का रस पीना आवश्यक है।
  4. तुलसी और कालीमिर्च :तुलसी के पत्तों और दो ग्राम कालीमिर्च को पानी में उबालकर पीने से डेंगू के बुखार में फर्क पड़ता है। यह पेय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाती है और जीवाणु प्रतिरोधक तत्व के रूप में कार्य करती है।डेंगू के रोगी को दिन में तीन से चार बार इस पेय का सेवन करायें।
  5. धनिया पत्ती : डेंगू के बुखार से राहत दिलाने में धनिया पत्ती मदद करता है।थोड़ी-सी मात्रा में धनिया पत्ती लेकर उसे साफ पानी में धो लें, फिर उन्हीं पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें।दिन में तीन से चार बार रोगी को यह रस देते रहें. इससे बुखार कम हो जाता है।
  6. आँवला :आँवला विटामिन सी (Vitamin C) का श्रेष्ठ श्रोत है।यह खून को साफ करके आयरन (Iron) की मात्रा को बढ़ाने में सहायता करता है।शरीर में खून की सही मात्रा होने से डेंगू के वायरस धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं।रोगी को दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच आँवले का रस पिलाये।
  7. एलोवेरा :एलोवेरा लीवर (Lever) को स्वस्थ रखता है और पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है, साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। एलोवेरा के एक पत्ते को काटकर उसका रस निकाल लें, ध्यान रहें कि पत्ती से निकलने वाले पीले रस का प्रयोग बिल्कुल न करें।रोगी को दिन में दो बार एक चम्मच एलोवेरा का रस पिलाये। इससे शरीर के विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते हैं और डेंगू के वायरस (Virus) भी खत्म हो जाते है।
  8. गिलोय : गिलोय का काढ़ा बुखार, जुकाम और खाँसी को दूर करने में बहुत उपयोगी है। दो कप पानी में गिलोय की कुछ जड़ें और तुलसी के कुछ पत्ते डालकर तब तक उबाले जब तक कि पानी आधा न हो जाये।फिर उस काढ़े को रोगी को पिलाये।गिलोय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर को हर तरह के संक्रमण से बचाता है।
  9. हल्दी :डेंगू के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों के दर्द के लिए हल्दी बहुत उपयोगी है।एक गिलास दूध में एक से दो चम्मच हल्दी के चूर्ण को मिलाकर रोगी को पिलाने से रोगी को दर्द से राहत मिलेगी।
  • गोल्डनसील :गोल्डनसील में डेंगू के वायरस (Virus) को खत्म करने की क्षमता है। इस बूटी को कूटकर सीधे चबा भी सकते हैं या फिर इसे पीसकर उसका रस निकालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं।
  • चिरायता : चिरायता एक तरह की बूटी है जो स्वाद में बहुत कड़वा होता है।यह पाचन तंत्र को ठीक करने के साथ डेंगू के बुखार को कम करने में भी मदद करता है।इस बूटी को अच्छे से धोकर रातभर पानी में भीगोकर रखें।सुबह इसी पानी को छानकर रोगी को पिलाये।इसके निरंतर प्रयोग से बुखार कम हो जायेगा और रोगी को भी आराम मिलेगा।इसके अलावा एक चम्मच चिरायता के चूर्ण को पानी में मिलाकर भी पिला सकते हैं।
  • अनार : अनार खून को साफ करके शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है साथ ही यह डेंगू के बुखार के लिए बहुत उपयोगी है।डेंगू के रोगी को अनार का रस पिलाये।
  • नीम के पत्ते :नीम के पत्ते डेंगू के बुखार को ठीक करने के साथ प्लेटलेट की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद करता है। कुछ नीम के पत्ते लेकर उसे अच्छे से धो लें।फिर उन्हें पीसकर उसके रस को दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच रोगी को पिलाये। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
  • पानी : डेंगू होने पर शरीर में पानी का अभाव होता है जिसके कारण दस्त भी हो सकता।इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि रोगी को समय-समय पर पानी पिलाया जाये।पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पेशाब के माध्यम से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
  • जौ का पौधा या घास (Barley Grass) :जौ का पौधा या घास प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।इसे पीसकर इसके रस को रोगी को पिलाने से डेंगू का बुखार भी कम होगा और कमजोरी भी नहीं रहेगी।यह डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic fever) के लिए भी उपयोगी है।

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उपर्युक्त घरलू नुस्खों के द्वारा डेंगू की बीमारी से राहत मिलेगी। यदि तीन से चार दिनोंमें बुखार न उतरे तो चिकित्सक की सलाह लेकर उपयुक्त जांच करवायें।अपने खून की जांच करवाकर आपको पता चल सकता है कि आपके बुखार का कारण क्या है।इसके अलावा कुछ बातों का ध्यान रखना अत्यावश्यक हैं, जैसे :

  • डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए।
  • बुखार या सिरदर्द के लिए एस्पिरिन (Aspirin) या ब्रूफेन (Brufen) जैसी दवाइयाँ बिल्कुल न लें।बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह से मात्र पेरासिटामोल (Paracetamol) ही लेना उपयुक्त है।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से अपनी खून में प्लेटलेट (Platelet) की मात्रा की जाँच करवाते रहें।
  • रोगी को पर्याप्त मात्रा में आहार और पानी का सेवन करना चाहिए।
  • घर के अन्दर और आस-पास पानी जमा न होने दें। यदि आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा करके रखते हैं तो उसे हमेशा ढककर रखें।
  • घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
  • कूलर का काम न होने पर उसमें जमा पानी निकालकर सूखा दें।जरुरत पड़ने पर रोजाना नियमित रूप से कूलर का पानी बदलते रहें।
  • खिड़की और दरवाजे पर जाली लगाकर रखें।
  • किसी भी खुली जगह में जैसे गड्ढे, गमले आदि में पानी जमा न होने दें और अगर पानी जमा हो तो उसमें मिट्टी डाल दें।
  • रात को सोते वक्त मच्छरदानी लगाकर सोये।
  • मच्छर विरोधी उपकरणों का इस्तेमाल करें, जैसे, मच्छर भगाने वाला इलेक्ट्रिक बैट (Electric Bat), क्रीम (Cream), सिट्रॉनेला आयल (Cirtonela Oil) आदि।
  • अगर बच्चे बाहर खेलने जाते है, यहां तक कि स्कूल जाने से पहले भी उनके उनके शरीर और कपड़ों पर मच्छर भगाने वाली क्रीम (Cream) जरुर लगायें।
  • शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।

झुर्रियाँ हटाने के घरेलू नुस्खें

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झुर्रियाँ उम्र बढ़ने के साथ की ही एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन कोई भी व्यक्ति जल्दी बूढ़ा नहीं होना चाहता, अतः यह स्वाभाविक प्रक्रिया ही लोगों के लिए कष्टप्रद हो जाता हैं।परन्तुउम्र बढ़ने के अलावा भी झुर्रियों के अन्य कई कारण हो सकते हैं।कई बार चिकित्सकीय कारणों से झुर्रियाँ आ सकती हैं, सूरज की किरणों और प्रदूषण के अतिरिक्त संपर्क में जाने से भी झुर्रियाँ पैदा हो सकती हैं।तली-भुनी, ज्यादा मसालेदार चीजों का सेवन करने से भी झुर्रियाँ हो सकती हैं।कई बार अत्यधिक शराब पीने और धूम्रपान करने से भी झुर्रियाँ आ जाती हैं।ये झुर्रियाँ गले, चेहरे, आँखों के नीचे जैसी जगहों पर दिखाई देती हैं। लेकिन कुछ आसान, प्राकृतिक और घरेलू उपायों द्वारा झुर्रियों को नियंत्रित किया जा सकता हैं तथा उससे निजात भी पाया जा सकता हैं।

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झुर्रियाँ दूर करने के घरेलू उपाय

  1. तेल की मसाज : यदि आप झुर्रियों से परेशान हैं तो आप झुर्रियाँ कम करने के लिए अपने चेहरे, गले पर अपने पसंद के तेल से मसाज कर सकते हैं।जैतून का तेल, नारियल तेल अथवा विटामिन ई (Vitamin E) के तेल का प्रयोग कर सकते हैं।इस बात का जरुर ध्यान रखें कि आप जिस भी तेल प्रयोग करें, वो आपके चेहरे के लिए उपयुक्त हों।तेल का प्रयोग रात को करें जिससे रातभर आपकी त्वचा को पोषण मिलता रहे।सुबह उठकर आप अपने फेसवाश (Facewash) से अपना चेहरा अच्छे से धो लें।इससे आपकी झुर्रियाँ कम हो जायेगी।
  2. दही : झुर्रियाँ हटाने के लिए एक जगह एक चम्मच दही, एक चम्मच शहद, एक चम्मच संतरे का रस और आधे पके हुए केले को मिलाकर एक उबटन तैयार करें। उसके बाद उस उबटन को अपने चेहरे, गर्दनऔर गले पर लगायें और बीस मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें।बीस मिनट बाद एक हलके गर्म कपड़े से चेहरे को साफ कर लीजिए तथा उसके बाद अपने पसंदीदा मॉइश्चराइज़र (Moisturiser)लगा लीजिए जिससे आपके चेहरे की नमी बाहर न निकले और वो बरकरार रहे।दही और शहद आपके चेहरे को साफ करने के साथ आपकी त्वचा को कसते हैं, संतरे का रस झुर्रियों पर असर करता है और केला त्वचा को नमी प्रदान करता है।
  3. नींबू का रस :झुर्रियों से छुटकारा पाने के लिए नींबू एक असरदार और प्राकृतिक उपाय है जो त्वचा को साफ करके उसे कसता है।नींबू के रस में शहद मिलाकर अपने चेहरे, गर्दन और गले पर लगाये।कुछ देर तक रखने के बाद अपना चेहरा धो लें और मॉइश्चराइज़र (Moisturiser) लगा लें।इससे आपकी झुर्रियाँ दूर हो जायेगी।
  4. अंडे का सफेद भाग :झुर्रियों के इलाज के लिए अंडे का सफेद भाग एक बेहतरीन उपाय है।उम्र बढ़ने के साथ त्वचा और शरीर के अन्य भाग ढीले हो जाते हैं और ऐसे में अंडे का सफेद भाग बहुत ही लाभदायक है। पहले आप एक अंडा तोड़कर बहुत सावधानी से उसके सफेद भाग को अलग कर लीजिए, फिर उसे अपनी उँगलियों की मदद से अपने चेहरे पर लगायें।दस मिनट तक रखने के बाद गुनगुने पानी से उसे धो लें। नियमित रूप से इसका प्रयोग करने से झुर्रियों की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा।
  5. विटामिन ई (Vitamin E) युक्त उबटन : आप विटामिन ई का प्रयोग घर पर भी कर सकते हैं।किसी भी मेडिकल स्टोर (Medical Store) पर आपको विटामिन ई की कैप्सूल्स (Capsules) मिल जायेगी. एक मध्यम आकर का बर्तन लेकर उसमें विटामिन ई की दो कैप्सूल्स तोड़कर उसमें से तेल निचोड़ लें, और कैप्सूल का ऊपरी भाग फेंक दें, फिर उसमें आधा चम्मच शहद, आधा चम्मच नींबू का रस और दो चम्मच दही मिलाकर एक उबटन तैयार कर लें।उसके बाद उस उबटन को अपने चेहरे, गर्दन और गले पर अच्छे से लगाकर पन्द्रह से बीस मिनट के लिए छोड़ दें, फिर गुनगुने पानी से अपना चेहरा धो लें।झुर्रियाँ हटाने के लिए इसका निरंतर इस्तेमाल करें. झुर्रियाँ हटाने में यह उबटन बहुत ही लाभदायक है।
  6. पका हुआ पपीता : पके हुए पपीते को अपने हाथ से अच्छे से मसल लें और उसे अपने चेहरे, गर्दन और गले पर लगायें।पंद्रह से बीस मिनट तक उसे लगायें रखें और फिर पानी से धो लें।ये उपचार निरंतर करने से मुहासे खत्म हो जाती हैं और झुर्रियाँ भी मिट जाती हैं, साथ ही चेहरे पर निखार आ जाता है।
  7. एलोवेरा (AloeVera) : एलोवेरा त्वचा के लिए बहुत ही असरदार और लाभदायक है।एलोवेरा का एक पत्ता काटकर उसके अन्दर का रस निकाल लें और उँगलियों की मदद से उस रस को अपने चेहरे, गर्दन और गले पर लगायें।आप चाहे तो एलोवेरा का रस अपने हाथों और पैरों पर भी लगा सकते हैं।अत्यधिक धूप और प्रदूषण के कारण हमारे चेहरे और शरीर के खुले हुए भाग काले पड़ जाते हैं, जिसे अंग्रेजी में सन टैन (Suntan) कहते है।एलोवेरा इस कालेपन को हटाने में मदद करता है साथ ही यह त्वचा को जरुरी पोषण प्रदान करते हुए उसे स्वस्थ रखता है। इसके रोजाना प्रयोग से चेहरे की झुर्रियाँ मिट जाती हैं।
  8. गाजर का रस : रोजाना एक गिलास गाजर का रस पीने से आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है, और आपकी त्वचा में भी निखार आ जाता है।गाजर में पाये जाने वाले विटामिन (Vitamins) और मिनरल (Minerals) आपको अन्दर से स्वस्थ रखता है, जिसका प्रभाव आपके चेहरे पर भी पड़ता है, साथ ही निरंतर इसके सेवन से झुर्रियाँ भी खत्म हो जाती हैं।
  9. टमाटर : टमाटर में उम्र प्रतिरोधक (Anti-ageing) गुण हैं।चेहरे की झुर्रियों को हटाने का यह एक बेहतरीन उपाय है।रोजाना एक टमाटर काटकर चेहरे और झुर्रियों से प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें और हलके हाथों से मसाज करें। ऐसा करने से चेहरा साफ होता है और झुर्रियाँ भी दूर हो जाती हैं।
  • खीरा : खीरा प्रभावी ढंग से झुर्रियाँ मिटाता है।एक खीरे का आधा भाग लेकर उसे छील लें, फिर उसे पीसकर उसका रस निकाल लें।उस गूदे सहित रस को अपने आँखों, चेहरे, गले और गर्दन पर लगायें और पंद्रह मिनट तक रखने के बाद अपना चेहरा धो लें।आँखों के नीचे और चेहरे की झुर्रियों के लिए खीरा बहुत ही फायदेमंद है, साथ ही यह त्वचा को भी साफ रखता है।
  1. अनानस : अनानस का रस भी झुर्रियों को दूर करने में सहायक है। अनानस के कुछ टुकड़े लेकर उसे मसलकर उसका रस निकाल लें।फिर उस गूदे सहित रस को अपने चेहरे और झुर्रियों से प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें। पंद्रह मिनट बाद अच्छे से धो लें।इसके प्रयोग से झुर्रियाँ दूर होती हैं।
  2. हल्दी :हल्दी हर किसी के रसोई में आसानी से उपलब्ध एक पदार्थ है जिसका आमतौर पर खाने में प्रयोग होता है।हल्दी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है और इसके प्रयोग से आपकी त्वचा स्वस्थ रहती है और चेहरे पर निखार आ जाता है। एक मध्यम आकर का बर्तन लें।उसमें दो चम्मच गुलाब जल, दो चम्मच कच्ची पीसी हुई हल्दी का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर एक उबटन तैयार कर लें।उस उबटन को अपने चेहरे और आँखों के आसपास लगायें. इससे आपकी झुर्रियाँ दूर हो जायेगी।बेहतर परिणाम के लिए हल्दी से बने इस उबटन का इस्तेमाल हर सप्ताह करें।
  • तनाव से दूर रहें : तनाव और चिंता की वजह से चेहरे पर और आँखों झुर्रियाँ आ जाती हैं साथ ही आँखों के नीचे काले घेरे भी उत्पन्न हो जाती हैं।इसलिए जितना हो सके खुद को तनाव और चिंता से दूर रखें और अपनी जिंदगी को खुलकर जियें।
  1. बेसन :जिस तरह साबुन के प्रयोग से आपके शरीर का मैल दूर हो जाता हैं, उसी तरह बेसन के प्रयोग से आपका चेहरे का मैल दूर हो जाता है।गुनगुने पानी में आवश्यकतानुसार बेसन घोल कर एक लेप बना लें और उस लेप को अपने चेहरे पर लगा लें। फिर सूखने के बाद अपना चेहरा अच्छे से धो लें।उसके बाद एक चम्मच शहद लेकर अपने चेहरे पर अच्छे से लगायें और बीस मिनट बाद धो लें।इससे आपके चेहरे की झुर्रियाँ दूर हो जायेगी।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप अपने झुर्रियों को मिटाकर अपने उम्र को नियंत्रण मरख सकते हैं।यदि किसी चिकित्सकीय प्रभाव के कारण आपके चेहरे पर झुर्रियाँ आती हैं अथवा इन सब उपायों से भी यदि झुर्रियाँ दूर नहीं होती तो आप किसी अच्छे त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) की सलाह लें।पहले से ही यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाये तो झुर्रियों की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी, जैसे :

  • पोषण एवं नमी के अभाव के कारण झुर्रियाँ आ जाती हैं।इसलिए शरीर और त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए सही आहार की जरुरत है, साथ ही पानी पीना बहुत ही फायदेमंद है। सुबह उठकर अपने चेहरे और आँखों को ठन्डे पानी से अच्छे से धोये और उसके बाद दो से तीन गिलास पानी भी पीयें। चेहरे और आँखों को धोने से नमी बरकरार रहेगी और खाली पेट पानी पीने से आपका हाजमा सही रहेगा।दिनभर में कम से कम सात से आठ गिलास पानी जरूर पीयें।सही समय पर अच्छा खाना खाएँ, दिन में एक फल जरुर खाएँ, प्रोटीन (Protein), मिनरल (Minerals), कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), फाइबर( Fibre) युक्त भोजन का सेवन करें।हरे, पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।
  • अत्यधिक धूप भी हमारे चेहरे और आँखों को प्रभावित करता है।इसलिए धूप में निकलने के आधे घंटे पहले अपने चेहरे, गले, गर्दन और शरीर के अन्य खुले भागों पर अच्छे से सन्सक्रीम (Suns cream) या लोशन लगायें तथा निकलते समय धूप-चश्मा या सनग्लास(Sunglass) जरुर पहनें।
  • दिन में कम से कम आठ घंटे जरुर सोये।अच्छी नींद आपकी त्वचा, आँखों और शरीर के लिए लाभदायक है।
  • झुर्रियाँ हटाने के लिए कुछ व्यायाम हैं जिसे निरंतर करने से रक्त-प्रवाह बढ़ता है, चेहरा कसता है, चेहरे की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और त्वचा भी मुलायम हो जाती है।आप किसी अच्छे योगा संस्थान में जाकर या किसी योगा विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयुक्त योगा करके अपना उम्र घटा सकते है।
  • अत्यधिक धूम्रपान करना और शराब पीना सेहत और त्वचा दोनों के लिए ही नुकसानदेह है। इसलिए झुर्रियों की समस्या से निजात पाने के लिए धूम्रपान और मद्यपान करना छोड़ दें।

छींक की समस्या को दूर करने के लिए घरेलू उपचार

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छींक एक सामान्य क्रिया है।छींक प्रायः तब आती है जब हमारी नाक के अन्दर की झिल्ली, किसी बाहरी पदार्थ के घुस जाने से परेशानी महसूस करती है। परन्तु छींक प्रतिरोधी तंत्र की प्रक्रिया का जरुरी हिस्सा है, छींकने से शरीर के हानिकारक रोगाणु बाहर निकल जाते है। छींक की क्रिया में छाती, पेट, गला, आँखें जैसे कई अंग एक साथ काम करते हैं।ये सभी अंग बाहरी पदार्थ को शरीर से बाहर निकालने के लिए एकजुट होकर काम करते हैं।छींकते समय हमारे मुँह और नाक से बाहर निकलने वाली हवा की गति इतनी तेज होती है कि हमारे पूरे शरीर में एक कम्पन-सा होता है. छींक को रोकना शरीर के लिए हानिकारक है।छींक रोकने से शरीर के अन्य अंगों जैसे, कान, मस्तिष्क, फेफड़े, गर्दन, पेट आदि पर प्रभाव पड़ता है और इन अंगों को नुकसान पहुँच सकता है।छींक आने के कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • छींक का प्रमुख कारण है एलर्जी।पराग कण, धूल के कण, धुआँ, जानवरों के रोएं, कपड़ों के रोएं, कीटों के डंक, कुछ दवाइयां, कुछ खाद्य पदार्थ आदि से एलर्जी हो सकता है और इसके कारण छींक आ सकती है।
  • अत्यधिक चिंता, परेशानी, घबराहट के कारण भी किसी-किसी को छींक आती है।
  • सामान्य सर्दी या फ्लू के कारण भी छींक आती है, विशेषकर बदलते मौसम में छींक की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ठंड में जुकाम होना भी छींक की एक वजह हो सकती है।
  • धूप में बहुत देर तक रहना भी छींक का कारण बन सकता है। तेज धूप के कारण नाक की नसें सक्रिय हो सकती है, जिससे छींकें आ सकती हैं।
  • ब्यूटी पार्लर में थ्रेडिंग करवाते समय या उसके बाद भी छींक आती है। दरअसल, भौंहों के ठीक नीचे जो नस होती है वह श्वास नली से जुड़ी होती है।इसलिए जब भी उस नस पर प्रभाव पड़ता है तो उसकी प्रतिक्रियास्वरूप छींकें आने लगती है।
  • कई बार तेज रोशनी देखने से आँखों के रेटिना (Retina) और दिमाग को जोड़ने वाली ऑप्टिक (Optic) नस उत्तेजित हो जाती है, और इस वजह से भी छींक आ जाती है।

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छींक की समस्या से निजात पाने के घरेलू नुस्खें

ऊपर कुछ ऐसे कारण बताये गए हैं जिससे छींकें आती हैं, परन्तु एक साथ लगातार कई छींकें आने पर व्यक्ति परेशान हो जाता।कभी-कभी यह रोज की बात हो जाती है। ऐसे में कुछ घरेलू उपायों द्वारा छींक को रोका जा सकता है।यहाँ नीचे दिए गए घरेलू उपायों का प्रयोग करके आप छींक की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

  1. सौंफ की चाय :सौंफ के प्रयोग से छींक की समस्या में तो राहत मिलती ही है, साथ ही यह कई साँस संबंधी संक्रमण से लड़ने की क्षमता भी देती है।सौंफ में प्रतिजीवाणु (Anti-biotic) और वायरस विरोधी (Anti-viral) गुण होते हैं।यदि आप छींक की समस्या से परेशान है, तो आपके लिए सौंफ की चाय का सेवन एक बेहतरीन घरेलू उपचार साबित हो सकता है।सौंफ की चाय बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में एक कप पानी उबाल लें और उसमें दो चम्मच पिसी हुई सौंफ डालें।कुछ देर बाद आँच को बंद कर दे और बर्तन को ढक दे, जिससे कि सौंफ अच्छे से पानी में घुल जाये।अब उस पानी को छान लें और चाय की तरह उसका सेवन करें।छींक की समस्या से छुटकारा पाने के लिए रोजाना दिन में कम से कम दो बार सौंफ की चाय का सेवन करें।
  2. लहसुन : आम तौर पर लहसुन का प्रयोग भोजन बनाने के लिए किया जाता है लेकिन कई लोग इस बात से अंजान है कि लहसुन में औषधीय गुण भी होते हैं। रोजाना कच्चे लहसुन की एक कली का सेवन करने से साँस संबंधी समस्यासे छुटकारा मिल सकता है।इसके अतिरिक्त तीन से चार लहसुन की कलियाँ लेकर मसल लें। अब इन्हें अपनी नाक के पास ले जाकर उसकी गंध को सूंघे।ऐसा करने से आपकी नाक बिल्कुल साफ हो जायेगीऔर आप आसानी से साँस ले पायेंगे।यदि आपको कच्चा लहसुन नहीं खाना या उसका गंध भी नहीं सूंघना तो फिर आप सब्जियों में या सूप में लहसुन के प्रोयग की मात्रा को बढ़ाकर भी उसका सेवन कर सकते है। इससे आपकी छींक की समस्या दूर हो जायेगी।
  3. भाँप : छींक से बचने के लिए सबसे आसान तरीका है भाँप लेना।इस उपचार के अंतर्गत आपको सिर्फ गर्म पानी और एक तौलिए की आवश्यकता होगी।सबसे पहले एक मध्यम आकार का एक पात्र लें और उसमें पानी लेकर उबालें।जैसे ही पानी उबलने लगे, उसे आँच से उतार ले।फिर उस पात्र को एक टेबल या स्टूल पर रखें और एक कुर्सी लेकर उसके सामने बैठ जाये।उसके बाद एक बड़े तौलिए से अपने सिर और उस पानी के बर्तन को एक साथ ढक ले और दस मिनट तक उस गर्म पानी का भाँप ले।इस बात का ध्यान रखे कि इस दौरान पंखा, ए.सी या कूलर बंद रहे। इसके बाद लगभग बीस मिनट तक हवा में न जाएँ। इस प्रक्रिया से नाक की समस्या तो दूर होगी ही साथ ही छींक की समस्या में भी फर्क पड़ेगा है।
  4. लैवेंडर का तेल : छींक की समस्या में लैवेंडर का तेल एक अच्छा उपाय है। एक रुई को लैवेंडर के तेल में भीगोकर उसे नाक के दोनों छेदों में घुसाएँ और साँस लें।इसके अलावाआप लैवेंडर के तेल को नैज़ल ड्रॉप (Nasal Drop) की तरह अपने नाक में डालकर सूंघ भी सकते हैं।यह छींक से बचने का एक बेहतरीन उपाय है।
  5. संतरा : विशेषज्ञों का कहना है कि एलर्जेंस (Allergens-एलर्जी पैदा करने वाले तत्व) शरीर में हिस्टामिन (Histamine) को उत्पन्न करते हैं जिससे छींक जैसे लक्षणों को देखा जा सकता है।विटामिन सी (Vitamin C)शरीर में हिस्टामिन के उत्पादन को कम करने में काफी प्रभावी साबित होता है।विटामिन सी हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरुरी है क्योंकि यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।संतरे में विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए रोजाना नाश्ते में या दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास संतरे का रस या एक साबुत संतरे का सेवन बहुत ही फायदेमंद है।इसके सेवन से सर्दी-खाँसी की समस्या दूर होती है।
  6. कैमोमाइल चाय : एलर्जी की समस्या के कारण होने वाली छींक की समस्या में कैमोमाइल चाय बहुत ही असरदार है।कैमोमाइल में हिस्टामिन विरोधी गुण है जो छींक की समस्या को दूर करती है।उबलते हुए पानी में एक चम्मच कैमोमाइल के सूखे फूल को मिलाकर उसे कुछ देर तक उबालें, फिर उसे छानकर, उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोजाना दिन में दो बार पीने से छींक की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
  7. अदरक : छींक की समस्या में अदरक एक प्रभावी उपाय है।अदरक के टुकड़े को पानी में मिलाकर, उसे उबाल लें, फिर उसे छानकर एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से छींक की समस्या में राहत मिलती है।रात को सोने जाने से पहले अदरक के इस चाय का सेवन करने से रात को और सुबह आने वाली छींक से छुटकारा मिलता है।इसके अलावा आप सुबह और शाम की चाय में भी अदरक का टुकड़ा डालकर लें सकते हैं।इससे भी छींक की समस्या में फर्क पड़ेगा।
  8. मेथी के बीज : मेथी के बीज में पाये जाने वाले प्रतिजीवाणु गुण छींक के लिए फायदेमंद है। मेथी नाक के रास्ते को साफ करता है। एक चम्मच मेथी के बीज को पानी में डालकर उबालें, फिर उस पानी को छानकर चाय की तरह दिन में दो से तीन बार पीने से छींक की समस्या में फर्क पड़ता है।
  9. पेपरमिंट तेल : पेपरमिंट तेल प्रतिजीवाणु (Anti bacterial) गुण का अच्छा स्रोत है।यह बंद नाक को खोलता है औरछींक में राहत दिलाती है।तीन से चार गिलास पानी को उबालें और उसमें पाँच से छः बूंद पेपरमिंट तेल मिलायें।फिर उस पानी को आँच से उतार लें।उसके बाद अपने सिर को तौलिए से ढककर उस पेपरमिंट तेल युक्त गर्म पानी का भाँप ले।इससे बंद नाक और छींक की समस्या में फर्क पड़ेगा।
  10. काली मिर्च : बहती नाक और छींक को रोकने का एक कारगर उपाय काली मिर्च है।गुनगुने पानी में थोड़ा-सा काली मिर्च मिलाकर दिन में दो से तीन बार उस पानी को पीने से छींक की समस्या में फर्क पड़ता है।इसके अलावा आप रात को सोने जाने से पहले गर्म दूध में भी काली मिर्च मिलाकर पी सकते है, इससे भी आपको छींक की समस्या में राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त आप गर्म पानी में काली मिर्च मिलाकर उससे गरारा भी कर सकते हैं, या फिर अपने प्रतिदिन के खाने, सलाद और सूप आदि में भी काली मिर्च डालकर उसका सेवन कर सकते है।इससे आपके अन्दर के जीवाणु, जो सर्दी और छींक के कारण हैं, खत्म हो जाते हैं।
  • अजवाइन : अजवाइन में जीवाणुओं से लड़ने की क्षमता होती है।छींक के उपचार के लिएसरसों के तेल को गर्म कर लीजिए, उसमें अजवाइन डालकर उस तेल को नहाने से पहले अपने नाक और शरीर पर लगाईये, इससे बंद नाक और छींक की समस्या में राहत मिलती है।आप रात को सोने जाने से पहले भी इस तेल का प्रयोग कर सकते है।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप छींक की समस्या से निजात पा सकते हैं।यदि इन नुस्खों का प्रयोग करके भी आपकी छींक बंद नहीं होती या सर्दी ठीक नहीं होती, तो आप तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।नीचे दिए गए कुछ सावधानियों को बरतने से छींक की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी, जैसे :

  • धूल और धुंए से बचिए, आवश्यकता पड़ने पर मास्क (Mask) का प्रयोग करें।
  • धूम्रान और शराब से परहेज करें।
  • ठन्डे पदार्थों का अधिक सेवन न करें।
  • अत्यधिक चिंता करने से बचे।
  • जुकाम होने पर उपचार करायें।

चेचक के घरेलू उपचार

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चेचक एक सर्वविदित और संक्रामक रोग है जिसे कई लोग त्वचा पर पड़ने वाले खास किस्म के दाने या लाल फुंसियों के कारण पहचानते है । चेचक वैरिसेला जोस्टर (Varicella Zoster) नामक वायरस (Virus) के कारण होता है । यह एक व्यक्ति से दूसरे में बहुत जल्दी फैलता है । यह रोग हवा के माध्यम से या एक संक्रमित व्यक्ति के माध्यम से भी फैल सकता है । चेचक होने पर सिर में दर्द, शरीर में दर्द, बुखार, खाँसी, नाक बहना, थकान, कमजोरी, खुजली, भूख की कमी आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है । चेचक होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; दूषित खान-पान, हवा में मौजूद चेचक के वायरस या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, माँ के दूध पर रहने वाले छोटे बच्चों को एकाएक माँ का दूध छोड़कर अन्य खाद्य पदार्थ खिलाना आदि । सामान्य तौर पर इस रोग के जीवाणु थूक, मल-मूत्र और नखुनों आदि में पाये जाते हैं । इस रोग के जीवाणु हवा में घुल जाते हैं और श्वसन के समय ये जीवाणु शरीर के अन्दर प्रवेश कर जाते हैं ।

इस रोग को ठीक होने में दस से पंद्रह दिन लग जाते हैं । यह रोग अधिकतर वसन्त ऋतु तथा ग्रीष्मकाल में होता है । इस रोग के तीन प्रकार हैं; 1. रोमांतिका या दुलारी माता, 2. मसूरिका या छोटी माता, 3. बड़ी माता । जब किसी को चेचक का रोमांतिका रूप हो जाता है तो इसके दाने रोमकूपों पर निकलने लगते हैं । यह रोग बारह वर्ष से कम आयु के बच्चों को अधिक होता है । कुछ सावधानियां बरतने से ही यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है । इस रोग में रोगी के चेहरे पर लाल रंग के दाने निकलने लगते हैं और जब ये दाने निकलते हैं तब रोगी को बुखार हो जाता है और बेचैनी होने लगती है । यह दाने दो से तीन दिनों के बाद फफोलों का रूप ले लेते हैं तथा कुछ ही दिनों के बाद ये सूखकर झड़ने लगते हैं ।

दूसरे, चेचक के मसूरिका रूप से पीड़ित रोगी के शरीर पर मसूर की दाल के बराबर दाने निकलने लगते हैं । इस चेचक को ठीक होने में कम-से-कम ग्यारह से बारह दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है । इस रोग में रोगी को खाँसी हो जाती है और छींके आने लगती है । इस रोग में दाने कभी-कभी बिना बुखार आये भी निकलने लगते हैं । तीसरे, चेचक के तीसरे प्रकार बड़ी माता से पीड़ित व्यक्ति को बहुत अधिक परेशानी होती है । इस रोग को ठीक होने में कम-से-कम पंद्रह से बीस दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है । इस रोग में दाने बड़े-बड़े फफोलों के रूप में शरीर पर निकलने लगते हैं । इन दानों के फूटने से उनमें से पानी निकलने लगता है और कभी-कभी तो उनमें मवाद भी भर जाता है और बदबू आने लगती है । इस चेचक के दाग गहरे होते हैं ।

चेचक के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. बेकिंग सोडा (Baking Soda) : बेकिंग सोडा चेचक से पीड़ित रोगी को खुजली और जलन से राहत दिलाने में मदद करता है । एक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलायें । अब उसी पानी में साफ और नर्म कपड़े को भीगोकर चेचक पर हलके हाथों से लगायें । अब कुछ देर के लिए सूखने दें और फिर उसे दुबारा पोंछ दें ।
  2. हरी मटर : हरी मटर में पाये जाने वाले आवश्यक गुण चेचक के उपचार के लिए सहायक है । दो सौ ग्राम हरी मटर को पानी में उबालें, फिर उस पानी को छानकर मटर को अलग कर लें । फिर उन उबले हुए मटर को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और रोगी के शरीर के प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें और सूखने तक छोड़ दें । फिर पानी से धीरे-धीरे पोंछ लें । इस उपचार को निरंतर करने से रोगी को जलन और दर्द से छुटकारा मिल जायेगा ।
  3. नीम : नीम की पत्तियों में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है और यह चेचक के जीवाणु को दूर करने में मदद करता है । रोगी को गर्म लगने पर आप नीम के पत्ते-सह टहनियों को एक करके रोगी को हवा करें । इससे न केवल रोगी को आराम मिलेगा बल्कि नीम के गुण के कारण जीवाणु का प्रभाव भी धीरे-धीरे कम हो जायेगा । रोगी के बिस्तर के चारों ओर नीम के पत्ते फैलाकर रखें । यहां तक की रोगी को जब भी नहलाएं तो पानी के बाल्टी में नीम के पत्ते डाल दें या फिर नीम के पत्तों को गर्म पानी में उबालकर रोगी को नहला सकते हैं । इससे रोगी का दर्द और खुजली कम हो जायेगा ।
  4. शहद : शहद में भी जीवाणु प्रतिरोधक गुण है को चेचक के जीवाणु को खत्म करने में कारगर है । शहद के प्रयोग से खुजली और दर्द कम हो जायेंगे । इसके रोजाना प्रयोग से चेचक के निशान भी नहीं बनते । एक कटोरी में पर्याप्त मात्रा में शहद लेकर चेचक पर लगायें । बीस से पच्चीस मिनट तक लगाकर रखने के बाद पानी से जगह को धीरे-धीरे धो दें । दिन में दो से तीन बार इस उपचार को करें ।
  5. गाजर और धनिया : गाजर में विटामिन ए (Vitamin A) और धनिया में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा पायी जाती है जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं । एक पात्र में एक गिलास पानी उबालें और उसमें एक कप कटे हुए गाजर और डेढ़ कप धनिया के पत्ते डाल दें । आँच को धीमा करके पंद्रह मिनट तक गर्म करें । उसमें थोड़ा-सा नमक मिलायें । फिर पानी को छानकर रोगी को पिलायें । एक महीने तक रोगी को इस पानी का सेवन करायें । आप रोगी को उबले हुए गाजर और धनिया पत्ती भी खिला सकते हैं ।
  6. एलोवेरा : एलोवेरा में कई सारे आवश्यक गुण पाए जाते हैं जो कई तरह के जीवाणुओं को दूर करने में मदद करता है । यह त्वचा को नर्म रखता है और दाग या निशान से मुक्ति दिलाता है । एक एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसके रस को बाहर निकाल लें । अब उसी रस को चेचक पर लगायें । ऐसा रोजाना करने से रोगी को खुजली से राहत मिलेगी और बाद में चेचक के निशान भी नहीं बनेंगे । इस बात का ध्यान रखें कि एलोवेरा के पत्ते से निकलने वाले पीले रंग के रस का प्रयोग बिल्कुल न करें, केवल सफेद वाला रस ही लगायें ।
  7. तुलसी : तुलसी में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व चेचक के जीवाणु को खत्म करने में कारगर है । एक कप पानी को उबालें और उसमें एक मुट्ठी ताजे तुलसी के पत्ते डाल दें । अब आँच कम करके तीन मिनट तक पानी को उबालें । फिर आँच से उतारकर पानी को दस मिनट के लिए छोड़ दें ताकि तुलसी के पत्ते के रस पानी में अच्छे से घुल जाये । पानी को छानकर फ्रिज में रख दें । कुछ देर बाद उसी पानी को निकाल लें और एक साफ कपड़े को तुलसी के पानी में भीगोकर चेचक पर धीरे-धीरे लगायें । इससे रोगी को आराम मिलेगा और खुजली भी कम हो जायेगी । रोजाना दिन में एक बार इस उपचार को करने से जल्द ही चेचक से राहत मिलेगी ।
  8. सेंधा नमक : सेंधा नमक में पाये जाने वाले मैग्नीशियम (Magnesium) और सल्फेट (Sulphate) नामक मिनरल (Mineral) दर्द को कम करने में सहायक है । एक बाल्टी हलके गर्म पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर अच्छे से घोल दें । फिर उसी पानी में साफ कपड़े को भीगोकर चेचक पर हलके हाथों से सिकाई करें । ऐसा रोजाना करने से चेचक से पीड़ित व्यक्ति को आराम मिलेगा और दर्द से भी छुटकारा मिल जायेगा । रोजाना दिन में दो बार इस उपचार को करने से जल्द ही चेचक से राहत मिल जायेगी ।
  9. अदरक : अदरक में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व चेचक के रोग में होने वाली खाँसी और बुखार को ठीक करने में मदद करता है । एक कप पानी को अच्छे से उबालें और उसमें एक चम्मच महीन कटे हुए अदरक को डाल दें । अब आँच को धीमा करके पानी को पांच मिनट तक उबालें । फिर पानी को छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोगी को पिलायें । दिन में दो से तीन बार इस पेय को पीने से चेचक से जल्द ही राहत मिलेगी । इसके अलावा थोड़े-से सूखे अदरक को पीसकर पाउडर बना लें या फिर ताजे अदरक के छोटे-से टुकड़े को नहाने के गर्म पानी में डाल दें और बीस से पच्चीस मिनट के लिए छोड़ दें । फिर उसी पानी से रोगी को नहलाएं ।
  10. दलिया : दलिया चेचक के उपचार के लिए सबसे सुरक्षित घरेलू उपचारों में से एक है । दो कप दलिया को पीसकर पाउडर बना लें । दो लीटर गुनगुने पानी में उस दलिया के चूर्ण को मिला दें और पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें ताकि दलिया अच्छे से पानी में घुल जाये । अब उसी पानी में साफ और नर्म कपड़े को भीगोकर रोगी के प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें । इससे खुजली और दर्द कम हो जायेगा । रोजाना दिन में दो बार इस उपचार को करने से रोगी को आराम मिलेगा और जल्द ही चेचक से राहत मिल जायेगी ।  

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर चेचक की बीमारी से राहत मिल सकती है । बहुत अधिक कष्ट होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ और उपयुक्त जाँच  करवाएं । चेचक रोग के होने पर निम्नलिखित सावधानियाँ बर्तें :

  • चेचक के रोगी को अधिक मसालेदार, तेलयुक्त भोजन न दें ।
  • चेचक होने पर रोगी को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए ।
  • चेचक के रोगी को जब भी नहलायें तब हलके गर्म पानी का प्रयोग करें ।
  • इस बात का ध्यान रखें की रोगी शरीर पर आये छालों या फोड़ों को बिल्कुल न खरोचें, वर्ना यह रोग और भी फैल सकता है और दर्द भी बढ़ सकता है और बाद में निशान भी पड़ सकता है । फोड़ों को किसी भी तरह ढक कर न रखें ।
  • रोगी के चारों तरफ साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें ।
  • रोगी को अलग कमरे में लिटायें ताकि यह रोग किसी और में न फैले ।
  • चेचक की बीमारी से बचने के लिए बाहर का दूषित खाना न खायें और न ही दूषित पानी पीयें । चेचक के रोगी के संपर्क में न जाएँ, और यदि किसी कारणवश रोगी की सेवा हेतु रोगी के पास जाना पड़ता है तो सावधानियां बर्तें । रोगी के मल-मूत्र, त्वचा से निकलने वाले छालों, बलगम आदि से दूर रहें ।
  • वैरिसेला वैक्सीन (Varicella Vaccine) या चेचक का टीका वैरिसेला वायरस से होने वाले चेचक के लिए प्रतिरोधक के रूप में कार्य करता है । इस टीके को बहुत ही सुरक्षित माना गया है । टीके की एक खुराक से चेचक की गंभीर बीमारी से छुटकारा मिलता है । छोटे बच्चों को यह टीका लगवाना जरुरी है ।

गंजापन दूर करने के लिए घरेलू नुस्खें

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गंजापन एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति के बाल असामान्य रूप से झड़ने लगते हैं । गंजेपन को तकनीकी भाषा में एलोपेसिया (Alopecia) कहते है । जब असामान्य रूप से बहुत तेजी से बाल झड़ने लगते हैं और नए बाल उतनी तेजी से नहीं उग पाते या फिर वे पहले के बालों की तुलना में अधिक पतले या कमजोर उगते हैं, तो ऐसी स्थिति में आगे जाकर गंजा होने की संभावना होती है । गंजापन एक आम समस्या बन गई है । चाहे महिला हो या पुरुष, बूढ़े हो या जवान, सभी इस समस्या से जूझ रहे हैं । एलोपेसिया (Alopecia) या गंजेपन के अंतिम चरण को एलोपेसिया टोटालिस (Alopecia Totalis) कहते है जिसमें व्यक्ति के लगभग सारे बाल झड़ जाते हैं । गंजेपन के कुछ लक्षण हैं, जैसे; बालों का पतला होना, शैम्पू करते समय बालों का अधिक मात्रा में झड़ना, बालों का झड़कर तकिये पर दिखना, कंघी करने पर अत्यधिक मात्रा में बालों का झड़ना आदि । गंजेपन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • होर्मोनल (Hormonal) परिवर्तन
  • उम्र बढ़ना
  • शरीर में आयरन (Iron) और कैल्शियम (Calcium) का अभाव
  • असामान्य रूप से वजन घटना
  • अधिक मात्रा में विटामिन ए (Vitamin A) का सेवन
  • सिर में किसी तरह का संक्रमण होना
  • मानसिक तनाव या मानसिक आघात
  • गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन
  • कैंसर (Cancer) या थाइरोएड (Thyroid) जैसी बीमारी
  • बालों पर अधिक मात्रा में रासायनिक एवं मशीनों का प्रयोग करना
  • स्टेरॉयड (Steroid) का सेवन
  • धूम्रपान एवं मद्यपान
  • आनुवांशिकता
  • रुसी की समस्या

गंजापन रोकने के लिए घरेलू उपचार

गंजेपन से तंग आकर कई लोग हेयर ट्रांसप्लांट (Hair Transplant) या सर्जरी (Surgery) की ओर उन्मुख होते हैं जिसमें लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं । इसके विपरीत आप घरेलू नुस्खों को आजमाकर गंजेपन की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं । यहां नीचे कुछ कुदरती और घरेलू नुस्खों के बारे में बताया गया हैं जिसे अपनाकर आपको गंजेपन की समस्या से राहत मिलेगी ।

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  1. अरंडी का तेल (Castor Oil) : अरंडी का तेल गंजापन को दूर करने में सहायक है । यह बाल और त्वचा के कई समस्याओं को दूर करता है । गंजेपन को रोकने के लिए आपको अपनी हथेली पर थोड़ा-सा अरंडी का तेल लेकर उसे अपने बालों की जड़ों में अच्छे से लगाना हैं और धीरे-धीरे मालिश करना हैं । यह तेल आपके बालों की जड़ों को पोषण देगा और उसे मजबूत बनाएगा और इसके निरंतर उपयोग से आपके सिर पर बाल भी उगने लगेंगे ।
  2. एलोवेरा (Aloe Vera) : बालों की समस्या के लिए एलोवेरा बहुत ही कारगर है । यह बालों को उगाने में मदद करता है । एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसके अन्दर के रस को निकालकर एक छोटी-सी कटोरी में रख लें । फिर उसी रस को बालों की जड़ों में लगाकर अच्छे से मालिश करें । यह बालों की जड़ों में बंद हुए छिद्रों को खोल देता है । इसके निरंतर प्रयोग से बाल झड़ने भी कम हो जायेंगे और सिर पर बाल भी उगने लगेंगे ।
  3. नारियल का तेल : नारियल का तेल बालों की जड़ों को पोषण देता है । रात को सोने जाने से पहले दस मिनट तक नारियल तेल से अपने बालों और उसके जड़ों की अच्छी तरह से मालिश करें । सुबह उठकर बालों में शैम्पू कर लें । आप चाहे तो नारियल के तेल में नींबू का रस भी मिला सकते हैं । नींबू भी गंजेपन को रोकने में मदद करता है ।
  4. काली मिर्च : काली मिर्च गंजेपन के इलाज के लिए बहुत ही फायदेमंद है काली मिर्च और नींबू के बीजों को पहले एक साथ महीन पीस लें और फिर थोड़ा-सा पानी मिलकर उसका लेप तैयार कर लें । उसी लेप को अपने बालों की जड़ों पर अच्छे से फैलाकर लगायें । इसके निरंतर प्रयोग से कुछ ही दिनों में असर दिखने लगेगा ।
  5. मेथी के बीज : गंजेपन को दूर करने के लिए मेथी के बीज भी बहुत कारगर है । मेथी के बीजों में प्रोटीन (Protein) पाया जाता है जो बालों की जड़ों में पोषण पहुँचाता है । मेथी को बीजों को रातभर पानी में भीगोकर रखें । सुबह उन बीजों को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और उसी लेप को अपने सिर पर अच्छे से लगा लें । एक घंटे बाद अपने सिर और बालों को अच्छे-से धो लें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में असर दिखने लगेगा । इसके अलावा आप मेथी के बीजों को नारियल के तेल में भुन लें । फिर उस तेल को छानकर मेथी को अलग कर लें और उसी तेल को अपने बालों की जड़ों में लगाकर धीरे-धीरे मालिश करें । एक महीने तक इसके निरंतर प्रयोग से बाल झड़ने कम हो जायेंगे और सिर पर बाल भी उगने लगेंगे ।
  6. नींबू : नींबू में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा है जो बालों की विभिन्न समस्याओं को दूर करने में मदद करता है । गंजेपन से बचने के लिए आप पानी के साथ नींबू के रस को मिलाकर अपने सिर पर लगा सकते हैं । इसके अलावा नारियल तेल, अरंडी का तेल, एलोवेरा आदि के साथ भी नींबू का रस मिलाकर अपने बालों की जड़ों में लगा सकते हैं । इसके निरंतर प्रयोग से बालों का झड़ना कम हो जायेगा और बाल भी सुन्दर दिखने लगेंगे ।
  7. चकुंदर के पत्ते (Beetroot leaves) : चकुंदर के पत्ते गंजेपन को दूर करने की अचूक दवा है । चकुंदर के पत्तों को पानी में उबालें, जब वे काफी नर्म हो जाये तो उसे पानी से निकालकर उसमें मेहँदी के पत्ते मिलाकर मिक्सर (Mixer) में पीस लें और एक लेप तैयार कर लें । अब उसी लेप को अपने बालों और उसके जड़ों में लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें । सूखने के बाद अपने बालों को गुनगुने पानी से अच्छे से धो लें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में फर्क दिखने लगेगा ।
  8. प्याज : प्याज में मौजूद सल्फर (Sulphur) सिर में रक्त के प्रवाह को तेज करता है जिससे गंजेपन की समस्या ठीक हो सकती है । प्याज को काट लें, फिर उसे पीसकर उसका रस निकाल लें और उसमें थोड़ी-सी मात्रा में शहद मिलाकर एक लेप तैयार कर लें । फिर उसी लेप को अपने बालों और उसके जड़ों में लगायें । कुछ देर बाद अपने सिर और बालों को अच्छे से धो लें । प्याज जीवाणुओं को मारने में मदद करता है । इसके निरंतर प्रयोग से बाल झड़ने कम हो जायेंगे और नए बाल भी उगने लगेंगे ।
  9. दही : बालों के लिए दही बहुत ही उपयोगी है । यह गंजेपन को दूर करने में सहायक है । दही को अच्छे से फेंट लें, फिर उसे अपने बालों और उसके जड़ों पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें । सूखने के बाद पहले पानी से बालों को धो लें फिर बालों में शैम्पू कर लें । इसके अलावा आप दही में मेथी मिलाकर भी अपने बालों में लगा सकते हैं । रातभर मेथी के दानों को पानी में भीगोकर रखें । सुबह उन्हीं मेथी के दानों को पीस लें फिर उन्हें दही के साथ मिलाकर एक लेप तैयार कर लें । फिर उसी लेप को अपने बालों और उसके जड़ों में लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें । निर्धारित समय के बाद अपने बालों को पहले पानी से धो लें फिर बालों में शैम्पू कर लें । इन दोनों तरीकों से आप दही का इस्तेमाल कर सकते हैं । इसके निरंतर प्रयोग से बाल झड़ने कम हो जायेंगे और नए बाल भी उगने लगेंगे साथ ही आपके बाल आकर्षक दिखेंगे ।
  10. धनिया के पत्ते : धनिया के पत्ते व्यंजन को केवल आकर्षक और स्वादिष्ट ही नहीं बनाता बल्कि यह गंजेपन से राहत भी दिलाते है । ताजे धनिया के पत्तों को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और फिर उसी लेप को अपने सिर और बालों में लगायें । इसके निरंतर प्रयोग से बालों का झड़ना कम होने के साथ-साथ नए बाल भी उगने लगेंगे ।
  11. मुलेठी और केसर : मुलेठी और केसर गंजेपन को कम करने में मदद करते हैं । पहले एक जगह थोड़े से दूध में केसर भीगोकर रखें । फिर मुलेठी को पीस लें और उसमें केसर-सह दूध को मिलाकर एक लेप तैयार कर लें । रात को सोने जाने से पहले इसी लेप को अपने सिर पर अच्छे से लगा लें । सोते समय अपने सिर पर एक प्लास्टिक (Plastic) बांध लें ताकि लेप बिस्तर या तकिया पर न लगे । सुबह उठकर बालों में शैम्पू कर लें । हफ्ते में एक से दो बार इस उपचार को करने से धीरे-धीरे गंजापन दूर हो जायेगा ।
  12. आंवला : विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध आँवले में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो गंजेपन की समस्या को दूर करने में मदद करता है । एक चम्मच आँवले के रस में एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर अपने बालों की जड़ों में लगाकर अच्छे से मालिश करें ।
  13. अंडा : एक अंडे को अच्छे से फेंट लें और फिर उसमें थोड़ा-सा जैतून का तेल मिलायें । फिर उसे अपने बालों की जड़ों में लगाकर सूखने दें । सूखने के बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें और उसके बाद बालों में हल्का शैम्पू कर लें । हफ्ते में दो से तीन बार इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में बाल झड़ने कम हो जायेंगे ।
  14. अमरुद के पत्ते : अमरुद के पत्तों को एक लीटर पानी में तब तक उबालें जब तक पानी का रंग काला न हो जाए । फिर उस पानी को ठंडा करके छान लें और उसी पानी को अपने बालों की जड़ों में मालिश करते हुए लगायें । हफ्ते में दो से तीन बार इस उपचार को करने से बाल झड़ने कम हो जायेंगे, साथ ही बाल भी उगने लगेंगे ।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर गंजेपन से बचा जा सकता है । यदि किसी गंभीर बीमारी या संक्रमण के कारण असामान्य रूप से बाल झड़ रहे हो तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाएं । गंजेपन से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक हैं, जैसे :

  • गीले बालों को कंघी न करें ।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें ।
  • दिनभर में 6-7 गिलास पानी पीयें और 8 घंटे तक सोयें ।
  • रोजाना व्यायाम करें ।
  • अपने बालों में रासायनिक तत्वों का प्रयोग न करें ।
  • बाहर के खाने से परहेज करें ।
  • अपने खाने में हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें ।
  • हफ्ते में तीन से चार बार तेल से अपने सिर की मालिश करें ताकि आपके बालों को पोषण मिलें ।

खाज या एक्जिमा (Eczema) के घरेलू उपचार

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खाज या एक्जिमा एक प्रकार का चर्म रोग है। इस रोग में नमी के अभाव के कारण त्वचा शुष्क हो जाती है। शुष्कता के कारण जीवाणुओं के लिए त्वचा के भीतर घुसना आसान हो जाता है।गंभीर मामलों में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। समय पर इलाज न करवाने से यह शरीर में तेजी से फैलता है। यह किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकता है।इस रोग के कई लक्षण हैं, जैसे; खुजली होना और चमड़ी का लाल हो जाना एवं खुजाने पर लक्षण और भी तेज हो जाना; चमड़ी का सुखापड़ जाना और उससे पपड़ी निकलना; कभी-कभी खुजली के बाद फफोले आ जाना और फफोले के फूटने पर चमड़ी में एक चिकनापन आ जाना; कुछ विशिष्ट दवाइयों का प्रभाव, साबुन, शैम्पू तेल इत्यादि के प्रति चमड़ी का अतिसंवेदनशील हो जाना आदि।बहुदा लोगों में खाज या एक्जिमा की शुरुआत का मुख्य कारण एलर्जी होता है। साबुन, डिटर्जेंट, नेल पोलिश (Nail polish), क्रीम (Cream), कपड़ों के रोएँ, परफ्यूम (Perfume), मरकरी (Mercury), निकिल (Nickel)आदि।इसके अलावा गलत खान-पान, खून की खराबी, लीवर की खराबी आदि के कारण भी खाज की समस्या हो सकती है।

खाज या एक्जिमा के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. एलोवेरा (Aloe Vera) : एलोवेरा एक्जिमा या खाज की खुजली को शांत करके त्वचा को नमी प्रदान करने में सहायक होता है। एलोवेरा पौधे की एक पत्ती को काट लें।पत्ती को काटने के समय उसके नीचे से पीले रंग का रस निकलता है। पत्ते के उस भाग को काटकर फेंक दें।फिर उस पत्ती को बीच में से काटकर उसमें से जल जैसा रस निकाल लें।एक्जिमा ग्रस्त त्वचा पर उस रस को लगाकर सूखने दें। सूखने के बाद उस जगह को गुनगुने पानी से धो लें।आप नित्य प्रयोग के लिए एलोवेरा के कुछ पत्तों को फ्रिज में भी रख सकते हैं।इसके निरंतर प्रयोग से एक्जिमा की समस्या से राहत मिलेगी।
  2. जई या ओट्स (Oats) :जई में सूजन विरोधी और खुजली विरोधी तत्व हैं, जो एक्जिमा या खाज से राहत दिलाती है। आप थोड़ी-सी मात्रा में जई लेकर उसे पानी के साथ मिलाकर एक लेप तैयार कर लें। उसी लेप को एक्जिमा से प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।सूखने के बाद गुनगुने पानी से धो लें।इससे एक्जिमा की समस्या में बहुत फर्क पड़ेगा।इसके अलावा घुटनों तक लम्बे नायलॉन (Nylon) के मोज़े को जई से भरकर अपने बाथरूम के नल के साथ बांध दें ताकि नल खोलने पर पानी जई से होता हुआ बाल्टी में गिरे। फिर उसी पानी से नहाएं। इसके निरंतर प्रयोग से एक्जिमा की समस्या से राहत मिलेगी।
  3. जैविक (Organic) नारियल तेल :जैविक नारियल का तेल एक्जिमा को ठीक करने में मदद करता है।यह किसी भी मेडिकल स्टोर (Medical store), सुपरमार्केट (Supermarket) या हेल्थ फूड स्टोर (Health food store) में उपलब्ध है।इस बात की जांच जरुर कर लें कि उस जैविक नारियलतेल को 116 डिग्री से कम तापमान पर प्रोसेस (Process) किया गया हो, इससे तेल के पोषक तत्व, एंजाइम (Enzyme) और मिनरल्स (Minerals) सुरक्षित रहते हैं। इसे शीत दबाव जैविक नारियल तेल (Cold compressed organic coconut oil ) कहते है।इस तेल को प्रभावित क्षेत्रों और अपनी रुखी त्वचा पर लगाकर दस से पंद्रह मिनट तक छोड़ दें ताकि तेल आपकी त्वचा के भीतर अच्छे से समा जाये।यह तेल थोड़ी गाढ़ी होती है लेकिन आपकी त्वचा के संपर्क में आने से अच्छे से फैल जाता है।दिन में दो से तीन बार इस तेल का प्रयोग करें और तब तक प्रयोग करें जब तक आपको एक्जिमा या खाज की समस्या से राहत नहीं मिल जाती।इसके निरंतर प्रयोग से एक्जिमा के कारण होने वाली खुजली, सूजन और उसके दाग ठीक हो जाते हैं।
  4. नहाने के लिए गर्म पानी और बेकिंग सोडा (Baking soda):यदि आप एक्जिमा या खाज की समस्या के शिकार हैं तो रोजाना नहाने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें।ठंडा पानी आपकी त्वचा को रुखा बना देती है, वहीँ गुनगुने पानी से नहाने से आपकी त्वचा की नमी बनी रहेगी। खुजली को कम करने के लिए आप अपने नहाने के पानी में बेकिंग सोडा का प्रयोग कर सकते हैं।एक से डेढ़ चम्मच बेकिंग सोडा को बाल्टी भर गुनगुने पानी में मिलाकर नहाने से खुजली की समस्या से राहत मिलेगी।
  5. विटामिन ई कैप्सूल (Vitamin Ecapsule) :एक्जिमा की समस्या से राहत पाने के लिए आप विटामिन ई कैप्सूलका प्रयोग कर सकते हैं।किसी भी मेडिकल स्टोर (Medical store) में उपलब्ध विटामिन ई कैप्सूल खरीदकर उसे तोड़कर उसके भीतर के तेल को निकाल लें।फिर उसी तेल को प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।बेहतर परिणाम के लिए दिन में तीन बार इस उपचार का प्रयोग करें। इसके निरंतर प्रयोग से खाज की समस्या से राहत मिलेगी।
  6. शुद्ध शहद : त्वचा जनित समस्याओं के लिए शुद्ध शहद बहुत ही लाभदायक है। यह खाज की समस्या से भी छूटकारा दिलाता है।पहले आप प्रभावित क्षेत्रों को अच्छे से धोकर पोंछ लें। फिर शुद्ध शहद को सीधे एक्जिमा से प्रभावित क्षेत्रों पर लगाकर दस मिनट के लिए छोड़ दें।निर्धारित समय के बाद गुनगुने पानी से जगह को धो लें। बेहतर परिणाम के लिए दिन में तीन से चार बार इसका प्रयोग करें।
  7. हल्दी और नीम :त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए नीम और हल्दी रामबाण औषधि हैं।यह दोनों ही त्वचा की जलन, सूजन आदि समस्याओं को दूर करता हैं।कुछ साफ नीम के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें और उसी रस में एक चम्मच जैविक (Organic) हल्दी पाउडर मिलाकर एक लेप तैयार कर लें।अब इसी लेप में एक चम्मच जैविक (Organic) जैतून का तेल या जैविक नारियल का तेल मिला लें।फिर उस लेप को प्रभावित क्षेत्रों पर लगाकर तीस मिनट के लिए छोड़ दें।उसके बादहलके गर्म पानी से जगह को धो लें।निरंतर दस दिनों तक दिन में दो बार इस उपाय को करने से एक महीने में फर्क दिखेगा।
  8. सेब का सिरका :सेब के सिरके में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो एक्जिमा का बेहतरीन उपचार है।एक से दो चम्मच सेब के सिरके में उसी मात्रा में पानी मिलाकर उस मिश्रण को प्रभावित क्षेत्रों पर लगाकर तीस मिनट तक छोड़ दें। उसके बाद हलके गर्म पानी से जगह को धो लें।एक हफ्ते तक लगातार इसका प्रयोग करने से खाज की समस्या से राहत मिलेगी।
  9. सही भोजन खायें :अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सही खान-पान बहुत आवश्यक है।पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें. हरी सब्जियां, तरह-तरह के फल, सूखे मेवे, मछली आदि का सेवन करें।इससे आपका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और खाज की समस्या भी दूर हो जायेगी।एक्जिमा की समस्या होने परडेयरी उत्पादों (Dairy products) से परहेज करें, क्योंकि इस तरह का खाद्य एक्जिमा की समस्या को बढ़ा देता है।
  • सेंधा नमक (Epsom salt) : सेंधा नमक खाज और त्वचा के रूखेपन को कम करने में सहायक होता है। एक बाल्टी में हल्का गर्म पानी लेकर उसमें दो चम्मच सेंधा नमक और जैविक(Organic) जैतून के तेल या जैविक नारियल के तेल की कुछ बूंदे डालकर अच्छे से मिला लें।फिर उसी पानी से नहाएं।सेंधा नमक में मैग्नीशियम सल्फेट ( Magnesium Sulphate) होता है जो प्राकृतिक रूप से त्वचा की जलन और खुजली को कम करता है।इस प्रक्रिया से आपकी सूजन भी कम हो जायेगी।
  • जैविक (Organic) खीरा : खीरा एक्जिमा की जलन और खुजली को कम करके त्वचा को ठंडक पहुंचता है। आप खीरे को पतले और गोलाकार रूप में काटकर प्रभावित क्षेत्रों पर एक घंटे तक लगाकर रखियें ताकि खीरे का रस आपकी त्वचा में समा जाये। सूखने के बाद गुनगुने पानी से उस जगह को धो लीजिए या फिर नहा लीजिए।इसके अलावा खीरे का रस निकालकर रुई की मदद से उसे खाज पर लगा सकते हैं।निरंतर इसका प्रयोग करने से एक्जिमा या खाज की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
  1. शुद्ध जैतून का तेल : शुद्ध जैतून के तेल में सूजन विरोधी तत्व है जो खाज की समस्या और चमड़े का लाल होना कम करता है। पर्याप्त मात्रा में जैतून का तेल लेकर प्रभावित क्षेत्रों पर लगाकर तीन से चार के लिए छोड़ दें।उसके बाद तेल को अच्छे से अपनी त्वचा पर फैला दें ताकि तेल आपकी त्वचा में समा जाए।इसके बाद गुनगुने पानी में एक साफ कपड़ा भीगोकर उससे अपनी त्वचा पर लगाये गए तेल को अच्छे से पोंछ लें। निरंतर इस प्रक्रिया को करने से खाज या एक्जिमा की समस्या से राहत मिलेगी।

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उपर्युक्त घरेलू और प्राकृतिक नुस्खों का प्रयोग करके खाज की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन यदि इन उपायों का प्रयोग करके भी खाज की समस्या बनी रहती है या फिर खुजाने पर रक्त का स्राव होने लगता है तो तुरंत किसी चर्म विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाएं। खाज की समस्या होने पर उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ बातों पर ध्यान रखना आवश्यक हैं, जैसे :

  • आपको अगर किसी भी पदार्थ से एलर्जी है तो ऐसे पदार्थों से परहेज करें, चाहे वह खाद्य पदार्थ हो, धात्विक पदार्थ हो, कपड़े हो, सौन्दर्य के प्रसाधन हो या साबुन वगैरह हो।
  • धूल कण, मौसमी पराग कण, बालों की रुसी आदि एक्जिमा को उत्पन्न करने वाले कारक हैं।अतः ऐसे चीजों से सावधान रहें।अपने घर और आस-पास के वातारण को साफ रखें, साथ ही खुद को भी साफ-सुथरा रखें।
  • बैक्टीरिया, फंगस, वायरस से बचें। बीमार व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचे।
  • मानसिक तनाव और चिंता के कारण एक्जिमा बढ़ सकता है, अतः तनाव और चिंता से दूर रहें।
  • बार-बार नहाने से बचे, क्योंकि इससे त्वचा की नमी निकल जाती है और एक्जिमा की समस्या बढ़ सकती है।नहाने के बाद त्वचा में नमी बनाये रखने के लिए ऐसे किसी क्रीम या तेल का उपयोग करें जिससे आपको एलर्जी न हो।
  • पूरी नींद लें।इस बात का भी ध्यान रखें कि रात को जिस कमरे में आप सोयेंगे वहां अँधेरा और ठंडक रहें। सोते वक्त अपने मोबाइल को खुद से दूर रखें।
  • आपको किस वस्तु से एलर्जी है, यह जानने के लिए अच्छी जगह से अपना एलर्जी टेस्ट (Allergy test) करवाएं।

कमर दर्द से निजात पाने के लिए घरेलू उपचार

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आज के जीवन में कमर दर्द की समस्या एक आम और तकलीफदेह समस्या बन चुकी है।आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ शुरू होने वाली कमर दर्द की शिकायत अब 20-40 वर्ष के उम्र में ही लोगों को होने लगी है।चिकित्सकों के अनुसार पीठ का दर्द, पीठ की मांसपेशियों, डिस्क (Disk) और लिगामेंट्स (Ligaments) से जुड़ी 26 हड्डियों में से किसी पर भी असर डाल सकता है।कमर का दर्द व्यक्ति की कार्यक्षमता को कई गुना तक घटा देता है। आज की जीवन शैली के कारण अधिकतर लोग इसके शिकार हो चुके हैं। कमर दर्द होने के कई कारण हैं, जैसे :

  • आज के तकनीकी युग में प्रायः सभी लोग आधुनिक उपकरणों जैसे मोबाइल (Mobile), लैपटॉप (Laptop), कंप्यूटर (Computer), आदि का प्रयोग करते हैं, कहीं-न-कहीं यह उपकरण उनके जीवन का अंग बन चुके हैं। लेकिन इनका उपयोग करते समय कोई भी स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर ध्यान नहीं देता, और उनके बैठने की मुद्रा भी सही नहीं होती, फलतः बाद में कमर दर्द के रूप में इसका नतीजा भुगतना पड़ता है।
  • आज के फैशन ने युवा वर्ग को अत्यधिक प्रभावित किया है।आज तो तंग (Tight) कपड़ों का जमाना है, तंग शर्ट (Shirt), तंग जींस (Jeans), ऊँची एड़ी के जूते या चप्पल(High Heel Shoes) आदि।लेकिन इस तरह के पहनावे के कारण हमारी मांसपेशियों में रक्त के संचार में बाधा उत्पन्न होती है जिससे कमर दर्द सहित अन्य परेशानियाँ सामने आती हैं।
  • गाड़ी चलाते समय अगर सीट और स्टीयरिंग के बीच सही दूरी न हो तो इसके कारण भी कमर में दर्द हो सकता है।
  • मोटापे के कारण भी कमर में दर्द हो सकता है।बाहर का अस्वास्थ्यकर खाद्य खाने या पीने से, कैफीन युक्त खाद्य का सेवन करने से, धूम्रपान और मद्यपान करने से वजन बढ़ता है, जिससे कमर दर्द की समस्या हो सकती है।
  • अपनी पीठ पर अधिक बोझ लेने से या भारी सामान उठाने से पीठ और कमर दर्द की समस्या हो सकती है।
  • किसी प्रकार का चोट लगने के कारण या रीढ़ की हड्डी खिसकने के कारण भी कमर में दर्द हो सकता है।
  • बहुत अधिक मानसिक तनाव, दबाव, चिंता और थकावट के कारण पीठ की पेशियों में तनाव पैदा हो जाता है जो पीठ और कमर दर्द का कारण बनता है।

कमर दर्द के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. योगाया व्यायाम : कमर के दर्द से निजात पाने के लिए योगा या व्यायाम सबसे अच्छा उपाय है।किसी विशेषज्ञ से कमर दर्द के लिए व्यायाम सीखकर उसे रोजाना करने से एक महीने में ही दर्द में फर्क पड़ेगा। मकरासन, भुजंगासन, हलासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन जैसे योगासन कमर दर्द के लिए बहुत ही फायदेमंद हैं।पर ध्यान रहें कि ये सभी योगासन किसी विशेषज्ञ के निरीक्षण में सीखकर ही करें।
  2. लैवेंडर का तेल (Lavender oil) : लैवेंडर का तेल मांसपेशियों के दर्द को कम करता है।हांगकांग विश्वविद्यालयके शोधकर्ताओं ने पाया कि कमर दर्द के लिए लैवेंडर का तेल एक प्राकृतिक उपचार है। यह तेल पुराने और तेज पीठ दर्द को ठीक करने में सहायक है। हर रात सोने से पहले इस तेल से मसाज कर सकते हैं। बेहतर हो कि कोई दूसरा ये मसाज करें, इससे आराम मिलेगा और इस प्रक्रिया को निरंतर करने से एक ही महीने में कमर के दर्द में फर्क पड़ेगा।इसके अलावा एक टब हल्के गर्म पानी में लैवेंडर के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर खुद उसी पानी में आधे घंटे के लिए बैठ जायें या लेट जायें। रोजाना दिन में एक बार इस प्रक्रिया को करने से भी कमर का दर्द कम हो जायेगा। इसके अतिरिक्त दो चम्मच जैतून के तेल में कुछ बूंदे लैवेंडर का तेल मिलाकर उसे हल्का गर्म कर लें और उसी से कमर पर दिन में दो बार मालिश करने से दर्द कम हो जाता है।
  3. अदरक :अदरक में कमर के दर्द से राहत दिलाने की क्षमता है।थोड़ी-सी मात्रा में अदरक पीसकर उसका लेप तैयार कर लें, फिर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में नीलगिरी का तेल (Eucalyptus Oil) मिलाकर उसे प्रभावित क्षेत्रों पर लगाने से कमर के दर्द से राहत मिलेगी।इसके अलावा आप अदरक की चाय भी पी सकते हैं।थोड़ी-सी मात्रा में अदरक को बारीक काटकर उसे एक कप पानी के साथ 10-15 मिनट तक उबाले।थोड़ा ठंडा करके उसे छान लें। फिर उसमें एक चम्मच शहद डालकर दिन में दो-तीन बार पीने से कमर दर्द से राहत मिलती है।
  4. तुलसी के पत्ते : तुलसी मांसपेशियों के दर्द को ठीक करने में मदद करता है। 8 से 10 साफ और ताजे तुलसी के पत्तों को एक कप पानी में तब तक उबालें जब तक की पानी घटकर आधा न हो जाये। फिर उस पानी को थोड़ा ठंडा करके उसमें एक चुटकी नमक डालकर उसका सेवन करें। हल्के दर्द के लिए इस पेय को दिन में एक बार पीयें और तेज दर्द के लिए दिन में दो बार पीयें।इससे कमर के दर्द में फर्क पड़ेगा।
  5. खसखस : खसखस कमर के दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है। सौ ग्राम खसखस और सौ ग्राम मिश्री को एक साथ पीसकर एक डब्बे में रख लें।रोजाना दिन में दो बार एक गिलास हल्के गर्म दूध के साथ दो चम्मच इस मिश्रण को लेने से कमर और पीठ दर्द की समस्या दूर हो जायेगी।
  6. लहसुन : लहसुन भी मांसपेशियों के दर्द को दूर करने में मददगार है। रोजाना नियमित रूप से सुबह खाली पेट दो लहसुन की कलियाँ खाने से हर किस्म का दर्द ठीक जाता है।इसके अलावा आप एक कटोरी में नारियल का तेल या सरसों का तेल अथवा तिल का तेल गर्म करके उसमें आठ से दस लहसुन की कलियाँ डालकर धीमी आँच पर तब तक पकायें जब तक कि लहसुन भूरे न हो जायें।ठंडा होने पर उस तेल को छान लें और उसी तेल से प्रभावित क्षेत्रों पर मालिश करवाएं।ऐसा निरंतर करने से कमर दर्द से राहत मिलेगी।
  7. गेंहू :गेंहू दर्दनाशक औषधि है, यह मांसपेशियों के दर्द को कम करता है। रातभर एक मुट्ठी गेंहू पानी में भीगोकर रखें।सुबह उसे खसखस घास और धनिया के साथ पीस लें।फिर उस मिश्रण को एक कप दूध में मिलाकर तब तक उबालें जब तक कि दूध गाढ़ी न हो जायें। रोजाना दिन में दो बार इस मिश्रण को पीने से कमर दर्द से राहत मिलेगी।
  8. गर्म सेंक : गर्म सेंक देने से भी मांसपेशियों की नसों को काफी आराम मिलता है। गर्म सेंक के लिए आप हॉट पैड (Hot pad), हॉट वाटर बैग (Hot water bag) या नमक की पोटली का भी प्रयोग कर सकते हैं।नमक की पोटली को गर्म तवे पर रखकर गर्म करके उससे सेंक दे सकते है।ठंडा होने पर दुबारा पोटली को गर्म कर लें।पांच से दस मिनट तक सेंक देने से आपको राहत महसूस होगी।
  9. हल्दी : हल्दी में दर्द को कम करने का गुण है।एक कप दूध में एक चम्मच हल्दी का पाउडर मिलाकर उसे धीमी आँच पर गर्म होने दें और फिर उसी दूध का सेवन करें।हल्दी आपके मांसपेशियों को मजबूत करके अंदरूनी दर्द को कम करता है।वैकल्पिक तौर पर बराबर मात्रा में पीसी हुई हल्दी को नींबू के रस और नमक के साथ मिलाकर एक लेप तैयार करें। फिर उस लेप को अच्छी तरह से प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें। आधे घंटे बाद हल्के गर्म पानी से धो लें। इस लेप का प्रयोग रोजाना दिन में दो बार करें और तब तक करें जब तक आपका दर्द चला नहीं जाता।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों का प्रयोग करके आपको कमर के दर्द से राहत मिलेगी। उपर्युक्त सभी नुस्खें आपके स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।लेकिन यदि इन नुस्खों को अपनाकर भी दर्द में कोई फर्क न पड़े तो आप किसी अच्छे हड्डी के डॉक्टर की सलाह लें और उपयुक्त जाँच करवाएं। लेकिन साथ ही छोटी-छोटी  बातों का ध्यान जरुर रखें, जैसे :

  • अपने बैठने का तरीका सही करें।ऑफिस हो या घर, यहां तक कि गाड़ी चलाते समय भी आपके बैठने की मुद्रा सही होनी चाहिए, अन्यथा आपके कमर में दर्द हो सकता है।कोशिश करें कि आपकी पीठ हमेशा सीधी रहेंऔर अपने कमर पर ज्यादा प्रभाव न डालें।
  • एक अच्छी दिनचर्या आपके लिए चीजे आसान कर सकती है, इसलिए अपनी दिनचर्या में शारीरिक व्यायाम, सही भोजन और पर्याप्त मात्रा में पानी को शामिल करें। उपयुक्त भोजन में हरी सब्जियाँ, मछली, दाल आदि खाद्य के साथ विटामिन सी (Vitamin C), विटामिन बी (Vitamin B), कैल्शियम (Calcium) और फॉस्फोरस (Phosphorus) से भरपूर आहार का सेवन करें।
  • ज्यादा झुककर काम न करें।पढ़ते समय, लैपटॉप पर काम करते समय या मोबाइल का प्रयोग करते समय अपनी पीठ, गर्दन और कंधे पर ज्यादा प्रभाव न डालें।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।तंबाकू में निकोटिन होता है जिससे कमर और पीठ दर्द की समस्या बढ़ती हैं और मद्यपान करने से आपका वजन बढ़ता है और साथ ही इसके कारण आपका दर्द जल्दी ठीक नहींहोता।
  • एक ही मुद्रा में लगातार ज्यादा समय तक न बैठे, बीच-बीच में स्ट्रेचिंग (Stretching) करते रहें और अपने बैठने की मुद्रा भी बदलते रहें।ज्यादा देर तक कुर्सी पर एक ही मुद्रा में बैठना कमर के लिए सही नहीं होता।ळएक-आध घंटे के अन्तराल में थोड़ी देर के लिए टहल लेना चाहिए।
  • यदि आपके कमर पर कोई चोट लगी हो या बहुत ज्यादा दर्द हो, तो ऐसे में पहले दर्द कम करके फिर व्यायाम करें।
  • कुछ मामलों में देखा गया है कि अत्यधिक तनाव के कारण कमर में दर्द हो सकता है।अतः मानसिक तनाव और चिंता से दूर रहें।
  • यदि कमर में दर्द हो, तो ज्यादा से ज्यादा आराम करें और भारी वजन बिल्कुल न उठाये।
  • नहाने के पानी को हल्का गर्म कर लें।ठन्डे पानी से कमर का दर्द बढ़ सकता है।
  • कमर दर्द होने पर नर्म गद्देदार बिस्तर या कुर्सी पर बिल्कुल न बैठे, इससे दर्द बढ़ सकता है।

कब्ज के लिए घरेलू उपचार

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कब्ज एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का पेट ठीक से साफ नहीं होता है और मल त्याग करते समय कष्ट भी होता है । जहाँ आम तौर पर लोग दिन में कम से कम एक बार शौच करते हैं वहीँ कब्ज का मरीज दो या उससे भी ज्यादा दिनों तक मल त्याग नहीं कर पाता । आधुनिक जीवन शैली और खान-पान के कारण कब्ज एक आम समस्या बन गयी है । यह समस्या केवल बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि बच्चों और युवाओं में भी देखी जा रही है । कब्ज के रोगियों का पेट ठीक से साफ न होने के कारण उनमें भोजन के प्रति अरुचि हो जाती है । कुछ लोगों को कब्ज के कारण उल्टी भी हो जाती है और सिर में दर्द बना रहता है । कब्ज होने पर यदि लम्बे समय तक कब्ज का इलाज न किया जाये तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं । कब्ज के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

Constipation

  • अधिक मात्रा में तेल, मसालेदार एवं बाहर का पोषण रहित खाना खाने से कब्ज की समस्या हो सकती है । फाइबर (Fiber) युक्त खाना न खाने से भी यह समस्या हो सकती है ।
  • अपनी भूख से काफी कम मात्रा में आहार लेने से हमारा पाचन तंत्र प्रभावित होता है और कब्ज की समस्या देखी जा सकती है ।
  • आहार को ठीक से चबाकर न खाने से कब्ज की समस्या उत्पन्न हो सकती है ।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने के कारण हमारा पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और कब्ज की समस्या हो सकती है ।
  • किसी तरह की बीमारी जैसे, थाइरोइड (Thyroid), मधुमेह (Diabetes), हर्निया (Hernia), पित्ताशय में पथरी (Gall bladder stone) आदि भी कब्ज के कारण हो सकते हैं ।
  • कुछ दवाओं का अधिक सेवन करने से कब्ज की समस्या हो सकती है, खासकर वो दवाइयाँ जो कैल्शियम कार्बोनेट (Calcium carbonate) एवं आयरन (Iron) से युक्त होती हैं ।
  • अत्यधिक मात्रा में कैफीन (Caffeine) युक्त पेय एवं कोल्डड्रिंक (Cold drink) का सेवन करने से कब्ज हो सकता है ।
  • धूम्रपान, मद्यपान, तंबाकू आदि के सेवन से भी कब्ज हो सकता है ।
  • मल त्याग का वेग आने पर यदि आप उसे किसी कारण से टालते हैं और अगर ये निरंतर करते हैं तो इससे कब्ज की समस्या हो सकती है ।
  • रात के खाने के तुरंत बाद सो जाने से खाना अच्छे से नहीं पचता और इससे भी कब्ज की समस्या हो सकती है ।

कब्ज दूर करने के घरेलू उपाय

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  1. त्रिफला का चूर्ण : आंवला, हरीतकी और विभीतकी के चूर्ण से त्रिफला बनता है । रात को सोने जाने से पहले एक कप गुनगुने पानी में एक छोटा चम्मच त्रिफला का चूर्ण मिलाकर सेवन कर सकते है अथवा शहद के साथ भी इस चूर्ण को लिया जा सकता है । इसके निरंतर सेवन से पाचन क्रिया संतुलित रहती है और कब्ज से राहत मिलती है ।
  2. अलसी के बीज (Flax seed) : अलसी के बीज में फाइबर (Fiber) की मात्रा अधिक होती है इसलिए ये कब्ज की समस्या को दूर करने में सहायक है । दो चम्मच अलसी के बीज को सुबह गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं । पहले अलसी के बीज को चबा लीजिए फिर पानी पी लीजिए । इसके अलावा कुछ अलसी के बीजों को तवे पर सूखा भुनकर और फिर पीसकर चूर्ण बना लें, फिर उसी चूर्ण में से करीबन 20 ग्राम चूर्ण को एक गिलास पानी में लगभग 3 घंटे तक भीगोकर रखें और फिर उसे छानकर पीयें । इससे कब्ज से राहत मिलेगी ।
  3. किशमिश : किशमिश फाइबर (Fiber) से भरपूर होती है और साथ ही यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है । एक गिलास पानी में दो चम्मच किशमिश रातभर भीगोकर रखें, सुबह खाली पेट उसी किशमिश को खा लें । गर्भवती महिलाओं को जब कब्ज हो जाता है तो उनके लिए यह उपचार बहुत ही लाभदायक है ।
  4. अंजीर : अंजीर में भी फाइबर (Fiber) की मात्रा अधिक होती है । एक गिलास दूध में अंजीर के कुछ टुकडों को उबालें और रात को सोने जाने से पहले गर्म-गर्म ही अंजीर सह उस दूध को पीयें । कब्ज से राहत पाने के लिए यह उपचार बहुत ही उपयोगी है । इसके अलावा आप रातभर अंजीर को एक गिलास पानी में भीगोकर रखें और सुबह खाली पेट अंजीर सह उस पानी को पीयें ।
  5. मुनक्का : मुनक्का में कब्ज नष्ट करने के तत्व मौजूद हैं । रोजाना रात को सोने जाने से पहले 6-7 मुनक्का खायें, इससे कब्ज की समस्या दूर हो जाती है ।
  6. नींबू : नींबू पेट को साफ करता है । हर सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस और थोड़ा-सा नमक मिलाकर पीयें । इससे शरीर के खराब तत्व बाहर निकल जाते हैं और इसके निरंतर सेवन से कब्ज की समस्या से भी राहत मिलती है । आप नींबू पानी में अदरक का रस और शहद मिलाकर भी पी सकते हैं ।
  7. संतरा : संतरा सिर्फ विटामिन सी (Vitamin C) का ही मुख्य स्रोत नहीं है बल्कि इसमें फाइबर (Fiber) की भी भरपूर मात्रा होती है । रोजाना सुबह और शाम एक-एक संतरा खाने से कब्ज की बीमारी से राहत मिलती है ।
  8. पालक : पालक पेट से खराब तत्वों को बाहर निकालकर पेट को साफ करने में मदद करता है । 100 मि.ली. पालक के रस में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर पीयें । दिन में दो बार पालक का रस पीने से कब्ज में फर्क पड़ता है ।
  9. बीजों का मिश्रण : बीजों में फाइबर (Fiber) की भरपूर मात्रा होती है जो कब्ज के लिए लाभदायक है । दो से तीन सूरजमुखी के बीजों को कुछ अलसी के बीज, तिल और बादाम (Almond) के साथ पीसकर एक मिश्रण तैयार कर लें । एक सप्ताह तक रोजाना इस मिश्रण का सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर हो जायेगी । इस चूर्ण को आप सलाद के ऊपर छिड़ककर भी ले सकते है ।
  10. अमरुद : अमरुद के गूदे और बीज में फाइबर (Fiber) की उचित मात्रा होती है । अमरुद खाने को पचाने में मदद करता है साथ ही यह पेट को भी साफ करता है । यह शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है । रोजाना एक अमरुद का सेवन करने से कब्ज में फर्क पड़ता है ।
  11. अरंडी का तेल (Castor oil) : सदियों से कब्ज के लिए अरंडी के तेल का प्रयोग होता आया है । रात को सोने जाने से पहले हलके गर्म दूध में एक चम्मच अरंडी का तेल मिलाकर पीयें । इस उपचार को निरंतर करने से पेट साफ होगा और कब्ज भी समस्या भी खत्म हो जायेगी ।
  12. व्यायाम : कब्ज की समस्या से निजात पाने के लिए व्यायाम बहुत ही लाभदायक है । धनुरासन, कपालभाती, अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम के द्वारा कब्ज से छुटकारा मिल सकता है । बेहतर है कि आप किसी योगा विशेषज्ञ से कब्ज के लिए व्यायाम सीखकर उसे रोजाना करें । इससे कब्ज की समस्या से तो राहत मिलेगी ही साथ ही आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा ।
  13. शहद : शहद पेट को साफ करता है । रोजाना सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से कब्ज की समस्या से निजात पाया जा सकता है ।
  14. पत्ता गोभी : कब्ज के लिए पत्ता गोभी बहुत ही फायदेमंद है । पत्ता गोभी के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें । रोजाना दिन में आधा गिलास उसी रस को पीने से कब्ज की समस्या से राहत मिलेगी ।
  15. बेकिंग सोडा (Baking soda) : बेकिंग सोडा कब्ज की समस्या से निजात दिलाने में सहायक है । एक चौथाई कप गुनगुने पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर पीने से पेट साफ होगा और कब्ज से भी राहत मिलेगी ।
  16. इशब्गुल : कब्ज के लिए इशब्गुल रामबाण इलाज है । 125 ग्राम दही में 10 ग्राम इशब्गुल मिलाकर सुबह और शाम लेने से कब्ज में आराम मिलता है । आप रात को सोने जाने से पहले दूध या पानी में इशब्गुल मिलाकर भी उसका सेवन कर सकते हैं ।
  17. दही : कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए दही एक बेहतरीन उपाय है । दही में प्रो-बायोटिक (Pro biotic) तत्व है जो कब्ज के लिए लाभदायक है । रोजाना एक से दो कप दही का सेवन करने से कब्ज में फर्क पड़ता है ।
  18. पपीता : पपीते में पर्याप्त मात्रा में फाइबर (Fiber) होता है जो कब्ज को ठीक करने में मदद करता है । आप कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर भी खा सकते है या पके हुए पपीते का भी सेवन कर सकते है ।
  19. जैतून का तेल : जैतून का तेल पाचन तंत्र को उत्तेजित करके पेट को साफ करने में मदद करता है । सुबह खाली पेट एक चम्मच जैतून के तेल में थोड़ा-सा नींबू का रस मिलाकर पीयें । यह उपचार कब्ज से राहत दिलाने में मददगार है ।
  20. सौंठ, काला नमक और अजवाइन : सौंठ, अजवाइन और काला नमक को समान मात्रा में मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर ले । रोजाना सुबह और रात को सोने जाने से पूर्व एक-एक चम्मच इसी मिश्रण को गुनगुने पानी के साथ लेने से कब्ज की समस्या से राहत मिलेगी ।                                     

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों का प्रयोग करके कब्ज की समस्या से निजात पाया जा सकता है । कब्ज को नियंत्रित करने के लिए इन उपचारों के साथ कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक हैं, जैसे :

  • मैदा, मसालेदार खाना, दुकान का पहले से बना हुआ खाना या प्रोसेस्ड फूड (Processed food) से परहेज करें ।
  • खाना खाने के लगभग आधे घंटे बाद पानी पीयें और रोजाना 7-8 गिलास पानी पीयें ।
  • रात को सोने जाने के लगभग 3-4 घंटे पहले अपना आहार लें इससे आपका पाचन तंत्र सही रूप में कार्य करेगा ।
  • अपने खाद्य में जीरा, हल्दी, अजवाइन जैसे मसालों का प्रयोग करें ।
  • अपने आहार में सब्जियों और फलों को शामिल करें ।
  • रोजाना नियमित रूप से व्यायाम करें ।
  • कैफीन युक्त पेय, धूम्रपान, मद्यपान से परहेज करें ।

कंधे के दर्द लिए घरेलू उपाय

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आज की जीवन शैली में कंधे का दर्द एक आम शिकायत है।कंधे का दर्द किसी भी उम्र में हो सकता है।कंधे का दर्द दिनभर की गतिविधियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।अधिक समय तक झुककर या लम्बे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करने के कारण कंधे में दर्द हो सकता है।वास्तव में हमारा कन्धा तीन हड्डियों से बना हैं।ऊपरी बाँह की हड्डी, कंधे की हड्डी और हंसली। ऊपरी बाँह की हड्डी का सबसे ऊपर वाला हिस्सा कंधे के ब्लेड या स्कैपुला (Blade/Scapula) के एक गोल सॉकेट (Socket) में जुड़ा रहता है।यह सॉकेट ग्लेनोएड लैब्रम (GlenoidLabrum) कहलाता है। मांसपेशियों और टेंडॉन्स (Tendons) का संयोजन बाँह की हड्डी को कंधे के सॉकेट में केन्द्रित रखता है।ये ऊतक (Muscles) रोटेटर कफ (Rotator Cuff) कहलाते हैं। अक्सर कंधे की समस्याओं का प्राथमिक कारण रोटेटर कफ में पाये जाने वाले आसपास के कोमल ऊतक का बढ़ते उम्र के साथ प्राकृतिक रूप से बिगड़ना है। कंधों में होने वाली इस जकड़न को फ्रोजेन शोल्डर (FrozenShoulder) नाम से जाना जाता है।इस दर्द का आसानी से पता नहीं चलता। फ्रोजेन शोल्डर में कंधों की हड्डियों को हिलाना मुश्किल हो जाता है।फ्रोजेन शोल्डर की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दुगुनी पाई जाती है।

Closeup of young shirtless man with shoulder pain over white background
Closeup of young shirtless man with shoulder pain over white background

फ्रोजेन शोल्डर जिसे चिकित्सकीय भाषा में आसंजी सम्पुट प्रदाह अथवा कैप्सुलाइटीस कहा जाता है, एक विकार है जिसमें कंधे का कैप्सूल (Capsule) कंधे के असंगत तथा प्रगंडिका संबंधी जोड़ को घेरने वाला संयोजी ऊतक सूज जाता है एवं कठोर बन जाता है जो गति पर रोक लगाकर तीव्र दर्द को उत्पन्न करता है।सर्दियों के दौरान यह दर्द बढ़ जाता है।फ्रोजेन शोल्डर के पहले चरण में व्यक्ति को कंधे में दर्द होता है।दूसरे चरण में कंधे को हिलाने-डुलाने या कोई काम करने में परेशानी होती है। तीसरे चरण में कंधे की गति बिल्कुल अवरुद्ध हो जाती है।इसके अतिरिक्त 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में रोटेटर कफ की समस्या ज्यादा पाई जाती है।रोटेटर कफ के शिकार व्यक्ति को कंधे के ऊपर और बाहर की ओर के तिकोने पेशी पर दर्द महसूस होता है। कपड़े पहनने में या हाथ ऊपर उठाने में दर्द होता है साथ ही कन्धा हिलाने पर चटक-सी आवाज सुनाई देती है।

कंधे के दर्द लिए घरेलू नुस्खें

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  1. बर्फ से उपचार : कंधे पर होने वाले दर्द पर बर्फ से सिंकाई करने से दर्द में आराम मिलता है।यदि कंधे पर कोई चोट लगी हो या सूजन आ गयी हो, तो ऐसे में बर्फ से उपचार करने से ज्यादा आराम मिलता है और सूजन भी कम हो जाती है।एक कपड़े में कुछ बर्फ के टुकड़े लेकर दर्द वाले जगह पर पाँचसे दस मिनट तक सेंक देने से दर्द का एहसास कम होगा।इस प्रक्रिया को लगातार कुछ दिनों तक दिन में तीन से चार बार करने से आपका दर्द बहुत कम हो जायेगा और आपको काफी राहत महसूस होगी।
  2. गर्म सेंक : गर्म सेंक देने से भी मांसपेशियों की नसों को काफी आराम मिलता है। गर्म सेंक के लिए आप हॉट पैड (Hot pad), हॉट वाटर बैग (Hot water bag) या नमक की पोटली का भी प्रयोग कर सकते हैं।नमक की पोटली को गर्म तवे पर रखकर गर्म करके उससे सेंक दे सकते है। ठंडा होने पर दुबारा पोटली को गर्म कर लें। पांच से दस मिनट तक सेंक देने से आपको राहत महसूस होगी।यदि कंधे पर चोट लगी हो तो चोट लगने के 48 घंटे बाद गर्म सेंक देना चाहिए।
  3. सेंधा नमक (Epsom salt):सेंधा नमक दर्द को कम करने में सहायक होता है।एक टब में हल्का गर्म पानी लेकर उसमें एक या दो कप सेंधा नमक डालें।फिर उसी पानी में पंद्रह मिनट के लिए खुद बैठ जायें। सेंधा नमक में मैग्नीशियम सल्फेट ( Magnesium Sulphate) होता है जो प्राकृतिक रूप से दर्द को कम करके आपकी मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है।इस प्रक्रिया से आपकी सूजन भी कम हो जायेगी।हफ्ते में कम से कम तीन बार इस प्रक्रिया को करने से आपका दर्द कम हो जायेगा।
  4. हल्दी : हल्दी में दर्द को कम करने का गुण है। एक कप दूध में एक चम्मच हल्दी का पाउडर मिलाकर उसे धीमी आँच पर गर्म होने दें और फिर उसी दूध का सेवन करें। हल्दी आपके मांसपेशियों को मजबूत करके अंदरूनी दर्द को कम करता है। वैकल्पिक तौर पर बराबर मात्रा में पीसी हुई हल्दी को नींबू के रस और नमक के साथ मिलाकर एक लेप तैयार करें।फिर उस लेप को अच्छी तरह से प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।आधे घंटे बाद हलके गर्म पानी से धो लें।इस लेप का प्रयोग तब तक दिन में दो बार करें जब तक आपका दर्द चला नहीं जाता।
  5. अदरक : अदरक में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो दर्द और सूजन से राहत देता है।अदरक आपकी मांसपेशियों के दर्द को दूर करने में काफी असरदार है।कंधे के दर्द से निजात पाने के लिए रोजाना नियमित रूप से दो से तीन कप अदरक की चाय का सेवन करें।इसके अतिरिक्त चार चम्मच ताजी पीसी हुई अदरक एक सूती के कपड़े में डालकर अच्छे से बांधकर एक पोटली बना लें।फिर उस पोटली को एक मिनट से कुछ कम समय तक गर्म पानी में डालकर निकाल लें। फिर पोटली को ठंडा होने दे और फिर उसका प्रयोग पंद्रह मिनट तक प्रभावित भागों पर करें। कुछ दिनों तक दिन में दो बार इसका प्रयोग करने से कंधे का दर्द कम हो जायेगा।
  6. जैतून का तेल (Olive oil) :जैतून का तेल कंधे के दर्द से राहत दिलाता है।इस तेल को लगाने से रक्त का संचार अच्छे से होता है जिससे जड़ता, दर्द और सूजन कम हो जाते हैं। थोड़ा-सा जैतून का तेल लेकरगर्म कर लें। फिर उसी तेल से कंधों पर मालिश करें। अच्छा हो यदि कोई दूसरा व्यक्ति मालिश करे दें। रोजाना दस मिनट तक मालिश करने से दर्द से राहत मिलेगी
  7. काला तिल : काले तिल में कैल्शियम (Calcium) और मैग्नीशियम (Magnesium) हैं जो हड्डियों और मांसपेशियों के लिए अच्छा होता है।इसके अतिरिक्त इसमें कॉपर (Copper) और जिंक (Zinc) जैसे मिनरल्स (Minerals) भी हैं जो सूजन को कम करने में मदद करता है।एक गिलास पानी में एक मुट्ठी साफ काला तिल रातभर भीगोकर रखें।सुबह काले तिल सहित उसी पानी का सेवन करें।कुछ दिनों तक इस प्रक्रिया को दोहराने से दर्द कम होता है। इसके अतिरिक्त आप काले तिल को सूखा भुनकर पीस लें और फिर उसे अपने सलाद, सूप या दही में छिड़ककर भी उसका सेवन कर सकते हैं।
  8. पुदीना : पुदीना दर्द वाले भागों में ठंडक पंहुचाकर दर्द से राहत दिलाती है। पुदीना के कुछ ताजे पत्ते लेकर उसे पीस लें, फिर उसमें थोड़ा-सा पानी मिलाकर एक लेप तैयार कर लें। उस लेप को दर्द वाले भागों पर लगायें।इसके निरंतर प्रयोग से सूजन और दर्द कम हो जायेगा।
  9. लैवेंडर का तेल : लैवेंडर का तेल मांसपेशियों के दर्द को कम करता है। एक टब में हल्का गर्म पानी लेकर उसमें लैवेंडर के तेल की कुछ बूंदें मिलायें। फिर खुद उसी पानी में आधे घंटे के लिए बैठ जायें। रोजाना दिन में एक बार इस प्रक्रिया को करने से कंधे का दर्द और सूजन कम हो जायेगा।इसके अतिरिक्त दो चम्मच जैतून के तेल में कुछ बूंदे लैवेंडर का तेल मिलाकर, उससे कंधों पर दिन में दो बार मालिश करने से दर्द कम हो जाता है।

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  • व्यायाम :कंधे के दर्द से निजात पाने के लिए व्यायाम सबसे अच्छा उपाय है।किसी विशेषज्ञ से कंधे के दर्द के लिए व्यायाम सीखकर उसे रोजाना करने से एक महीने में ही दर्द में फर्क पड़ेगा।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों का प्रयोग करके आपको कंधे के दर्द से राहत मिलेगी। उपर्युक्त सभी नुस्खें आपके स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।लेकिन यदि इन नुस्खों को अपनाकर भी दर्द में कोई फर्क न पड़े तो आप किसी अच्छे हड्डी के डॉक्टर की सलाह लें और उपयुक्त जाँच करवाएं।लेकिन साथ ही छोटी-छोटी  बातों का ध्यान जरुर रखें,जैसे :

  • अपने बैठने का तरीका सही करें।ऑफिस हो या घर, आपके बैठने की मुद्रा सही होनी चाहिए अन्यथा आपको कंधों के दर्द का सामना करना पड़ सकता है।अपनी पीठ को हमेशा सीधी रखें और अपने गर्दन और कंधे पर ज्यादा प्रभाव न डालें।
  • एक अच्छी दिनचर्या आपके लिए चीजे आसान कर सकती है, इसलिए अपनी दिनचर्या में शारीरिक व्यायाम, सही भोजन और पर्याप्त मात्रा में पानी को शामिल करें।
  • कुछ मामलों में देखा गया है कि अत्यधिक तनाव के कारण कंधों में दर्द होता है।अतः मानसिक तनाव और चिंता से दूर रहें।
  • ज्यादा झुककर काम न करें। पढ़ते समय या मोबाइल का प्रयोग करते समय अपने गर्दन और कंधे पर ज्यादा प्रभाव न डालें।
  • गाड़ी चलाते समय बार-बार ब्रेक (Break) लगाने की जरुरत पड़ती है जिससे शरीर की एलाइनमेंट (Alignment) पर असर पड़ता है और इसका खामियाजा आपको कंधे के दर्द के रूप में भुगतना पड़ता है।इसलिए गाड़ी चलाते समय सावधानी बरतना आवश्यक है। इस बात का ध्यान रखें कि गाड़ी चलाते समय आपके गर्दन और कंधे पर ज्यादा जोर न पड़े।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें क्योंकि इसके कारण आपका दर्द जल्दी ठीक नहीं होगा और आपको लम्बे समय तक कंधे के दर्द को सहना पड़ सकता है।
  • एक ही मुद्रा में लगातार ज्यादा समय तक न बैठे, बीच-बीच में स्ट्रेचिंग (Stretching) करते रहें और अपने बैठने की मुद्रा भी बदलते रहें।
  • यदि आपके कंधे पर कोई चोट लगी हो या बहुत ज्यादा दर्द हो, तो ऐसे में पहले दर्द कम करके फिर व्यायाम करें।
  • सोते वक्त तकिये का इस्तेमाल जरुर करें।तकिया आपके गर्दन और कंधे के बीच होना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि बहुत अधिक मोटे या नर्म तकिये का प्रयोग न करें।
  • यदि कंधे पर दर्द हो, तो ज्यादा से ज्यादा आराम करें, भारी वजन बिल्कुल न उठाये।

 

उल्टी रोकने के घरेलू उपाय

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अमाशय की मांसपेशी के आक्षेपिक संकुचन से भोजन पदार्थ का वेग से मुख के मार्ग से निकलना उल्टी या वमन कहलाता है।उल्टी होना शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने की एक शारीरिक प्रक्रिया है, मगर कभी-कभी शरीर में संक्रमण होने से कुछ भी खाने-पीने से उल्टी होने लगती है।कुछ लोग तो अपना पेट साफ रखने के लिए हफ्ते या दो हफ्ते में एक बार सुबह खाली पेट नमक पानी पीकर जानबूझकर उल्टी करते है, जो एक तरह से शरीर के लिए लाभदायक होता है।वैसे तो उल्टी होना एक आम बात है लेकिन इससे शरीर कमजोर हो जाता है और इंसान थकान महसूस करता है।यदि व्यक्ति को जरुरत से ज्यादा उल्टी आती है, तब बात गंभीर हो सकती है।चाहे बच्चे, जवान या वयस्क व्यक्ति हो, किसी को भी उल्टी की समस्या हो सकती हैं।उल्टी या वमन होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • विषाक्त खान-पान के कारण उल्टी हो सकती है।
  • अत्यधिक तनाव के कारण व्यक्ति खाने-पीने का ध्यान नहीं रखता, जिससे उल्टी होने की संभावना होती है।
  • अधिक समय तक खाली पेट रहने से अम्लता हो जाती है जिसके कारण उल्टी हो सकती है।
  • अधिक मात्रा में खाना खाने से खाद्य ठीक से नहीं पचता, जिसके कारण उल्टी हो सकती है।
  • ज्यादा शराब पीने से उल्टी होती है।
  • बस या गाड़ी में बहुत देर तक सफ़र करने से भी उल्टी की समस्या हो सकती है।
  • गर्भावस्था में उल्टी हो सकती है, जो एक आम बात है
  • किसी संक्रमण (Infection) के कारण उल्टी हो सकती है।
  • शरीर में पानी की कमी के कारण भी उल्टी हो सकती है।
  • अत्यधिक गर्मी के कारण भी उल्टी हो सकती है।

उल्टी से बचने या उसे रोकने के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. अदरक : अदरक पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और इसके उपयोग से उल्टी को रोका जा सकता है।उल्टी की समस्या होने पर एक चम्मच अदरक के रस में एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर पीने से उल्टी की समस्या में फर्क पड़ता है।इसके अलावा अदरक वाली चाय में शहद मिलाकर पीना भी असरदार है या फिर अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा मुँह में लेकर चबाने से भी उल्टी में फर्क पड़ता है।
  2. चावल का स्टार्च (Starch) : यदि अत्यधिक गैस की वजह से उल्टी हो रही होतो ऐसे में सफेद चावल का स्टार्च बहुत फायदेमंद है।चावल का स्टार्च बनाना कोई बहुत मुश्किल कार्य नहीं है।लगभग हर किसी के घर में चावल पकता है।चावल पकने के बाद जिस पानी को छानकर फेंक दिया जाता है, वही पानी स्टार्च है जो उल्टियों में लाभदायक होता है। चावल पकने के बाद पके हुए चावल के पानी को एक बर्तन में छान लें।अब उसमें स्वाद अनुसार नमक डालकर उसका सेवन करने से उल्टी में राहत मिलती है।
  3. लौंग : लौंग अम्लता जैसी समस्या को दूर रखकर पाचन तंत्र को सही रखता है। दो से तीन लौंग मुँह में डालकर चबाने से उल्टी की समस्या नहीं रहती। इसके अतिरिक्त लौंग को गर्म तवे पर थोड़ा सेंक लें, फिर उसे दरदरा पीसकर शहद के साथभी उसका सेवन कर सकते है या फिर लौंग की चाय बनाकर भी पी सकते है। इन सभी तरीकों से लौंग का सेवन करने से उल्टी होना बंद हो जायेगी और आराम मिलेगा।
  4. दालचीनी : कभी-कभी पाचन तंत्र के बिगड़ने से भी उल्टी होती है, ऐसे में दालचीनी बहुत लाभदायक है।एक मध्यम आकर के बर्तन में एक कपपानी डालकर उसे उबालें, अब उस उबलते हुए पानी एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण या चार से पाँच साबुत दालचीनी डालकर आँच को बंद कर दें, और बर्तन को थोड़ी देर के लिए ढक दें, ताकि दालचीनी अच्छे से पानी में घुल जाए।इसके बाद उस पानी को छान लें और उसमें थोड़ी-सी शहद मिलाकर उसका सेवन करें।इससे उल्टी बंद हो जायेगी, पर इस बात का जरुर ध्यान रखें कि यह नुस्खे का प्रयोग कोई गर्भवती महिला बिल्कुल न करें, इससे गर्भ को नुकसान पहुँच सकता है।
  5. पुदीना : पेट खराब होने पर खाद्य ठीक से नहीं पचता और वो उल्टी के रूप में बाहर निकल जाता है, ऐसे में पुदीना बहुत ही फायदेमंद है।पेट के खराब होने पर होने वाली उल्टी से पुदीना राहत दिलाती है। एक मध्यमआकर के बर्तन में एक कप पानी डालकर उबालें, फिर उसमें एक चम्मच सूखे पुदीने के पत्तियां डालकर आँच बंद करके बर्तन को ढककर पाँच से दस मिनट तक रहने दें।फिर उस पानी को छानकर पीने से उल्टी में राहत मिलेगी।इसके अलावा आप कुछ ताजे पुदीने के पत्ते भी चबाकर खा सकते हैं, इससे भी उल्टी में फर्क पड़ता है. इसके अतिरिक्त आप पुदीने के पत्तों का रस, नींबू का रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर भी उसका सेवन कर सकते हैं। दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है।
  6. सौंफ : सौंफ हमारे पाचन तंत्र को सही रखता है।सौंफ में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो उल्टी होने से रोकती है। एक कप उबलते हुए पानी में एक चम्मच पीसी हुई सौंफ मिलाकर आँच बंद कर दें और दस मिनट तक उस पानी को ढककर रखें, फिर उस पानी को छानकर दिन में दो बार पीने से उल्टी नहीं होगी। इसके अलावा आप सौंफ को ऐसे ही मुँह में डालकर चबायेंगे तो उल्टी नहीं होगी।
  7. नमक और शक्कर का घोल :लगातार उल्टियाँ होने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिससे और भी ज्यादा उल्टियाँ होने लगती हैं।ऐसे में नमक और चीनी का घोल बनाकर पीने से फायदा मिलता है। एक गिलास पानी में एक चम्मच चीनी और एक चुटकी नमक मिलाकर घोल तैयार करें।इस घोल को थोड़ा-थोड़ा करके दिन में पाँच से छै बार पीने से उल्टियाँ होना बंद हो जायेगी और आपको जल्द ही राहत मिलेगी।
  8. इलायची : जरुरत से ज्यादा खाना खाने से अम्लता हो जाती है जिससे उल्टी हो सकती है, ऐसे में दो हरी इलायची चबाकर खाने से अम्लता ठीक हो जायेगी, साथ ही यह अपच खाने को भी पचाने में मदद करती है जिससे पेट की समस्या नहीं होती और उल्टी भी नहीं आती।
  9. नींबू पानी : उल्टी में नींबू का पानी बहत ही असरदार होता है।एक गिलास पानी में एक नींबू का रस मिलाएं, फिर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में शक्कर और चीनी मिलकर पीयें, इससे उल्टी बंद हो जायेगी और आपको आराम मिलेगा।
  • जीरा : जीरा रसोईघर में उपलब्ध एक आम मसाला है, लेकिन इसके कई सारे गुणों में से एक गुण है उल्टी को रोकना। जीरा के सेवन से पाचन से जुड़ी हर तकलीफ दूर हो जाती है। आधा कप गुनगुने पानी में आधा चम्मच जीरा पाउडर डालकर पीने से उल्टी में फर्क पड़ता है।इसके अलावा एक चम्मच शहद में आधा चम्मच इलायची और आधा चम्मच जीरा पाउडर मिलाकर लेने से उल्टी में तुरंत राहत मिलती है।
  • प्याज का रस : प्याज में प्रतिजीवाणु गुण है जो उल्टी होने से रोकती है।एक चम्मच प्याज के रस में एक चम्मच पीसा हुआ अदरक मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें और थोड़ी-थोड़ी देर में इस मिश्रण को लेते रहें, इसके सेवन से उल्टी नहीं होगी।इसके अलावा आधा कप प्याज के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर, थोड़ी-थोड़ी देर में एक चम्मच करके इस मिश्रण का सेवन करने से उल्टी में राहत मिलेगी।
  1. लहसुन : किसी-किसी को बस या गाड़ी से यात्रा करने के दौरान उल्टी आती है, ऐसे में लहसुन बहुत ही फायदेमंद है।यात्रा के दौरान आने वाली उल्टी को रोकने के लिए लहसुन की दो कलियाँ चबायें, इससे उल्टी आना बंद हो जायेगी और आपको राहत भी मिलेगी।
  • गन्ने का रस : गर्मी के कारण होने वाली उल्टी के लिए गन्ने का रस बहुत असरदार है। एक गिलास ठन्डे गन्ने के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पीने से उल्टी बंद जाती है।गन्ने का रस पेट को ठंडा रखता है और शहद पाचन तंत्र को ठीक रखता है।
  • संतरा : साबुत संतरा या संतरे का रस उल्टी को आने से रोकती है।यदि आपको लगे कि उल्टी आने वाली है तो आप एक साबुत संतरा खा सकते हैं या संतरे का रस भी पी सकते हैं।इसके अलावा दो ग्राम संतरे के सूखे छिलके का चूर्ण शहद में मिलाकर लेने से भी उल्टी आनी तुरंत बंद हो जाती है।
  • तुलसी : उल्टी में तुलसी भी बहुत असरदार है। एक चम्मच तुलसी के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर लेने से उल्टी बंद हो जाती है और जी मिचलाना भी ठीक हो जाता है।
  • धनिया : धनिया के उपयोग से उल्टी को रोकना एक कारगर उपाय है।12 ग्राम या तीन चम्मच धनिया के चूर्ण और एक चम्मच मिश्री को 250 लीटर पानी में एक घंटे के लिए भिगो दें। फिर उस पानी को छानकर पीने से उल्टी आनी बंद हो जाती है। आप इसे बच्चों, बड़ों या फिर गर्भवती महिलाओं को भी पिला सकते हैं।बच्चों की उल्टी बंद करने के लिए इसी पेय को एक घंटे के अन्तराल में एक छोटी चम्मच (चाय चम्मच)की मात्रा में पिला सकते हैं और बड़ें हर घंटे इसी पेय का सेवन 30 ग्राम की मात्रा में कर सकते हैं।इसके सेवन से उल्टी के दौरान चक्कर आना, सिर दर्द करना, दिल धड़कना आदि समस्याएं भी ठीक हो जाती हैं।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर उल्टी जैसी समस्या से बचा जा सकता है।लेकिन इन नुस्खों को अपनाकर भी यदि उल्टी आनी बंद न हो तो आपको तुरंत किसी चिकित्सक से अपना इलाज करवाना चाहिए।कुछ मामलों को छोड़कर कुछेक बातों का ध्यान रखने से उल्टी की समस्या नहीं होती, जैसे :

  • ज्यादा मसालेदार, तेल युक्त और बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए, इससे पाचन तंत्र बिगड़ जाता है।
  • शराब से परहेज करें क्योंकि इसके सेवन से भी पाचन तंत्र प्रभावित होता है।
  • अधिक समय तक खाली पेट न रहें और ज्यादा से ज्यादा पानी पीयें।
  • संक्रमण के कारण होने वाली उल्टी के मामलों में डॉक्टर से जांच करवाएं।
  • मानसिक तनाव और चिंता से जितना हो सके दूर रहें।

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