बवासीर के लिए घरेलू उपचार

बवासीर या पाइल्स एक खतरनाक बीमारी है।गुदा-भाग में वाहिकाओं की वे संरचनाएं हैं जो मल नियंत्रण में सहायता करती हैं।जब वे सूज जाते हैं या बड़े हो जाते हैं तो वे रोगजनक या बवासीर हो जाते हैं।इस रोग में गुदा-भाग की भीतरी दीवार में मौजूद खून की नसें सूजकर फूल जाती हैं। इससे उनमें कमजोरी आ जाती है और मलत्याग के वक्त जोड़ लगाने से या कड़े मल के रगड़ के कारण खून की नसों में दरार पड़ जाती है और उसमें से खून बहने लगता है। इस बीमारी में गुदाभाग में मस्से हो जाते हैं।मलत्याग के समय इन मस्सों में असहनीय पीड़ा होती है।बवासीर के कुछ लक्षण हैं, जैसे; मलद्वार के आस-पास खुजली होना; उठते, बैठते और चलते समय गुदा-भाग में दर्द होना; मलत्याग के समय कष्ट होना; मलद्वार के आस-पास पीड़ादायक सूजन होना; मलत्याग के बाद रक्त का स्राव होना; मलत्याग के बाद मस्सों का बाहर निकलना; कफ या श्लेष्मिक द्रव का स्राव होना; लम्बे समय तक कब्ज रहना इत्यादि।आम तौर पर बवासीर के दो प्रकार बताये गए हैं,अंदरूनी बवासीर और बाहरी बवासीर।

अंदरूनी बवासीर में मलद्वार के भीतर मस्सा हो जाता है और अगर रोगी को साथ में कब्ज भी हो तो मलत्याग के समय जोर लगाने पर यह मस्सा छिल जाता है और मलद्वार से खून आने लगते है,साथ ही असहनीय पीड़ा होने लगती है। इसमें सूजन को छुआ नहीं जा सकता पर महसूस किया जा सकता है।बाहरी बवासीर में मस्सा बाहर की तरफ होता है और इस स्थिति में दर्द नहीं होता, परन्तु मलत्याग के समय मस्से पर रगड़ की वजह से बहुत अधिक खुजली व पीड़ा होती है।इस स्थिति में सूजन को महसूस किया जा सकता है।बवासीर की दो अवस्थाएँ हैं, खूनी और बादी। खूनी बवासीर में किसी तरह का दर्द नहीं होता, सिर्फ खून निकलता है।इस अवस्था में मस्सा अन्दर की तरफ होता है जो मलत्याग के समय जोर देने से बाहर आने लगता है।कभी-कभी मस्सा अपने-आप ही अन्दर चला जाता है लेकिन स्थिति ख़राब होने पर या यह रोग बहुत पुराना होने पर हाथ से दबाकर ही मस्से को अन्दर की तरफ किया जा सकता है। कभी-कभी तो हाथ से दबाने से भी मस्सा अन्दर नहीं जाता।बादी बवासीर की स्थिति में पेट ख़राब रहता है, कब्ज बना रहता है, गैस बनती है। इसमें जलन, दर्द, खुजली, शरीर में बेचैनी इत्यादि होती हैं।

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इसमें मस्सा अन्दर की तरफ होता है।मस्सा अंदर होने की वजह से मलाशय का रास्ता छोटा पड़ता है और नसें फट जाती है और वहां घाव हो जाता है।इस रोग को फिशर (Fisher) भी कहते है, जिसमें असहनीय पीड़ा और जलन होती है।बवासीर पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है, जिसे अंग्रेजी में फिस्टुला (Fistula) कहते है।भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है।कुछ दिन बाद इसी रस्ते से पखाना भी आने लगता है। भगन्दर की आखरी अवस्था में धमनियां फट जाती हैं और बवासीर कैंसर का रूप ले लेता है जिसे रेक्टम कैंसर (Rectum Cancer) कहते है और जो जानलेवा साबित होता है। बवासीर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; लम्बे समय तक शौच को रोकना; कब्ज की समस्या होना; अधिक मसालेदार खाद्य का सेवन करना; देर रात तक जागना; लगातार खड़े रहना या एक ही जगह बैठे रहना; आनुवांशिकता इत्यादि।

बवासीर से राहत के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. ठंडी सेंक : बवासीर होने पर ठंडी सेंक देने से दर्द कम होता है और यह खुजली से भी तुरंत आराम दिलाती है।ठंडी सेंक सूजन को कम करने में मदद करता है जिससे मलत्याग करने में आसानी होती है।एक साफ कपड़े में बर्फ के कुछ टुकड़े लेकर उसका प्रयोग बवासीर के ऊपर करें।दिन में कई बार इसका उपयोग करें।रोजाना नियमित रूप से दिन में तीन बार दस मिनट तक इसका प्रयोग करें।इससे बवासीर से राहत मिलेगी।
  2. एलोवेरा (Aloe Vera) : बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने में एलोवेरा एक बेहतरीन उपाय है। बवासीर का प्राथमिक स्तर होने पर एलोवेरा के प्रयोग से वह सम्पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है।यह अंदरूनी और बाहरी बवासीर, दोनों के लिए ही फायदेमंद है। एलोवेरा का एक पत्ता काटकर उसके अन्दर से रस निकाल लें, फिर उसी रस का प्रयोग बवासीर के ऊपर करें।इसके अलावा आप एलोवेरा की पत्ती के किनारे से सारे काँटें निकालकर फेंक दें।अब उस पत्ती को छोटे-छोटे टुकडों में काटकर एक बर्तन में रखकर फ्रिज (Fridge) में रख दें।ठंडा होने पर उसी ठन्डे एलोवेरा का प्रयोग बवासीर के ऊपर करें। इससे जलन और सूजन कम हो जायेगी।
  3. नींबू का रस : नींबू में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो बवासीर की समस्या से निपटने में काफी मददगार है।एक रुई की मदद से ताजे नींबू के रस का प्रयोग सीधे सूजन वाली जगह पर किया जा सकता है।इससे बवासीर का दर्द कम हो जायेगा।इसके अलावा आप डेढ़ चम्मच नींबू का रस, अदरक का रस, पुदीने का रस और शहद मिलाकर दिन में एक बार इसका सेवन भी कर सकते है।इससे भी बवासीर से राहत मिलेगी।
  4. जैतून का तेल (Olive oil) : बवासीर के उपचार के लिए जैतून का तेल एक बेहतरीन उपाय है।जैतून के तेल में जलनरोधी गुण हैं।यह रक्त की धमनियों की लोच में वृद्धि करता है।यह मल की कठोरता को भी काफी हद तक कम करता है. रोजाना अपने खाद्य के साथ एक चम्मच जैतून के तेल का सेवन कर सकते हैं।इसके अलावा कुछ बेर के पत्तों से रस निकालकर उसे जैतून के तेल के साथ मिलाकर बवासीर के ऊपर लगाने से दर्द और सूजन से राहत मिलेगी।
  5. किशमिश : रात को सौ ग्राम किशमिश पानी में भीगो दें।सुबह किशमिश के साथ उसी पानी का सेवन करें।रोजाना नियमित रूप से इस उपचार का प्रयोग करने से पाचन तंत्र सही रहता है एवं कब्ज और बवासीर की समस्या से राहत मिलती है।
  6. बड़ी इलायची : बड़ी इलायची बवासीर को दूर करने का बहुत ही अच्छा उपचार है।पचास ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर भुन लीजिए।ठंडी होने पर उसे पीसकर एक वायुरोधी डब्बे में रख दीजिए।रोजाना सुबह बड़ी इलायची के इसी चूर्ण को पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर से राहत मिलती है।
  7. छाछ : छाछ बवासीर के इलाज का एक बेहतरीन विकल्प है।एक गिलास छाछ में एक-चौथाई चम्मच अजवाइन का चूर्ण और एक ग्राम काला नमक मिलाकर रोजाना दोपहर के खाने के बाद लेने से बवासीर की समस्या से राहत मिलेगी।छाछ बवासीर के दर्द को कम करता है और शरीर में नमी को बनाये रखता है।
  8. सेब का सिरका :सेब का सिरका बवासीर की समस्या को दूर करने में मदद करता है।बाहरी बवासीर के उपचार के लिए थोड़ी-सी रुई लेकर उसे सेब के सिरके में भीगोकर प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।पहले आपको थोड़ी जलन जरुर होगी, लेकिन इस प्रयोग से खुजली और दर्द दोनों ही कम हो जायेगा। इसके अलावा अंदरूनी बवासीर के लिए एक कप पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से खून निकलने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
  9. फाइबर (Fiber) युक्त भोजन :खाना आसानी से पचाने के लिए और मलाशय को स्वस्थ रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन का सेवन फायदेमंद है। फाइबर युक्त खाद्य मल को नर्म करने और आँतों की सारी प्रणाली को साफ-सुथरा रखने में सहायता करते हैं तथा कब्ज की समस्या से भी राहत मिलती है।दाल, सूखे मेवे, पटसन के बीज, बीन्स, ब्रोकोली, नाशपाती, पपीता, विभिन्न सब्जियाँ, फल इत्यादि फाइबर युक्त आहार हैं।
  • जीरा : बवासीर के कई दुष्परिणामों से निपटने के लिए जीरा मददगार है। जीरे को भुनकर उसका चूर्ण बना लें।रोजाना एक चम्मच जीरे का चूर्ण एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से बवासीर से राहत मिलती है।आप छाछ के साथ भी जीरे का चूर्ण मिलाकर उसका सेवन कर सकते हैं।दो लीटर छाछ में पचास ग्राम जीरा पाउडर और थोड़ा-सा नमक मिलायें।प्यास लगने पर इसी पेय का सेवन करें।एक हफ्ते तक यह प्रयोग करने से बवासीर के मस्से ठीक हो जाते है।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर बवासीर से राहत मिल सकती है।बवासीर को शुरूआती दौर में ही आसानी से ठीक किया जा सकता है, इसलिए बवासीर की शंका होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाना बेहद जरुरी है। बवासीर होने पर कभी-कभी ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है।इसलिए यह रोग होने पर कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी हैं, जैसे :

  • यह रोग कब्ज की समस्या के कारण हो सकता है, अतः रेशेदार सब्जियों, फलों और सलाद का सेवन करें क्योंकि इस तरह के खाद्य कब्ज को खत्म करने में सहायक हैं।
  • तेज मिर्च और मसालेदार खाद्य का सेवन न करें।
  • दिनभर में 6-7 गिलास पानी जरुर पीयें ताकि पाचन तंत्र सही रूप से कार्य करें।
  • चाय, कॉफी का अधिक सेवन न करें।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • जब भी कभी मलत्याग का वेग आता है तो उसे रोककर न रखें और मलत्याग के समय ज्यादा जोर न लगायें।
  • अधिक देर तक एक ही जगह बैठे या खड़े न रहें।
  • पूरी नींद लें।
  • योगासन के द्वारा इस रोग से राहत मिल सकती है अतः नियमित रूप से योगासन करें।

मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) के लिए घरेलू उपचार

वर्तमान जीवन शैली में मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) बड़ी तेजी से फैल रहा है।संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, विशेष रूप से भारत में।मधुमेह एक ऐसा घातक रोग है जो कई असाध्य रोगों का जन्मदाता है, जैसे, दिल की बीमारी या दिल का दौरा पड़ना, गुर्दा खराब होना, अंधापन आदि। मधुमेह रोग तब उत्पन्न होता है जब आहार से अवशोषित शर्करा, कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाती है और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने लगता है। रक्त में शर्करा का स्तर तभी बढ़ता है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन (Insulin) उत्पन्न नहीं कर पाता या जब शरीर की कोशिकाएं उत्पन्न हो रही इन्सुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करती।इन्सुलिन एक हॉर्मोन (Hormone) है जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) और वसा (Fat) के मेटाबोलिज्म (Metabolism) को नियंत्रित करता है।

मेटाबोलिज्म वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर खाने को पचाता है ताकि शरीर को ऊर्जा (Energy) मिल सके और उसका सही विकास हो सके।हम जो खाना खाते है वो पेट में जाकर ऊर्जा में बदल जाता है जिसे ग्लूकोज़ (Glucose) कहते है। इस ग्लूकोज़ को हमारे शरीर में मौजूद लाखों कोशिकाओं के भीतर पहुँचाने का कार्य हमारा अग्न्याशय (Pancreas) करता है जो पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन उत्पन्न करता है। बिना इन्सुलिन के ग्लूकोज़ कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता और कोशिकाओं के अन्दर ग्लूकोज़ के पहुँचने के बाद हमारी कोशिकाएं उसी ग्लूकोज़ को जलाकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। जब यह सम्पूर्ण प्रक्रिया सामान्य रूप से नहीं हो पाती तो व्यक्ति मधुमेह रोग से ग्रस्त हो जाता है।मधुमेह रोग के कुछ लक्षण होते हैं, जैसे, बार-बार पेशाब लगना, अधिक प्यास लगना, शरीर में घाव होने पर जल्दी ठीक न होना, बिना काम किये ही थकान महसूस करना, त्वचा में संक्रमण होना या खुजली होना, चीजों का धुंधला नजर आना, अचानक वजन घट जाना आदि। यदि इनमें से कुछ लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत रक्त में शर्करा की जाँच करवाएं।मधुमेह के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • यह रोग आनुवांशिक है। माता-पिता या परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्य से यह रोग दूसरी पीढ़ी में आ सकता है।
  • कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) या वसा (Fat) युक्त खाद्य पदर्थों जैसे, चीनी, गुड़, मिठाई, चॉकलेट, चावल, आलू, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, तला और मसालेदार खाना, घी, मक्खन, लाल मांसआदि का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह रोग हो सकता है।
  • मद्यपान और धूम्रपान भी मधुमेह रोग का कारण है।
  • अनुचित दिनचर्या और जीवन शैली इस रोग के कारण हो सकते हैं। परिश्रम न करना, व्यायाम न करना, मानसिकतनाव, चिंता भी इस रोग के कारण हैं।

मधुमेह के कुछ प्रकार हैं, जैसे :

  • टाइप 1 डायबिटीज़ : यह तब होता है जब शरीर इन्सुलिन (Insulin) बनाना बंद कर देता है।ऐसे में मरीज को डॉक्टर की सलाह से इन्सुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है।इसे इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज़ मेलिटस कहते है (Insulin dependent diabetes mellitus or IDDM)।
  • टाइप 2 डायबिटीज़ : यह तब होता है जब शरीर की कोशिकाएं उत्पन्न हो रही इन्सुलिन (Insulin) पर प्रतिक्रिया नहीं करती।इसे नॉन-इन्सुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज़ मेलिटस कहते है (Non-insulin-dependent diabetes mellitus or NIDDM)।
  • जैस्टेशनल डायबिटीज़ (Gestational diabetes) : यह मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं को होता है। ऐसा नहीं है कि इन महिलाओं को पहले से ही यह बीमारी हो, लेकिन गर्भावस्था के दौरान खून में ग्लूकोस की मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाने के कारण मधुमेह हो जाता है।2-3 प्रतिशत गर्भावस्था में ऐसा होता है।इसके दौरान गर्भावस्था में मधुमेह से संबंधित जटिलताएं बढ़ जाती हैं तथा भविष्य में माता और संतान को भी मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है।

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मधुमेह के लिए घरेलू नुस्खें : मधुमेह होने पर इसे जड़ से दूर करना मुश्किल हो जाता है पर कुछ घरेलू नुस्खों के द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. मेथी दाना :मेथी के दाने में प्रचुर मात्रा में फाइबर (Fibre) होता है जो मधुमेह के लिए बहुत ही उपयोगी है।रातभर एक से दो चम्मच साफ मेथी के दाने पानी में भीगोकर रखें। सुबह खाली पेट दानों के साथ उसी पानी का सेवन करें। इसके अलावा मेथी का प्रयोग अपने खाद्य पदार्थों में भी कर सकते हैं या फिर मेथी के दानों को पीसकर चूर्ण बनाकर हल्के गर्म दूध या पानी के साथ भी ले सकते हैं। कुछ महीनों तक नियमित रूप से मेथी के दानों का सेवन करने से शर्करा का स्तर कम हो जाता है।
  2. व्यायाम : व्यायाम से रक्त में शर्करा स्तर कम हो जाता है तथा ग्लूकोज़ का उपयोग करने के लिए शारीरिक क्षमता पैदा होती है।इसके अलावा प्रतिघंटा 6 कि.मी. की गति से चलने पर 30 मिनट में 135 कैलोरी (Calorie) घटता है और साईकिल चलाने से लगभग 200 कैलोरी घटती है। इसलिए मधुमेह होने पर रोजाना नियमित रूप से व्यायाम करना, चलना और हो सके तो साईकिल चलाना अत्यावश्यक हैं।
  3. आंवला : आंवला विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध है जो अग्न्याशय (Pancreas) की कार्यक्षमता को बढ़ाकर इन्सुलिन के उत्पन्न होने में मदद करता है।आँवले का बीज निकालकर उसे पीस लें और उसका रस निकाल लें। फिर एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच आँवले का रस मिलाकर पीयें।इसके अलावा एक कप करेले के रस में एक चम्मच आँवले का रस मिलाकर भी पी सकते हैं।रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।
  4. हरी चाय या ग्रीन टी (Green Tea) : रोजाना खाली पेट हरी चाय पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।हरी चाय में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) होता है जो शरीर के टोक्सिन (Toxin) को दूर करने में मदद करता है साथ ही रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में भी सहायक है।
  5. जामुन : जामुन मधुमेह का एक बेहतरीन उपचार है।जामुन के पेड़ का हर भाग इस रोग के लिए बहुत ही लाभदायक हैं।जामुन के पेड़ के पत्ते, छाल, फल, बीज, सभी शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखता है।आप साबुत जामुन खा सकते हैं अथवा जामुन के पत्तों या उसके बीजों कोपीसकर चूर्ण बनाकर एक गिलास गुनगुने पानी के साथ लें सकते हैं।
  6. तुलसी :तुलसी मेंएंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो शरीर को स्वस्थ रखता है, साथ ही इसमें आवश्यक तत्व हैं जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। रोजाना खाली पेट दो चम्मच ताजे और साफ तुलसी के पत्तों का रस पीने से मधुमेह में फायदा होता है।
  7. आम के पत्ते : आम के पत्ते मधुमेह का एक और बेहतरीन उपचार है।15 ताजे और साफ आम के पत्तों को एक गिलास पानी में रातभर भीगोकर रखें। सुबह उसी पानी को छानकर खाली पेट पीने से शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।इसके अलावा आप आम के कुछ पत्तों को छाँव में सुखाकर उसे पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना दिन में दो बार डेढ़ चम्मच उस चूर्ण का सेवन करने से मधुमेह में फर्क पड़ेगा।
  8. करेला :करेला मधुमेह को नियंत्रित रखने का बहुत ही अच्छा उपचार है।यह अग्न्याशय (Pancreas) से इन्सुलिन(Insulin)के स्राव को बढ़ाता।एक करेले का बीज निकालकर उसे पीसकर रस निकाल लें और उसमें थोड़ा-सा पानी मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट पीयें।नियमित रूप से कम-से-कम दो महीनों तक इसका सेवन करें।इसके अलावा आप अपने रोजाना के डाइट (Diet) में करेले की सब्जी को शामिल कर सकते हैं।
  9. नीम :नीम रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।रोजाना एक गिलास नीम के पत्तों का रस पीने से मधुमेह में फर्क पड़ता है।
  • दालचीनी : दालचीनी इन्सुलिन के कार्य को गति प्रदान करने में मदद करता है। इसमें बायोएक्टिव (Bioactive) तत्व हैं जो मधुमेह को नियंत्रित करता है।लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि अत्यधिक मात्रा में दालचीनी का सेवन करने से लीवर को क्षति पहुँच सकता है।इसलिए पूरे दिन में एक से दो चाय चम्मच (Teaspoon) से अधिक दालचीनी का सेवन न करें। एक कप गुनगुने पानी में डेढ़ चाय चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर रोजाना नियमित रूप से सेवन करें। इसके अलावा तीन से चार साबुत दालचीनी एक कप पानी के साथ उबालें और 20 मिनट तक उसे धीमी आँच पर पकाएं।फिर थोड़ा ठंडा होने पर उसे पीयें।इस पेय को रोजाना दिन में एक बार तब तक पीयें जब तक शर्करा का स्तर कम न हो।
  • करी पत्ता : करी पत्ता में मौजूद आवश्यक तत्व शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।मधुमेह होने पर रोजाना 10-12 साफ और ताजे करी पत्ते का सेवन करने से फर्क पड़ता है।आप अपने खाद्य पदार्थों में भी करी पत्ता डाल सकते हैं या 15 हफ़्तों तक करी पत्ते के चूर्ण का सेवन भी कर सकते हैं।
  • ब्रोकोली : विटामिन ए और सी से समृद्ध ब्रोकोली रक्त में उच्च शर्करा के स्तर को कम करने और नियंत्रित रखने में मददगार है। ब्रोकोली की सब्जी बनाकर खा सकते हैं या सूप आदि के साथ भी इसका सेवन कर सकते हैं।
  • राजमा :राजमा में आवश्यक मिनरल (Minerals) हैं। इसके नियमित सेवन से मधुमेह और उसके दुष्प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता हैं।
  • बीन :बीन इन्सुलिन उत्पन्न करने में अग्न्याशय (Pancreas) की क्षमता को बढ़ा देता है। मधुमेह के शिकार लोगों को रोजाना बीन की सब्जी खानी चाहिए।

उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के द्वारा रक्त में शर्करा के स्तर को कम करके मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता हैं।इसके अलावा मधुमेह के रोगी के लिए अच्छे चिकित्सक की सलाह लेना भी आवश्यक है, क्योंकि यह रोग होने पर कुछ दवाइयों का सेवन करना जरुरी है।इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे :

  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • मीठी चीजों, वसा (Fat) और कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) युक्त भोजन, बाहर का अस्वास्थ्यकर खाना न खायें। चावल, आलू, लाल मांस, मयदा जैसे पदार्थों का सेवन न करें।
  • फलों का सेवन करें पर आम, केला जैसे फलों का सेवन न करें।
  • समय पर खाना खायें।
  • बहुत अच्छा हो यदि किसी अच्छे खाद्य विशेषज्ञ से अपना डाइट चार्ट (Diet chart) बनाकर, उसके अनुरूप खाना खायें।
  • नियमित रूप से रक्त की जाँच करवाते रहें, हो सके तो खून में शर्करा का स्तर जांचने की मशीन खरीद कर घर पर ही रख लें और समय-समय पर खुद ही रक्त की जाँच करते रहें।

बच्चों की सर्दी-खाँसी के लिए घरेलू उपाय

सर्दी और खाँसी किसी भी उम्र में हो सकती है।बच्चों को अगर सर्दी-खाँसी हो जाती है, तो वो बहुत ही परेशान हो जाते हैं क्योंकि बच्चे तो अपनी समस्याओं को ठीक से बयां भी नहीं कर पाते।अक्सर शिशुओं में सर्दी और खाँसी की समस्या देखी जाती है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होती है।संक्रमित वायु के कारण या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण, ठंड लगने के कारणछोटे बच्चों में सर्दी और खाँसी की समस्या हो सकती है।जन्म लेने के बाद प्रायः सभी बच्चे इस समस्या के शिकार होते हैं।सर्दी और खाँसी से त्रस्त शिशु को बेचैनी-सी होती रहती है, यहां तक कि उसे स्तनपान करने में भी तकलीफ होती है।छोटे बच्चों को जब सर्दी और खाँसी की समस्या होती है तब उसमें कई सारे लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे :

  • 101 डिग्री तक बुखार होना।
  • आँखें लाल हो जाना।
  • गले में खराश होना।
  • जबड़ो और कान में दर्द होना।
  • निरंतर नाक बहना।
  • उल्टी होना।
  • भूख न लगना।
  • चिड़चिड़ापन और बेचैनी।

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बच्चों की सर्दी-खाँसी को दूर करने के घरेलू नुस्खें

  1. हल्दी : सर्दी और खाँसी के लिए हल्दी बहुत ही स्वस्थ और विश्वसनीय उपाय है। यदि बच्चा बहुत ही छोटा है और स्तनपान करता है तो उसे दूध पिलाते वक्त अपने स्तन पर थोड़ी-सी हल्दी का पाउडर लगा लें।इस तरह शिशु हल्दी वाले दूध का सेवन कर लेगा। यदि बच्चा बोतल से या गिलास से दूध पीता है तो या तो उसके बोतल में या फिर उसके गिलास में थोड़ी-सी मात्रा में हल्दी का पाउडर मिलाकर पिलायें।दिन में दो बार हल्दी वाला दूध पिलाने से बच्चे को सर्दी-खाँसी में राहत मिलेगी।
  2. भाँप : सर्दी और खाँसी में भाँप बेहतरीन उपाय है।गरम भाँप बलगम को दूर करता है।शिशु को भाँप दिलाने के लिए आप अपने बाथरूम को चारों तरफ से बंद करके उसमें गरम शावर (Shower) चला दें।जब बाथरूम में भाँप बन जाये तब शिशु को लेकर पंद्रह मिनट के लिए बाथरूम में बैठ जाये।इस तरह भाँप आपके शिशु के फेफड़े को साफ कर देगा और बंद नाक की समस्या भी खत्म हो जायेगी।यदि बच्चा थोड़ा बड़ा हो और खुद से भाँप ले सकता हो तो उसके लिए आप एक बर्तन में गर्म पानी करके उसके सिर और बर्तन को एक बड़े तौलिए से ढक दें और उसे जोर-जोर सेश्वास लेने को कहें।इससे बच्चे को सर्दी और खाँसी की समस्या में राहत मिलेगी। दिन में दो बार इस प्रक्रिया को करने से बच्चा जल्द ही ठीक हो जायेगा।
  3. स्तनपान : 6 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए माँ का दूध ही सर्दी-खाँसी की समस्या से छुटकारा दिलाता है।माँ का दूध शिशु को किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ने की शक्ति देता है।
  4. अजवाइन : अजवाइन में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो सर्दी और खाँसी को दूर करने में मदद करता है। एक कपड़े के टुकड़े में थोड़ी-सी अजवाइन लेकर एक पोटली बना लें और उस पोटली को तवे पर रखकर हल्का गर्म कर लें। फिर उस पोटली को अपने बच्चे की छाती पर रखकर उससे गर्म भाँप दें।दो बातों का धयान रखें, एक यह कि भाँप देते बच्चे का बदन पूरी तरह से ढका हुआ हो और दूसरा यह कि पोटली इतनी गर्म न हो कि बच्चे की मुलायम त्वचा जल जाये। इस प्रक्रिया को दो से तीन दिनों तक दोहराने से सर्दी-खाँसी में फर्क पड़ेगा।गर्म अजवाइन का गंध बलगम को दूर करता है।इसके अतिरिक्त आप सरसों के तेल में अजवाइन मिलाकर भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए पहले एक कटोरी में थोड़ा-सा सरसों का तेल गर्म कर लें, फिर आँच बंद करके उसी गर्म तेल में थोड़ी-सी मात्रा में अजवाइन मिला दें।उस दौरान उठने वाला भाँप बच्चे को दें, उससे बहुत फर्क पड़ेगा, साथ ही अजवाइन युक्त सरसों के तेल से बच्चे की हथेली, छाती, पैर और पूरे बदन में मालिश करें, इससे बच्चे को बंद नाक, बलगम, जुकाम, खाँसी की समस्या में राहत मिलेगी। दिन में दो बार इसी तेल से मालिश करने से दो से तीन दिनों में ही फर्क दिखेगा।
  5. गर्म सूप (Soup) :बच्चा यदि थोड़ा बड़ा हो, अर्थात केवल स्तनपान पर ही न हो और अन्य खाद्य पदार्थों का भी सेवन करता हो, तो आप उसे गर्म सूप पिला सकते है।सब्जियों का सूप या चिकेन (Chicken) सूप पिलाने से जुकाम और खाँसी में फर्क पड़ेगा साथ ही बच्चे की प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होगी और वो तंदरुस्त रहेगा।
  6. अदरक :सर्दी और खाँसी की समस्या में अदरक एक प्रभावी उपाय है। 6 कप पानी में आधा कप बारीक कटा हुआ अदरक और दालचीनी के दो छोटे टुकड़े डालकर बीस मिनट तक धीमी आँच पर पकाएं। उसके बाद उसे छानकर उसमें एक चम्मच शहद या एक चम्मच मिश्री का चूर्ण डालकर बच्चे को पिलायें।एक साल से अधिक उम्र के बच्चे को दिन में तीन से चार बार थोड़ा-थोड़ा करके पिलाने से उसे सर्दी और खाँसी में राहत मिलेगी।रात को सोने जाने से पहले अदरक के इस चाय का सेवन कराने से बच्चे की रात की नींद भी अच्छी होगी और जुकाम एवं खाँसी से छुटकारा भी मिलेगा।
  7. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : एकसाल से अधिक उम्र के बच्चे को तुलसी के पत्ते का काढ़ा भी पिला सकते हैं।सर्दी और खाँसी में सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते।तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें। अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।फिर इस काढ़े को छान लें फिर आधे कप काढ़े में दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार अपने बच्चे को पिलायें।इससे बलगम की समस्या भी खत्म हो जाती है और सर्दी में भी राहत मिलती है।
  8. लहसुन : लहसुन के तेल को लगाने से जुकाम और खाँसी में आराम मिलता है। एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो से तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल को बच्चे की हथेली, छाती और नाक पर अच्छे से लगायें।इससे सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होगी।
  9. गुड़, काली मिर्च और जीरा : तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को गुड़, काली मिर्च और जीरे के मिश्रण का सेवन कराने से सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होती है। एक गिलास गर्म पानी में आधी चम्मच पीसी हुई काली मिर्च, आधा चम्मच पीसा हुआ जीरा और एक चम्मच गुड़ मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके बच्चे को उसका सेवन कराने से जुकाम और सर्दी की समस्या दूर हो जाती है। यह मिश्रण छाती में जमे बलगम को निकालने के साथ सर्दी और खाँसी का भी अच्छा उपचार है।
  • नींबू और शहद :सर्दी और खाँसी की समस्या में आप बच्चे कोनींबू के रस में शहद मिलाकर पिला सकते हैं।इससे जुकाम और खाँसी की समस्या दूर होती है और बच्चे को आराम मिलता है।यदि बच्चा एक साल से अधिक उम्र का हो तो आप एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस निचोड़ लें और फिर उसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को पिलायें।यदि बच्चा एक साल से कम उम्र का हो तो एक चम्मच नींबू के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पिलायें।नींबू में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा अधिक होती है जो सर्दी और खाँसी के जीवाणुओं से लड़ने में सक्षम है और शहद बलगम हो हटाकर छाती को साफ करता है।
  • पानी : इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आपके बच्चे के शरीर में पानी का अभाव न हो। इसलिए समय-समय पर उसे पानी पिलाते रहें।पानी मल-मूत्र के द्वारा बच्चे के शरीर से हर तरह के जीवाणु को निकालकर उसे बंद नाक, बलगम, छाती जमने आदि की समस्या से बचाता है।आप पानी को हल्का गर्म करके भी अपने बच्चे को पिला सकते हैं।
  1. डॉक्टर की सलाह : बच्चे को अगर सर्दी-खाँसी के कारण साँस लेने में दिक्कत हो रही हो या वो अत्यधिक मात्रा में उल्टी कर रहा हो अथवा उसके शरीर का तापमान कम न हो रहा हो तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और उपयुक्त जाँच करवायें।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप बच्चे को सर्दी और खाँसी की समस्या से निजात दिला सकते हैं। वैसे तो विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को पहले दो से तीन सालों में आठ से दस बार जुकाम और खाँसी हो सकता है, इसलिए सर्दी-खाँसी की समस्या बच्चों में आम है।ऐसी स्थिति में बच्चे की तकलीफ को कम करने के लिए कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक हैं, जैसे :

  • बच्चे को जुकाम और खाँसी होने पर उसकी छाती को खुला न रखें और उसके शरीर को ढक कर रखें ताकि किसी भी तरह से उसे ठंड न लगें।
  • यदि आपके घर में कोई बीमार हो या जुकाम और खाँसी का शिकार हो तो उसे बच्चे के पास न जाने दें।
  • अगर आपके घर में कोई धूम्रपान करता हो तो उसे बाहर जाने को कहें, बच्चे के सामने बिल्कुल धूम्रपान न करें।
  • बच्चे का नाक बंद होने पर आप डॉक्टर की सलाह लेकर नेसल ड्रॉप (Nasal Drop) का प्रयोग कर सकते हैं।

बंध्यता या बांझपन दूर करने के घरेलू उपचार

बंध्यता या बाँझपन प्रजनन प्रणाली की एक समस्या है जिसके कारण महिला के गर्भधारण में विकृति आ जाती है।गर्भधारण की प्रक्रिया कई बातों पर निर्भर करती हैं, जैसे, पुरुष द्वारा स्वस्थ शुक्राणु तथा महिला द्वारा स्वस्थ अण्डों का उत्पादन होना, अबाधित गर्भ नलिकाएँ ताकि शुक्राणु बिना किसी रुकावट के अण्डों तक पहुँच सके, अण्डों को निषेचित करने की शुक्राणु की क्षमता, निषेचित अंडे का महिला के गर्भाशय में स्थापित होने की क्षमता, गर्भाशय का स्वस्थ होना तथा भ्रूण के विकास के लिए महिला के होर्मोन (Hormone) का अनुकूल होना।इनमें से किसी एक में विकृति आने का परिणाम बांझपन हो सकता है।पुरुषों में कमी के कारण भी महिलाओं में बाँझपन की समस्या को देखा जा सकता है।लेकिन अक्सर भारतीय समाज में देखा जाता है कि जब भी किसी दम्पत्ति को संतान नहीं होती तो सबसे पहले पत्नी को ही दोषी ठहराया जाता है, और उन्हें बाँझ कहकर ताने दिए जाते हैं, यहाँ तक कि कभी-कभी तलाक तक दे दिया जाता है।

जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO ) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक दशक में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में नपुंसकता के मामले बढ़े हैं।यदि कोई दम्पत्ति नियमित रूप से एवं बिना किसी गर्भ-निरोधक का उपयोग करते हुए सम्बन्ध बनाते है और उसके बावजूद भी महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है तो उसे बाँझपन या बंध्यता से जुड़ी समस्या माना जाता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गर्भावस्था बनाये रखना और एक जीवित बच्चे को जन्म न दे पाने की असमर्थता भी बाँझपन में ही सम्मिलित होता हैं। स्त्रियों में प्रजनन क्षमता विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकती हैं, जैसे, पॉलीसिस्टिक ओवरीयन सिंड्रोम(Polycystic ovarian syndrome or PCOS), गर्भाशय फाइब्रॉएड (Uterine Fibroids), एनीमिया (Anaemia), थायरॉएड (Thyroid), श्रोणी सूजन की बीमारी (Pelvic inflammatory disease), अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूब (Blocked fallopian tubes), कैंडिडा और यौन संचरित रोग (Candida and sexually transmitted diseases or STDs)आदि।

आज की वर्तमान जीवन शैली ने स्त्री और पुरुष दोनों को ही अत्यधिक प्रभावित किया है।अधिक मात्रा में मद्यपान और धूम्रपान करना, ड्रग्स लेना, ज्यादा उम्र होना (35 वर्ष से अधिक), मोटापा, अत्यधिक तनाव, अनियमित मासिक होना, अतिरिक्त शारीरिक श्रम, अनियमित और अस्वास्थ्यकर खान-पान भी महिलाओं के बाँझपन का कारण हो सकते हैं। महिलाओं के लिए बंध्यता एक ऐसी समस्या है जिसके कारण वे चिंता, उदासी, अकेलेपन का शिकार होती हैं।आज इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In vitro fertilizationor IVF) जैसी तकनीक निःसंतान दम्पत्ति के लिए वरदान साबित हुई है और इसके कारण कुछ हद तक बंध्यता की समस्या का समाधान भी हुआ है।लेकिन इस तरह की तकनीक बहुत ही महँगी होती है जो हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है।इसलिए यहाँ कुछ ऐसे प्राकृतिक और घरेलू उपाय पेश हैं जो बाँझपन के मूल कारणों से लड़ने और गर्भवती होने की संभावनाओं को बढ़ाने में मददगार हैं।

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बाँझपन दूर करके गर्भधारण करने के घरेलू उपाय

  1. अश्वगंधा :अश्वगंधा हार्मोनल संतुलन को बनाये रखने और प्रजनन अंगों के समुचित कार्य क्षमता को बढ़ाने में मददगार है।यह जड़ी-बूटी बार-बार हुए गर्भपात के कारण शिथिल गर्भाशय को समुचित आकार में लाकर उसे स्वस्थ बनाने में मदद करती है। हलके गर्म पानी में एक चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर दिन में दो बार उसका सेवन करने से गर्भाशय की क्षमता बढ़ती है और बाँझपन की समस्या दूर होती है।
  2. गाजर : गाजर में पाये जाने वाले आवश्यक पोषक तत्व शरीर को भीतर से स्वस्थ रखता है और गर्भाशय की दुर्बलता को दूर करता है।रोजाना सुबह नियमित रूप से एक गिलास गाजर का रस पीने से बंध्यता की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
  3. जायफल :जायफल में गर्भाशय की दुर्बलता को दूर करने की क्षमता है। जायफल को महीन पीसकर उस चूर्ण को बेहद बारीक कपड़े में से छानकर अलग कर लें। इसके पश्चात् अलग किये गए जायफल के बारीक चूर्ण में बराबर मात्रा में पीसी हुई शक्कर मिलाकर एक साफ डब्बे में रख लें। मासिक स्राव के बाद तीन दिन तक लगभग आधा चम्मच इसी चूर्ण को अपनी हथेली में रखकर खायें। इसके साथ दूध व भात (पका हुआ चावल) का पथ्य लें। इस उपचार से गर्भ ठहरने की संभावना रहती है।
  4. सिंघाड़ा : सिंघाड़े के सेवन से गर्भाशय की दुर्बलता दूर हो जाती है तथा गर्भाशय की क्षमता में वृद्धि होती है।
  5. खजूर : खजूर गर्भधारण करने की क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।खजूर में विटामिन ए (Vitamin A), विटमिन बी (Vitamin B), विटामिन ई (Vitamin E) आयरन (Iron) जैसे पोषक तत्व हैं जो शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है।10-12 खजूर के बीज निकालकर उसे अच्छे से पीस लें, फिर उसमें दो चम्मच कटे हुए धनिया पत्ती डालकर एक मिश्रण तैयार कर लें। अब उसमें तीन-चौथाई कप गाय का दूध मिलायें और उसे कुछ देर के लिए पकायें। आँच से उतारकर, ठंडा करके इसका सेवन करें।अपने मासिक स्राव के बाद एक सप्ताह तक रोजाना इसका सेवन करें।इसके अलावा आप रोजाना नाश्ते में दूध के साथ 6-8 खजूर खा सकते हैं या दही के साथ भी खजूर का सेवन कर सकते हैं।
  6. अनार :रोजाना अनार का सेवन करने से शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है और शरीर भी स्वस्थ रहता है।इसके सेवन से गर्भाशय के रक्त प्रवाह में वृद्धि होता है।यह गर्भाशय के दीवारों को मोटा करके गर्भपात की संभावना को कम करने में सहायक है, साथ ही यह भ्रूण के स्वस्थ विकास में भी मदद करता है।अनार की बीजों और अनार के छाल को बारीक पीस लें। फिर इन दोनों चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर एक साफ और वायुरोधी डब्बे में डालकर रखें। रोजाना दिन में दो बार आधा चम्मच उस चूर्ण को एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर उसका सेवन करें।इससे आपको फायदा होगा।इसके अलावा आप चाहे तो अनार का रस पी सकते हैं या फिर साबुत अनार का सेवन भी कर सकते हैं।
  7. दालचीनी : दालचीनी, डिम्ब-ग्रंथि के सही रूप में कार्य करने में मदद करता है साथ ही बाँझपन की समस्या को दूर करने में भी सहायक है। इसके अलावा यह पॉलीसिस्टिक ओवरीयन सिंड्रोम (Polycystic ovarian syndrome or PCOS) का एक बेहतरीन इलाज है।2007 के एक शोध लेख में यह बताया गया है कि दालचीनी महिलाओं के अनियमित मासिक स्राव को नियमित करने में मदद करता है।एक कप गर्म पानी में एक चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर पीने से फायदा होता है।कुछ महीनों तक नियमित रूप से इसका सेवन करें। इसके अलावा आप अपने खाद्य में भी दालचीनी का इस्तेमाल कर सकते हैं।लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि एक दिन में दो चम्मच से अधिक दालचीनी के चूर्ण का सेवन न करें।
  8. विटामिन डी (Vitamin D) : विटामिन डी गर्भावस्था के लिए और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के लिए आवश्यक है।वास्तव में विटामिन डी की कमी, बाँझपन और गर्भपात का कारण हो सकती है।इसलिए विटामिन डी युक्त खाद्य का सेवन करें जैसे, कुकुरमुत्ता (Mushroom), चीज़ (Cheese), अंडा, मछली आदि।
  9. अलसी के बीज (Flax seed) : अलसी के बीजग्रीवा बलगम को बढ़ाने में मदद करता है, साथ ही यह शुक्राणुओं को अधिक समय तक जीवित रखकर उसे गर्भाशय ग्रीवा में पहुंचाकर गर्भधारण में मदद करता है। आप अण्डोत्सर्ग के बाद ग्रीवा बलगम को बढ़ाने के लिए एक चम्मच अलसी के बीज या उसके तेल का सेवन कर सकते हैं।
  10. बैगन : बैगन पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता से जुड़ी समस्या का एक आसान उपचार है।एक बैगन को पहले आप अच्छे से पका लें। फिर पके हुए बैगन में थोड़ी-सी छाछ मिलाकर उसे अच्छे से मसल लें और उसका सेवन करें।रोजाना नियमित रूप से एक महीने तक इसका सेवन करने से बंध्यता की समस्या दूर हो जायेगी।
  • बरगद का पेड़ : बरगद के पेड़ का मुलायम जड़ पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता से जुड़ी समस्या को दूर करने का एक प्राकृतिक उपचार है। यह पुरुषों और महिलाओं की बंध्यता संबंधी जन्मजात दोष को दूर करता है। बरगद के पेड़ के मुलायम जड़ों को अच्छे से सुखाकर उसका चूर्ण बना लें।एक गिलास दूध में इसी चूर्ण का करीबन 20 ग्राम मिलाकर लगातार तीन दिनों तक उसका सेवन करें।महिलाएँ इस उपचार का प्रयोग अपने मासिक स्राव के आठवें या नवें दिन से करें।
  • योगा या व्यायाम :योगा या व्यायाम से आपके शरीर का अतिरिक्त वसा (Fat) घटता है और होर्मोन (Hormone) का स्तर भी ठीक रहता है। विभिन्न प्राणायाम की मदद से प्रजनन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। किसी अच्छे योग विशेषज्ञ से योग सीखकर ही रोजाना नियमित रूप से योग या व्यायाम करें।इससे न सिर्फ शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि यह मानसिक तनाव को दूर करने में भी मदद करता है।पुरुषों और महिलाओं दोनों को ही योगा करना चाहिए।
  • सही और स्वस्थ संतुलित खान-पान : सही, स्वस्थ और संतुलित खान-पान हॉर्मोन (Hormone) को नियंत्रित करता है और आपके प्रजनन तंत्र को स्वस्थ रखता है। इससे आपके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होता है।

उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के द्वारा बंध्यता से जुड़ी समस्याओं का निवारण किया जा सकता है।लेकिन कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह लेना और उपयुक्त जाँच करवाना जरुरी है।यह सही है कि आज की जीवन शैली, अत्यधिक तनावयुक्त जीवन और काम के दबाव के कारण न केवल महिलाओं में बंध्यता से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को देखा जा रहा हैं बल्कि पुरुषों में भी नपुंसकता की समस्या बढ़ी हैं। इसलिए इस संदर्भ में महिलाओं और पुरुषों के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी हैं, जैसे :

  • पुरुष हो या स्त्री, सभी के लिए बाहर का अस्वास्थ्यकर खाद्य बहुत ही हानिकारक है।इससे वजन बढ़ता है जो बंध्यता का कारण हो सकता है।
  • पुरुषों और महिलाओं को धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करना चाहिए। इसके कारण भ्रूण के विकास में समस्या उत्पन्न हो सकती है और गर्भपात होने की आशंका रहती है।
  • प्लास्टिक में लपेटें खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल अच्छा नहीं होता। प्लास्टिक में टोक्सिन (Toxins) होता है जो खाने के साथ आपके शरीर में प्रवेश करके बंध्यता या नपुंसकता की समस्या को उत्पन्न कर सकता हैं।
  • नकली मीठा करने वाले पदार्थों (Artificial Sweeteners) का सेवन भी पुरुषों और महिलाओं में बंध्यता से जुड़ी समस्या को उत्पन्न कर सकता है।
  • अत्यधिक मात्रा में कैफीनयुक्त (Caffeine) पेय का सेवन भी गर्भपात का कारण हो सकता है।

 

दाँतों का पीलापन दूर करने के घरेलू उपाय

सफेद और चमकते दाँत किसी के भी व्यक्तित्व में निखार ला सकते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने पीले दाँतों के कारण दूसरों के सामने हँसने से बचते हैं या मुँह पर हाथ रखकर हँसते हैं।दाँतों का पीलापन एक जटिल समस्या है, जो चेहरे की सुन्दरता को प्रभावित करता है।दाँतों के पीलेपन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • रोजाना ब्रश न करना।
  • दाँतों का ठीक से साफ न होना।
  • बिना ब्रश किये खाना खाना।
  • मीठे खाने की चीजों, जैसे आइसक्रीम, चॉकलेट, मिठाई आदि का सेवन करना.
  • शराबपीना।
  • किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों,जैसे गुटखा, पान, जर्दा,आदि का सेवन करना।
  • धूम्रपान करना।

दाँतों का पीलापन दूर करने के घरेलू नुस्खे

हम अपने दाँतों को कुछ घरेलू, प्राकृतिक और सुरक्षित उपायों से सफेद और चमकदार बना सकते हैं।यदि आप भी दाँतों के पीलेपन से परेशान है तो आपके लिए यहाँ कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे पेश हैं जो आपको आपकी इस परेशानी से छुटकारा दिलायेगी।

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  1. नींबू :नींबू मुँह की लार (Saliva) में वृद्धि करता है और इसलिए यह दांतों और मसूड़ों के लिए फायदेमंद होता है।

– एक नींबू का रस निकालकरउसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर खाने के बाद उससे कुल्ला करें।यह उपाय रोज करने से दाँतों का पीलापन चला जाता है और साँसों की दुर्गन्ध भी दूर हो जाती है।

– नींबू के पानी में रातभर दाँतून को भीगोकर रखे और सुबह उसी दाँतून का इस्तेमाल करें। इससे दाँतों का पीलापन दूर होगा एवं दांत तथा मसूड़े स्वस्थ और मजबूत होंगे।यदि प्रतिदिन दाँतून करना संभव नहीं तो सप्ताह में एक बार दाँतून जरुर करें।

– एक चौथाई कप खाने का सोडा और आधे नींबू का रस अच्छे से मिलाकर शीशे के सामने खड़े होकर साफ हाथों से या बड (Bud) की सहायता से उस मिश्रण को दाँतों पर लगाये।एक मिनट तक रखने के बाद धो ले। इस प्रक्रिया से दाँतों का पीलापन दूर होगा और दाँत चमकने लगेंगे।

– नींबू के छिलकों को धूप में सुखाकर पीस ले और उसमें बराबर मात्रा में फिटकिरी मिलाकर उस मिश्रण से मंजन करें।इससे दाँत चमकदार होते हैं और मसूड़े भी मजबूत होते हैं।

  1. 2. तेज पत्ता :तेज पत्ते के प्रयोग से दाँतों की चमक लौट आती है।

– तेज पत्ते को सुखाकर उसे बारीक पीस ले और हर तीसरे दिन एक बार उससे मंजन करे।इससे दाँतचमकने लगेंगे।

  1. खाने का सोडा :घर में इस्तेमाल होने वाला खाने का सोडा (Baking Soda) दाँतों को चमकाने का एक बेहतरीन उपाय है।

– रोजाना सुबह थोड़ा-सा खाने का सोडा लेकर उँगली के सहारे उसे दाँतों पर रगड़ने के बाद गुनगुने पानी से मुँह धो ले। इससे दाँतों का पीलापन दूर होता है।

– रोज ब्रश करते समय भी मंजन (Toothpaste) में थोड़ा-सा खाने का सोडा डालकर ब्रश कर सकते है।इससे दाँतों की चमक लौट आयेगी।

– एक कप पानी में खाने का सोडा और हाइड्रोजन परऑक्‍‌साइड‌ (Hydrogen Peroxide) मिलाकर माउथवॉश (Mouthwash) की तरह भी उसका इस्तेमाल कर सकते है।

4.संतरे का छिलका : संतरे के छिलके से रोज दाँतों की सफाई करने से कुछ ही दिनों में दाँतों का पीलापन दूर हो जाता है।

– रोज रात को सोने जाने से पहले संतरे के छिलके को दाँतों पर रगड़े। संतरे के छिलके में मौजूद विटामिन सी (Vitamin C) और कैल्शियम (Calcium) से दाँतों की मजबूती और चमक बनी रहती है।

– संतरे के छिलके और तुलसी के पत्तों को सुखाकर उसका चूर्ण (Powder) बनाकर रोजाना ब्रश करने के बाद उससे दाँतों पर हलके हाथों से मसाज कर सकते है, इससे भी दाँत मोती जैसे चमकने लगते है।

5.नमक :नमक से दाँत साफ करने का उपाय बहुत पुराना और बेहतरीन हैं।

– नमक में 2-3 बूंद सरसों का तेल मिलाकर दाँत साफ करने से पीलापन दूर हो जाता है।

– नमक और खाने का सोडा मिलाकर भी मंजन तैयार करके उससे सफाई की जा सकती है।इससे दाँतों की चमक लौट आएगी।

– नमक को चारकोल के साथ मिलाकर हलके हाथों से दाँतों पर मसाज करने से भी दाँत सफेद होते हैं।

6.स्ट्रॉबेरी :स्ट्रॉबेरी दाँतों को चमकदार बनाने का एक कारगर तरीका है। इसमें मौजूद विटामिनसी (Vitamin C) दाँतों को सफेद बनाने में सहायक है।

– स्ट्रॉबेरी के कुछ टुकड़ों को पीसकर उससे एक लेप बना ले और दिन में दो बार उससे दाँतों पर मसाज करे।ऐसा करने से कुछ ही दिनों में पीले दाँत सफेद होने लगते हैं।

– खाने का सोडा और स्ट्रॉबेरी के पल्प को मिलाकर भी दाँतों पर हलके हाथों से मसाज करने से दाँतों का पीलापन खत्म हो जाता है।

  1. तुलसी :तुलसी में दाँतों को चमकाने का गुण तो है ही साथ ही यह पायरिया आदि से भी दाँतों की रक्षा करती है।

– तुलसी के पत्तों को सुखाकर उसका चूर्ण बना ले, और उस चूर्ण को रोजाना इस्तेमाल करने वाले मंजन (Toothpaste) में मिलाकर उससे दाँतों की सफाई करे, इससे दाँत चमकने लगेंगे।

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– तुलसी के पत्तों का लेप बनाकर उसमें थोड़ा-सा सरसों का तेल मिलाये. उस लेप से दाँतों की सफाई करने पर बहुत फायदा होता है।

  1. सब्जियों का सेवन : दाँतों का पीलापन दूर करने का एक स्वास्थ्यकर और कुदरती उपाय है सब्जियों का सेवन करना।सब्जियों में प्राकृतिक एसिड (Acid) होता है जो दाँतों के संपर्क में आने से दाँत प्राकृतिक रूप से सफेद हो जाते हैं। विटामिन ए से भरी ब्रोकोली, गाजर, कद्दू, ककड़ी जैसी सब्जियाँप्राकृतिक रूप से दाँतों की सफाई करने के साथ दाँतों की जड़ो को भी मजबूत बनाती हैं। गाजर को कच्चा चबाने से उसके रेशे दाँतों से रगड़कर उसे साफ करते हैं।
  2. फलों का सेवन : फलों के सेवन से भी दाँत मजबूत और चमकदार होते हैं नाशपाती और सेब दाँतों के लिए काफी अच्छे हैं।इस तरह के फल चबाकर खाने से दाँतों की प्राकृतिक सफाई होती हैं और दाँतों का पीलापन भी कम होता है।विटामिन सी (Vitamin C) से भरे स्ट्रॉबेरी, कीवी जैसे फल भी मसूड़ों को मजबूत बनाते हैं। बादाम और अखरोट जैसे सूखे फल भी दाँतों को मजबूत बनाते हैं।
  3. केला : केला पीसकर उसका लेप बनाकर उससे रोज एक मिनट तक दाँतों का मसाज करें और उसके बाद ब्रश करें।रोजाना ये उपाय करने से धीरे-धीरे दाँतों का पीलापन खत्म हो जाता है।
  4. सेब का सिरका :दाँतों को सफेद और चमकदार बनाने के लिए सेब के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है। सेब के सिरके को लगभग एक महीने तक दाँतों पर लगाने से दाँतों का पीलापन दूर हो जाता है।

– एक चम्मच जैतून के तेल में सेब का सिरका मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके उसमें ब्रश डूबोकर दाँतों पर हलके हाथों से घुमाएँ।इस नुस्खे को अपनाने से दाँतों का पीलापन दूर होने के साथ साँसों की दुर्गन्ध भी दूर होती है। लेकिन इस बात का जरुर ध्यान रखे कि सिरके से आपको कोई ऐलर्जि न हो।

  1. नीम : नीम का उपयोग प्राचीन काल से ही दाँत साफ करने के लिए किया जाता रहा है।नीम में दाँतों को सफेद बनाने और जीवाणु (Bacteria)को खत्म करने के गुण पाये जाते हैं।नीम प्राकृतिक प्रतिजीवाणु (Natural Anti-Bacterial) और प्रतिरोधी (Anti-septic) है।

– आसानी से उपलब्ध नीम के दाँतून के प्रयोग से दाँत रोग-मुक्त और चमकदार होते हैं।

– नीम के पत्तों की रख में कोयले का चूर्ण और कपूर मिलाकर अपने दाँतों पर लगाने से दाँत सफेद होते हैं।

  1. हल्दी : हमारे खाने को सही रंग देने वाली हल्दी भी हमारे दाँतों को चमकदार बनाने में सहायक होती है।पीसी हुई हल्दी, थोड़ा-सा नमक और सरसों का तेल मिलाकर एक लेप तैयार करके सुबह ब्रश या उंगली की सहायता से अपने दाँतों और मसूड़ों में लगाकर उसे कुछ देर तक छोड़ दे, फिर थोड़ी देर बाद कुल्ला करके अच्छे से मुँह साफ कर ले। यह मिश्रण न केवल दाँतों के पीलेपन को दूर करती है बल्कि इससे पायरिया जैसी समस्या भी उत्पन्न नहीं होती।
  2. सूरजमुखी के बीज : सूरजमुखी के बीजों में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन-ई (Vitamin E) भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।सूरजमुखी के बीजों को चबाने से मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है और दाँतों में सड़न नहीं होती।
  3. नियमित रूप से ब्रश करना : दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना आवश्यक है क्योंकि यह करने से आपके दाँतों के बीच चिपके जीवाणु निकल जाते हैं जोकि आपके मुँह के सड़न का कारण बनते हैं।अतः सड़न से बचने के लिए नियमित रूप से दिन में दो बार ब्रश करना अत्यावश्यक हैं।
  4. नियमित रूप से दन्त चिकित्सक से परीक्षण करवाना : उपर्युक्तनुस्खों को अपनाकर दाँतों को सफेद और चमकदार तो बनाया जा ही सकता है पर साथ ही स्वस्थ दाँतों के लिए दन्त चिकित्सक से दाँतों का परीक्षण करवाना भी अनिवार्य हैं।

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उपर्युक्त उपायों के साथ यदि आप अपनी कुछ गलत आदतों को भी बदल दें तो इससे आपके दाँत हमेशा सुरक्षित, मजबूत और चमकदार बने रहेंगे।

  • खाने के बाद ब्रश करें।यदि आप मिठाई भी खाते हैं, तो खाने के बाद अच्छी तरह से कुल्ला करके अपना मुँह जरुर साफ करें।
  • तंबाकू, गुटखा, पान, जर्दा जैसे पदार्थों का सेवन ना करें।
  • शराब और धूम्रपान से परहेज करें।
  • अतिरिक्त मात्रा में चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स का सेवन ना करें।

डेंगू के लिए घरेलू उपचार

हर साल करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वालेविभिन्न वायरल (Viral) रोगों में डेंगू सबसे खतरनाक रोग है।इस रोग के वायरस (Virus) चार प्रकार के होते हैं जिन्हें सिरोटाइप कहा जाता है।जब कोई रोगी डेंगू के बुखार से ठीक हो जाता है तब उसे उस विशेष प्रकार के डेंगू वायरस से लम्बे समय तक प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है लेकिन अन्य तीन प्रकार के डेंगू वायरस से दोबारा डेंगू होने का डर रहता है। दूसरी बार होने वाला डेंगू काफी गंभीर हो सकता है जिसे डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic fever) कहते है।डेंगू हवा, पानी, साथ खाने से या छूने से नहीं फैलता।

यह रोग एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) नामक मादा मच्छर के काटने से होता है।डेंगू के वायरस का प्रसार एक चक्र के अंतर्गत होता है।जब मादा एडीज एजिप्टी मच्छर संक्रमित या डेंगू के शिकार व्यक्तिको काटता है तो उसके अन्दर वही वायरस चला जाता है और जब यही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तब यह वायरस उस स्वस्थ व्यक्ति में चला जाता है और इसी तरह यह चक्र निरंतर चलता रहता है।एडीज एजिप्टी मच्छर की कुछ खास विशेषताएं होती हैं, जैसे; यह दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं, इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं, ये ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते, ठन्डे या छाँव वाले जगहों पर रहते हैं, घर के अन्दर रखे हुए साफ पानी में प्रजनन करते हैं, अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की दूरी के अन्दर ही उड़ते हैं,

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गटर या रास्ते में जमा प्रदूषित पानी में कम प्रजनन करते हैं, पानी के सूखने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनों तक जीवित रह सकते हैं।डेंगू के लिए कोई निश्चित दवाई नहीं है।हर साल भारत में इस बीमारी के कारण कई लोगों की मृत्यु हो जाती हैं।डेंगू के मरीजों की मृत्यु खून में प्लेटलेट (Platelet) की कमी के कारण होती है।कभी-कभी बाहर से भी प्लेटलेट चढ़ाया जाता है ताकि खून में प्लेटलेट की मात्रा सही रहें। डेंगू के वायरस का काम ही होता है खून में प्लेटलेट की संख्या को कम करना।डेंगू के लक्षण तीन से सात दिनों के अन्दर विकसित होते हैं। डेंगू के लक्षण निम्नलिखित हैं :

  • अचानक तीव्र ज्वर या बुखार
  • सिर और आँखों में दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में भयानक दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते बनना
  • ठंड लगना
  • भूख न लगना
  • गले में खराश
  • दस्त लगना
  • उल्टी होना
  • असामन्य रूप से कान, मसूड़ों और पेशाब आदि से खून निकलना

डेंगू के लिए घरेलू नुस्खें

source: stylecraze.com
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  1. पपीते की पत्ती : डेंगू के बुखार के लिए पपीते की पत्तियां बहुत ही असरदार हैं। पपीते के पत्तों में मौजूद पपैन एंजाइम (Papain enzyme) खून में प्लेटलेट (Platelet) की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। डेंगू के उपचार के लिए कुछ पपीते की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें।वही रस दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच रोगी को देते रहें।
  2. मेथी के पत्ते :मेथी के पत्ते डेंगू के बुखार को ठीक करने में सहायक हैं। मेथी के कुछ साफ पत्तों को पानी में उबाल लें, फिर उस पानी को छानकर चाय की तरह रोगी को पिलाये।इसके सेवन से शरीर के विषाक्त पदार्थ निकल जाते है और डेंगू का वायरस (Virus) भी खत्म हो जाता है। इसके अलावा मेथी के दाने के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर भी रोगी को दे सकते हैं।
  3. संतरा : विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध संतरा पाचन शक्ति को ठीक करता है और साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। डेंगू के रोगी के लिए संतरे का रस पीना आवश्यक है।
  4. तुलसी और कालीमिर्च :तुलसी के पत्तों और दो ग्राम कालीमिर्च को पानी में उबालकर पीने से डेंगू के बुखार में फर्क पड़ता है। यह पेय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाती है और जीवाणु प्रतिरोधक तत्व के रूप में कार्य करती है।डेंगू के रोगी को दिन में तीन से चार बार इस पेय का सेवन करायें।
  5. धनिया पत्ती : डेंगू के बुखार से राहत दिलाने में धनिया पत्ती मदद करता है।थोड़ी-सी मात्रा में धनिया पत्ती लेकर उसे साफ पानी में धो लें, फिर उन्हीं पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें।दिन में तीन से चार बार रोगी को यह रस देते रहें. इससे बुखार कम हो जाता है।
  6. आँवला :आँवला विटामिन सी (Vitamin C) का श्रेष्ठ श्रोत है।यह खून को साफ करके आयरन (Iron) की मात्रा को बढ़ाने में सहायता करता है।शरीर में खून की सही मात्रा होने से डेंगू के वायरस धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं।रोगी को दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच आँवले का रस पिलाये।
  7. एलोवेरा :एलोवेरा लीवर (Lever) को स्वस्थ रखता है और पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है, साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। एलोवेरा के एक पत्ते को काटकर उसका रस निकाल लें, ध्यान रहें कि पत्ती से निकलने वाले पीले रस का प्रयोग बिल्कुल न करें।रोगी को दिन में दो बार एक चम्मच एलोवेरा का रस पिलाये। इससे शरीर के विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते हैं और डेंगू के वायरस (Virus) भी खत्म हो जाते है।
  8. गिलोय : गिलोय का काढ़ा बुखार, जुकाम और खाँसी को दूर करने में बहुत उपयोगी है। दो कप पानी में गिलोय की कुछ जड़ें और तुलसी के कुछ पत्ते डालकर तब तक उबाले जब तक कि पानी आधा न हो जाये।फिर उस काढ़े को रोगी को पिलाये।गिलोय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर को हर तरह के संक्रमण से बचाता है।
  9. हल्दी :डेंगू के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों के दर्द के लिए हल्दी बहुत उपयोगी है।एक गिलास दूध में एक से दो चम्मच हल्दी के चूर्ण को मिलाकर रोगी को पिलाने से रोगी को दर्द से राहत मिलेगी।
  • गोल्डनसील :गोल्डनसील में डेंगू के वायरस (Virus) को खत्म करने की क्षमता है। इस बूटी को कूटकर सीधे चबा भी सकते हैं या फिर इसे पीसकर उसका रस निकालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं।
  • चिरायता : चिरायता एक तरह की बूटी है जो स्वाद में बहुत कड़वा होता है।यह पाचन तंत्र को ठीक करने के साथ डेंगू के बुखार को कम करने में भी मदद करता है।इस बूटी को अच्छे से धोकर रातभर पानी में भीगोकर रखें।सुबह इसी पानी को छानकर रोगी को पिलाये।इसके निरंतर प्रयोग से बुखार कम हो जायेगा और रोगी को भी आराम मिलेगा।इसके अलावा एक चम्मच चिरायता के चूर्ण को पानी में मिलाकर भी पिला सकते हैं।
  • अनार : अनार खून को साफ करके शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है साथ ही यह डेंगू के बुखार के लिए बहुत उपयोगी है।डेंगू के रोगी को अनार का रस पिलाये।
  • नीम के पत्ते :नीम के पत्ते डेंगू के बुखार को ठीक करने के साथ प्लेटलेट की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद करता है। कुछ नीम के पत्ते लेकर उसे अच्छे से धो लें।फिर उन्हें पीसकर उसके रस को दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच रोगी को पिलाये। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
  • पानी : डेंगू होने पर शरीर में पानी का अभाव होता है जिसके कारण दस्त भी हो सकता।इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि रोगी को समय-समय पर पानी पिलाया जाये।पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पेशाब के माध्यम से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
  • जौ का पौधा या घास (Barley Grass) :जौ का पौधा या घास प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।इसे पीसकर इसके रस को रोगी को पिलाने से डेंगू का बुखार भी कम होगा और कमजोरी भी नहीं रहेगी।यह डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic fever) के लिए भी उपयोगी है।

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उपर्युक्त घरलू नुस्खों के द्वारा डेंगू की बीमारी से राहत मिलेगी। यदि तीन से चार दिनोंमें बुखार न उतरे तो चिकित्सक की सलाह लेकर उपयुक्त जांच करवायें।अपने खून की जांच करवाकर आपको पता चल सकता है कि आपके बुखार का कारण क्या है।इसके अलावा कुछ बातों का ध्यान रखना अत्यावश्यक हैं, जैसे :

  • डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए।
  • बुखार या सिरदर्द के लिए एस्पिरिन (Aspirin) या ब्रूफेन (Brufen) जैसी दवाइयाँ बिल्कुल न लें।बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह से मात्र पेरासिटामोल (Paracetamol) ही लेना उपयुक्त है।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से अपनी खून में प्लेटलेट (Platelet) की मात्रा की जाँच करवाते रहें।
  • रोगी को पर्याप्त मात्रा में आहार और पानी का सेवन करना चाहिए।
  • घर के अन्दर और आस-पास पानी जमा न होने दें। यदि आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा करके रखते हैं तो उसे हमेशा ढककर रखें।
  • घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
  • कूलर का काम न होने पर उसमें जमा पानी निकालकर सूखा दें।जरुरत पड़ने पर रोजाना नियमित रूप से कूलर का पानी बदलते रहें।
  • खिड़की और दरवाजे पर जाली लगाकर रखें।
  • किसी भी खुली जगह में जैसे गड्ढे, गमले आदि में पानी जमा न होने दें और अगर पानी जमा हो तो उसमें मिट्टी डाल दें।
  • रात को सोते वक्त मच्छरदानी लगाकर सोये।
  • मच्छर विरोधी उपकरणों का इस्तेमाल करें, जैसे, मच्छर भगाने वाला इलेक्ट्रिक बैट (Electric Bat), क्रीम (Cream), सिट्रॉनेला आयल (Cirtonela Oil) आदि।
  • अगर बच्चे बाहर खेलने जाते है, यहां तक कि स्कूल जाने से पहले भी उनके उनके शरीर और कपड़ों पर मच्छर भगाने वाली क्रीम (Cream) जरुर लगायें।
  • शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।

झुर्रियाँ हटाने के घरेलू नुस्खें

झुर्रियाँ उम्र बढ़ने के साथ की ही एक स्वाभाविक प्रक्रिया है लेकिन कोई भी व्यक्ति जल्दी बूढ़ा नहीं होना चाहता, अतः यह स्वाभाविक प्रक्रिया ही लोगों के लिए कष्टप्रद हो जाता हैं।परन्तुउम्र बढ़ने के अलावा भी झुर्रियों के अन्य कई कारण हो सकते हैं।कई बार चिकित्सकीय कारणों से झुर्रियाँ आ सकती हैं, सूरज की किरणों और प्रदूषण के अतिरिक्त संपर्क में जाने से भी झुर्रियाँ पैदा हो सकती हैं।तली-भुनी, ज्यादा मसालेदार चीजों का सेवन करने से भी झुर्रियाँ हो सकती हैं।कई बार अत्यधिक शराब पीने और धूम्रपान करने से भी झुर्रियाँ आ जाती हैं।ये झुर्रियाँ गले, चेहरे, आँखों के नीचे जैसी जगहों पर दिखाई देती हैं। लेकिन कुछ आसान, प्राकृतिक और घरेलू उपायों द्वारा झुर्रियों को नियंत्रित किया जा सकता हैं तथा उससे निजात भी पाया जा सकता हैं।

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झुर्रियाँ दूर करने के घरेलू उपाय

  1. तेल की मसाज : यदि आप झुर्रियों से परेशान हैं तो आप झुर्रियाँ कम करने के लिए अपने चेहरे, गले पर अपने पसंद के तेल से मसाज कर सकते हैं।जैतून का तेल, नारियल तेल अथवा विटामिन ई (Vitamin E) के तेल का प्रयोग कर सकते हैं।इस बात का जरुर ध्यान रखें कि आप जिस भी तेल प्रयोग करें, वो आपके चेहरे के लिए उपयुक्त हों।तेल का प्रयोग रात को करें जिससे रातभर आपकी त्वचा को पोषण मिलता रहे।सुबह उठकर आप अपने फेसवाश (Facewash) से अपना चेहरा अच्छे से धो लें।इससे आपकी झुर्रियाँ कम हो जायेगी।
  2. दही : झुर्रियाँ हटाने के लिए एक जगह एक चम्मच दही, एक चम्मच शहद, एक चम्मच संतरे का रस और आधे पके हुए केले को मिलाकर एक उबटन तैयार करें। उसके बाद उस उबटन को अपने चेहरे, गर्दनऔर गले पर लगायें और बीस मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें।बीस मिनट बाद एक हलके गर्म कपड़े से चेहरे को साफ कर लीजिए तथा उसके बाद अपने पसंदीदा मॉइश्चराइज़र (Moisturiser)लगा लीजिए जिससे आपके चेहरे की नमी बाहर न निकले और वो बरकरार रहे।दही और शहद आपके चेहरे को साफ करने के साथ आपकी त्वचा को कसते हैं, संतरे का रस झुर्रियों पर असर करता है और केला त्वचा को नमी प्रदान करता है।
  3. नींबू का रस :झुर्रियों से छुटकारा पाने के लिए नींबू एक असरदार और प्राकृतिक उपाय है जो त्वचा को साफ करके उसे कसता है।नींबू के रस में शहद मिलाकर अपने चेहरे, गर्दन और गले पर लगाये।कुछ देर तक रखने के बाद अपना चेहरा धो लें और मॉइश्चराइज़र (Moisturiser) लगा लें।इससे आपकी झुर्रियाँ दूर हो जायेगी।
  4. अंडे का सफेद भाग :झुर्रियों के इलाज के लिए अंडे का सफेद भाग एक बेहतरीन उपाय है।उम्र बढ़ने के साथ त्वचा और शरीर के अन्य भाग ढीले हो जाते हैं और ऐसे में अंडे का सफेद भाग बहुत ही लाभदायक है। पहले आप एक अंडा तोड़कर बहुत सावधानी से उसके सफेद भाग को अलग कर लीजिए, फिर उसे अपनी उँगलियों की मदद से अपने चेहरे पर लगायें।दस मिनट तक रखने के बाद गुनगुने पानी से उसे धो लें। नियमित रूप से इसका प्रयोग करने से झुर्रियों की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा।
  5. विटामिन ई (Vitamin E) युक्त उबटन : आप विटामिन ई का प्रयोग घर पर भी कर सकते हैं।किसी भी मेडिकल स्टोर (Medical Store) पर आपको विटामिन ई की कैप्सूल्स (Capsules) मिल जायेगी. एक मध्यम आकर का बर्तन लेकर उसमें विटामिन ई की दो कैप्सूल्स तोड़कर उसमें से तेल निचोड़ लें, और कैप्सूल का ऊपरी भाग फेंक दें, फिर उसमें आधा चम्मच शहद, आधा चम्मच नींबू का रस और दो चम्मच दही मिलाकर एक उबटन तैयार कर लें।उसके बाद उस उबटन को अपने चेहरे, गर्दन और गले पर अच्छे से लगाकर पन्द्रह से बीस मिनट के लिए छोड़ दें, फिर गुनगुने पानी से अपना चेहरा धो लें।झुर्रियाँ हटाने के लिए इसका निरंतर इस्तेमाल करें. झुर्रियाँ हटाने में यह उबटन बहुत ही लाभदायक है।
  6. पका हुआ पपीता : पके हुए पपीते को अपने हाथ से अच्छे से मसल लें और उसे अपने चेहरे, गर्दन और गले पर लगायें।पंद्रह से बीस मिनट तक उसे लगायें रखें और फिर पानी से धो लें।ये उपचार निरंतर करने से मुहासे खत्म हो जाती हैं और झुर्रियाँ भी मिट जाती हैं, साथ ही चेहरे पर निखार आ जाता है।
  7. एलोवेरा (AloeVera) : एलोवेरा त्वचा के लिए बहुत ही असरदार और लाभदायक है।एलोवेरा का एक पत्ता काटकर उसके अन्दर का रस निकाल लें और उँगलियों की मदद से उस रस को अपने चेहरे, गर्दन और गले पर लगायें।आप चाहे तो एलोवेरा का रस अपने हाथों और पैरों पर भी लगा सकते हैं।अत्यधिक धूप और प्रदूषण के कारण हमारे चेहरे और शरीर के खुले हुए भाग काले पड़ जाते हैं, जिसे अंग्रेजी में सन टैन (Suntan) कहते है।एलोवेरा इस कालेपन को हटाने में मदद करता है साथ ही यह त्वचा को जरुरी पोषण प्रदान करते हुए उसे स्वस्थ रखता है। इसके रोजाना प्रयोग से चेहरे की झुर्रियाँ मिट जाती हैं।
  8. गाजर का रस : रोजाना एक गिलास गाजर का रस पीने से आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है, और आपकी त्वचा में भी निखार आ जाता है।गाजर में पाये जाने वाले विटामिन (Vitamins) और मिनरल (Minerals) आपको अन्दर से स्वस्थ रखता है, जिसका प्रभाव आपके चेहरे पर भी पड़ता है, साथ ही निरंतर इसके सेवन से झुर्रियाँ भी खत्म हो जाती हैं।
  9. टमाटर : टमाटर में उम्र प्रतिरोधक (Anti-ageing) गुण हैं।चेहरे की झुर्रियों को हटाने का यह एक बेहतरीन उपाय है।रोजाना एक टमाटर काटकर चेहरे और झुर्रियों से प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें और हलके हाथों से मसाज करें। ऐसा करने से चेहरा साफ होता है और झुर्रियाँ भी दूर हो जाती हैं।
  • खीरा : खीरा प्रभावी ढंग से झुर्रियाँ मिटाता है।एक खीरे का आधा भाग लेकर उसे छील लें, फिर उसे पीसकर उसका रस निकाल लें।उस गूदे सहित रस को अपने आँखों, चेहरे, गले और गर्दन पर लगायें और पंद्रह मिनट तक रखने के बाद अपना चेहरा धो लें।आँखों के नीचे और चेहरे की झुर्रियों के लिए खीरा बहुत ही फायदेमंद है, साथ ही यह त्वचा को भी साफ रखता है।
  1. अनानस : अनानस का रस भी झुर्रियों को दूर करने में सहायक है। अनानस के कुछ टुकड़े लेकर उसे मसलकर उसका रस निकाल लें।फिर उस गूदे सहित रस को अपने चेहरे और झुर्रियों से प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें। पंद्रह मिनट बाद अच्छे से धो लें।इसके प्रयोग से झुर्रियाँ दूर होती हैं।
  2. हल्दी :हल्दी हर किसी के रसोई में आसानी से उपलब्ध एक पदार्थ है जिसका आमतौर पर खाने में प्रयोग होता है।हल्दी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है और इसके प्रयोग से आपकी त्वचा स्वस्थ रहती है और चेहरे पर निखार आ जाता है। एक मध्यम आकर का बर्तन लें।उसमें दो चम्मच गुलाब जल, दो चम्मच कच्ची पीसी हुई हल्दी का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर एक उबटन तैयार कर लें।उस उबटन को अपने चेहरे और आँखों के आसपास लगायें. इससे आपकी झुर्रियाँ दूर हो जायेगी।बेहतर परिणाम के लिए हल्दी से बने इस उबटन का इस्तेमाल हर सप्ताह करें।
  • तनाव से दूर रहें : तनाव और चिंता की वजह से चेहरे पर और आँखों झुर्रियाँ आ जाती हैं साथ ही आँखों के नीचे काले घेरे भी उत्पन्न हो जाती हैं।इसलिए जितना हो सके खुद को तनाव और चिंता से दूर रखें और अपनी जिंदगी को खुलकर जियें।
  1. बेसन :जिस तरह साबुन के प्रयोग से आपके शरीर का मैल दूर हो जाता हैं, उसी तरह बेसन के प्रयोग से आपका चेहरे का मैल दूर हो जाता है।गुनगुने पानी में आवश्यकतानुसार बेसन घोल कर एक लेप बना लें और उस लेप को अपने चेहरे पर लगा लें। फिर सूखने के बाद अपना चेहरा अच्छे से धो लें।उसके बाद एक चम्मच शहद लेकर अपने चेहरे पर अच्छे से लगायें और बीस मिनट बाद धो लें।इससे आपके चेहरे की झुर्रियाँ दूर हो जायेगी।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप अपने झुर्रियों को मिटाकर अपने उम्र को नियंत्रण मरख सकते हैं।यदि किसी चिकित्सकीय प्रभाव के कारण आपके चेहरे पर झुर्रियाँ आती हैं अथवा इन सब उपायों से भी यदि झुर्रियाँ दूर नहीं होती तो आप किसी अच्छे त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) की सलाह लें।पहले से ही यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाये तो झुर्रियों की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी, जैसे :

  • पोषण एवं नमी के अभाव के कारण झुर्रियाँ आ जाती हैं।इसलिए शरीर और त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए सही आहार की जरुरत है, साथ ही पानी पीना बहुत ही फायदेमंद है। सुबह उठकर अपने चेहरे और आँखों को ठन्डे पानी से अच्छे से धोये और उसके बाद दो से तीन गिलास पानी भी पीयें। चेहरे और आँखों को धोने से नमी बरकरार रहेगी और खाली पेट पानी पीने से आपका हाजमा सही रहेगा।दिनभर में कम से कम सात से आठ गिलास पानी जरूर पीयें।सही समय पर अच्छा खाना खाएँ, दिन में एक फल जरुर खाएँ, प्रोटीन (Protein), मिनरल (Minerals), कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), फाइबर( Fibre) युक्त भोजन का सेवन करें।हरे, पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।
  • अत्यधिक धूप भी हमारे चेहरे और आँखों को प्रभावित करता है।इसलिए धूप में निकलने के आधे घंटे पहले अपने चेहरे, गले, गर्दन और शरीर के अन्य खुले भागों पर अच्छे से सन्सक्रीम (Suns cream) या लोशन लगायें तथा निकलते समय धूप-चश्मा या सनग्लास(Sunglass) जरुर पहनें।
  • दिन में कम से कम आठ घंटे जरुर सोये।अच्छी नींद आपकी त्वचा, आँखों और शरीर के लिए लाभदायक है।
  • झुर्रियाँ हटाने के लिए कुछ व्यायाम हैं जिसे निरंतर करने से रक्त-प्रवाह बढ़ता है, चेहरा कसता है, चेहरे की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और त्वचा भी मुलायम हो जाती है।आप किसी अच्छे योगा संस्थान में जाकर या किसी योगा विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयुक्त योगा करके अपना उम्र घटा सकते है।
  • अत्यधिक धूम्रपान करना और शराब पीना सेहत और त्वचा दोनों के लिए ही नुकसानदेह है। इसलिए झुर्रियों की समस्या से निजात पाने के लिए धूम्रपान और मद्यपान करना छोड़ दें।

छींक की समस्या को दूर करने के लिए घरेलू उपचार

छींक एक सामान्य क्रिया है।छींक प्रायः तब आती है जब हमारी नाक के अन्दर की झिल्ली, किसी बाहरी पदार्थ के घुस जाने से परेशानी महसूस करती है। परन्तु छींक प्रतिरोधी तंत्र की प्रक्रिया का जरुरी हिस्सा है, छींकने से शरीर के हानिकारक रोगाणु बाहर निकल जाते है। छींक की क्रिया में छाती, पेट, गला, आँखें जैसे कई अंग एक साथ काम करते हैं।ये सभी अंग बाहरी पदार्थ को शरीर से बाहर निकालने के लिए एकजुट होकर काम करते हैं।छींकते समय हमारे मुँह और नाक से बाहर निकलने वाली हवा की गति इतनी तेज होती है कि हमारे पूरे शरीर में एक कम्पन-सा होता है. छींक को रोकना शरीर के लिए हानिकारक है।छींक रोकने से शरीर के अन्य अंगों जैसे, कान, मस्तिष्क, फेफड़े, गर्दन, पेट आदि पर प्रभाव पड़ता है और इन अंगों को नुकसान पहुँच सकता है।छींक आने के कई सारे कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • छींक का प्रमुख कारण है एलर्जी।पराग कण, धूल के कण, धुआँ, जानवरों के रोएं, कपड़ों के रोएं, कीटों के डंक, कुछ दवाइयां, कुछ खाद्य पदार्थ आदि से एलर्जी हो सकता है और इसके कारण छींक आ सकती है।
  • अत्यधिक चिंता, परेशानी, घबराहट के कारण भी किसी-किसी को छींक आती है।
  • सामान्य सर्दी या फ्लू के कारण भी छींक आती है, विशेषकर बदलते मौसम में छींक की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ठंड में जुकाम होना भी छींक की एक वजह हो सकती है।
  • धूप में बहुत देर तक रहना भी छींक का कारण बन सकता है। तेज धूप के कारण नाक की नसें सक्रिय हो सकती है, जिससे छींकें आ सकती हैं।
  • ब्यूटी पार्लर में थ्रेडिंग करवाते समय या उसके बाद भी छींक आती है। दरअसल, भौंहों के ठीक नीचे जो नस होती है वह श्वास नली से जुड़ी होती है।इसलिए जब भी उस नस पर प्रभाव पड़ता है तो उसकी प्रतिक्रियास्वरूप छींकें आने लगती है।
  • कई बार तेज रोशनी देखने से आँखों के रेटिना (Retina) और दिमाग को जोड़ने वाली ऑप्टिक (Optic) नस उत्तेजित हो जाती है, और इस वजह से भी छींक आ जाती है।

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छींक की समस्या से निजात पाने के घरेलू नुस्खें

ऊपर कुछ ऐसे कारण बताये गए हैं जिससे छींकें आती हैं, परन्तु एक साथ लगातार कई छींकें आने पर व्यक्ति परेशान हो जाता।कभी-कभी यह रोज की बात हो जाती है। ऐसे में कुछ घरेलू उपायों द्वारा छींक को रोका जा सकता है।यहाँ नीचे दिए गए घरेलू उपायों का प्रयोग करके आप छींक की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

  1. सौंफ की चाय :सौंफ के प्रयोग से छींक की समस्या में तो राहत मिलती ही है, साथ ही यह कई साँस संबंधी संक्रमण से लड़ने की क्षमता भी देती है।सौंफ में प्रतिजीवाणु (Anti-biotic) और वायरस विरोधी (Anti-viral) गुण होते हैं।यदि आप छींक की समस्या से परेशान है, तो आपके लिए सौंफ की चाय का सेवन एक बेहतरीन घरेलू उपचार साबित हो सकता है।सौंफ की चाय बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में एक कप पानी उबाल लें और उसमें दो चम्मच पिसी हुई सौंफ डालें।कुछ देर बाद आँच को बंद कर दे और बर्तन को ढक दे, जिससे कि सौंफ अच्छे से पानी में घुल जाये।अब उस पानी को छान लें और चाय की तरह उसका सेवन करें।छींक की समस्या से छुटकारा पाने के लिए रोजाना दिन में कम से कम दो बार सौंफ की चाय का सेवन करें।
  2. लहसुन : आम तौर पर लहसुन का प्रयोग भोजन बनाने के लिए किया जाता है लेकिन कई लोग इस बात से अंजान है कि लहसुन में औषधीय गुण भी होते हैं। रोजाना कच्चे लहसुन की एक कली का सेवन करने से साँस संबंधी समस्यासे छुटकारा मिल सकता है।इसके अतिरिक्त तीन से चार लहसुन की कलियाँ लेकर मसल लें। अब इन्हें अपनी नाक के पास ले जाकर उसकी गंध को सूंघे।ऐसा करने से आपकी नाक बिल्कुल साफ हो जायेगीऔर आप आसानी से साँस ले पायेंगे।यदि आपको कच्चा लहसुन नहीं खाना या उसका गंध भी नहीं सूंघना तो फिर आप सब्जियों में या सूप में लहसुन के प्रोयग की मात्रा को बढ़ाकर भी उसका सेवन कर सकते है। इससे आपकी छींक की समस्या दूर हो जायेगी।
  3. भाँप : छींक से बचने के लिए सबसे आसान तरीका है भाँप लेना।इस उपचार के अंतर्गत आपको सिर्फ गर्म पानी और एक तौलिए की आवश्यकता होगी।सबसे पहले एक मध्यम आकार का एक पात्र लें और उसमें पानी लेकर उबालें।जैसे ही पानी उबलने लगे, उसे आँच से उतार ले।फिर उस पात्र को एक टेबल या स्टूल पर रखें और एक कुर्सी लेकर उसके सामने बैठ जाये।उसके बाद एक बड़े तौलिए से अपने सिर और उस पानी के बर्तन को एक साथ ढक ले और दस मिनट तक उस गर्म पानी का भाँप ले।इस बात का ध्यान रखे कि इस दौरान पंखा, ए.सी या कूलर बंद रहे। इसके बाद लगभग बीस मिनट तक हवा में न जाएँ। इस प्रक्रिया से नाक की समस्या तो दूर होगी ही साथ ही छींक की समस्या में भी फर्क पड़ेगा है।
  4. लैवेंडर का तेल : छींक की समस्या में लैवेंडर का तेल एक अच्छा उपाय है। एक रुई को लैवेंडर के तेल में भीगोकर उसे नाक के दोनों छेदों में घुसाएँ और साँस लें।इसके अलावाआप लैवेंडर के तेल को नैज़ल ड्रॉप (Nasal Drop) की तरह अपने नाक में डालकर सूंघ भी सकते हैं।यह छींक से बचने का एक बेहतरीन उपाय है।
  5. संतरा : विशेषज्ञों का कहना है कि एलर्जेंस (Allergens-एलर्जी पैदा करने वाले तत्व) शरीर में हिस्टामिन (Histamine) को उत्पन्न करते हैं जिससे छींक जैसे लक्षणों को देखा जा सकता है।विटामिन सी (Vitamin C)शरीर में हिस्टामिन के उत्पादन को कम करने में काफी प्रभावी साबित होता है।विटामिन सी हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरुरी है क्योंकि यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है।संतरे में विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए रोजाना नाश्ते में या दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास संतरे का रस या एक साबुत संतरे का सेवन बहुत ही फायदेमंद है।इसके सेवन से सर्दी-खाँसी की समस्या दूर होती है।
  6. कैमोमाइल चाय : एलर्जी की समस्या के कारण होने वाली छींक की समस्या में कैमोमाइल चाय बहुत ही असरदार है।कैमोमाइल में हिस्टामिन विरोधी गुण है जो छींक की समस्या को दूर करती है।उबलते हुए पानी में एक चम्मच कैमोमाइल के सूखे फूल को मिलाकर उसे कुछ देर तक उबालें, फिर उसे छानकर, उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोजाना दिन में दो बार पीने से छींक की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
  7. अदरक : छींक की समस्या में अदरक एक प्रभावी उपाय है।अदरक के टुकड़े को पानी में मिलाकर, उसे उबाल लें, फिर उसे छानकर एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से छींक की समस्या में राहत मिलती है।रात को सोने जाने से पहले अदरक के इस चाय का सेवन करने से रात को और सुबह आने वाली छींक से छुटकारा मिलता है।इसके अलावा आप सुबह और शाम की चाय में भी अदरक का टुकड़ा डालकर लें सकते हैं।इससे भी छींक की समस्या में फर्क पड़ेगा।
  8. मेथी के बीज : मेथी के बीज में पाये जाने वाले प्रतिजीवाणु गुण छींक के लिए फायदेमंद है। मेथी नाक के रास्ते को साफ करता है। एक चम्मच मेथी के बीज को पानी में डालकर उबालें, फिर उस पानी को छानकर चाय की तरह दिन में दो से तीन बार पीने से छींक की समस्या में फर्क पड़ता है।
  9. पेपरमिंट तेल : पेपरमिंट तेल प्रतिजीवाणु (Anti bacterial) गुण का अच्छा स्रोत है।यह बंद नाक को खोलता है औरछींक में राहत दिलाती है।तीन से चार गिलास पानी को उबालें और उसमें पाँच से छः बूंद पेपरमिंट तेल मिलायें।फिर उस पानी को आँच से उतार लें।उसके बाद अपने सिर को तौलिए से ढककर उस पेपरमिंट तेल युक्त गर्म पानी का भाँप ले।इससे बंद नाक और छींक की समस्या में फर्क पड़ेगा।
  10. काली मिर्च : बहती नाक और छींक को रोकने का एक कारगर उपाय काली मिर्च है।गुनगुने पानी में थोड़ा-सा काली मिर्च मिलाकर दिन में दो से तीन बार उस पानी को पीने से छींक की समस्या में फर्क पड़ता है।इसके अलावा आप रात को सोने जाने से पहले गर्म दूध में भी काली मिर्च मिलाकर पी सकते है, इससे भी आपको छींक की समस्या में राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त आप गर्म पानी में काली मिर्च मिलाकर उससे गरारा भी कर सकते हैं, या फिर अपने प्रतिदिन के खाने, सलाद और सूप आदि में भी काली मिर्च डालकर उसका सेवन कर सकते है।इससे आपके अन्दर के जीवाणु, जो सर्दी और छींक के कारण हैं, खत्म हो जाते हैं।
  • अजवाइन : अजवाइन में जीवाणुओं से लड़ने की क्षमता होती है।छींक के उपचार के लिएसरसों के तेल को गर्म कर लीजिए, उसमें अजवाइन डालकर उस तेल को नहाने से पहले अपने नाक और शरीर पर लगाईये, इससे बंद नाक और छींक की समस्या में राहत मिलती है।आप रात को सोने जाने से पहले भी इस तेल का प्रयोग कर सकते है।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप छींक की समस्या से निजात पा सकते हैं।यदि इन नुस्खों का प्रयोग करके भी आपकी छींक बंद नहीं होती या सर्दी ठीक नहीं होती, तो आप तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।नीचे दिए गए कुछ सावधानियों को बरतने से छींक की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी, जैसे :

  • धूल और धुंए से बचिए, आवश्यकता पड़ने पर मास्क (Mask) का प्रयोग करें।
  • धूम्रान और शराब से परहेज करें।
  • ठन्डे पदार्थों का अधिक सेवन न करें।
  • अत्यधिक चिंता करने से बचे।
  • जुकाम होने पर उपचार करायें।

चेचक के घरेलू उपचार

चेचक एक सर्वविदित और संक्रामक रोग है जिसे कई लोग त्वचा पर पड़ने वाले खास किस्म के दाने या लाल फुंसियों के कारण पहचानते है । चेचक वैरिसेला जोस्टर (Varicella Zoster) नामक वायरस (Virus) के कारण होता है । यह एक व्यक्ति से दूसरे में बहुत जल्दी फैलता है । यह रोग हवा के माध्यम से या एक संक्रमित व्यक्ति के माध्यम से भी फैल सकता है । चेचक होने पर सिर में दर्द, शरीर में दर्द, बुखार, खाँसी, नाक बहना, थकान, कमजोरी, खुजली, भूख की कमी आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है । चेचक होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; दूषित खान-पान, हवा में मौजूद चेचक के वायरस या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, माँ के दूध पर रहने वाले छोटे बच्चों को एकाएक माँ का दूध छोड़कर अन्य खाद्य पदार्थ खिलाना आदि । सामान्य तौर पर इस रोग के जीवाणु थूक, मल-मूत्र और नखुनों आदि में पाये जाते हैं । इस रोग के जीवाणु हवा में घुल जाते हैं और श्वसन के समय ये जीवाणु शरीर के अन्दर प्रवेश कर जाते हैं ।

इस रोग को ठीक होने में दस से पंद्रह दिन लग जाते हैं । यह रोग अधिकतर वसन्त ऋतु तथा ग्रीष्मकाल में होता है । इस रोग के तीन प्रकार हैं; 1. रोमांतिका या दुलारी माता, 2. मसूरिका या छोटी माता, 3. बड़ी माता । जब किसी को चेचक का रोमांतिका रूप हो जाता है तो इसके दाने रोमकूपों पर निकलने लगते हैं । यह रोग बारह वर्ष से कम आयु के बच्चों को अधिक होता है । कुछ सावधानियां बरतने से ही यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है । इस रोग में रोगी के चेहरे पर लाल रंग के दाने निकलने लगते हैं और जब ये दाने निकलते हैं तब रोगी को बुखार हो जाता है और बेचैनी होने लगती है । यह दाने दो से तीन दिनों के बाद फफोलों का रूप ले लेते हैं तथा कुछ ही दिनों के बाद ये सूखकर झड़ने लगते हैं ।

दूसरे, चेचक के मसूरिका रूप से पीड़ित रोगी के शरीर पर मसूर की दाल के बराबर दाने निकलने लगते हैं । इस चेचक को ठीक होने में कम-से-कम ग्यारह से बारह दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है । इस रोग में रोगी को खाँसी हो जाती है और छींके आने लगती है । इस रोग में दाने कभी-कभी बिना बुखार आये भी निकलने लगते हैं । तीसरे, चेचक के तीसरे प्रकार बड़ी माता से पीड़ित व्यक्ति को बहुत अधिक परेशानी होती है । इस रोग को ठीक होने में कम-से-कम पंद्रह से बीस दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है । इस रोग में दाने बड़े-बड़े फफोलों के रूप में शरीर पर निकलने लगते हैं । इन दानों के फूटने से उनमें से पानी निकलने लगता है और कभी-कभी तो उनमें मवाद भी भर जाता है और बदबू आने लगती है । इस चेचक के दाग गहरे होते हैं ।

चेचक के लिए घरेलू नुस्खें

Baking-Soda-True-Enemy-Of-The-Pharmaceutical-Industry-

  1. बेकिंग सोडा (Baking Soda) : बेकिंग सोडा चेचक से पीड़ित रोगी को खुजली और जलन से राहत दिलाने में मदद करता है । एक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलायें । अब उसी पानी में साफ और नर्म कपड़े को भीगोकर चेचक पर हलके हाथों से लगायें । अब कुछ देर के लिए सूखने दें और फिर उसे दुबारा पोंछ दें ।
  2. हरी मटर : हरी मटर में पाये जाने वाले आवश्यक गुण चेचक के उपचार के लिए सहायक है । दो सौ ग्राम हरी मटर को पानी में उबालें, फिर उस पानी को छानकर मटर को अलग कर लें । फिर उन उबले हुए मटर को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और रोगी के शरीर के प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें और सूखने तक छोड़ दें । फिर पानी से धीरे-धीरे पोंछ लें । इस उपचार को निरंतर करने से रोगी को जलन और दर्द से छुटकारा मिल जायेगा ।
  3. नीम : नीम की पत्तियों में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है और यह चेचक के जीवाणु को दूर करने में मदद करता है । रोगी को गर्म लगने पर आप नीम के पत्ते-सह टहनियों को एक करके रोगी को हवा करें । इससे न केवल रोगी को आराम मिलेगा बल्कि नीम के गुण के कारण जीवाणु का प्रभाव भी धीरे-धीरे कम हो जायेगा । रोगी के बिस्तर के चारों ओर नीम के पत्ते फैलाकर रखें । यहां तक की रोगी को जब भी नहलाएं तो पानी के बाल्टी में नीम के पत्ते डाल दें या फिर नीम के पत्तों को गर्म पानी में उबालकर रोगी को नहला सकते हैं । इससे रोगी का दर्द और खुजली कम हो जायेगा ।
  4. शहद : शहद में भी जीवाणु प्रतिरोधक गुण है को चेचक के जीवाणु को खत्म करने में कारगर है । शहद के प्रयोग से खुजली और दर्द कम हो जायेंगे । इसके रोजाना प्रयोग से चेचक के निशान भी नहीं बनते । एक कटोरी में पर्याप्त मात्रा में शहद लेकर चेचक पर लगायें । बीस से पच्चीस मिनट तक लगाकर रखने के बाद पानी से जगह को धीरे-धीरे धो दें । दिन में दो से तीन बार इस उपचार को करें ।
  5. गाजर और धनिया : गाजर में विटामिन ए (Vitamin A) और धनिया में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा पायी जाती है जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं । एक पात्र में एक गिलास पानी उबालें और उसमें एक कप कटे हुए गाजर और डेढ़ कप धनिया के पत्ते डाल दें । आँच को धीमा करके पंद्रह मिनट तक गर्म करें । उसमें थोड़ा-सा नमक मिलायें । फिर पानी को छानकर रोगी को पिलायें । एक महीने तक रोगी को इस पानी का सेवन करायें । आप रोगी को उबले हुए गाजर और धनिया पत्ती भी खिला सकते हैं ।
  6. एलोवेरा : एलोवेरा में कई सारे आवश्यक गुण पाए जाते हैं जो कई तरह के जीवाणुओं को दूर करने में मदद करता है । यह त्वचा को नर्म रखता है और दाग या निशान से मुक्ति दिलाता है । एक एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसके रस को बाहर निकाल लें । अब उसी रस को चेचक पर लगायें । ऐसा रोजाना करने से रोगी को खुजली से राहत मिलेगी और बाद में चेचक के निशान भी नहीं बनेंगे । इस बात का ध्यान रखें कि एलोवेरा के पत्ते से निकलने वाले पीले रंग के रस का प्रयोग बिल्कुल न करें, केवल सफेद वाला रस ही लगायें ।
  7. तुलसी : तुलसी में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व चेचक के जीवाणु को खत्म करने में कारगर है । एक कप पानी को उबालें और उसमें एक मुट्ठी ताजे तुलसी के पत्ते डाल दें । अब आँच कम करके तीन मिनट तक पानी को उबालें । फिर आँच से उतारकर पानी को दस मिनट के लिए छोड़ दें ताकि तुलसी के पत्ते के रस पानी में अच्छे से घुल जाये । पानी को छानकर फ्रिज में रख दें । कुछ देर बाद उसी पानी को निकाल लें और एक साफ कपड़े को तुलसी के पानी में भीगोकर चेचक पर धीरे-धीरे लगायें । इससे रोगी को आराम मिलेगा और खुजली भी कम हो जायेगी । रोजाना दिन में एक बार इस उपचार को करने से जल्द ही चेचक से राहत मिलेगी ।
  8. सेंधा नमक : सेंधा नमक में पाये जाने वाले मैग्नीशियम (Magnesium) और सल्फेट (Sulphate) नामक मिनरल (Mineral) दर्द को कम करने में सहायक है । एक बाल्टी हलके गर्म पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाकर अच्छे से घोल दें । फिर उसी पानी में साफ कपड़े को भीगोकर चेचक पर हलके हाथों से सिकाई करें । ऐसा रोजाना करने से चेचक से पीड़ित व्यक्ति को आराम मिलेगा और दर्द से भी छुटकारा मिल जायेगा । रोजाना दिन में दो बार इस उपचार को करने से जल्द ही चेचक से राहत मिल जायेगी ।
  9. अदरक : अदरक में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व चेचक के रोग में होने वाली खाँसी और बुखार को ठीक करने में मदद करता है । एक कप पानी को अच्छे से उबालें और उसमें एक चम्मच महीन कटे हुए अदरक को डाल दें । अब आँच को धीमा करके पानी को पांच मिनट तक उबालें । फिर पानी को छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोगी को पिलायें । दिन में दो से तीन बार इस पेय को पीने से चेचक से जल्द ही राहत मिलेगी । इसके अलावा थोड़े-से सूखे अदरक को पीसकर पाउडर बना लें या फिर ताजे अदरक के छोटे-से टुकड़े को नहाने के गर्म पानी में डाल दें और बीस से पच्चीस मिनट के लिए छोड़ दें । फिर उसी पानी से रोगी को नहलाएं ।
  10. दलिया : दलिया चेचक के उपचार के लिए सबसे सुरक्षित घरेलू उपचारों में से एक है । दो कप दलिया को पीसकर पाउडर बना लें । दो लीटर गुनगुने पानी में उस दलिया के चूर्ण को मिला दें और पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें ताकि दलिया अच्छे से पानी में घुल जाये । अब उसी पानी में साफ और नर्म कपड़े को भीगोकर रोगी के प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें । इससे खुजली और दर्द कम हो जायेगा । रोजाना दिन में दो बार इस उपचार को करने से रोगी को आराम मिलेगा और जल्द ही चेचक से राहत मिल जायेगी ।  

Ginger-Root-Benefits

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर चेचक की बीमारी से राहत मिल सकती है । बहुत अधिक कष्ट होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ और उपयुक्त जाँच  करवाएं । चेचक रोग के होने पर निम्नलिखित सावधानियाँ बर्तें :

  • चेचक के रोगी को अधिक मसालेदार, तेलयुक्त भोजन न दें ।
  • चेचक होने पर रोगी को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए ।
  • चेचक के रोगी को जब भी नहलायें तब हलके गर्म पानी का प्रयोग करें ।
  • इस बात का ध्यान रखें की रोगी शरीर पर आये छालों या फोड़ों को बिल्कुल न खरोचें, वर्ना यह रोग और भी फैल सकता है और दर्द भी बढ़ सकता है और बाद में निशान भी पड़ सकता है । फोड़ों को किसी भी तरह ढक कर न रखें ।
  • रोगी के चारों तरफ साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें ।
  • रोगी को अलग कमरे में लिटायें ताकि यह रोग किसी और में न फैले ।
  • चेचक की बीमारी से बचने के लिए बाहर का दूषित खाना न खायें और न ही दूषित पानी पीयें । चेचक के रोगी के संपर्क में न जाएँ, और यदि किसी कारणवश रोगी की सेवा हेतु रोगी के पास जाना पड़ता है तो सावधानियां बर्तें । रोगी के मल-मूत्र, त्वचा से निकलने वाले छालों, बलगम आदि से दूर रहें ।
  • वैरिसेला वैक्सीन (Varicella Vaccine) या चेचक का टीका वैरिसेला वायरस से होने वाले चेचक के लिए प्रतिरोधक के रूप में कार्य करता है । इस टीके को बहुत ही सुरक्षित माना गया है । टीके की एक खुराक से चेचक की गंभीर बीमारी से छुटकारा मिलता है । छोटे बच्चों को यह टीका लगवाना जरुरी है ।

गंजापन दूर करने के लिए घरेलू नुस्खें

गंजापन एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति के बाल असामान्य रूप से झड़ने लगते हैं । गंजेपन को तकनीकी भाषा में एलोपेसिया (Alopecia) कहते है । जब असामान्य रूप से बहुत तेजी से बाल झड़ने लगते हैं और नए बाल उतनी तेजी से नहीं उग पाते या फिर वे पहले के बालों की तुलना में अधिक पतले या कमजोर उगते हैं, तो ऐसी स्थिति में आगे जाकर गंजा होने की संभावना होती है । गंजापन एक आम समस्या बन गई है । चाहे महिला हो या पुरुष, बूढ़े हो या जवान, सभी इस समस्या से जूझ रहे हैं । एलोपेसिया (Alopecia) या गंजेपन के अंतिम चरण को एलोपेसिया टोटालिस (Alopecia Totalis) कहते है जिसमें व्यक्ति के लगभग सारे बाल झड़ जाते हैं । गंजेपन के कुछ लक्षण हैं, जैसे; बालों का पतला होना, शैम्पू करते समय बालों का अधिक मात्रा में झड़ना, बालों का झड़कर तकिये पर दिखना, कंघी करने पर अत्यधिक मात्रा में बालों का झड़ना आदि । गंजेपन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • होर्मोनल (Hormonal) परिवर्तन
  • उम्र बढ़ना
  • शरीर में आयरन (Iron) और कैल्शियम (Calcium) का अभाव
  • असामान्य रूप से वजन घटना
  • अधिक मात्रा में विटामिन ए (Vitamin A) का सेवन
  • सिर में किसी तरह का संक्रमण होना
  • मानसिक तनाव या मानसिक आघात
  • गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन
  • कैंसर (Cancer) या थाइरोएड (Thyroid) जैसी बीमारी
  • बालों पर अधिक मात्रा में रासायनिक एवं मशीनों का प्रयोग करना
  • स्टेरॉयड (Steroid) का सेवन
  • धूम्रपान एवं मद्यपान
  • आनुवांशिकता
  • रुसी की समस्या

गंजापन रोकने के लिए घरेलू उपचार

गंजेपन से तंग आकर कई लोग हेयर ट्रांसप्लांट (Hair Transplant) या सर्जरी (Surgery) की ओर उन्मुख होते हैं जिसमें लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं । इसके विपरीत आप घरेलू नुस्खों को आजमाकर गंजेपन की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं । यहां नीचे कुछ कुदरती और घरेलू नुस्खों के बारे में बताया गया हैं जिसे अपनाकर आपको गंजेपन की समस्या से राहत मिलेगी ।

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  1. अरंडी का तेल (Castor Oil) : अरंडी का तेल गंजापन को दूर करने में सहायक है । यह बाल और त्वचा के कई समस्याओं को दूर करता है । गंजेपन को रोकने के लिए आपको अपनी हथेली पर थोड़ा-सा अरंडी का तेल लेकर उसे अपने बालों की जड़ों में अच्छे से लगाना हैं और धीरे-धीरे मालिश करना हैं । यह तेल आपके बालों की जड़ों को पोषण देगा और उसे मजबूत बनाएगा और इसके निरंतर उपयोग से आपके सिर पर बाल भी उगने लगेंगे ।
  2. एलोवेरा (Aloe Vera) : बालों की समस्या के लिए एलोवेरा बहुत ही कारगर है । यह बालों को उगाने में मदद करता है । एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसके अन्दर के रस को निकालकर एक छोटी-सी कटोरी में रख लें । फिर उसी रस को बालों की जड़ों में लगाकर अच्छे से मालिश करें । यह बालों की जड़ों में बंद हुए छिद्रों को खोल देता है । इसके निरंतर प्रयोग से बाल झड़ने भी कम हो जायेंगे और सिर पर बाल भी उगने लगेंगे ।
  3. नारियल का तेल : नारियल का तेल बालों की जड़ों को पोषण देता है । रात को सोने जाने से पहले दस मिनट तक नारियल तेल से अपने बालों और उसके जड़ों की अच्छी तरह से मालिश करें । सुबह उठकर बालों में शैम्पू कर लें । आप चाहे तो नारियल के तेल में नींबू का रस भी मिला सकते हैं । नींबू भी गंजेपन को रोकने में मदद करता है ।
  4. काली मिर्च : काली मिर्च गंजेपन के इलाज के लिए बहुत ही फायदेमंद है काली मिर्च और नींबू के बीजों को पहले एक साथ महीन पीस लें और फिर थोड़ा-सा पानी मिलकर उसका लेप तैयार कर लें । उसी लेप को अपने बालों की जड़ों पर अच्छे से फैलाकर लगायें । इसके निरंतर प्रयोग से कुछ ही दिनों में असर दिखने लगेगा ।
  5. मेथी के बीज : गंजेपन को दूर करने के लिए मेथी के बीज भी बहुत कारगर है । मेथी के बीजों में प्रोटीन (Protein) पाया जाता है जो बालों की जड़ों में पोषण पहुँचाता है । मेथी को बीजों को रातभर पानी में भीगोकर रखें । सुबह उन बीजों को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और उसी लेप को अपने सिर पर अच्छे से लगा लें । एक घंटे बाद अपने सिर और बालों को अच्छे-से धो लें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में असर दिखने लगेगा । इसके अलावा आप मेथी के बीजों को नारियल के तेल में भुन लें । फिर उस तेल को छानकर मेथी को अलग कर लें और उसी तेल को अपने बालों की जड़ों में लगाकर धीरे-धीरे मालिश करें । एक महीने तक इसके निरंतर प्रयोग से बाल झड़ने कम हो जायेंगे और सिर पर बाल भी उगने लगेंगे ।
  6. नींबू : नींबू में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा है जो बालों की विभिन्न समस्याओं को दूर करने में मदद करता है । गंजेपन से बचने के लिए आप पानी के साथ नींबू के रस को मिलाकर अपने सिर पर लगा सकते हैं । इसके अलावा नारियल तेल, अरंडी का तेल, एलोवेरा आदि के साथ भी नींबू का रस मिलाकर अपने बालों की जड़ों में लगा सकते हैं । इसके निरंतर प्रयोग से बालों का झड़ना कम हो जायेगा और बाल भी सुन्दर दिखने लगेंगे ।
  7. चकुंदर के पत्ते (Beetroot leaves) : चकुंदर के पत्ते गंजेपन को दूर करने की अचूक दवा है । चकुंदर के पत्तों को पानी में उबालें, जब वे काफी नर्म हो जाये तो उसे पानी से निकालकर उसमें मेहँदी के पत्ते मिलाकर मिक्सर (Mixer) में पीस लें और एक लेप तैयार कर लें । अब उसी लेप को अपने बालों और उसके जड़ों में लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें । सूखने के बाद अपने बालों को गुनगुने पानी से अच्छे से धो लें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में फर्क दिखने लगेगा ।
  8. प्याज : प्याज में मौजूद सल्फर (Sulphur) सिर में रक्त के प्रवाह को तेज करता है जिससे गंजेपन की समस्या ठीक हो सकती है । प्याज को काट लें, फिर उसे पीसकर उसका रस निकाल लें और उसमें थोड़ी-सी मात्रा में शहद मिलाकर एक लेप तैयार कर लें । फिर उसी लेप को अपने बालों और उसके जड़ों में लगायें । कुछ देर बाद अपने सिर और बालों को अच्छे से धो लें । प्याज जीवाणुओं को मारने में मदद करता है । इसके निरंतर प्रयोग से बाल झड़ने कम हो जायेंगे और नए बाल भी उगने लगेंगे ।
  9. दही : बालों के लिए दही बहुत ही उपयोगी है । यह गंजेपन को दूर करने में सहायक है । दही को अच्छे से फेंट लें, फिर उसे अपने बालों और उसके जड़ों पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें । सूखने के बाद पहले पानी से बालों को धो लें फिर बालों में शैम्पू कर लें । इसके अलावा आप दही में मेथी मिलाकर भी अपने बालों में लगा सकते हैं । रातभर मेथी के दानों को पानी में भीगोकर रखें । सुबह उन्हीं मेथी के दानों को पीस लें फिर उन्हें दही के साथ मिलाकर एक लेप तैयार कर लें । फिर उसी लेप को अपने बालों और उसके जड़ों में लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें । निर्धारित समय के बाद अपने बालों को पहले पानी से धो लें फिर बालों में शैम्पू कर लें । इन दोनों तरीकों से आप दही का इस्तेमाल कर सकते हैं । इसके निरंतर प्रयोग से बाल झड़ने कम हो जायेंगे और नए बाल भी उगने लगेंगे साथ ही आपके बाल आकर्षक दिखेंगे ।
  10. धनिया के पत्ते : धनिया के पत्ते व्यंजन को केवल आकर्षक और स्वादिष्ट ही नहीं बनाता बल्कि यह गंजेपन से राहत भी दिलाते है । ताजे धनिया के पत्तों को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और फिर उसी लेप को अपने सिर और बालों में लगायें । इसके निरंतर प्रयोग से बालों का झड़ना कम होने के साथ-साथ नए बाल भी उगने लगेंगे ।
  11. मुलेठी और केसर : मुलेठी और केसर गंजेपन को कम करने में मदद करते हैं । पहले एक जगह थोड़े से दूध में केसर भीगोकर रखें । फिर मुलेठी को पीस लें और उसमें केसर-सह दूध को मिलाकर एक लेप तैयार कर लें । रात को सोने जाने से पहले इसी लेप को अपने सिर पर अच्छे से लगा लें । सोते समय अपने सिर पर एक प्लास्टिक (Plastic) बांध लें ताकि लेप बिस्तर या तकिया पर न लगे । सुबह उठकर बालों में शैम्पू कर लें । हफ्ते में एक से दो बार इस उपचार को करने से धीरे-धीरे गंजापन दूर हो जायेगा ।
  12. आंवला : विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध आँवले में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो गंजेपन की समस्या को दूर करने में मदद करता है । एक चम्मच आँवले के रस में एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर अपने बालों की जड़ों में लगाकर अच्छे से मालिश करें ।
  13. अंडा : एक अंडे को अच्छे से फेंट लें और फिर उसमें थोड़ा-सा जैतून का तेल मिलायें । फिर उसे अपने बालों की जड़ों में लगाकर सूखने दें । सूखने के बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें और उसके बाद बालों में हल्का शैम्पू कर लें । हफ्ते में दो से तीन बार इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में बाल झड़ने कम हो जायेंगे ।
  14. अमरुद के पत्ते : अमरुद के पत्तों को एक लीटर पानी में तब तक उबालें जब तक पानी का रंग काला न हो जाए । फिर उस पानी को ठंडा करके छान लें और उसी पानी को अपने बालों की जड़ों में मालिश करते हुए लगायें । हफ्ते में दो से तीन बार इस उपचार को करने से बाल झड़ने कम हो जायेंगे, साथ ही बाल भी उगने लगेंगे ।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर गंजेपन से बचा जा सकता है । यदि किसी गंभीर बीमारी या संक्रमण के कारण असामान्य रूप से बाल झड़ रहे हो तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाएं । गंजेपन से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक हैं, जैसे :

  • गीले बालों को कंघी न करें ।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें ।
  • दिनभर में 6-7 गिलास पानी पीयें और 8 घंटे तक सोयें ।
  • रोजाना व्यायाम करें ।
  • अपने बालों में रासायनिक तत्वों का प्रयोग न करें ।
  • बाहर के खाने से परहेज करें ।
  • अपने खाने में हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें ।
  • हफ्ते में तीन से चार बार तेल से अपने सिर की मालिश करें ताकि आपके बालों को पोषण मिलें ।