ऑयली स्किन से कैसे छुटकारा पाए

हम्मे से अधिक्तर को ये प्रॉब्लम है की हमारी ऑयली स्किन है। परन्तु कुछ प्राकृतिक एवं घरेलु नुस्खे का पालन कर हम अपने इस परेशानी से पीछा छुड़ा सकते है।

तो आइए जानते है ऑयली स्किन की कैसे देख भाल करे।

  • ऑयली स्किन को साफ करने के लिए गुनगुने जल का उपयोग करने की कोशिश करें, क्योंकि यह ठंडा पानी से अधिक प्रभावी ढंग से तेल में घुलता है। यह गंदगी और अशुद्धियों को धोने में मदद करता है जो त्वचा पर जमा हो गई हैं और त्वचा के छिद्रों को खोलता है।
  • स्वाभाविक रूप से स्पष्ट त्वचा प्राप्त करने के लिए महिलाओं के लिए सबसे अच्छे सुझावों में से एक नियमित रूप से सफाई है। दिन में दो बार अपने चेहरे को साफ करना,यह साफ रखने के लिए पर्याप्त है।
  • सैलिसिलिक एसिड, सिट्रिक एसिड और ग्लाइकोलिक एसिड युक्त जेल आधारित क्लैन्सर का उपयोग करें जो कि मृत त्वचा कोशिकाओं को कम करने में मदद करता है, जो छिद्रों को रोकता है और मुंहासों ​​को दबाता है।
  • बहुत अधिक स्क्रब न करें, हफ्ते में 2-3 बार त्वचा से मृत कोशिकाओं और ब्लैकहैड्स को निकालने के लिए पर्याप्त से अधिक होता है। त्वचा प्राकृतिक तेलों का उत्पादन करती है नमी को इकट्ठा करने, इसे हाइड्रेटेड रखने और विद्रोहों से लड़ने के लिए। अधिक स्क्रबिंग आपके प्राकृतिक तेलों और त्वचा की नमी को कम करता है।
  • तेलीय त्वचा की देखभाल के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक प्राकृतिक फेस पैक का आवधिक अनुप्रयोग है जो त्वचा से अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है और त्वचा से हानिकारक बैक्टीरिया को निकालता है। हफ्ते में एक बार, अतिरिक्त तेलों को मिलाकर, अशुद्धियों को दूर करने और त्वचा को शांत करने के लिए मुलतानी मिट्टी या चंदन का एक आरामदायक फेस पैक का प्रयोग करें।

image2 1

  • गर्मियों के मौसम की शुरुआत के साथ, श्रृंगार पर कम जाऐ, सिलिकॉन वाले टिंटेड (tinted) मॉइस्चराइजिंग क्रीम का प्रयोग करें । यह त्वचा और गर्मी के बीच एक अवरोध बन जाता है
  • अपने चेहरे को अपने हाथों से छूने की प्रथा को नियंत्रित करें, क्योंकि यह अतिरिक्त तेल, गंदगी और कीटाणुओं को आपके चेहरे पर स्थानांतरित करता है।
  • गर्मियों में टोनर तेल त्वचा की देखभाल के लिए अविभाज्य है। चेहरे के अत्यधिक तेल क्षेत्रों से जैसे माथे और नाक के आसपास पोंछने के लिए एक टोनर का उपयोग करें।
  • यदि आपके चेहरे को धोने के बीच बहुत अधिक तेल मिलता है, तो चेहरे से अधिक तेल दूर करने के लिए एक औषधीय पैड या टिश्यू का उपयोग करें ताकि इसे क्षणों में ताज़ा किया जा सके।

image1 1

  • देखो कि आप क्या खा रहे हो, आकर्षक कॉकटेल और तले हुए तेलयुक्त भोजन आकर्षक हो सकते हैं, लेकिन वे त्वचा में अतिरिक्त तेल जोड़ते हैं जिससे मुँहासे होते है।
  • हर दिन 8-10 गिलास पानी पीने से आपके शरीर और त्वचा को पर्याप्त पानी प्रदान करें।

इस तरह ऊपर दिए गए नुस्खे को अपनाकर आप आसानी से अपनी ऑयली स्किन की देख भाल कर सकते हो। ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए जुड़े रहे हमारे साथ और फॉलो करे हमारे वेबसाइट को।

शहनाज हुसैन के सुंदर त्वचा के लिए टिप्स

शहनाज हुसैन फैशन जगत में काफी नमी गिरामी हस्ती है। और हर वयक्ति चाहे वह पुरुष हो या महिला चाहता है की वह सुन्दर दिखे। बस इसीलिए हमने अपने इस लेख में आपको शहनाज हुसैन के कुछ बियुटी टिप्स के बारे में बताया है जिसे युस कर के आप सुन्दर तव्चा पा सकते है।

तो चलिए जानते है कुछ बियुटी टिप्स :

1. दही और हल्दी:

  • हल्दी पाउडर के एक चुटकी के साथ दही के 2 चम्मच मिक्स करें।
  • सभी गांठों को हटाने के लिए एक साथ मिलाएं
  • अब इसे अपने चेहरे पर लगाएं
  • इसे 15 मिनट तक रहने दें
  • यह हर दिन करें

यह कैसे मदद करता है:

यह मिश्रण टैन को दूर करने और आपकी त्वचा को ताजा, नरम और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करेगा ।

2. नीम और चंदन:

चन्दन का एक फेस पैक बनाए। या तो ताजी चंदन स्टिक या बाजार से चूर्ण चंदन का उपयोग करें

  • इसे अपने चेहरे पर लगाए
  • 12 मिनट के लिए छोड़ दें
  • नीम के पत्तों के समाधान के साथ इसे धो लें

यह कैसे मदद करता है:

जब नियमित रूप से किया जाता है, तो यह प्रक्रिया आपको मुंहासों से लड़ने में मदद करेगी। नीम को सबसे पुराना और सबसे शक्तिशाली विरोधी बैक्टीरिया एजेंटों में से एक माना जाता है। यह प्रक्रिया आपको एक स्पष्ट और धब्बा मुक्त रंग भी देगी।

3. नींबू:

  • एक 2: 2: 1 अनुपात में नींबू का रस, खीरे का रस और दूध मिलाएं
  • इसे अपने चेहरे पर लगाए
  • लगभग 10 से 15 मिनट के लिए छोड़ दें

यह कैसे मदद करता है:

यह समाधान रंग को साफ करने में मदद करेगा।

4. चावल का आटा और खट्टा दही

निम्नलिखित नुस्खे ब्लैक हेड्स के साथ ही वाइट हेड्स के इलाज के लिए सबसे अच्छा काम करता है।

  • चावल का आटा और खट्टा दही का मिश्रण बनाएं
  • इससे चेहरे पर सब कुछ साफ़ करें
  • दानेदार बनावट ब्लैक हेड्स के साथ ही वाइट हेड्स को हटाने में मदद करेगा।

यह कैसे मदद करता है:

यह खूबसूरत त्वचा प्राप्त करने का एक बहुत अच्छा घरेलु नुस्खा है जो अशुद्धियों से मुक्त करता है।

यहाँ हम देखेंगे कुछ परेशानिया जो की हम सभी को होती है और उससे जुडी घरेलु उपचार :

1. ब्लेमिश:

  • क्रमशः 1: 2: 1 के अनुपात में कुछ नींबू का रस, दूध और खीरा मिलाएं।
  • अब एक कॉटन बॉल का उपयोग करके अपने चेहरे पर इसे लगाए।

यह कैसे मदद करता है:

यह किसी भी प्रकार के दोषों का सामना करने का एक शानदार तरीका है।

2. सूखी त्वचा की सफाई:

  • यह सूखी त्वचा वाले लोगों के लिए एक अद्भुत होममेड सफाई उपचार है।
  • सूरजमुखी तेल के 10 बूंदों और कच्चे दूध के तीन बूंदों को मिलाएं।
  • कॉटन बॉल का उपयोग करके इस मिश्रण को साफ करें।

यह कैसे मदद करता है:

यह सूखी त्वचा की किसी भी तरह की अशुद्धता और गंदगी की सफाई में उपयोगी है।

3 . टैन हटाए:

  • 1 अंडे कि सफेदी, 1 बड़ा चम्मच नींबू का रस और 1 टीस्पून शहद का मिश्रण बनाएं।
  • इसे अपने चेहरे पर लगाए।
  • इसे 15 मिनट के बाद धो लें।

यह कैसे मदद करता है:

यह टैनिंग के किसी भी लक्षण को कम करने का एक प्रभावी तरीका है

4. तेलीय त्वचा:

  • दही के साथ 2 टीस्पून टमाटर का रस मिलाएं।
  • इसे लगा कर कुछ समय के लिए छोड़ दें।
  • 15 मिनट के बाद धो लें।

यह कैसे मदद करता है:

यह चेहरे से अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है।

5. डार्क पैच:

  • 2 भाग नींबू के रस के साथ 1 हिस्सा शहद मिलाएं।
  • यह सब चेहरे पर लगाए।
  • इसे लगभग 15 मिनट के लिए छोड़ दें।
  • धोकर साफ़ करें।

यह कैसे मदद करता है:

उपरोक्त मिश्रण त्वचा से डार्क पैच को दूर करने में मदद करता है।

6. डार्क सर्कल:

आंखों के नीचे पैच या घेरे निकालने के लिए, रोज आपने फेस की बादाम के तेल से मालिश करें।

7. त्वचा को चमकाने के लिए:

यह फेस पैक तेलीय त्वचा के साथ सामान्य त्वचा वालों के लिए भी अच्छा है।

  • दलिया, दही, शहद और बादाम पाउडर का उपयोग कर एक फेस पैक बनाएं।
  • इसे चेहरे पर लगाए और इसे कुछ समय तक लगे रहने दें।
  • धोकर साफ़ करें।

यह कैसे मदद करता है:

यह त्वचा के लिए सबसे अच्छा प्राकृतिक सौंदर्य उपचार है।

8. सूखी त्वचा और सामान्य त्वचा के लिए:

  • गेहूं चोकर पाउडर और एक टीस्पून संतरे का रस, दही, शहद और जैतून का तेल का उपयोग कर फेस पैक बनाएं।
  • चेहरे पर इसे लगाए।
  • कुछ समय के लिए छोड़ दें जब तक यह सूख ना जाए।
  • धोकर साफ़ करें।

यह कैसे मदद करता है:

यह त्वचा को साफ करने में मदद करता है।

तो इस प्रकार आप ऊपर बातये गए नुस्खे आजमा कर अपने चेहरे को और भी सुन्दर बना सकते है।  ऐसी ही जानकारी के जुड़े  रहे हमारे साथ और फॉलो करे हमारे इस वेबसाइट को।

Anti Ageing Food – एंटी ऐजिंग फ़ूड

Anti ageing Food की बात करें तो जाहिर है कोई भी इंसान अपनी Real age Show नहीं होने देना चाहता  हर इंसान जितनी उम्र होती है उससे कहीं ज्यादा जवान दिखे यही चाहता है, क्योंकि ये भी हमारे लिए एक इम्प्रेशन फैक्टर है कि हम आपनी Health को लेकर कितने Conscious है। अगर आप अपनी असली उम्र को छिपाने में कामयाब होना चाहते है तो हमारे कुछ एसे foods एंड tips है जो आप करेंगे तो आप अपनी उम्र को मात दे सकते हैं। आप अपने look को maintain कर सकेंगे और हम पहले जैसे ही जवान नज़र आ सकते हैं।

ये है कुछ ऐसे foods जो आपकी मदद कर सकते हैं :-

विटामिन सी ( Vitamin C ):-

हमारे लिए एक बढ़िया एंटी ऑक्साइड है, ये हमारी त्वचा के लिए उत्तम है। नीबू में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। आप जब सुबह उठते हैं तो आप अपने चेहरे पर नीबू का रस लगाएं और 15 से 20 मिनट के लिए नीबू का रस चेहरे पर लगा कर रखें। उसके बाद सादे पानी से धो लें। इसको लगाने से आपके चेहरे में जो दाग धब्बे होते हैं वो धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। हमारा चेहरा साफ सुथरा सुन्दर दिखने लगता है। नीबू के रस में क्रीम और अंडे को मिश्रत करे लें और फिर अच्छी तरह से पेस्ट बनाकर आप उसे चेहरे पर लगा सकते हैं। 15 मिनट के बाद आप उसे सादे पानी से धोलें। शहद के साथ नीबू का रस मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है। और नीबू का रस शहद दोनों को मिलाकर हमें अपने चेहरे पर लगाये तो आप का चेहरा काफी साफ़ रहता है। आपको नीबू से बहुत लाभ मिलता है। और यह आपका मोटापा कम करता है।

कच्चा नारियल (Coconut):-

कच्चा नारियल जो होता है, उसमें भी हमारे स्किन के लिए बहुत सारे पोषण तत्व होते है। इस कच्चे नारियल में विटामिन c आपको अच्छी मात्रा में मिल जाता है। कच्चे नारियल का जो दूध होता है, उसे  20 मिनट तक आप अपने चेहरे पर लगा कर रखें। उसके बाद आप गुनगुने पानी से मुंह धो लें। केरल और अन्य समुद्रीय तटीय जो इलाका है, जहां पर नारियल की पैदावार बहुत ज्यादा होती है वहां के लोग रोजमर्रा की जिन्दगी में अच्छा खासा इसे यूज़ करते हैं। और ये लोग इस कच्चे नारियल का कई तरीके से इस्तेमाल करते हैं। खाने की चीजों से लेकर बालों तक और स्किन केयर के लिए अलग-अलग तरीके से इस्तेमाल करते हैं।
नारियल के तेल और इसके दूध से कई तरह के हेल्थ बेनेफिट्स आपको मिलते हैं। और यह प्राक्रतिक भी है। यह एक कमाल का anti aging food भी है और इस food को हम कई विधि से इस्तेमाल कर सकते  हैं।

पपीता (Papaya):-

लेकिन प्रदुषण जैसे अन्य प्रभावों की वजह से हमारे त्वचा की नमी और लचक खो जाती है जिसे वापस gain करने में पपीता आपकी मदद करता है इसके लिए पपीते के गुद्दे को आप अपने चेहरे पर लगाओ २० मिनट के लिए लगा रहने दे उसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा अच्छे से धोले हमारे लिए पपीता भी एक अच्छा aging food हैं।

खीरा (Cucumber):-

खीरा का प्रयोग से हम अधिकतम वाकिफ है कई तरह के स्किन के उपचारों में भी खीरा का सेवन किया जाता है। खीरे को आप अच्छे तरह से पिसले और उसमे आधा कप दुध मिला ले अच्छे से मिला कर के पेस्ट तैयार करे पेस्ट को आप अपने चेहरे पर अच्छे से लगा ले और २० मिनट के बाद हलके गुन गुने पानी से चेहरा धोले।

मुल्तानी मिट्टी (Fuller’s earth):-

बाज़ार में मुल्तानी मिट्टी वाले भी कुछ फेस पैक आते है। मुल्तानी मिट्टी वाले फेस पैक में केमिकल नही होते है। आपको harm भी नही करते इनका इस्तेमाल आप अच्छी तरह से कर सकते है। इसके अलावा इसी तरह के पोषक तत्व आपको कई तरह के फूलो से और प्राकृतिक चीजों से प्राप्त होता है। जिसका इस्तेमाल हम अपने त्वचा के पोषण के लिए कर सकते हैं।

जैसे की बादाम एंटी ओक्सिडेंट विटामिन और मिनरल से प्रचुरता वाले खाद्य पदार्थो का सेवन आपकी बढती उम्र के प्रभाव को रोक सकता है जो कुछ खाते पीते है उसका सीधा असर आपके त्वचा पर पड़ता है।

एवोकाडो (Avocado):-

यह एक फुल है। इस फुल में हमें बहुत सारे पोषक तत्व मिलते है। यह मोनोसेच्युरेटेड फैट्स भरा फल है जो की सुजन और जलन से लड़ते है। ये हेल्थी फैट्स गुड कोलोस्टॉल भी बढ़ाते हैं। एवोकाडो में फाइबर पोटाशियम फोलेट और विटामिन ई बहुत ज्यादा होते है, हो सकता है कि आप इसे कई बार इसलिए ना खायें की इसमें कैलोरी काफी होती है। ज्यादा फैट होने के कारण आपको देर तक भूख नही लगती है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है की आप इसे सैंडविच में लेकर सलाद तक में खा सकते है।

अखरोट (Walnut):-

अगर आपको जवान त्वचा चमकते हुये बाल जवानतन चाहिए और आप अपनी दिमाग के स्वस्थ के लिए बेहद सजग है तो रोज आप ८ से १० अखरोट खाइए। विभिन्न शोध में यह साबित हो चूका है की अलजाइ मर्स रोकने में, यादास्त बढाने में, अवसाद कम करने में अखरोट बहुत ही लाभदायक एवं गुणकारी माना गया है।

दूध (MIlk):-

हमें दुध भी पीना बहुत जरुरी है। हमें दुध दो बार तो जरुर ही पीना चाहिए। हमारी बढती उम्र जो दिखती हैं अगर हम अपने खान पीने का ध्यान देगे तो हमारी उम्र बढती हुई नही दिखेगी।

इस तरह आप इन सब चीजों का अगर भरपूर तरीके से इस्तेमाल करे तो समझ लीजिये आपकी उम्र घटने की वजह बढती ही जायेगी। और आप एक सवस्थ जीवन जी पाओगे।

हम आसा करते हैं की इस लेख में दि गई जानकारी आपके लिए फायदे मंद साबित हो। और भी जानकारी के लिए जुड़े रहे हमारे साथ और फॉलो करे हमारे इस वेबसाइट को।

चमकदार त्वचा कैसे प्राप्त करें – Glowing Skin Kaise Paye

हर महिला को सुंदर और चमकदार त्वचा प्राप्त करने की इच्छा होती है क्योंकि यह उनके समग्र रूप और व्यक्तित्व के लिए वास्तव में बहुत कुछ जोड़ सकता है। हम में से हर कोई सुंदर त्वचा के साथ पैदा नहीं हुआ है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आपके चेहरे पर वैसी चमक नहीं हो सकती।  आपकी त्वचा के लिए थोड़ा अतिरिक्त देखभाल और सही प्रक्रिया आपको चमक और खूबसूरत त्वचा दे सकती है जो आपको कई प्रशंसाओं को जीतने के लिए निश्चित है।

तो, अगर आप चमकदार त्वचा पाने के सर्वोत्तम तरीकों की तलाश कर रहे हैं, तो यह लेख निश्चित रूप से आपकी सबसे अच्छी मदद होगी। चमकदार त्वचा पाने के लिए आपको महंगी पार्लर के उपचार या कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं से गुजरना नहीं पड़ता है। हमारी ज़रूरत होती है थोड़ा सा प्रयास और अछि त्वचा प्राप्त करने के लिए घरेलू उपचार का पालन करना। यहाँ सबसे अच्छी सौंदर्य युक्तियाँ हैं जिन्हें आपको स्वाभाविक रूप से चमकदार त्वचा के लिए अनुसरण करने की आवश्यकता है।

तो चलिए देखते है की चमकदार त्वचा कैसे प्राप्त करें :

1 ) चमकदार त्वचा के लिए एक स्वस्थ आहार प्राप्त करें

आप क्या खाते हैं जो आप देखते हैं यदि आप सही नहीं खाते हैं, तो यह आपकी त्वचा पर दिखना निश्चित है। यदि आप खूब चमकदार त्वचा प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपका काम अपने दैनिक आहार को सही करने से शुरू होता है। सब्जियां, ताजे फल शरीर को आवश्यक मिनरल्स और विटामिन प्रदान करते हैं जो कि न केवल एक स्वस्थ शरीर के लिए बल्कि एक स्वस्थ, चमकीले त्वचा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

सब्जियों और ताजे फल के अलावा आपके दैनिक आहार में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, नट और बीज शामिल होने चाहिए। ओमेगा -3-फैटी एसिड में समृद्ध खाद्य पदार्थों पर ध्यान दें सही आहार एक स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है और यदि आप पाचन या आंत्र समस्याओं से पीड़ित हैं तो आप वास्तव में सुंदर त्वचा नहीं प्राप्त कर सकते हैं।

2 ) चेहरे की उस चमक को पाने के लिए हाइड्रेटेड रहें

पानी शरीर के मुख्य घटक में से एक है। निर्जलीकरण शरीर की कोशिकाओं के सिकुड़ने का कारण बनता है और यह आपकी त्वचा को सबसे खराब तरीके से प्रभावित कर सकता है। चमकदार त्वचा पाने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप नियमित अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी पी लें। चमकदार त्वचा पाने के लिए यह सबसे आसान और अभी तक सबसे प्रभावशाली है।

3 ) व्यायाम त्वचा को चमकने में मदद कर सकता है

नियमित रूप से व्यायाम करना न केवल आपके शरीर के लिए बल्कि आपकी त्वचा के लिए भी लाभदायक हो सकता है। व्यायाम तनाव से राहत में मदद करता है और बेहतर पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है, जो दोनों स्वस्थ और चमकीले त्वचा के लिए महत्वपूर्ण हैं। व्यायाम रक्त सर्कुलेशन को बढ़ावा देता है, जो स्वाभाविक रूप से बेहतर त्वचा और स्वास्थ्य में मदद करता है।

4 ) एक नियमित सीटीएम दिनचर्या का पालन करें 

क्लीनिंग, टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग (CTM) त्वचा की देखभाल के मूलभूत आधार है। यदि आप अच्छी त्वचा की तलाश कर रहे हैं तो आपको रोजाना CTM करना बहुत आवस्यक है। अपने चेहरे को ठीक से शुद्ध करना, इसे टोन करना और उन्हें मॉइस्चराइजिंग करना सुंदर त्वचा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस लेख में आगे आप जानेंगे की कैसे फॉलो करे एक उच्च CTM अपनी त्वचा के लिए।

5 ) त्वचा की चमक के लिए स्क्रबिंग महत्वपूर्ण है

यदि आपने अभी तक अपने त्वचा को स्क्रबिंग नहीं किया है, तो यह उच्च समय है जब आप त्वचा को साफ़ करके अपनी पुरानी और मृत त्वचा कोशिकाओं से छुटकारा पा सकते है जो की नई त्वचा कोशिकाओं के विकास और पोषण में मदद करता है।

त्वचा पर चमक पाने के लिए कुछ सबसे महत्वपूर्ण युक्तियों पर विस्तार के बाद, अब हम कुछ घरेलू उपचार देखेंगे, जिसके उपयोग के साथ आपको नरम, सुंदर और चमकदार त्वचा प्राप्त हो सकती है। तो आगे पढ़िए,

1 ) त्वचा के चमक के लिए एक क्लीनर के रूप में तेल

जब आपका लक्ष्य आपके चेहरे पर चमक प्राप्त करना है, तो उन सभी रासायनिक भरे सफाईकर्ताओं को अलग रखना बेहतर होगा। ज्यादातर शुद्धिकरण साबुन और क्षार (alkali) के साथ विभिन्न रूपों में आते हैं, जो त्वचा से प्राकृतिक तेल को काट लेते हैं और समय के साथ त्वचा सूख जाती हैं।

आप अरंडी तेल और किसी भी तेल का मिश्रण जैसे जोजोबा तेल, जैतून का तेल या सूरजमुखी के बीज का तेल अपने चेहरे को शुद्ध करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। तेल आधारित स्वच्छता तेलीय मुँहासे प्रवण त्वचा के लिए भी उपयुक्त है और जब तेल का सही संयोजन उपयोग किया जाता है तो यह मुँहासे का इलाज करने में भी मदद कर सकता है।

2 ) त्वचा पर चमक के लिए घर का बना त्वचा टोनिंग फ़ार्मुला

उचित टोनर का उपयोग करना महत्वपूर्ण है न केवल आपकी त्वचा की उचित लोच सुनिश्चित करने के लिए बल्कि त्वचा को छिद्रित करने और स्वस्थ चमकदार त्वचा प्राप्त करने के लिए। बाजार में उपलब्ध शराब आधारित टोनर के बजाय आप उस चमक को प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए होममेड उपचारों में से किसी का उपयोग कर सकते हैं,

i ) त्वचा की चमक के लिए रोज़ावरण टोनर

गुलाब जल को सबसे अच्छा और प्राकृतिक त्वचा टोनर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। फ्रिज में अपने गुलाब जल की बोतल रखे अपने चेहरे को ठीक से साफ करने के बाद, ठंडा गुलाब के पानी में एक नए कॉटन बॉल को भिगो दें और अपने चेहरे पर लगाए।

ii ) चमकीली त्वचा के लिए एलोवेरा टोनर

चमकदार त्वचा प्राप्त करने के लिए आप टोनर के रूप में एलोवेरा का भी उपयोग कर सकते हैं। एक नए एलोवेरा पत्ते से एलोवेरा के लुगदी को लीजिए, इसे तोड़कर रस को दबाएं। इस रस के 1 चम्मच को 1 चम्मच सादे पानी के साथ मिलाएं और इसे त्वचा पर लगाए। इसे स्वाभाविक रूप से सूखने दें और फिर मॉइस्चराइज़र लगा लें।

3 ) त्वचा की चमक के लिए फेस पैक

अब अलग-अलग फेस पैक देखते हैं जो कि आपकी त्वचा की देखभाल के लिए सबसे प्रभावी हैं,

i ) चमकदार त्वचा के लिए खट्टा दही और टमाटर

आपकी त्वचा पर तत्काल चमक लाने के लिए सबसे अच्छे फेस पैक में से एक है, टमाटर के गूदा को खट्टी दही के साथ मिला कर तैयार करें। यहाँ बताया गया है कि आप इस फेस पैक को कैसे तैयार कर सकते हैं।

ग्लास कंटेनर में 2 बड़े चम्मच घर की बनी खट्टी दही लें। एक टमाटर का 1/2 लें और इसे भूनें। अब टमाटर को दही के साथ मिलाएं और परिणामस्वरूप मिश्रण अपने चेहरे और गर्दन पर लगा लें। 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर पानी से धोएं।

ii ) त्वचा की चमक के लिए शहद और दूध क्रीम

एक और फेस पैक जो आपकी त्वचा को तत्काल चमक दे सकता है, दूध की क्रीम के साथ शहद को मिला कर तैयार किया जा सकता है। यह सबसे अच्छा है अगर आप दूध से दूध क्रीम एकत्र करें और बाजार में उपलब्ध क्रीम का उपयोग ना करें।

2 चम्मच दूध क्रीम लें और इसमें 1 चम्मच शहद डालें। दो सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाएं और परिणामस्वरूप मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाए। 20-25 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर पानी से धोएं। आप अपने चेहरे पर तत्काल चमक देख पाएंगे।

इस प्रकार आप ऊपर दिए गए चरणों का अनुसरण कर के आप अपनी मन चाही त्वचा पा सकते है। तो हम आसा करते है की यह लेख आपके लिए काफी सहायक रहा और इसी तरह के टिप्स के लिए हमारे वेबसाइट को फॉलो करे और अपने लाइफ को आसान बनाये।

धन्यवाद।

बवासीर के लिए घरेलू उपचार

बवासीर या पाइल्स एक खतरनाक बीमारी है।गुदा-भाग में वाहिकाओं की वे संरचनाएं हैं जो मल नियंत्रण में सहायता करती हैं।जब वे सूज जाते हैं या बड़े हो जाते हैं तो वे रोगजनक या बवासीर हो जाते हैं।इस रोग में गुदा-भाग की भीतरी दीवार में मौजूद खून की नसें सूजकर फूल जाती हैं। इससे उनमें कमजोरी आ जाती है और मलत्याग के वक्त जोड़ लगाने से या कड़े मल के रगड़ के कारण खून की नसों में दरार पड़ जाती है और उसमें से खून बहने लगता है। इस बीमारी में गुदाभाग में मस्से हो जाते हैं।मलत्याग के समय इन मस्सों में असहनीय पीड़ा होती है।बवासीर के कुछ लक्षण हैं, जैसे; मलद्वार के आस-पास खुजली होना; उठते, बैठते और चलते समय गुदा-भाग में दर्द होना; मलत्याग के समय कष्ट होना; मलद्वार के आस-पास पीड़ादायक सूजन होना; मलत्याग के बाद रक्त का स्राव होना; मलत्याग के बाद मस्सों का बाहर निकलना; कफ या श्लेष्मिक द्रव का स्राव होना; लम्बे समय तक कब्ज रहना इत्यादि।आम तौर पर बवासीर के दो प्रकार बताये गए हैं,अंदरूनी बवासीर और बाहरी बवासीर।

अंदरूनी बवासीर में मलद्वार के भीतर मस्सा हो जाता है और अगर रोगी को साथ में कब्ज भी हो तो मलत्याग के समय जोर लगाने पर यह मस्सा छिल जाता है और मलद्वार से खून आने लगते है,साथ ही असहनीय पीड़ा होने लगती है। इसमें सूजन को छुआ नहीं जा सकता पर महसूस किया जा सकता है।बाहरी बवासीर में मस्सा बाहर की तरफ होता है और इस स्थिति में दर्द नहीं होता, परन्तु मलत्याग के समय मस्से पर रगड़ की वजह से बहुत अधिक खुजली व पीड़ा होती है।इस स्थिति में सूजन को महसूस किया जा सकता है।बवासीर की दो अवस्थाएँ हैं, खूनी और बादी। खूनी बवासीर में किसी तरह का दर्द नहीं होता, सिर्फ खून निकलता है।इस अवस्था में मस्सा अन्दर की तरफ होता है जो मलत्याग के समय जोर देने से बाहर आने लगता है।कभी-कभी मस्सा अपने-आप ही अन्दर चला जाता है लेकिन स्थिति ख़राब होने पर या यह रोग बहुत पुराना होने पर हाथ से दबाकर ही मस्से को अन्दर की तरफ किया जा सकता है। कभी-कभी तो हाथ से दबाने से भी मस्सा अन्दर नहीं जाता।बादी बवासीर की स्थिति में पेट ख़राब रहता है, कब्ज बना रहता है, गैस बनती है। इसमें जलन, दर्द, खुजली, शरीर में बेचैनी इत्यादि होती हैं।

piles1

इसमें मस्सा अन्दर की तरफ होता है।मस्सा अंदर होने की वजह से मलाशय का रास्ता छोटा पड़ता है और नसें फट जाती है और वहां घाव हो जाता है।इस रोग को फिशर (Fisher) भी कहते है, जिसमें असहनीय पीड़ा और जलन होती है।बवासीर पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है, जिसे अंग्रेजी में फिस्टुला (Fistula) कहते है।भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है।कुछ दिन बाद इसी रस्ते से पखाना भी आने लगता है। भगन्दर की आखरी अवस्था में धमनियां फट जाती हैं और बवासीर कैंसर का रूप ले लेता है जिसे रेक्टम कैंसर (Rectum Cancer) कहते है और जो जानलेवा साबित होता है। बवासीर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; लम्बे समय तक शौच को रोकना; कब्ज की समस्या होना; अधिक मसालेदार खाद्य का सेवन करना; देर रात तक जागना; लगातार खड़े रहना या एक ही जगह बैठे रहना; आनुवांशिकता इत्यादि।

बवासीर से राहत के लिए घरेलू नुस्खें

shutterstock_260457242-1-e1461602966564

  1. ठंडी सेंक : बवासीर होने पर ठंडी सेंक देने से दर्द कम होता है और यह खुजली से भी तुरंत आराम दिलाती है।ठंडी सेंक सूजन को कम करने में मदद करता है जिससे मलत्याग करने में आसानी होती है।एक साफ कपड़े में बर्फ के कुछ टुकड़े लेकर उसका प्रयोग बवासीर के ऊपर करें।दिन में कई बार इसका उपयोग करें।रोजाना नियमित रूप से दिन में तीन बार दस मिनट तक इसका प्रयोग करें।इससे बवासीर से राहत मिलेगी।
  2. एलोवेरा (Aloe Vera) : बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने में एलोवेरा एक बेहतरीन उपाय है। बवासीर का प्राथमिक स्तर होने पर एलोवेरा के प्रयोग से वह सम्पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है।यह अंदरूनी और बाहरी बवासीर, दोनों के लिए ही फायदेमंद है। एलोवेरा का एक पत्ता काटकर उसके अन्दर से रस निकाल लें, फिर उसी रस का प्रयोग बवासीर के ऊपर करें।इसके अलावा आप एलोवेरा की पत्ती के किनारे से सारे काँटें निकालकर फेंक दें।अब उस पत्ती को छोटे-छोटे टुकडों में काटकर एक बर्तन में रखकर फ्रिज (Fridge) में रख दें।ठंडा होने पर उसी ठन्डे एलोवेरा का प्रयोग बवासीर के ऊपर करें। इससे जलन और सूजन कम हो जायेगी।
  3. नींबू का रस : नींबू में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो बवासीर की समस्या से निपटने में काफी मददगार है।एक रुई की मदद से ताजे नींबू के रस का प्रयोग सीधे सूजन वाली जगह पर किया जा सकता है।इससे बवासीर का दर्द कम हो जायेगा।इसके अलावा आप डेढ़ चम्मच नींबू का रस, अदरक का रस, पुदीने का रस और शहद मिलाकर दिन में एक बार इसका सेवन भी कर सकते है।इससे भी बवासीर से राहत मिलेगी।
  4. जैतून का तेल (Olive oil) : बवासीर के उपचार के लिए जैतून का तेल एक बेहतरीन उपाय है।जैतून के तेल में जलनरोधी गुण हैं।यह रक्त की धमनियों की लोच में वृद्धि करता है।यह मल की कठोरता को भी काफी हद तक कम करता है. रोजाना अपने खाद्य के साथ एक चम्मच जैतून के तेल का सेवन कर सकते हैं।इसके अलावा कुछ बेर के पत्तों से रस निकालकर उसे जैतून के तेल के साथ मिलाकर बवासीर के ऊपर लगाने से दर्द और सूजन से राहत मिलेगी।
  5. किशमिश : रात को सौ ग्राम किशमिश पानी में भीगो दें।सुबह किशमिश के साथ उसी पानी का सेवन करें।रोजाना नियमित रूप से इस उपचार का प्रयोग करने से पाचन तंत्र सही रहता है एवं कब्ज और बवासीर की समस्या से राहत मिलती है।
  6. बड़ी इलायची : बड़ी इलायची बवासीर को दूर करने का बहुत ही अच्छा उपचार है।पचास ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर भुन लीजिए।ठंडी होने पर उसे पीसकर एक वायुरोधी डब्बे में रख दीजिए।रोजाना सुबह बड़ी इलायची के इसी चूर्ण को पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर से राहत मिलती है।
  7. छाछ : छाछ बवासीर के इलाज का एक बेहतरीन विकल्प है।एक गिलास छाछ में एक-चौथाई चम्मच अजवाइन का चूर्ण और एक ग्राम काला नमक मिलाकर रोजाना दोपहर के खाने के बाद लेने से बवासीर की समस्या से राहत मिलेगी।छाछ बवासीर के दर्द को कम करता है और शरीर में नमी को बनाये रखता है।
  8. सेब का सिरका :सेब का सिरका बवासीर की समस्या को दूर करने में मदद करता है।बाहरी बवासीर के उपचार के लिए थोड़ी-सी रुई लेकर उसे सेब के सिरके में भीगोकर प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।पहले आपको थोड़ी जलन जरुर होगी, लेकिन इस प्रयोग से खुजली और दर्द दोनों ही कम हो जायेगा। इसके अलावा अंदरूनी बवासीर के लिए एक कप पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से खून निकलने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
  9. फाइबर (Fiber) युक्त भोजन :खाना आसानी से पचाने के लिए और मलाशय को स्वस्थ रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन का सेवन फायदेमंद है। फाइबर युक्त खाद्य मल को नर्म करने और आँतों की सारी प्रणाली को साफ-सुथरा रखने में सहायता करते हैं तथा कब्ज की समस्या से भी राहत मिलती है।दाल, सूखे मेवे, पटसन के बीज, बीन्स, ब्रोकोली, नाशपाती, पपीता, विभिन्न सब्जियाँ, फल इत्यादि फाइबर युक्त आहार हैं।
  • जीरा : बवासीर के कई दुष्परिणामों से निपटने के लिए जीरा मददगार है। जीरे को भुनकर उसका चूर्ण बना लें।रोजाना एक चम्मच जीरे का चूर्ण एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से बवासीर से राहत मिलती है।आप छाछ के साथ भी जीरे का चूर्ण मिलाकर उसका सेवन कर सकते हैं।दो लीटर छाछ में पचास ग्राम जीरा पाउडर और थोड़ा-सा नमक मिलायें।प्यास लगने पर इसी पेय का सेवन करें।एक हफ्ते तक यह प्रयोग करने से बवासीर के मस्से ठीक हो जाते है।

127965

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर बवासीर से राहत मिल सकती है।बवासीर को शुरूआती दौर में ही आसानी से ठीक किया जा सकता है, इसलिए बवासीर की शंका होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाना बेहद जरुरी है। बवासीर होने पर कभी-कभी ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है।इसलिए यह रोग होने पर कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी हैं, जैसे :

  • यह रोग कब्ज की समस्या के कारण हो सकता है, अतः रेशेदार सब्जियों, फलों और सलाद का सेवन करें क्योंकि इस तरह के खाद्य कब्ज को खत्म करने में सहायक हैं।
  • तेज मिर्च और मसालेदार खाद्य का सेवन न करें।
  • दिनभर में 6-7 गिलास पानी जरुर पीयें ताकि पाचन तंत्र सही रूप से कार्य करें।
  • चाय, कॉफी का अधिक सेवन न करें।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • जब भी कभी मलत्याग का वेग आता है तो उसे रोककर न रखें और मलत्याग के समय ज्यादा जोर न लगायें।
  • अधिक देर तक एक ही जगह बैठे या खड़े न रहें।
  • पूरी नींद लें।
  • योगासन के द्वारा इस रोग से राहत मिल सकती है अतः नियमित रूप से योगासन करें।

मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) के लिए घरेलू उपचार

वर्तमान जीवन शैली में मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) बड़ी तेजी से फैल रहा है।संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, विशेष रूप से भारत में।मधुमेह एक ऐसा घातक रोग है जो कई असाध्य रोगों का जन्मदाता है, जैसे, दिल की बीमारी या दिल का दौरा पड़ना, गुर्दा खराब होना, अंधापन आदि। मधुमेह रोग तब उत्पन्न होता है जब आहार से अवशोषित शर्करा, कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाती है और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने लगता है। रक्त में शर्करा का स्तर तभी बढ़ता है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन (Insulin) उत्पन्न नहीं कर पाता या जब शरीर की कोशिकाएं उत्पन्न हो रही इन्सुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करती।इन्सुलिन एक हॉर्मोन (Hormone) है जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) और वसा (Fat) के मेटाबोलिज्म (Metabolism) को नियंत्रित करता है।

मेटाबोलिज्म वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर खाने को पचाता है ताकि शरीर को ऊर्जा (Energy) मिल सके और उसका सही विकास हो सके।हम जो खाना खाते है वो पेट में जाकर ऊर्जा में बदल जाता है जिसे ग्लूकोज़ (Glucose) कहते है। इस ग्लूकोज़ को हमारे शरीर में मौजूद लाखों कोशिकाओं के भीतर पहुँचाने का कार्य हमारा अग्न्याशय (Pancreas) करता है जो पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन उत्पन्न करता है। बिना इन्सुलिन के ग्लूकोज़ कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता और कोशिकाओं के अन्दर ग्लूकोज़ के पहुँचने के बाद हमारी कोशिकाएं उसी ग्लूकोज़ को जलाकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। जब यह सम्पूर्ण प्रक्रिया सामान्य रूप से नहीं हो पाती तो व्यक्ति मधुमेह रोग से ग्रस्त हो जाता है।मधुमेह रोग के कुछ लक्षण होते हैं, जैसे, बार-बार पेशाब लगना, अधिक प्यास लगना, शरीर में घाव होने पर जल्दी ठीक न होना, बिना काम किये ही थकान महसूस करना, त्वचा में संक्रमण होना या खुजली होना, चीजों का धुंधला नजर आना, अचानक वजन घट जाना आदि। यदि इनमें से कुछ लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत रक्त में शर्करा की जाँच करवाएं।मधुमेह के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • यह रोग आनुवांशिक है। माता-पिता या परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्य से यह रोग दूसरी पीढ़ी में आ सकता है।
  • कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) या वसा (Fat) युक्त खाद्य पदर्थों जैसे, चीनी, गुड़, मिठाई, चॉकलेट, चावल, आलू, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, तला और मसालेदार खाना, घी, मक्खन, लाल मांसआदि का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह रोग हो सकता है।
  • मद्यपान और धूम्रपान भी मधुमेह रोग का कारण है।
  • अनुचित दिनचर्या और जीवन शैली इस रोग के कारण हो सकते हैं। परिश्रम न करना, व्यायाम न करना, मानसिकतनाव, चिंता भी इस रोग के कारण हैं।

मधुमेह के कुछ प्रकार हैं, जैसे :

  • टाइप 1 डायबिटीज़ : यह तब होता है जब शरीर इन्सुलिन (Insulin) बनाना बंद कर देता है।ऐसे में मरीज को डॉक्टर की सलाह से इन्सुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है।इसे इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज़ मेलिटस कहते है (Insulin dependent diabetes mellitus or IDDM)।
  • टाइप 2 डायबिटीज़ : यह तब होता है जब शरीर की कोशिकाएं उत्पन्न हो रही इन्सुलिन (Insulin) पर प्रतिक्रिया नहीं करती।इसे नॉन-इन्सुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज़ मेलिटस कहते है (Non-insulin-dependent diabetes mellitus or NIDDM)।
  • जैस्टेशनल डायबिटीज़ (Gestational diabetes) : यह मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं को होता है। ऐसा नहीं है कि इन महिलाओं को पहले से ही यह बीमारी हो, लेकिन गर्भावस्था के दौरान खून में ग्लूकोस की मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाने के कारण मधुमेह हो जाता है।2-3 प्रतिशत गर्भावस्था में ऐसा होता है।इसके दौरान गर्भावस्था में मधुमेह से संबंधित जटिलताएं बढ़ जाती हैं तथा भविष्य में माता और संतान को भी मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है।

Diabetes-1024x497

मधुमेह के लिए घरेलू नुस्खें : मधुमेह होने पर इसे जड़ से दूर करना मुश्किल हो जाता है पर कुछ घरेलू नुस्खों के द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. मेथी दाना :मेथी के दाने में प्रचुर मात्रा में फाइबर (Fibre) होता है जो मधुमेह के लिए बहुत ही उपयोगी है।रातभर एक से दो चम्मच साफ मेथी के दाने पानी में भीगोकर रखें। सुबह खाली पेट दानों के साथ उसी पानी का सेवन करें। इसके अलावा मेथी का प्रयोग अपने खाद्य पदार्थों में भी कर सकते हैं या फिर मेथी के दानों को पीसकर चूर्ण बनाकर हल्के गर्म दूध या पानी के साथ भी ले सकते हैं। कुछ महीनों तक नियमित रूप से मेथी के दानों का सेवन करने से शर्करा का स्तर कम हो जाता है।
  2. व्यायाम : व्यायाम से रक्त में शर्करा स्तर कम हो जाता है तथा ग्लूकोज़ का उपयोग करने के लिए शारीरिक क्षमता पैदा होती है।इसके अलावा प्रतिघंटा 6 कि.मी. की गति से चलने पर 30 मिनट में 135 कैलोरी (Calorie) घटता है और साईकिल चलाने से लगभग 200 कैलोरी घटती है। इसलिए मधुमेह होने पर रोजाना नियमित रूप से व्यायाम करना, चलना और हो सके तो साईकिल चलाना अत्यावश्यक हैं।
  3. आंवला : आंवला विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध है जो अग्न्याशय (Pancreas) की कार्यक्षमता को बढ़ाकर इन्सुलिन के उत्पन्न होने में मदद करता है।आँवले का बीज निकालकर उसे पीस लें और उसका रस निकाल लें। फिर एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच आँवले का रस मिलाकर पीयें।इसके अलावा एक कप करेले के रस में एक चम्मच आँवले का रस मिलाकर भी पी सकते हैं।रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।
  4. हरी चाय या ग्रीन टी (Green Tea) : रोजाना खाली पेट हरी चाय पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।हरी चाय में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) होता है जो शरीर के टोक्सिन (Toxin) को दूर करने में मदद करता है साथ ही रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में भी सहायक है।
  5. जामुन : जामुन मधुमेह का एक बेहतरीन उपचार है।जामुन के पेड़ का हर भाग इस रोग के लिए बहुत ही लाभदायक हैं।जामुन के पेड़ के पत्ते, छाल, फल, बीज, सभी शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखता है।आप साबुत जामुन खा सकते हैं अथवा जामुन के पत्तों या उसके बीजों कोपीसकर चूर्ण बनाकर एक गिलास गुनगुने पानी के साथ लें सकते हैं।
  6. तुलसी :तुलसी मेंएंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो शरीर को स्वस्थ रखता है, साथ ही इसमें आवश्यक तत्व हैं जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। रोजाना खाली पेट दो चम्मच ताजे और साफ तुलसी के पत्तों का रस पीने से मधुमेह में फायदा होता है।
  7. आम के पत्ते : आम के पत्ते मधुमेह का एक और बेहतरीन उपचार है।15 ताजे और साफ आम के पत्तों को एक गिलास पानी में रातभर भीगोकर रखें। सुबह उसी पानी को छानकर खाली पेट पीने से शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।इसके अलावा आप आम के कुछ पत्तों को छाँव में सुखाकर उसे पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना दिन में दो बार डेढ़ चम्मच उस चूर्ण का सेवन करने से मधुमेह में फर्क पड़ेगा।
  8. करेला :करेला मधुमेह को नियंत्रित रखने का बहुत ही अच्छा उपचार है।यह अग्न्याशय (Pancreas) से इन्सुलिन(Insulin)के स्राव को बढ़ाता।एक करेले का बीज निकालकर उसे पीसकर रस निकाल लें और उसमें थोड़ा-सा पानी मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट पीयें।नियमित रूप से कम-से-कम दो महीनों तक इसका सेवन करें।इसके अलावा आप अपने रोजाना के डाइट (Diet) में करेले की सब्जी को शामिल कर सकते हैं।
  9. नीम :नीम रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।रोजाना एक गिलास नीम के पत्तों का रस पीने से मधुमेह में फर्क पड़ता है।
  • दालचीनी : दालचीनी इन्सुलिन के कार्य को गति प्रदान करने में मदद करता है। इसमें बायोएक्टिव (Bioactive) तत्व हैं जो मधुमेह को नियंत्रित करता है।लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि अत्यधिक मात्रा में दालचीनी का सेवन करने से लीवर को क्षति पहुँच सकता है।इसलिए पूरे दिन में एक से दो चाय चम्मच (Teaspoon) से अधिक दालचीनी का सेवन न करें। एक कप गुनगुने पानी में डेढ़ चाय चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर रोजाना नियमित रूप से सेवन करें। इसके अलावा तीन से चार साबुत दालचीनी एक कप पानी के साथ उबालें और 20 मिनट तक उसे धीमी आँच पर पकाएं।फिर थोड़ा ठंडा होने पर उसे पीयें।इस पेय को रोजाना दिन में एक बार तब तक पीयें जब तक शर्करा का स्तर कम न हो।
  • करी पत्ता : करी पत्ता में मौजूद आवश्यक तत्व शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।मधुमेह होने पर रोजाना 10-12 साफ और ताजे करी पत्ते का सेवन करने से फर्क पड़ता है।आप अपने खाद्य पदार्थों में भी करी पत्ता डाल सकते हैं या 15 हफ़्तों तक करी पत्ते के चूर्ण का सेवन भी कर सकते हैं।
  • ब्रोकोली : विटामिन ए और सी से समृद्ध ब्रोकोली रक्त में उच्च शर्करा के स्तर को कम करने और नियंत्रित रखने में मददगार है। ब्रोकोली की सब्जी बनाकर खा सकते हैं या सूप आदि के साथ भी इसका सेवन कर सकते हैं।
  • राजमा :राजमा में आवश्यक मिनरल (Minerals) हैं। इसके नियमित सेवन से मधुमेह और उसके दुष्प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता हैं।
  • बीन :बीन इन्सुलिन उत्पन्न करने में अग्न्याशय (Pancreas) की क्षमता को बढ़ा देता है। मधुमेह के शिकार लोगों को रोजाना बीन की सब्जी खानी चाहिए।

उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के द्वारा रक्त में शर्करा के स्तर को कम करके मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता हैं।इसके अलावा मधुमेह के रोगी के लिए अच्छे चिकित्सक की सलाह लेना भी आवश्यक है, क्योंकि यह रोग होने पर कुछ दवाइयों का सेवन करना जरुरी है।इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे :

  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • मीठी चीजों, वसा (Fat) और कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) युक्त भोजन, बाहर का अस्वास्थ्यकर खाना न खायें। चावल, आलू, लाल मांस, मयदा जैसे पदार्थों का सेवन न करें।
  • फलों का सेवन करें पर आम, केला जैसे फलों का सेवन न करें।
  • समय पर खाना खायें।
  • बहुत अच्छा हो यदि किसी अच्छे खाद्य विशेषज्ञ से अपना डाइट चार्ट (Diet chart) बनाकर, उसके अनुरूप खाना खायें।
  • नियमित रूप से रक्त की जाँच करवाते रहें, हो सके तो खून में शर्करा का स्तर जांचने की मशीन खरीद कर घर पर ही रख लें और समय-समय पर खुद ही रक्त की जाँच करते रहें।

बच्चों की सर्दी-खाँसी के लिए घरेलू उपाय

सर्दी और खाँसी किसी भी उम्र में हो सकती है।बच्चों को अगर सर्दी-खाँसी हो जाती है, तो वो बहुत ही परेशान हो जाते हैं क्योंकि बच्चे तो अपनी समस्याओं को ठीक से बयां भी नहीं कर पाते।अक्सर शिशुओं में सर्दी और खाँसी की समस्या देखी जाती है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होती है।संक्रमित वायु के कारण या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण, ठंड लगने के कारणछोटे बच्चों में सर्दी और खाँसी की समस्या हो सकती है।जन्म लेने के बाद प्रायः सभी बच्चे इस समस्या के शिकार होते हैं।सर्दी और खाँसी से त्रस्त शिशु को बेचैनी-सी होती रहती है, यहां तक कि उसे स्तनपान करने में भी तकलीफ होती है।छोटे बच्चों को जब सर्दी और खाँसी की समस्या होती है तब उसमें कई सारे लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे :

  • 101 डिग्री तक बुखार होना।
  • आँखें लाल हो जाना।
  • गले में खराश होना।
  • जबड़ो और कान में दर्द होना।
  • निरंतर नाक बहना।
  • उल्टी होना।
  • भूख न लगना।
  • चिड़चिड़ापन और बेचैनी।

common_cold

बच्चों की सर्दी-खाँसी को दूर करने के घरेलू नुस्खें

  1. हल्दी : सर्दी और खाँसी के लिए हल्दी बहुत ही स्वस्थ और विश्वसनीय उपाय है। यदि बच्चा बहुत ही छोटा है और स्तनपान करता है तो उसे दूध पिलाते वक्त अपने स्तन पर थोड़ी-सी हल्दी का पाउडर लगा लें।इस तरह शिशु हल्दी वाले दूध का सेवन कर लेगा। यदि बच्चा बोतल से या गिलास से दूध पीता है तो या तो उसके बोतल में या फिर उसके गिलास में थोड़ी-सी मात्रा में हल्दी का पाउडर मिलाकर पिलायें।दिन में दो बार हल्दी वाला दूध पिलाने से बच्चे को सर्दी-खाँसी में राहत मिलेगी।
  2. भाँप : सर्दी और खाँसी में भाँप बेहतरीन उपाय है।गरम भाँप बलगम को दूर करता है।शिशु को भाँप दिलाने के लिए आप अपने बाथरूम को चारों तरफ से बंद करके उसमें गरम शावर (Shower) चला दें।जब बाथरूम में भाँप बन जाये तब शिशु को लेकर पंद्रह मिनट के लिए बाथरूम में बैठ जाये।इस तरह भाँप आपके शिशु के फेफड़े को साफ कर देगा और बंद नाक की समस्या भी खत्म हो जायेगी।यदि बच्चा थोड़ा बड़ा हो और खुद से भाँप ले सकता हो तो उसके लिए आप एक बर्तन में गर्म पानी करके उसके सिर और बर्तन को एक बड़े तौलिए से ढक दें और उसे जोर-जोर सेश्वास लेने को कहें।इससे बच्चे को सर्दी और खाँसी की समस्या में राहत मिलेगी। दिन में दो बार इस प्रक्रिया को करने से बच्चा जल्द ही ठीक हो जायेगा।
  3. स्तनपान : 6 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए माँ का दूध ही सर्दी-खाँसी की समस्या से छुटकारा दिलाता है।माँ का दूध शिशु को किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ने की शक्ति देता है।
  4. अजवाइन : अजवाइन में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो सर्दी और खाँसी को दूर करने में मदद करता है। एक कपड़े के टुकड़े में थोड़ी-सी अजवाइन लेकर एक पोटली बना लें और उस पोटली को तवे पर रखकर हल्का गर्म कर लें। फिर उस पोटली को अपने बच्चे की छाती पर रखकर उससे गर्म भाँप दें।दो बातों का धयान रखें, एक यह कि भाँप देते बच्चे का बदन पूरी तरह से ढका हुआ हो और दूसरा यह कि पोटली इतनी गर्म न हो कि बच्चे की मुलायम त्वचा जल जाये। इस प्रक्रिया को दो से तीन दिनों तक दोहराने से सर्दी-खाँसी में फर्क पड़ेगा।गर्म अजवाइन का गंध बलगम को दूर करता है।इसके अतिरिक्त आप सरसों के तेल में अजवाइन मिलाकर भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए पहले एक कटोरी में थोड़ा-सा सरसों का तेल गर्म कर लें, फिर आँच बंद करके उसी गर्म तेल में थोड़ी-सी मात्रा में अजवाइन मिला दें।उस दौरान उठने वाला भाँप बच्चे को दें, उससे बहुत फर्क पड़ेगा, साथ ही अजवाइन युक्त सरसों के तेल से बच्चे की हथेली, छाती, पैर और पूरे बदन में मालिश करें, इससे बच्चे को बंद नाक, बलगम, जुकाम, खाँसी की समस्या में राहत मिलेगी। दिन में दो बार इसी तेल से मालिश करने से दो से तीन दिनों में ही फर्क दिखेगा।
  5. गर्म सूप (Soup) :बच्चा यदि थोड़ा बड़ा हो, अर्थात केवल स्तनपान पर ही न हो और अन्य खाद्य पदार्थों का भी सेवन करता हो, तो आप उसे गर्म सूप पिला सकते है।सब्जियों का सूप या चिकेन (Chicken) सूप पिलाने से जुकाम और खाँसी में फर्क पड़ेगा साथ ही बच्चे की प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होगी और वो तंदरुस्त रहेगा।
  6. अदरक :सर्दी और खाँसी की समस्या में अदरक एक प्रभावी उपाय है। 6 कप पानी में आधा कप बारीक कटा हुआ अदरक और दालचीनी के दो छोटे टुकड़े डालकर बीस मिनट तक धीमी आँच पर पकाएं। उसके बाद उसे छानकर उसमें एक चम्मच शहद या एक चम्मच मिश्री का चूर्ण डालकर बच्चे को पिलायें।एक साल से अधिक उम्र के बच्चे को दिन में तीन से चार बार थोड़ा-थोड़ा करके पिलाने से उसे सर्दी और खाँसी में राहत मिलेगी।रात को सोने जाने से पहले अदरक के इस चाय का सेवन कराने से बच्चे की रात की नींद भी अच्छी होगी और जुकाम एवं खाँसी से छुटकारा भी मिलेगा।
  7. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : एकसाल से अधिक उम्र के बच्चे को तुलसी के पत्ते का काढ़ा भी पिला सकते हैं।सर्दी और खाँसी में सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते।तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें। अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।फिर इस काढ़े को छान लें फिर आधे कप काढ़े में दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार अपने बच्चे को पिलायें।इससे बलगम की समस्या भी खत्म हो जाती है और सर्दी में भी राहत मिलती है।
  8. लहसुन : लहसुन के तेल को लगाने से जुकाम और खाँसी में आराम मिलता है। एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो से तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल को बच्चे की हथेली, छाती और नाक पर अच्छे से लगायें।इससे सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होगी।
  9. गुड़, काली मिर्च और जीरा : तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को गुड़, काली मिर्च और जीरे के मिश्रण का सेवन कराने से सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होती है। एक गिलास गर्म पानी में आधी चम्मच पीसी हुई काली मिर्च, आधा चम्मच पीसा हुआ जीरा और एक चम्मच गुड़ मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके बच्चे को उसका सेवन कराने से जुकाम और सर्दी की समस्या दूर हो जाती है। यह मिश्रण छाती में जमे बलगम को निकालने के साथ सर्दी और खाँसी का भी अच्छा उपचार है।
  • नींबू और शहद :सर्दी और खाँसी की समस्या में आप बच्चे कोनींबू के रस में शहद मिलाकर पिला सकते हैं।इससे जुकाम और खाँसी की समस्या दूर होती है और बच्चे को आराम मिलता है।यदि बच्चा एक साल से अधिक उम्र का हो तो आप एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस निचोड़ लें और फिर उसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को पिलायें।यदि बच्चा एक साल से कम उम्र का हो तो एक चम्मच नींबू के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पिलायें।नींबू में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा अधिक होती है जो सर्दी और खाँसी के जीवाणुओं से लड़ने में सक्षम है और शहद बलगम हो हटाकर छाती को साफ करता है।
  • पानी : इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आपके बच्चे के शरीर में पानी का अभाव न हो। इसलिए समय-समय पर उसे पानी पिलाते रहें।पानी मल-मूत्र के द्वारा बच्चे के शरीर से हर तरह के जीवाणु को निकालकर उसे बंद नाक, बलगम, छाती जमने आदि की समस्या से बचाता है।आप पानी को हल्का गर्म करके भी अपने बच्चे को पिला सकते हैं।
  1. डॉक्टर की सलाह : बच्चे को अगर सर्दी-खाँसी के कारण साँस लेने में दिक्कत हो रही हो या वो अत्यधिक मात्रा में उल्टी कर रहा हो अथवा उसके शरीर का तापमान कम न हो रहा हो तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और उपयुक्त जाँच करवायें।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप बच्चे को सर्दी और खाँसी की समस्या से निजात दिला सकते हैं। वैसे तो विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को पहले दो से तीन सालों में आठ से दस बार जुकाम और खाँसी हो सकता है, इसलिए सर्दी-खाँसी की समस्या बच्चों में आम है।ऐसी स्थिति में बच्चे की तकलीफ को कम करने के लिए कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक हैं, जैसे :

  • बच्चे को जुकाम और खाँसी होने पर उसकी छाती को खुला न रखें और उसके शरीर को ढक कर रखें ताकि किसी भी तरह से उसे ठंड न लगें।
  • यदि आपके घर में कोई बीमार हो या जुकाम और खाँसी का शिकार हो तो उसे बच्चे के पास न जाने दें।
  • अगर आपके घर में कोई धूम्रपान करता हो तो उसे बाहर जाने को कहें, बच्चे के सामने बिल्कुल धूम्रपान न करें।
  • बच्चे का नाक बंद होने पर आप डॉक्टर की सलाह लेकर नेसल ड्रॉप (Nasal Drop) का प्रयोग कर सकते हैं।

बंध्यता या बांझपन दूर करने के घरेलू उपचार

बंध्यता या बाँझपन प्रजनन प्रणाली की एक समस्या है जिसके कारण महिला के गर्भधारण में विकृति आ जाती है।गर्भधारण की प्रक्रिया कई बातों पर निर्भर करती हैं, जैसे, पुरुष द्वारा स्वस्थ शुक्राणु तथा महिला द्वारा स्वस्थ अण्डों का उत्पादन होना, अबाधित गर्भ नलिकाएँ ताकि शुक्राणु बिना किसी रुकावट के अण्डों तक पहुँच सके, अण्डों को निषेचित करने की शुक्राणु की क्षमता, निषेचित अंडे का महिला के गर्भाशय में स्थापित होने की क्षमता, गर्भाशय का स्वस्थ होना तथा भ्रूण के विकास के लिए महिला के होर्मोन (Hormone) का अनुकूल होना।इनमें से किसी एक में विकृति आने का परिणाम बांझपन हो सकता है।पुरुषों में कमी के कारण भी महिलाओं में बाँझपन की समस्या को देखा जा सकता है।लेकिन अक्सर भारतीय समाज में देखा जाता है कि जब भी किसी दम्पत्ति को संतान नहीं होती तो सबसे पहले पत्नी को ही दोषी ठहराया जाता है, और उन्हें बाँझ कहकर ताने दिए जाते हैं, यहाँ तक कि कभी-कभी तलाक तक दे दिया जाता है।

जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO ) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में नपुंसकता के मामले बढ़े हैं।यदि कोई दम्पत्ति नियमित रूप से एवं बिना किसी गर्भ-निरोधक का उपयोग करते हुए सम्बन्ध बनाते है और उसके बावजूद भी महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है तो उसे बाँझपन या बंध्यता से जुड़ी समस्या माना जाता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गर्भावस्था बनाये रखना और एक जीवित बच्चे को जन्म न दे पाने की असमर्थता भी बाँझपन में ही सम्मिलित होता हैं। स्त्रियों में प्रजनन क्षमता विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकती हैं, जैसे, पॉलीसिस्टिक ओवरीयन सिंड्रोम(Polycystic ovarian syndrome or PCOS), गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids), एनीमिया (Anaemia), थायरॉएड (Thyroid), श्रोणी सूजन की बीमारी (Pelvic inflammatory disease), अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब (Blocked fallopian tubes), कैंडिडा और यौन संचरित रोग (Candida and sexually transmitted diseases or STDs)आदि।

आज की वर्तमान जीवन शैली ने स्त्री और पुरुष दोनों को ही अत्यधिक प्रभावित किया है।अधिक मात्रा में मद्यपान और धूम्रपान करना, ड्रग्स लेना, ज्यादा उम्र होना (35 वर्ष से अधिक), मोटापा, अत्यधिक तनाव, अनियमित मासिक होना, अतिरिक्त शारीरिक श्रम, अनियमित और अस्वास्थ्यकर खान-पान भी महिलाओं के बाँझपन का कारण हो सकते हैं। महिलाओं के लिए बंध्यता एक ऐसी समस्या है जिसके कारण वे चिंता, उदासी, अकेलेपन का शिकार होती हैं।आज इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In vitro fertilizationor IVF) जैसी तकनीक निःसंतान दम्पत्ति के लिए वरदान साबित हुई है और इसके कारण कुछ हद तक बंध्यता की समस्या का समाधान भी हुआ है।लेकिन इस तरह की तकनीक बहुत ही महँगी होती है जो हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है।इसलिए यहाँ कुछ ऐसे प्राकृतिक और घरेलू उपाय पेश हैं जो बाँझपन के मूल कारणों से लड़ने और गर्भवती होने की संभावनाओं को बढ़ाने में मददगार हैं।

itt-1455950315

बाँझपन दूर करके गर्भधारण करने के घरेलू उपाय

  1. अश्वगंधा :अश्वगंधा हार्मोनल संतुलन को बनाये रखने और प्रजनन अंगों के समुचित कार्य क्षमता को बढ़ाने में मददगार है।यह जड़ी-बूटी बार-बार हुए गर्भपात के कारण शिथिल गर्भाशय को समुचित आकार में लाकर उसे स्वस्थ बनाने में मदद करती है। हलके गर्म पानी में एक चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर दिन में दो बार उसका सेवन करने से गर्भाशय की क्षमता बढ़ती है और बाँझपन की समस्या दूर होती है।
  2. गाजर : गाजर में पाये जाने वाले आवश्यक पोषक तत्व शरीर को भीतर से स्वस्थ रखता है और गर्भाशय की दुर्बलता को दूर करता है।रोजाना सुबह नियमित रूप से एक गिलास गाजर का रस पीने से बंध्यता की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
  3. जायफल :जायफल में गर्भाशय की दुर्बलता को दूर करने की क्षमता है। जायफल को महीन पीसकर उस चूर्ण को बेहद बारीक कपड़े में से छानकर अलग कर लें। इसके पश्चात् अलग किये गए जायफल के बारीक चूर्ण में बराबर मात्रा में पीसी हुई शक्कर मिलाकर एक साफ डब्बे में रख लें। मासिक स्राव के बाद तीन दिन तक लगभग आधा चम्मच इसी चूर्ण को अपनी हथेली में रखकर खायें। इसके साथ दूध व भात (पका हुआ चावल) का पथ्य लें। इस उपचार से गर्भ ठहरने की संभावना रहती है।
  4. सिंघाड़ा : सिंघाड़े के सेवन से गर्भाशय की दुर्बलता दूर हो जाती है तथा गर्भाशय की क्षमता में वृद्धि होती है।
  5. खजूर : खजूर गर्भधारण करने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।खजूर में विटामिन ए (Vitamin A), विटमिन बी (Vitamin B), विटामिन ई (Vitamin E) आयरन (Iron) जैसे पोषक तत्व हैं जो शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है।10-12 खजूर के बीज निकालकर उसे अच्छे से पीस लें, फिर उसमें दो चम्मच कटे हुए धनिया पत्ती डालकर एक मिश्रण तैयार कर लें। अब उसमें तीन-चौथाई कप गाय का दूध मिलायें और उसे कुछ देर के लिए पकायें। आँच से उतारकर, ठंडा करके इसका सेवन करें।अपने मासिक स्राव के बाद एक सप्ताह तक रोजाना इसका सेवन करें।इसके अलावा आप रोजाना नाश्ते में दूध के साथ 6-8 खजूर खा सकते हैं या दही के साथ भी खजूर का सेवन कर सकते हैं।
  6. अनार :रोजाना अनार का सेवन करने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है और शरीर भी स्वस्थ रहता है।इसके सेवन से गर्भाशय के रक्त प्रवाह में वृद्धि होता है।यह गर्भाशय के दीवारों को मोटा करके गर्भपात की संभावना को कम करने में सहायक है, साथ ही यह भ्रूण के स्वस्थ विकास में भी मदद करता है।अनार की बीजों और अनार के छाल को बारीक पीस लें। फिर इन दोनों चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर एक साफ और वायुरोधी डब्बे में डालकर रखें। रोजाना दिन में दो बार आधा चम्मच उस चूर्ण को एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर उसका सेवन करें।इससे आपको फायदा होगा।इसके अलावा आप चाहे तो अनार का रस पी सकते हैं या फिर साबुत अनार का सेवन भी कर सकते हैं।
  7. दालचीनी : दालचीनी, डिम्ब-ग्रंथि के सही रूप में कार्य करने में मदद करता है साथ ही बाँझपन की समस्या को दूर करने में भी सहायक है। इसके अलावा यह पॉलीसिस्टिक ओवरीयन सिंड्रोम (Polycystic ovarian syndrome or PCOS) का एक बेहतरीन इलाज है।2007 के एक शोध लेख में यह बताया गया है कि दालचीनी महिलाओं के अनियमित मासिक स्राव को नियमित करने में मदद करता है।एक कप गर्म पानी में एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर पीने से फायदा होता है।कुछ महीनों तक नियमित रूप से इसका सेवन करें। इसके अलावा आप अपने खाद्य में भी दालचीनी का इस्तेमाल कर सकते हैं।लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि एक दिन में दो चम्मच से अधिक दालचीनी के चूर्ण का सेवन न करें।
  8. विटामिन डी (Vitamin D) : विटामिन डी गर्भावस्था के लिए और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए आवश्यक है।वास्तव में विटामिन डी की कमी, बाँझपन और गर्भपात का कारण हो सकती है।इसलिए विटामिन डी युक्त खाद्य का सेवन करें जैसे, कुकुरमुत्ता (Mushroom), चीज़ (Cheese), अंडा, मछली आदि।
  9. अलसी के बीज (Flax seed) : अलसी के बीजग्रीवा बलगम को बढ़ाने में मदद करता है, साथ ही यह शुक्राणुओं को अधिक समय तक जीवित रखकर उसे गर्भाशय ग्रीवा में पहुंचाकर गर्भधारण में मदद करता है। आप अण्डोत्सर्ग के बाद ग्रीवा बलगम को बढ़ाने के लिए एक चम्मच अलसी के बीज या उसके तेल का सेवन कर सकते हैं।
  10. बैगन : बैगन पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता से जुड़ी समस्या का एक आसान उपचार है।एक बैगन को पहले आप अच्छे से पका लें। फिर पके हुए बैगन में थोड़ी-सी छाछ मिलाकर उसे अच्छे से मसल लें और उसका सेवन करें।रोजाना नियमित रूप से एक महीने तक इसका सेवन करने से बंध्यता की समस्या दूर हो जायेगी।
  • बरगद का पेड़ : बरगद के पेड़ का मुलायम जड़ पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता से जुड़ी समस्या को दूर करने का एक प्राकृतिक उपचार है। यह पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता संबंधी जन्मजात दोष को दूर करता है। बरगद के पेड़ के मुलायम जड़ों को अच्छे से सुखाकर उसका चूर्ण बना लें।एक गिलास दूध में इसी चूर्ण का करीबन 20 ग्राम मिलाकर लगातार तीन दिनों तक उसका सेवन करें।महिलाएँ इस उपचार का प्रयोग अपने मासिक स्राव के आठवें या नवें दिन से करें।
  • योगा या व्यायाम :योगा या व्यायाम से आपके शरीर का अतिरिक्त वसा (Fat) घटता है और होर्मोन (Hormone) का स्तर भी ठीक रहता है। विभिन्न प्राणायाम की मदद से प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। किसी अच्छे योग विशेषज्ञ से योग सीखकर ही रोजाना नियमित रूप से योग या व्यायाम करें।इससे न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि यह मानसिक तनाव को दूर करने में भी मदद करता है।पुरुषों और महिलाओं दोनों को ही योगा करना चाहिए।
  • सही और स्वस्थ संतुलित खान-पान : सही, स्वस्थ और संतुलित खान-पान हॉर्मोन (Hormone) को नियंत्रित करता है और आपके प्रजनन तंत्र को स्वस्थ रखता है। इससे आपके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होता है।

उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के द्वारा बंध्यता से जुड़ी समस्याओं का निवारण किया जा सकता है।लेकिन कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह लेना और उपयुक्त जाँच करवाना जरुरी है।यह सही है कि आज की जीवन शैली, अत्यधिक तनावयुक्त जीवन और काम के दबाव के कारण न केवल महिलाओं में बंध्यता से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को देखा जा रहा हैं बल्कि पुरुषों में भी नपुंसकता की समस्या बढ़ी हैं। इसलिए इस संदर्भ में महिलाओं और पुरुषों के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी हैं, जैसे :

  • पुरुष हो या स्त्री, सभी के लिए बाहर का अस्वास्थ्यकर खाद्य बहुत ही हानिकारक है।इससे वजन बढ़ता है जो बंध्यता का कारण हो सकता है।
  • पुरुषों और महिलाओं को धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करना चाहिए। इसके कारण भ्रूण के विकास में समस्या उत्पन्न हो सकती है और गर्भपात होने की आशंका रहती है।
  • प्लास्टिक में लपेटें खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल अच्छा नहीं होता। प्लास्टिक में टोक्सिन (Toxins) होता है जो खाने के साथ आपके शरीर में प्रवेश करके बंध्यता या नपुंसकता की समस्या को उत्पन्न कर सकता हैं।
  • नकली मीठा करने वाले पदार्थों (Artificial Sweeteners) का सेवन भी पुरुषों और महिलाओं में बंध्यता से जुड़ी समस्या को उत्पन्न कर सकता है।
  • अत्यधिक मात्रा में कैफीनयुक्त (Caffeine) पेय का सेवन भी गर्भपात का कारण हो सकता है।

 

दाँतों का पीलापन दूर करने के घरेलू उपाय

सफेद और चमकते दाँत किसी के भी व्यक्तित्व में निखार ला सकते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने पीले दाँतों के कारण दूसरों के सामने हँसने से बचते हैं या मुँह पर हाथ रखकर हँसते हैं।दाँतों का पीलापन एक जटिल समस्या है, जो चेहरे की सुन्दरता को प्रभावित करता है।दाँतों के पीलेपन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • रोजाना ब्रश न करना।
  • दाँतों का ठीक से साफ न होना।
  • बिना ब्रश किये खाना खाना।
  • मीठे खाने की चीजों, जैसे आइसक्रीम, चॉकलेट, मिठाई आदि का सेवन करना.
  • शराबपीना।
  • किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों,जैसे गुटखा, पान, जर्दा,आदि का सेवन करना।
  • धूम्रपान करना।

दाँतों का पीलापन दूर करने के घरेलू नुस्खे

हम अपने दाँतों को कुछ घरेलू, प्राकृतिक और सुरक्षित उपायों से सफेद और चमकदार बना सकते हैं।यदि आप भी दाँतों के पीलेपन से परेशान है तो आपके लिए यहाँ कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे पेश हैं जो आपको आपकी इस परेशानी से छुटकारा दिलायेगी।

lemon

  1. नींबू :नींबू मुँह की लार (Saliva) में वृद्धि करता है और इसलिए यह दांतों और मसूड़ों के लिए फायदेमंद होता है।

– एक नींबू का रस निकालकरउसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर खाने के बाद उससे कुल्ला करें।यह उपाय रोज करने से दाँतों का पीलापन चला जाता है और साँसों की दुर्गन्ध भी दूर हो जाती है।

– नींबू के पानी में रातभर दाँतून को भीगोकर रखे और सुबह उसी दाँतून का इस्तेमाल करें। इससे दाँतों का पीलापन दूर होगा एवं दांत तथा मसूड़े स्वस्थ और मजबूत होंगे।यदि प्रतिदिन दाँतून करना संभव नहीं तो सप्ताह में एक बार दाँतून जरुर करें।

– एक चौथाई कप खाने का सोडा और आधे नींबू का रस अच्छे से मिलाकर शीशे के सामने खड़े होकर साफ हाथों से या बड (Bud) की सहायता से उस मिश्रण को दाँतों पर लगाये।एक मिनट तक रखने के बाद धो ले। इस प्रक्रिया से दाँतों का पीलापन दूर होगा और दाँत चमकने लगेंगे।

– नींबू के छिलकों को धूप में सुखाकर पीस ले और उसमें बराबर मात्रा में फिटकिरी मिलाकर उस मिश्रण से मंजन करें।इससे दाँत चमकदार होते हैं और मसूड़े भी मजबूत होते हैं।

  1. 2. तेज पत्ता :तेज पत्ते के प्रयोग से दाँतों की चमक लौट आती है।

– तेज पत्ते को सुखाकर उसे बारीक पीस ले और हर तीसरे दिन एक बार उससे मंजन करे।इससे दाँतचमकने लगेंगे।

  1. खाने का सोडा :घर में इस्तेमाल होने वाला खाने का सोडा (Baking Soda) दाँतों को चमकाने का एक बेहतरीन उपाय है।

– रोजाना सुबह थोड़ा-सा खाने का सोडा लेकर उँगली के सहारे उसे दाँतों पर रगड़ने के बाद गुनगुने पानी से मुँह धो ले। इससे दाँतों का पीलापन दूर होता है।

– रोज ब्रश करते समय भी मंजन (Toothpaste) में थोड़ा-सा खाने का सोडा डालकर ब्रश कर सकते है।इससे दाँतों की चमक लौट आयेगी।

– एक कप पानी में खाने का सोडा और हाइड्रोजन परऑक्‍‌साइड‌ (Hydrogen Peroxide) मिलाकर माउथवॉश (Mouthwash) की तरह भी उसका इस्तेमाल कर सकते है।

4.संतरे का छिलका : संतरे के छिलके से रोज दाँतों की सफाई करने से कुछ ही दिनों में दाँतों का पीलापन दूर हो जाता है।

– रोज रात को सोने जाने से पहले संतरे के छिलके को दाँतों पर रगड़े। संतरे के छिलके में मौजूद विटामिन सी (Vitamin C) और कैल्शियम (Calcium) से दाँतों की मजबूती और चमक बनी रहती है।

– संतरे के छिलके और तुलसी के पत्तों को सुखाकर उसका चूर्ण (Powder) बनाकर रोजाना ब्रश करने के बाद उससे दाँतों पर हलके हाथों से मसाज कर सकते है, इससे भी दाँत मोती जैसे चमकने लगते है।

5.नमक :नमक से दाँत साफ करने का उपाय बहुत पुराना और बेहतरीन हैं।

– नमक में 2-3 बूंद सरसों का तेल मिलाकर दाँत साफ करने से पीलापन दूर हो जाता है।

– नमक और खाने का सोडा मिलाकर भी मंजन तैयार करके उससे सफाई की जा सकती है।इससे दाँतों की चमक लौट आएगी।

– नमक को चारकोल के साथ मिलाकर हलके हाथों से दाँतों पर मसाज करने से भी दाँत सफेद होते हैं।

6.स्ट्रॉबेरी :स्ट्रॉबेरी दाँतों को चमकदार बनाने का एक कारगर तरीका है। इसमें मौजूद विटामिनसी (Vitamin C) दाँतों को सफेद बनाने में सहायक है।

– स्ट्रॉबेरी के कुछ टुकड़ों को पीसकर उससे एक लेप बना ले और दिन में दो बार उससे दाँतों पर मसाज करे।ऐसा करने से कुछ ही दिनों में पीले दाँत सफेद होने लगते हैं।

– खाने का सोडा और स्ट्रॉबेरी के पल्प को मिलाकर भी दाँतों पर हलके हाथों से मसाज करने से दाँतों का पीलापन खत्म हो जाता है।

  1. तुलसी :तुलसी में दाँतों को चमकाने का गुण तो है ही साथ ही यह पायरिया आदि से भी दाँतों की रक्षा करती है।

– तुलसी के पत्तों को सुखाकर उसका चूर्ण बना ले, और उस चूर्ण को रोजाना इस्तेमाल करने वाले मंजन (Toothpaste) में मिलाकर उससे दाँतों की सफाई करे, इससे दाँत चमकने लगेंगे।

Img-223754Tulsi-leaves-Pan-PL52-b

– तुलसी के पत्तों का लेप बनाकर उसमें थोड़ा-सा सरसों का तेल मिलाये. उस लेप से दाँतों की सफाई करने पर बहुत फायदा होता है।

  1. सब्जियों का सेवन : दाँतों का पीलापन दूर करने का एक स्वास्थ्यकर और कुदरती उपाय है सब्जियों का सेवन करना।सब्जियों में प्राकृतिक एसिड (Acid) होता है जो दाँतों के संपर्क में आने से दाँत प्राकृतिक रूप से सफेद हो जाते हैं। विटामिन ए से भरी ब्रोकोली, गाजर, कद्दू, ककड़ी जैसी सब्जियाँप्राकृतिक रूप से दाँतों की सफाई करने के साथ दाँतों की जड़ो को भी मजबूत बनाती हैं। गाजर को कच्चा चबाने से उसके रेशे दाँतों से रगड़कर उसे साफ करते हैं।
  2. फलों का सेवन : फलों के सेवन से भी दाँत मजबूत और चमकदार होते हैं नाशपाती और सेब दाँतों के लिए काफी अच्छे हैं।इस तरह के फल चबाकर खाने से दाँतों की प्राकृतिक सफाई होती हैं और दाँतों का पीलापन भी कम होता है।विटामिन सी (Vitamin C) से भरे स्ट्रॉबेरी, कीवी जैसे फल भी मसूड़ों को मजबूत बनाते हैं। बादाम और अखरोट जैसे सूखे फल भी दाँतों को मजबूत बनाते हैं।
  3. केला : केला पीसकर उसका लेप बनाकर उससे रोज एक मिनट तक दाँतों का मसाज करें और उसके बाद ब्रश करें।रोजाना ये उपाय करने से धीरे-धीरे दाँतों का पीलापन खत्म हो जाता है।
  4. सेब का सिरका :दाँतों को सफेद और चमकदार बनाने के लिए सेब के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है। सेब के सिरके को लगभग एक महीने तक दाँतों पर लगाने से दाँतों का पीलापन दूर हो जाता है।

– एक चम्मच जैतून के तेल में सेब का सिरका मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके उसमें ब्रश डूबोकर दाँतों पर हलके हाथों से घुमाएँ।इस नुस्खे को अपनाने से दाँतों का पीलापन दूर होने के साथ साँसों की दुर्गन्ध भी दूर होती है। लेकिन इस बात का जरुर ध्यान रखे कि सिरके से आपको कोई ऐलर्जि न हो।

  1. नीम : नीम का उपयोग प्राचीन काल से ही दाँत साफ करने के लिए किया जाता रहा है।नीम में दाँतों को सफेद बनाने और जीवाणु (Bacteria)को खत्म करने के गुण पाये जाते हैं।नीम प्राकृतिक प्रतिजीवाणु (Natural Anti-Bacterial) और प्रतिरोधी (Anti-septic) है।

– आसानी से उपलब्ध नीम के दाँतून के प्रयोग से दाँत रोग-मुक्त और चमकदार होते हैं।

– नीम के पत्तों की रख में कोयले का चूर्ण और कपूर मिलाकर अपने दाँतों पर लगाने से दाँत सफेद होते हैं।

  1. हल्दी : हमारे खाने को सही रंग देने वाली हल्दी भी हमारे दाँतों को चमकदार बनाने में सहायक होती है।पीसी हुई हल्दी, थोड़ा-सा नमक और सरसों का तेल मिलाकर एक लेप तैयार करके सुबह ब्रश या उंगली की सहायता से अपने दाँतों और मसूड़ों में लगाकर उसे कुछ देर तक छोड़ दे, फिर थोड़ी देर बाद कुल्ला करके अच्छे से मुँह साफ कर ले। यह मिश्रण न केवल दाँतों के पीलेपन को दूर करती है बल्कि इससे पायरिया जैसी समस्या भी उत्पन्न नहीं होती।
  2. सूरजमुखी के बीज : सूरजमुखी के बीजों में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन-ई (Vitamin E) भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।सूरजमुखी के बीजों को चबाने से मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है और दाँतों में सड़न नहीं होती।
  3. नियमित रूप से ब्रश करना : दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना आवश्यक है क्योंकि यह करने से आपके दाँतों के बीच चिपके जीवाणु निकल जाते हैं जोकि आपके मुँह के सड़न का कारण बनते हैं।अतः सड़न से बचने के लिए नियमित रूप से दिन में दो बार ब्रश करना अत्यावश्यक हैं।
  4. नियमित रूप से दन्त चिकित्सक से परीक्षण करवाना : उपर्युक्तनुस्खों को अपनाकर दाँतों को सफेद और चमकदार तो बनाया जा ही सकता है पर साथ ही स्वस्थ दाँतों के लिए दन्त चिकित्सक से दाँतों का परीक्षण करवाना भी अनिवार्य हैं।

5-Home-Remedies-for-Whiter-Teeth

उपर्युक्त उपायों के साथ यदि आप अपनी कुछ गलत आदतों को भी बदल दें तो इससे आपके दाँत हमेशा सुरक्षित, मजबूत और चमकदार बने रहेंगे।

  • खाने के बाद ब्रश करें।यदि आप मिठाई भी खाते हैं, तो खाने के बाद अच्छी तरह से कुल्ला करके अपना मुँह जरुर साफ करें।
  • तंबाकू, गुटखा, पान, जर्दा जैसे पदार्थों का सेवन ना करें।
  • शराब और धूम्रपान से परहेज करें।
  • अतिरिक्त मात्रा में चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन ना करें।

डेंगू के लिए घरेलू उपचार

हर साल करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वालेविभिन्न वायरल (Viral) रोगों में डेंगू सबसे खतरनाक रोग है।इस रोग के वायरस (Virus) चार प्रकार के होते हैं जिन्हें सिरोटाइप कहा जाता है।जब कोई रोगी डेंगू के बुखार से ठीक हो जाता है तब उसे उस विशेष प्रकार के डेंगू वायरस से लम्बे समय तक प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है लेकिन अन्य तीन प्रकार के डेंगू वायरस से दोबारा डेंगू होने का डर रहता है। दूसरी बार होने वाला डेंगू काफी गंभीर हो सकता है जिसे डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic fever) कहते है।डेंगू हवा, पानी, साथ खाने से या छूने से नहीं फैलता।

यह रोग एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) नामक मादा मच्छर के काटने से होता है।डेंगू के वायरस का प्रसार एक चक्र के अंतर्गत होता है।जब मादा एडीज एजिप्टी मच्छर संक्रमित या डेंगू के शिकार व्यक्तिको काटता है तो उसके अन्दर वही वायरस चला जाता है और जब यही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तब यह वायरस उस स्वस्थ व्यक्ति में चला जाता है और इसी तरह यह चक्र निरंतर चलता रहता है।एडीज एजिप्टी मच्छर की कुछ खास विशेषताएं होती हैं, जैसे; यह दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं, इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं, ये ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते, ठन्डे या छाँव वाले जगहों पर रहते हैं, घर के अन्दर रखे हुए साफ पानी में प्रजनन करते हैं, अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की दूरी के अन्दर ही उड़ते हैं,

dengue_storysize_660_112913041732

गटर या रास्ते में जमा प्रदूषित पानी में कम प्रजनन करते हैं, पानी के सूखने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनों तक जीवित रह सकते हैं।डेंगू के लिए कोई निश्चित दवाई नहीं है।हर साल भारत में इस बीमारी के कारण कई लोगों की मृत्यु हो जाती हैं।डेंगू के मरीजों की मृत्यु खून में प्लेटलेट (Platelet) की कमी के कारण होती है।कभी-कभी बाहर से भी प्लेटलेट चढ़ाया जाता है ताकि खून में प्लेटलेट की मात्रा सही रहें। डेंगू के वायरस का काम ही होता है खून में प्लेटलेट की संख्या को कम करना।डेंगू के लक्षण तीन से सात दिनों के अन्दर विकसित होते हैं। डेंगू के लक्षण निम्नलिखित हैं :

  • अचानक तीव्र ज्वर या बुखार
  • सिर और आँखों में दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में भयानक दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते बनना
  • ठंड लगना
  • भूख न लगना
  • गले में खराश
  • दस्त लगना
  • उल्टी होना
  • असामन्य रूप से कान, मसूड़ों और पेशाब आदि से खून निकलना

डेंगू के लिए घरेलू नुस्खें

source: stylecraze.com
source: stylecraze.com
  1. पपीते की पत्ती : डेंगू के बुखार के लिए पपीते की पत्तियां बहुत ही असरदार हैं। पपीते के पत्तों में मौजूद पपैन एंजाइम (Papain enzyme) खून में प्लेटलेट (Platelet) की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। डेंगू के उपचार के लिए कुछ पपीते की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें।वही रस दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच रोगी को देते रहें।
  2. मेथी के पत्ते :मेथी के पत्ते डेंगू के बुखार को ठीक करने में सहायक हैं। मेथी के कुछ साफ पत्तों को पानी में उबाल लें, फिर उस पानी को छानकर चाय की तरह रोगी को पिलाये।इसके सेवन से शरीर के विषाक्त पदार्थ निकल जाते है और डेंगू का वायरस (Virus) भी खत्म हो जाता है। इसके अलावा मेथी के दाने के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर भी रोगी को दे सकते हैं।
  3. संतरा : विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध संतरा पाचन शक्ति को ठीक करता है और साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। डेंगू के रोगी के लिए संतरे का रस पीना आवश्यक है।
  4. तुलसी और कालीमिर्च :तुलसी के पत्तों और दो ग्राम कालीमिर्च को पानी में उबालकर पीने से डेंगू के बुखार में फर्क पड़ता है। यह पेय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाती है और जीवाणु प्रतिरोधक तत्व के रूप में कार्य करती है।डेंगू के रोगी को दिन में तीन से चार बार इस पेय का सेवन करायें।
  5. धनिया पत्ती : डेंगू के बुखार से राहत दिलाने में धनिया पत्ती मदद करता है।थोड़ी-सी मात्रा में धनिया पत्ती लेकर उसे साफ पानी में धो लें, फिर उन्हीं पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें।दिन में तीन से चार बार रोगी को यह रस देते रहें. इससे बुखार कम हो जाता है।
  6. आँवला :आँवला विटामिन सी (Vitamin C) का श्रेष्ठ श्रोत है।यह खून को साफ करके आयरन (Iron) की मात्रा को बढ़ाने में सहायता करता है।शरीर में खून की सही मात्रा होने से डेंगू के वायरस धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं।रोगी को दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच आँवले का रस पिलाये।
  7. एलोवेरा :एलोवेरा लीवर (Lever) को स्वस्थ रखता है और पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है, साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। एलोवेरा के एक पत्ते को काटकर उसका रस निकाल लें, ध्यान रहें कि पत्ती से निकलने वाले पीले रस का प्रयोग बिल्कुल न करें।रोगी को दिन में दो बार एक चम्मच एलोवेरा का रस पिलाये। इससे शरीर के विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते हैं और डेंगू के वायरस (Virus) भी खत्म हो जाते है।
  8. गिलोय : गिलोय का काढ़ा बुखार, जुकाम और खाँसी को दूर करने में बहुत उपयोगी है। दो कप पानी में गिलोय की कुछ जड़ें और तुलसी के कुछ पत्ते डालकर तब तक उबाले जब तक कि पानी आधा न हो जाये।फिर उस काढ़े को रोगी को पिलाये।गिलोय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर को हर तरह के संक्रमण से बचाता है।
  9. हल्दी :डेंगू के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों के दर्द के लिए हल्दी बहुत उपयोगी है।एक गिलास दूध में एक से दो चम्मच हल्दी के चूर्ण को मिलाकर रोगी को पिलाने से रोगी को दर्द से राहत मिलेगी।
  • गोल्डनसील :गोल्डनसील में डेंगू के वायरस (Virus) को खत्म करने की क्षमता है। इस बूटी को कूटकर सीधे चबा भी सकते हैं या फिर इसे पीसकर उसका रस निकालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं।
  • चिरायता : चिरायता एक तरह की बूटी है जो स्वाद में बहुत कड़वा होता है।यह पाचन तंत्र को ठीक करने के साथ डेंगू के बुखार को कम करने में भी मदद करता है।इस बूटी को अच्छे से धोकर रातभर पानी में भीगोकर रखें।सुबह इसी पानी को छानकर रोगी को पिलाये।इसके निरंतर प्रयोग से बुखार कम हो जायेगा और रोगी को भी आराम मिलेगा।इसके अलावा एक चम्मच चिरायता के चूर्ण को पानी में मिलाकर भी पिला सकते हैं।
  • अनार : अनार खून को साफ करके शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है साथ ही यह डेंगू के बुखार के लिए बहुत उपयोगी है।डेंगू के रोगी को अनार का रस पिलाये।
  • नीम के पत्ते :नीम के पत्ते डेंगू के बुखार को ठीक करने के साथ प्लेटलेट की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद करता है। कुछ नीम के पत्ते लेकर उसे अच्छे से धो लें।फिर उन्हें पीसकर उसके रस को दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच रोगी को पिलाये। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
  • पानी : डेंगू होने पर शरीर में पानी का अभाव होता है जिसके कारण दस्त भी हो सकता।इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि रोगी को समय-समय पर पानी पिलाया जाये।पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पेशाब के माध्यम से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
  • जौ का पौधा या घास (Barley Grass) :जौ का पौधा या घास प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।इसे पीसकर इसके रस को रोगी को पिलाने से डेंगू का बुखार भी कम होगा और कमजोरी भी नहीं रहेगी।यह डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic fever) के लिए भी उपयोगी है।

barley grass

उपर्युक्त घरलू नुस्खों के द्वारा डेंगू की बीमारी से राहत मिलेगी। यदि तीन से चार दिनोंमें बुखार न उतरे तो चिकित्सक की सलाह लेकर उपयुक्त जांच करवायें।अपने खून की जांच करवाकर आपको पता चल सकता है कि आपके बुखार का कारण क्या है।इसके अलावा कुछ बातों का ध्यान रखना अत्यावश्यक हैं, जैसे :

  • डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए।
  • बुखार या सिरदर्द के लिए एस्पिरिन (Aspirin) या ब्रूफेन (Brufen) जैसी दवाइयाँ बिल्कुल न लें।बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह से मात्र पेरासिटामोल (Paracetamol) ही लेना उपयुक्त है।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से अपनी खून में प्लेटलेट (Platelet) की मात्रा की जाँच करवाते रहें।
  • रोगी को पर्याप्त मात्रा में आहार और पानी का सेवन करना चाहिए।
  • घर के अन्दर और आस-पास पानी जमा न होने दें। यदि आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा करके रखते हैं तो उसे हमेशा ढककर रखें।
  • घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
  • कूलर का काम न होने पर उसमें जमा पानी निकालकर सूखा दें।जरुरत पड़ने पर रोजाना नियमित रूप से कूलर का पानी बदलते रहें।
  • खिड़की और दरवाजे पर जाली लगाकर रखें।
  • किसी भी खुली जगह में जैसे गड्ढे, गमले आदि में पानी जमा न होने दें और अगर पानी जमा हो तो उसमें मिट्टी डाल दें।
  • रात को सोते वक्त मच्छरदानी लगाकर सोये।
  • मच्छर विरोधी उपकरणों का इस्तेमाल करें, जैसे, मच्छर भगाने वाला इलेक्ट्रिक बैट (Electric Bat), क्रीम (Cream), सिट्रॉनेला आयल (Cirtonela Oil) आदि।
  • अगर बच्चे बाहर खेलने जाते है, यहां तक कि स्कूल जाने से पहले भी उनके उनके शरीर और कपड़ों पर मच्छर भगाने वाली क्रीम (Cream) जरुर लगायें।
  • शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।