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साइनस के लिए घरेलू उपचार

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साइनस नाक का एक रोग है।नाक बंद होना, सिर में दर्द होना, आधे सिर में बहुत तेज दर्द होना, नाक से निरंतर पानी बहना, आँखों के ऊपरी पलकों या दोनों किनारों पर दर्द होना, चेहरे पर सूजन आदि इस रोग के लक्षण हैं। साइनस के मरीज के नाक और गले में कफ जमता रहता हैं।यह रोग होने पर नाक के अन्दर की हड्डी बढ़ जाती है या तिरछी हो जाती है, जिससे श्वास लेने में तकलीफ होती है। इससे पीड़ित व्यक्ति ठंडी हवा, धूल या धुआँ सहन नहीं कर पाता।साइनस ही आगे चलकर अस्थमा और दमा जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देता है।चिकित्सकों के अनुसार साइनस मानव शरीर की खोपड़ी में हवा भरी हुई कैविटी होती हैं, जो हमारे सिर को हल्कापन और श्वास वाली हवा लाने में मदद करती है।श्वास लेते समय अन्दर आने वाली हवा इस थैली से होकर फेफड़ों तक जाती है।इस थैली में हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल और दूसरे तरह की गंदगियों को रोकती है और बाहर फेंक दी जाती है।साइनस का मार्ग जब रुक जाता है अर्थात बलगम निकलने का मार्ग जब रुक जाता है तब ‘साइनोसाइटिस’ नामक बीमारी हो सकती है। वास्तव में साइनस का संक्रमण होने पर साइनस की झिल्ली में सूजन आ जाती है। सूजन की वजह से साइनस में हवा की जगह मवाद या बलगम आदि भर जाता है, जिससे साइनस बंद हो जाते हैं।इसके कारण माथे पर, गालों और ऊपर के जबाड़ो में दर्द होने लगता है।इस रोग में सर्दी बनी रहती है और कुछ लोग इसे सामान्य सर्दी समझकर इसका इलाज नहीं करवाते हैं।यदि वक्त रहते इसका इलाज न कराया जाए तो ऑपरेशन की नौबत भी आ सकती है।कुछ घरेलू उपायों से साइनस से निजात पाया जा सकता है।

साइनस के लिए कुछ घरेलू नुस्खें

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  1. भाँप : उबलते हुए पानी में नमक डालकर उसे आँच से उतार ले।उसके बाद अपना सिर और उस पानी के बर्तन को एक कपड़े से ढक ले और दस मिनट तक उस गर्म पानी का भाँप ले।इस बात का ध्यान रखे कि इस दौरान पंखा, ए.सी या कूलर बंद रहे।इसके बाद लगभग बीस मिनट तक हवा में न जाएँ।इस प्रक्रिया से साइनस में फर्क पड़ता है।
  2. नाक साफ करना :साइनस में नाक में कफ जम जाता है, ऐसे में जरुरी है कि नाक को साफ रखे।कई लोग शर्म के कारण अपने नाक का बलगम अन्दर की ओर खींच लेते हैं, पर ऐसा करने से नाक बंद हो जाता है, और साँस लेने में असुविधा होती है।इसलिए साइनस के मरीज के लिए अपना नाक साफ रखना आवश्यक है।
  3. दालचीनी : साइनस पैदा करने वाले सूक्ष्म जीवाणुओं के लिए दालचीनी बहुत ही प्रभावशाली है। एक गिलास गरम पानी में एक छोटी चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में एक बार पियें।लगातार दो हफ्ते तक इसे पीने से साइनस में फर्क पड़ता है।
  4. नींबू : एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर दो से तीन हफ्तें तक रोजाना सुबह खाली पेट पीने से साइनस की समस्या कम होती है। नींबू में साइनस के दर्द को दूर करने की क्षमता होती है साथ ही यह नाक की नली को भी साफ करता है।
  5. अदरक : अदरक में प्रतिजीवाणु पाये जाते हैं, जो साइनस के दर्द को मिटाने में सहायक होते हैं।दो से तीन कप पानी में एक अदरक का एक टुकड़ा बारीक काटकर उबाल ले, फिर उसे छानकर औरथोड़ा ठंडा करके पीने से साइनस में राहत मिलती है।
  6. हल्दी :हल्दी को गर्म दूध के साथ लेने से श्वास संबंधी बीमारियों में लाभ मिलता है।यह मसाला शरीर में गरमाहट लाता है, इसलिए साइनस में इसके सेवन से जकड़न से तुरंत राहत मिलती है।एक गिलास दूध में एक छोटी चम्मच हल्दी और एक छोटा चम्मच शहद मिलाकर दो हफ्तें तक पीने से साइनस में काफी फायदा होता है।
  7. लहसुन : साइनस में लहसुन एक बेहतरीन उपाय है।इसमें मौजूद एलिसिन एंजाइम साइनस के जीवाणु को खत्म करने में मदद करता है।साइनस से बचने के लिए लहसुन रामबाण दवा है। रोजाना कच्चे लहसुन की एक कली खाने से साइनस संक्रमण में राहत मिलती है।
  8. विटामिन ई और विटामिन ए : विटामिन ई से भरपूर खाद्द पदार्थों का सेवन करने से साइनस की समस्या दूर हो जाती है।सूरजमुखी के बीज, बादाम, काजू, अखरोट, सरसों, ब्रोकोली जैसे खाद्द पदार्थों में विटामिन ई की मात्रा पायी जाती है जो साइनस के लिए फायदेमंद हैं।विटामिन ए से युक्त खाद्द पदार्थ जैसे गाजर, पालक, अंडा, मीठा आलू आदि भी साइनस में फायदा पहुंचाता है।
  9. नारियल पानी : नारियल पानी में पोटेशियम (Potassium) पाया जाता है जो साइनस के मरीजों के लिए लाभदायक है।इससे गले की तकलीफ में आराम मिलता है।
  10. गाजर का रस :साइनस में गाजर बहुत ही लाभकारी होता है।आप गाजर का रस निकालकर पी सकते है, या फिर गाजर के रस को चकुंदर के रस के साथ भी ले सकते है अथवा पालक के पत्तियों के रस के साथ भी ले सकते है।
  • काला जीरा : साइनस में कालेजीरे से तुरंत राहत मिलता है।थोड़ा-सा काला जीरा लेकर एक कपड़े में बाँध ले, फिर उसे नाक के करीब ले जाकर जोर-जोर से साँस ले।ऐसा करने से बंद नाक खुल जाता है और तुरंत राहत मिलती है।
  1. प्याज : प्याज का रस नाक में डालने से साइनस के सिरदर्द से तुरन्त राहत मिलती है।
  2. शहद : रोजाना सुबह शुद्ध शहद का सेवन करने से साइनस से होने वाली परेशानियों से राहत मिलती है।इसके अलावा एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद और एक चौथाई चम्मच नमक डालकर उस घोल को ड्रॉपर की सहायता से दो बूंद नाक में डालने से साइनस में राहत मिलती है।
  3. यूकेलिप्टस तेल : साइनस होने पर अक्सर सिरदर्द की समस्या होती रहती है।यूकेलिप्टस का तेल साइनस के सिरदर्द से तुरंत राहत देने वाला नुस्खा है। इसके लिए एक बर्तन में थोड़ा पानी लेकर उसमें यूकेलिप्टस तेल की कुछ बूंदें डालकर उस पानी को ढककर उबाल ले, और उसी गर्म पानी का भाँप ले।ऐसा करने से साइनस से होने वाली सिरदर्द में फर्क पड़ता है।
  4. चिकेन सूप : साइनस के मरीज को चिकेन सूप पीना चाहिए क्योंकि इसमें पाये जाने वाले एमिनो सिस्टीन से नाक बहने लगती है जो साइनस ठीक होने का संकेत है।
  5. मेथी : साइनस में मेथी दाना भी फायदेमंद है।एक बर्तन में एक गिलास पानी और उसमें दो से तीन चम्मच मेथी के दानें डालकर लगभग पांच मिनट तक अच्छे से उबाल कर छान ले, और उस पानी को चाय की तरह पिये। दिन में एक बार इसे पीने से साइनस में फर्क पड़ता है।
  6. त्रिकुट : त्रिकुट (सौंठ, पीपल और काली मिर्च) साइनस में बहुत ही लाभदायक है।सौंठ, पीपल और काली मिर्च का पाउडर बनाकर बराबर मात्रा में मिला ले।त्रिकुट के इस मिश्रण की थोड़ी-सी मात्रा सब्जी में मिलाकर खाने से साइनस का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
  7. जौ : जौ नाक के रोगों को दूर करता है।कफ, सूजन, बलगम को नष्ट करने के गुण जौ में मौजूद हैं।इसलिए साइनस के मरीज को जौ से बना भोजन जैसे जौ के आटे की रोटी, हलवा आदि अधिक मात्रा में लेना चाहिए।
  8. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना : साइनस से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में पानी का अभाव हो जाता है, ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो और मरीज को इस संक्रमण के कारण परेशानी भी न हो।
  9. खारे पानी से कुल्ला : साइनस के रोगी को खारे पानी से कुल्ला करना चाहिए।ऐसा रोजाना करने से साइनस की समस्या बहुत हद तक खत्म हो जाती है।
  10. साइनस दूर करने के लिए योगा : साइनस की समस्या योगा द्वारा भी दूर हो सकती है।निरन्तर योगा करने से साइनस से उत्पन्न परेशानियाँ खत्म हो जाती हैं।योगा में साँस को विभिन्न तरीकों से नियंत्रित करना पड़ता है। इससे न सिर्फ आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है बल्कि साँसों से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं।साइनस की समस्या में योगा एक कारगर उपाय है।आप किसी अच्छे योगा विशेषज्ञ से इस बीमारी के लिए योगा सीख सकते है।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों से साइनस की समस्या में राहत मिलेगी। लेकिन कुछ खाद्द पदार्थों को त्यागकर और कुछ सावधानियाँ बरतने से इस समस्या से निजात मिल सकता है,जैसे :

  • साइनस के मरीज को धूल से काफी परेशानी होती है, इसलिए घर का वातावरण साफ रखना चाहिए।यदि वह व्यक्ति बाहर भी जाता है तो उसे अपने नाक पर मास्क (Mask) पहनकर निकलना चाहिए।साइनस से पीड़ित व्यक्ति को धूम्रपान या अन्य तरह के धुएं से बचना चाहिए।
  • साइनस होने पर कैफीन युक्त पेय जैसे कॉफी, चाय, हॉट चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि से बचना चाहिए। इस तरह के पेय पदार्थों से शरीर में पानी की कमी हो जाती है जो कि नाक को जाम कर सकता है। बंद नाक के कारण साइनस की बीमारी और भी कष्टदायक हो जाता है।
  • साइनस में ठन्डे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।दही, आइसक्रीम, कोल्ड कॉफी, ठंडा पानी आदि से परहेज करना चाहिए।इस तरह के पदार्थ साइनस के संक्रमण को बढ़ा सकता है।
  • साइनस के मरीज को शराब से भी दूर रहना चाहिए।शराब पीने से नाक बंद हो जाता है और इससे साइनस की तकलीफ बढ़ जाती है।
  • कभी-कभी मसालेदार खाना खाने से भी नाक बंद हो जाता है।साइनस से पीड़ित व्यक्ति के लिए मसालेदार खाना समस्या उत्पन्न कर सकता है। इसलिए ऐसे खाने से परहेज करना ही उचित है।
  • इसके अलावा साइनस की बीमारी यदि आपको ज्यादा तकलीफ दे रही है, तो आप डॉक्टर से संपर्क करके उनकी सलाह जरुर ले। डॉक्टर द्वारा सुझाए गए दवाइयों का उपयोग करे।

साँसों की दुर्गन्ध दूर करने के घरेलू उपाय

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साँसों की दुर्गन्ध एक ऐसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या है जो कई लोगों में पाई जाती है।साँसों की दुर्गन्ध या बदबू का कारण मुँह में मौजूद बैक्टीरिया (Bacteria) होती है। इस बैक्टीरिया से निकलने वाले सल्फर कम्पाउंड (Sulphur Compound) की वजह से मुँह में बदबू पैदा होती है। साँसों की दुर्गन्ध के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • धूम्रपान, मद्यपान या तंबाकू का सेवन
  • मसूड़े के रोग
  • अच्छी तरह से मुँह साफ न करना अर्थात ब्रश न करना
  • शुष्क मुँह
  • गले का संक्रमण अर्थात टोंसिल या साइनस की समस्या
  • दांतों का संक्रमण जैसे पाईरिया
  • अम्लता या एसिडिटी (Acidity)

साँसों की दुर्गन्ध या मुँह की बदबू दूर करने के घरेलू नुस्खें

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  1. नियमित रूप से ब्रश करें : रोजाना नियमित रूप से दिन में दो बार ब्रश करना अत्यावश्यक है। ऐसा करने से आपकेदांत और मुँह साफ रहते हैं। खाना खाने के बाद मुँह में खाद्य के कुछ न कुछ कण रह ही जाते हैं, जिन्हें अच्छी तरह से साफ न करने से उसमें जीवाणु पनपते हैं और साँसों की बदबू का कारण बनते हैं।अतः रोजाना सुबह नींद से उठकर और रात को सोने जाने से पहले ब्रश करना जरुरी है।
  2. जीभ को साफ रखें : भोजन करने के बाद यदि मुँह ठीक से साफ न किया जाये तो मुँह में, खासकर जीभ के ऊपर जीवाणु जमा हो जाते हैं और मुँह में बदबू पैदा करते है।इसलिए दाँतों को साफ करने के साथ जीभ को साफ करना भी जरुरी है ताकि किसी भी तरह से जीवाणु मुँह के अन्दर न रह जाये।
  3. पुदीना या धनिया : पुदीना या धनिया के ताजे पत्ते चबाने से साँसों की दुर्गन्ध दूर होती है और मुँह में ताजगी भी बनी रहती है। आप सलाद के साथ या ऐसे भी पुदीना या धनिया के ताजे पत्तों का सेवन कर सकते है। लहसुन और प्याज के कारण उत्पन्न साँसों की दुर्गन्ध को भी दूर करने में पुदीना या धनिया के पत्ते सहायक है।
  4. सूरजमुखी के बीज : सूरजमुखी के बीजों में फाइबर (Fiber), प्रोटीन (Protein) और विटामिन-ई (Vitamin E) भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।सूरजमुखी के बीजों को चबाने से मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है और दाँतों में सड़न नहीं होती।इन बीजों को चबाकर एक गिलास पानी पी लें। इस प्रक्रिया को निरंतर करने से साँसों की दुर्गन्ध दूर हो जायेगी।
  5. हल्दी : हमारे खाने को सही रंग देने वाली हल्दी भी हमारी साँसों की दुर्गन्ध दूर करने में सहायक होती है। पीसी हुई हल्दी, थोड़ा-सा नमक और सरसों का तेल मिलाकर एक लेप तैयार करके सुबह ब्रश या उंगली की सहायता से अपने दाँतों और मसूड़ों में लगाकर उसे कुछ देर तक छोड़ दे, फिर थोड़ी देर बाद कुल्ला करके अच्छे से मुँह साफ कर ले।इस मिश्रण के प्रयोग से पाईरिया जैसी समस्या उत्पन्न नहीं होती और साँसों की बदबू भी खत्म हो जाती है।
  6. खाने का सोडा (Baking Soda) : घर में इस्तेमाल होने वाला खाने का सोडा (Baking Soda) मुँह की बदबू दूर करने का एक बेहतरीन उपाय है।हफ्ते में एक बार सुबह थोड़ा-सा खाने का सोडा लेकर उँगली के सहारे उसे दाँतों पर रगड़ने के बाद गुनगुने पानी से मुँह धो ले, इससे आपके मुँह में जीवाणु उत्पन्न नहीं होंगे।वैकल्पिक तौर पर हफ्ते में एक बार सुबह ब्रश करते समय अपने मंजन (Toothpaste) में थोड़ा-सा खाने का सोडा डालकर ब्रश कर सकते है। इससे भी साँसों की दुर्गन्ध दूर हो जायेगी। इसके अतिरिक्त एक कप पानी में खाने का सोडा और हाइड्रोजन परऑक्‍‌साइड‌ (Hydrogen Peroxide) मिलाकर माउथवॉश (Mouthwash) की तरह भी उसका इस्तेमाल कर सकते है।
  7. नींबू : नींबू मुँह की लार (Saliva) में वृद्धि करता है और इसलिए शुष्क मुँह के कारण होने वाली साँसों की दुर्गन्ध को दूर करने में नींबू मदद करता है।एक कप पानी में एक चम्मच नींबू का रस और एक चुटकी नमक मिलाकर खाने के बाद उससे कुल्ला करें।यह उपाय रोज करने से साँसों की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।इसके अतिरिक्त आप नींबू के पानी में रातभर नीम के दाँतून को भीगोकर रखे और सुबह उसी दाँतून का इस्तेमाल करे। इससे दांत तथा मसूड़े स्वस्थ और मजबूत होंगे और मुँह की बदबू भी दूर हो जायेगी।यदि प्रतिदिन दाँतून करना संभव नहीं तो सप्ताह में एक बार दाँतून जरुर करे। इसके अलावा नींबू के छिलकों को धूप में सुखाकर पीस ले और उसमें बराबर मात्रा में फिटकिरी मिलाकर उस मिश्रण से मंजन करें। इससे दाँतों और मसूड़ों की समस्या तो दूर होती ही है साथ ही साँसों की दुर्गन्ध भी दूर हो जाती है।
  8. टी ट्री ऑयल (Tea tree oil) :यह एक शक्तिशाली कीटाणु नाशक है तेल है, जो मुँह में पैदा होने वाले जीवाणुओं को खत्म करके साँसों की दुर्गन्ध को दूर करने में मदद करता है। आप अपने मंजन में टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदें डालकर उससे दांत साफ कर सकते है। वैकल्पिक तौर पर टी ट्री ऑयल, नींबू का रस और पेपरमिंट ऑयल (Peppermint oil) को बराबर मात्रा में मिलाकर उस मिश्रण का माउथवाश (Mouthwash) की तरह भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके निरंतर प्रयोग से आपके मुँह में ताजगी बनी रहेगी और बदबू भी दूर हो जायेगी।
  9. सौंफ : सौंफ साँसों की दुर्गन्ध से छुटकारा दिलाने में मदद करता है। खाने के बाद थोड़ा-सा सौंफ लेकर चबाकर खाने से मुँह की बदबू दूर हो जाती है और मुँह में ताजगी बरकरार रहती है।सौंफ में जीवाणुओं से लड़ने की क्षमता भी होती है।
  • पार्सले (Parsley) : पार्सले मुँह की बदबू को दूर करने में मदद करता है।ताजे पार्सले की पत्तियों को सिरके में कुछ देर के लिए भीगोकर रखें उसके बाद उन्हीं पत्तियों को चबाकर खाने से मुँह में ताजगी फैल जायेगी और दुर्गन्ध भी दूर हो जायेगी।इसके अलावा आप पार्सले की पत्तियों का रस बनाकर भी पी सकते है।पार्सले पेट के पाचन तंत्र को सही रखता है और गैस एवं अम्लता जैसी समस्याओं को भी दूर करके उससे उत्पन्न होने वाली साँसों की बदबू को भी दूर करता है।
  1. दालचीनी : दालचीनी में खासकिस्मकातेल पाया जाता है जो न केवल मुँह की बदबू को खत्म करता है बल्कि मुँह में उत्पन्न होने वाले खराब बैक्टीरिया (Bacteria) को भी नष्ट करता है।एक मध्यम आकर का बर्तन लेकर उसमें एक कप पानी डालकर उबालें, फिर उसमें एक-एक करके दो से तीन हरी इलायची और एक तेजपत्ता डालकर अच्छे से उबाल लें।फिर उस मिश्रण को छानकर पानी को गुनगुना होने तक छोड़े और उससे कुल्ला करें। इससे आपकी साँसों की बदबू दूर हो जायेगी और आपको मुँह में ताजगी का अनभव होगा।
  • सेब का सिरका : सांसों की दुर्गन्ध से निजात पाने के लिए सेब के सिरके का प्रयोग किया जा सकता है।एक चम्मच जैतून के तेल में सेब का सिरका मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके उसमें ब्रश डूबोकर दाँतों पर हलके हाथों से घुमाएँ।इस नुस्खे को अपनाने से दाँत भी साफ होंगे और साँसों की दुर्गन्ध भी दूर होगी।इसके अतिरिक्त आप एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर खाने से एक घंटे पहले उसका सेवन भी कर सकते हैं। इससे पाचन तंत्र भी सही रहता है और मुँह की बदबू भी दूर होती है।लेकिन इस बात का जरुर ध्यान रखे कि सिरके से आपको कोई ऐलर्जि (Allergy) न हो।
  • लौंग : लौंग में जीवाणु प्रतिरोधक गुण हैं जो सांसों की दुर्गन्ध दूर करने में सहायक है। आप खाने के बाद दो से तीन लौंग मुँह में रखकर धीरे-धीरे चबा सकते हैं।लौंग से निकलने वाला तेल आपकी लार के साथ मिलकर बदबू को पैदा करने वाले जीवाणुओं को खत्म करता है। कुछ ही मिनटों में आपको ताजगी का अनुभव होगा और मुँह की बदबू भी चली जायेगी। इसके अलावा आप लौंग की चाय का सेवन भी कर सकते है या उससे कुल्ला भी कर सकते हैं।एक कप पानी को उबालकर उसमें एक चम्मच पीसी हुई लौंग डालकर उसे पाँच से दस मिनट तक धीमी आँच पर पकाएं, फिर उसे छानकर चाय की तरह पी सकते हैं या उस पानी को थोड़ा ठंडा करके उससे कुल्ला भी कर सकते हैं।ऐसा नियमित रूप से करने से साँसों की बदबू कुछ ही दिनों में दूर हो जायेगी।
  • तुलसी :तुलसी की ताजी पत्तियों को चबाकर खाने से मुँह की बदबू दूर होती है और मुँह का घाव भी ठीक हो जाता है।पाईरिया जैसी समस्या को दूर करने में भी तुलसी मदद करता है।

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उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के प्रयोग द्वारा आप साँसों की दुर्गन्ध से निजात पा सकते हैं। यदि इनके प्रयोग के बावजूद भी साँसों की दुर्गन्ध दूर नहीं होती है तो किसी अच्छे दन्त चिकित्सक से अपना इलाज करवायें।किसी  संक्रमण के कारण भी आपके मुँह में बदबू पैदा हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना जरुरी है।मुँह में बदबू पैदा न हो इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी हैं, जैसे :

  • खूब सारा पानी पिये. पानी आपके दाँतों में फंसे खाद्य कणों को निकालकर मुँह को साफ रखता है।
  • सही भोजन का सेवन करें। अपने रोजाना के खाद्य में हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों को शामिल करें।विटामिन ए (Vitamin A) से भरी ब्रोकोली, गाजर, कद्दू, ककड़ी जैसी सब्जियाँ प्राकृतिक रूप से दाँतों की सफाई करने के साथ दाँतों की जड़ो को भी मजबूत बनाती हैं।नाशपाती, सेब, अमरुद, केला जैसे फल मसूड़ों के लिए काफी अच्छे हैं।विटामिन सी (Vitamin C) से भरे स्ट्रॉबेरी, कीवी जैसे फल भी मसूड़ों को मजबूत बनाते हैं।
  • धूम्रपान, मद्यपान, तंबाकू के सेवन से परहेज करें।
  • अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रखें।अत्यधिक मात्रा में बाहर का खाना एवं मसालेदार खाना पाचन तंत्र को बिगाड़ सकता है और उससे अम्लता, गैस जैसी समस्या हो सकती है, जिससे मुँह में बदबू पैदा हो सकतीहै।
  • दाँतों को ब्रश करने की तरह फ्लॉस (Floss)भी करें। एक धागे की मदद से दाँतों के बीच फंसे खाद्य कणों को बाहर निकालना जरुरी होता है ताकि वोखाद्य कण मुँह में सड़कर बदबू पैदा न कर सके।
  • अतिरिक्त मात्रा में चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, मिठाई, चॉकलेट आदि का सेवन ना करें। इसके अत्यधिक सेवन से दांतों और मसूड़ों की समस्या हो सकती है।

सर्दी और खाँसी से निजात के लिए घरेलू उपाय

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सर्दीऔर खाँसी की समस्या बहुत ही आम समस्या है लेकिन इसके कारण आपके स्वास्थ्य को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।यह किसी भी उम्र में हो सकता है।सर्दी-खाँसी होने पर सरदर्द, लगातार नाक बहना, बदन दर्द, यहां तक कि बुखार भी हो सकता है।यदि सही समय पर सर्दी और खाँसी का सही इलाज न किया जाएँ तो आगे चलकर वो साइनस का रूप भी ले सकती है।सर्दी और खाँसी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • मौसम में परिवर्तन होने के कारण सर्दी और खाँसी की समस्या होती है।
  • धूल, धुआँ, प्रदूषण के कारण भी इस तरह की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • ठन्डे पदार्थों जैसे, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, फ्रिज का पानी आदि का सेवन करने से जुकाम और खाँसी की समस्या हो सकती है।
  • सर्दियों के मौसम में भी ये समस्या उत्पन्न हो सकती है।

सर्दी खाँसी के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. दूध और हल्दी : दूध और हल्दी सर्दी और खाँसी के सबसे असरदार इलाजों में से एक है।एक गिलास दूध को गर्म करके उसमें एक चम्मच हल्दी का पाउडर मिलाकर उसका सेवन करें। इसके सेवन से आपका शरीर अन्दर से गर्म रहता है और सर्दी-खाँसी जैसी समस्या भी दूर हो जाती है।
  2. ब्रांडी (Brandy) और शहद : सामान्य सर्दी और खाँसी को ठीक करने के लिए आप ब्रांडी और शहद का सेवन भी कर सकते है।हर मेडिकल स्टोर (Medical Store) में डॉक्टर्स ब्रांडी (Doctors Brandy) उपलब्ध है। एक चम्मच ब्रांडी में एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से सामान्य सर्दी और खाँसी की समस्या से निजात पाया जा सकता है। ब्रांडी छाती को गर्म रखता है और शहद में बलगम से लड़ने का प्राकृतिक गुण है।इन दोनों का मिश्रण सर्दी और खाँसी को प्रभावी रूप से दूर करता है।
  3. आंवला :आंवला विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा होता है।आँवले के नियमित सेवन सेरक्त का संचार अच्छी तरह से होता है।यह आपके प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर सर्दी, जुकाम और खाँसी जैसी बीमारियों को ठीक करता है।जिन्हें अक्सर सर्दियों में जुकाम और खाँसी की समस्या होती रहती है उन्हें रोजाना एक आँवले का सेवन जरुर करना चाहिए, इससे सर्दी और खाँसी की समस्या से हमेशा के लिए छूटकारा पाया जा सकता है।
  4. नींबू और शहद : नींबू के रस में शहद मिलाकर लेने से जुकाम और खाँसी की समस्या से निजात पाया जा सकता है। एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस निचोड़ लें और फिर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर उसका सेवन करें।इससे सर्दी और खाँसी की समस्या में आपको आराम मिलेगा।
  5. अजवाइन : अजवाइन में जीवाणुओं से लड़ने की क्षमता होती है।जुकाम और खाँसी के उपचार के लिए सरसों के तेल को गर्म कर लीजिए, उसमें अजवाइन डालकर उस तेल को नहाने से पहले अपनी नाक, छाती और शरीर पर लगाईये, इससे बंद नाक और सर्दी की समस्या में राहत मिलती है।आप रात को सोने जाने से पहले भी इस तेल का प्रयोग कर सकते है।
  6. अदरक : सर्दी और खाँसी की समस्या में अदरक एक प्रभावी उपाय है। अदरक के टुकड़े को पानी में मिलाकर उसे उबाल लें, फिर उसे छानकर एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है।रात को सोने जाने से पहले अदरक के इस चाय का सेवन करने से रात की नींद भी अच्छी होती है और जुकाम एवं खाँसी से छुटकारा भी मिलता है।इसके अलावा आप सुबह और शाम की चाय में भी अदरक का टुकड़ा डालकर लें सकते हैं। इससे भी सर्दी-खाँसी की समस्या में फर्क पड़ता है।
  7. भाँप : सर्दी और खाँसी की समस्या से बचने के लिए सबसे आसान तरीका है भाँप लेना। इस उपचार के अंतर्गत आपको सिर्फ गर्म पानी और एक तौलिए की आवश्यकता होगी। सबसे पहले एक मध्यम आकार का एक पात्र लें और उसमें पानी लेकर उबालें।जैसे ही पानी उबलने लगे, उसे आँच से उतार ले।फिर उस पात्र को एक टेबल या स्टूल पर रखें और एक कुर्सी लेकर उसके सामने बैठ जाये।उसके बाद एक बड़े तौलिए से अपने सिर और उस पानी के बर्तन को एक साथ ढक ले और दस मिनट तक उस गर्म पानी का भाँप ले। इस बात का ध्यान रखे कि इस दौरान पंखा, ए.सी या कूलर बंद रहे। इसके बाद लगभग बीस मिनट तक हवा में न जाएँ। इस प्रक्रिया से बंद नाक की समस्या और बहते नाक की समस्या तो दूर होगी ही साथ ही बलगम की समस्या में भी फर्क पड़ता है।आप चाहे तो इस प्रक्रिया में पेपरमिंट तेल का भी प्रयोग कर सकते है।भांप लेने से पहले गर्म पानी में पेपरमिंट तेल की कुछ बूंदें डालकर भांप लेने से सर्दी और खाँसी में अच्छा परिणाम मिलता है।
  8. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : सर्दी और खाँसी में सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते। तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें।अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।फिर इस काढ़े को छानकर एक कप या गिलास में डालें और उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करने से बलगम की समस्या भी खत्म हो जाती है और सर्दी में भी राहत मिलती है।
  9. लहसुन : लहसुन के तेल को लगाने से जुकाम और खाँसी में आराम मिलता है। एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो से तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल को अपनी हथेली, छाती और नाक पर अच्छे से लगायें। इससे सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होगी।
  • गुड़, काली मिर्च और जीरा : गुड़, काली मिर्च और जीरे का मिश्रण सर्दी और खाँसी की समस्या को दूर करने में मदद करता है।एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच पीसी हुई काली मिर्च, एक चम्मच पीसा हुआ जीरा और एक चम्मच गुड़ मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके उसका सेवन करने से जुकाम और सर्दी की समस्या दूर हो जाती है। यह मिश्रण छाती में जमे बलगम को निकालने के साथ सर्दी और खाँसी का भी अच्छा उपचार है।
  • मसाला चाय :सर्दी और खाँसी के लिए घर पर बने मसाला चाय बहुत ही उपयोगी है।मसाला तैयार करने के लिए एक तवे पर एक चौथाई कप धनिये का बीज, डेढ़ चम्मच जीरे का बीज, डेढ़ चम्मच सौंफ और एक चौथाई चम्मच मेथी के बीज को सूखा भून लें और फिर उसे अच्छे से पीसकर चूर्ण बना लें। उसके बाद एक जगह एक कप पानी उबालें और उसी उबलते हुए पानी में डेढ़ चम्मच वही चूर्ण डालें और साथ ही डेढ़ चम्मच मिश्री मिलाकर धीमी आँच पर तीन से चार मिनट तक रखें, उसके बाद उसमें दो चम्मच दूध मिलाकर उसे उबालें ताकि सभी मसाले अच्छे से घुल जाएँ।फिर उस चाय को छानकर पीयें।इससे सर्दी और खाँसी में बहुत राहत मिलेगी। रोजाना दिन में दो बार पीने से जुकाम और खाँसी की समस्या दूर हो जायेगी।
  • चिकेन सूप (Chicken Soup):चिकेन सूप में आवश्यक पोषक तत्व हैं जो सामान्य सर्दी और खाँसी की समस्या में राहत दिलाती है। इसमें पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant), जीवाणु से लड़ने में मदद करता है।बेहतर परिणाम के लिए घर पर ही तरह-तरह की सब्जियों से चिकेन सूप बनाकर उसमें काली मिर्च डालकर गरम-गरम पीने से सामान्य सर्दी और खाँसी जैसी समस्या से निजात पाया जा सकता है साथ ही यह आपके शरीर को तंदरुस्त भी रखता है।
  • च्यवनप्राश : जिन लोगों को हमेशा सर्दियों में जुकाम और खाँसी होती रहती है, उन्हें सुबह एक चम्मच च्यवनप्राश का सेवन जरुर करना चाहिए। च्यवनप्राश प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और जीवाणुओं से लड़ने में मदद करता है।
  • खारे पानी से कुल्ला : खाँसी चाहे सुखी हो या बलगम वाली, खारे पानी से कुल्ला करने से फर्क पड़ता है, साथ ही बंद नाक की समस्या में भी राहत मिलती है।सर्दी और खाँसी की समस्या होने पर खारे पानी से कुल्ला करने से आराम मिलता है।
  • व्यायाम या योग : व्यायाम या योगा द्वारा सर्दी और खाँसी की समस्या दूर हो सकती है।योगा में साँस को विभिन्न तरीकों से नियंत्रित करना पड़ता है। इससे न सिर्फ आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है बल्कि साँसों से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। शरीर की विभिन्न समस्याओं में योगा एक कारगर उपाय है।आप किसी अच्छे योगा विशेषज्ञ से योगा सीखकर जुकाम और खाँसी की समस्या से हमेशा के लिए निजात पा सकते है।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप सर्दी और खाँसी को दूर कर सकते है। यदि इन उपायों से भी दो दिनों में कोई फर्क न पड़े तो आप जल्दी ही किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जांच करवायें।कुछ सावधानियां बरतने से सर्दी और खाँसी की समस्या को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं, जैसे :

  • प्रदूषण और धूल से बचे।आवश्यकता पड़ने पर मास्क का प्रयोग करें।
  • नियमित व्यायाम करें।
  • मद्यपान और धूम्रपान से परहेज करें।
  • ठन्डे पदार्थों का सेवन अधिक न करें।
  • ऐसे पदार्थों का सेवन करें जिसमें विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा अधिक हो।

वजन बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय

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आज एक ओर जहाँ बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं वहीँ दूसरी ओर ऐसे भी लोग हैं जो दुबलेपन या वजन कम होने की समस्या से जूझ रहें हैं। चाहे वजन ज्यादा हो या कम, लेकिन ये दोनों ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनता हैं।वजन कम होने का अर्थ है शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव होना जो आपके पारिवारिक और सामाजिक जीवन को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं।वजन कम करने की तरह ही वजन बढ़ाना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।वजन बढ़ाने के लिए ऐसे आहार लेने चाहिए जिसमें सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), प्रोटीन (Protein), फैट (Fat) और मिनरल (Mineral) हो। कुछ लोग सोचते हैं कि तला और वसायुक्त आहार लेने से वजन आसानी से बड़जायेगा, लेकिन वास्तव में वजन बढ़ाने के लिए सही आहार और व्यायाम की आवश्यकता होती हैं।

दुबलेपन के कारण :

  • ज्यादा उपवास करने से पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और खाने की इच्छा नष्ट हो जाती है।
  • पौष्टिक आहार ग्रहण न करने से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव हो जाता है जिसके कारण वजन घटने लगता है।
  • खाने के प्रति अरुचि होने से सही और उपयुक्त खाद्य शरीर को नहीं मिलता जिससे वजन कम हो जाता है।
  • मानसिक एवं भावनात्मक तनाव और चिंता की वजह से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है।
  • व्यायाम न करना भी दुबलेपन का कारण हो सकता है।
  • कई बीमारियाँ भी दुबलेपन का कारण हो सकती हैं, जैसे, खून की कमी (Anaemia), टी.बी (Tuberculosis), हायपर थाइरोइड (Hyper Thyroid), क्रोनिक डायरिया(Chronic Diarrhoea), मधुमेह (Diabetes)आदि।

दुबलेपन से निजात पाने और वजन बढ़ाने के लिए घरेलू नुस्खें :

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  1. सूखे मेवे : सूखे मेवे को कैलोरी (Calorie), वसा (Fat), कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) और फाइबर (Fibre) का अच्छा स्रोत माना जाता हैं। इसलिए दुबलेपन के त्रस्त लोगों को अपने आहर में किशमिश, बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, अंजीर जैसे सूखे मेवे को शामिल करना चाहिए।
  2. चीज़ (Cheese) : चीज़ में भरपूर मात्रा में वसा (Fat) होता है और ये वजन बढ़ानेके लिए उपयोगी है।आप अपने खाने में चीज़ का प्रयोग कर सकते हैं, इससे आपका खाना भी स्वादिष्ट होगा और चीज़ में पायी जाने वाली कैलोरी (Calorie), प्रोटीन (Protein), कैल्शियम (Calcium) से आपका वजन भी बढ़ेगा तथा आपको दुबलेपन की समस्या से छुटकारा भी मिल जायेगा।
  3. पीनट बटर (Peanut Butter) : पीनट बटर प्रोटीन (Protein) और वसा (Fat) का एक समृद्ध स्रोत है तथा उन लोगों के लिए उपयुक्त हैं जो अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं साथ ही इसमें पाये जाने वाले आवश्यक पोषक तत्व ह्रदय के लिए के अच्छा होता है।
  4. आलू : आलू एक सामान्य सब्जी, लेकिन यह कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), स्टार्च (Starch) और फाइबर (Fibre)का समृद्ध स्रोत है तथा वजन बढ़ाने में सहायक है। अतः अपने खाद्य में आलू को शामिल करें क्योंकि यह वजन बढ़ाने का एक आसान उपाय है।
  5. पास्ता (Pasta) : पास्ता एक स्वादिष्ट और कैलोरी (Calorie) से भरा हुआ आहार है। यह कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) का भी अच्छा स्रोत है।एक कप मैकरोनी (Macaroni) में लगभग 390 कैलोरीज़ (Calories) होती है।आप पास्ता में चीज़, तरह-तरह की सब्जियां डालकर भी खा सकते हैं।यह वजन बढ़ाने में सहायक होता है।
  6. मक्खन (Butter) :मक्खन या बटर में भरपूर मात्रा में वसा (Fat) है जो वजन बढ़ाने में सहायक है।आप भोजन बनाने में बटर का प्रयोग कर सकते है, ब्रेड या तले हुए पदार्थों के साथ भी बटर का सेवन कर सकते है।
  7. फल : आम, पका हुआ पपीता, केला, अनानस, खरबूजा, अनार, तरबूजजैसे फल वजन बढ़ाने में सहायक हैं।इन फलों में प्राकृतिक शर्करा होती है जो ऊर्जा का अच्छा स्रोत है।आप सलाद में, मिठाई में या साबुत फलों का सेवन भी कर सकते हैं।इसके अतिरिक्त दूध के साथ केले व आम का शेक (Shake) बनाकर भी पी सकते हैं।
  8. अंडे : अंडे कैलोरी (Calorie) से समृद्ध होते हैं तथा इनमें प्रोटीन (Protein) और पोषक तत्व की प्रचुर मात्रा होती हैं।एक अंडे में लगभग 70 कैलोरीज़ (Calories) तथा 5 ग्राम वसा (Fat) होती है। अंडा ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega 3 fatty acid) से भी समृद्ध है और इसमें अच्छे कोलेस्ट्रोल (Good Cholesterol) की मात्रा अधिक होती है।अतः रोजाना सुबह नाश्ते में एक अंडा खाने से तेजी से वजन बढ़ता है।
  9. मांस : मांस प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है।इसे पकाकर या भुनकर खाने से वजन तेजी से बढ़ता है।आप बिना चर्बी के लाल मांस (Red Meat) का भी सेवन कर सकते है।
  10. बीन्स (Beans) : यदि आप शाकाहारी हैतो शरीर में प्रोटीन (Protein) की मात्रा बढ़ाने के लिए आप बीन्स का सेवन कर सकते है। एक कटोरी बीन्स में 300 कैलोरी (Calorie) होती हैं।बीन्स बहुत ही पौष्टिक सब्जी है जो आपको स्वस्थ रखने के साथ आपके वजन को भी बढ़ाता है।
  11. अदरक : अदरक पाचन तंत्र में गर्मी पैदा करके शरीर के भीतर खून के बहाव को तीव्र करता है जिससे भूख बढ़ जाती है।इसलिए अदरक वजन बढ़ाने का एक कारगर उपाय है। अदरक का रस बहुत ही लाभदायक है। आप रोजाना अदरक की बनी चाय भी पी सकते हैं या अदरक का एक टुकड़ा मुँह में रखकर उसका रस भी चूस सकते है। ऐसा करने से आपकी खाने की इच्छा तीव्र होगी।
  12. अवोकाडो (Avocado) : यह एक बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी होने के साथ वसा (Fat) का एक अच्छा स्रोत भी है।इसमें अधिक मात्रा में पोटैशियम (Potassium), फोलिक एसिड (Folic acid) और विटामिन ई (Vitamin E) पाया जाता हैं।आप इस सब्जी को सलाद (Salad) के साथ, मांस के साथ या घर पर बने पिज्ज़ा के साथ भी ले सकते हैं।
  13. दही :दही में प्रोटीन (Protein) की मात्रा अधिक होती है। वजन बढ़ाने के लिए आप मलाई युक्त दही का सेवन कर सकते है या दही में विभिन्न फलों को मिलाकर भी उसका सेवन कर सकते है।दुबले-पतले लोगों को अपने रोज के खाद्य दही को शामिल करना चाहिए।
  14. सोयाबीन्स (Soybeans) :सोयाबीन्स में भरपूर प्रोटीन (Protein), कैल्शियम (Calcium), फाइबर (Fibre), कैलोरीज़ (Calories), आयरन (Iron), विटामिन बी (Vitamin B), एमिनो एसिड (Amino acid) पाया जाता है। वैसे सोयाबीन्स वजन घटाने और बढ़ाने, दोनों ही क्षेत्रों में फायदेमंद हैं।
  15. राजमा : राजमा में प्रोटीन (Protein) की मात्रा अधिक होती है, इसलिए जो लोग शाकाहारी हैं वे मांस-मछली-अंडे की जगह राजमा का सेवन भी कर सकते है। राजमा के सेवन से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति होती हैं और यह वजन बढ़ाने में भी सहायक होता है।
  16. पनीर : दूध के उत्पादों में से पनीर भी एक है जिसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन (Protein) और कुछ मात्रा में कैलोरी (Calorie) भी होती है।पनीर के सेवन से भी दुबलेपन की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
  • दाल : अपने रोजाना के खाद्य में दाल को शामिल करें। दाल में पाई जाने वाली प्रोटीन (Protein), कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), फाइबर (Fibre) वजन को संतुलित रखता है। ये ज्यादा वजन वाले और कम वजन वाले लोगों के लिए लाभदायक है।
  1. नारियल का दूध : नारियल का दूध एक तरफ जायके को बढ़ाकर भोजन को स्वादिष्ट बनाता है तो दूसरी तरफ इसमें भरपूर मात्रा में पाई जाने वाली कैलोरी (Calorie)वजन को बढ़ाने में सहायक होता है।
  2. दूध में शहद : शहद वजन को संतुलित रखता है।यदि आपका वजन अधिक है तो तो शहद उसे कम करता है और यदि कम है तो उसे बढ़ाता है। रोज रात को सोने जाने से पहले या नाश्ते में दूध में शहद मिलाकर पीने से वजन बढ़ता है साथ ही इससे पाचन तंत्र भी स्वस्थ रहता है।
  • अश्वगंधा और शतावरी :अश्वगंधा और शतावरी वजन बढ़ाने का आयुर्वेदिक उपाय हैं. अश्वगंधा और शतावरी के चूर्ण को मिलाकर, उसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिला लीजिए। रात को सोने जाने से पहले या व्यायाम के बाद पहले एक चम्मच इस चूर्ण को मुँह में डालें फिर उसे अच्छे से खाने के बाद एक गिलास गर्म दूध पी लें। रोजाना इसका सेवन करने से एक महीने में ही शरीर का रूप-रंग और डील-डौल बदल जायेगा।
  • च्यवनप्राश : च्यवनप्राश स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा है ही साथ ही यह वजन बढ़ाने में भी सहायक है।सुबह-शाम दूध के साथ च्यवनप्राश का सेवन करना दुबले-पतले लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद है।
  • व्यायाम और योग क्रियाएं : व्यायाम सिर्फ वजन घटाता ही नहीं है बल्कि बढ़ाता है।दुबले-पतले लोगों को वजन बढ़ाने के लिए रोजाना व्यायाम करना चाहिएक्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। यदि आप दुबलेपन की समस्या से त्रस्त है तो आप पुश अप, रोल डाउन जैसे व्यायाम कर सकते हैं।योग क्रियायों के द्वारा भी वजन बढ़ाया जा सकता हैं। योग से शारीरिक और मानसिक विकास होता हैं।सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, श्वासन योग क्रियायों द्वारा भी दुबलेपन की समस्या से निजात पा सकते है।व्यायाम और योग आपकी भूख को बढ़ाता है और आपको स्वस्थ रखता है।अतः वजन बढ़ाने के लिए रोजाना व्यायाम करना जरुरी है।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को आजमाकर आप अपना वजन बढ़ा सकते हैं।यदि इन नुस्खों का प्रयोग करके भी कोई फर्क नहीं पड़ता या किसी बीमारी के कारण वजन घटता है, तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लें।किसी अच्छे आहार विशेषज्ञ (Dietician) द्वारा बताये गए आहार चार्ट (Diet Chart) के अनुसार ही अपना आहार ग्रहण करें।कुछ सावधानियों को बरतने से दुबलेपन की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी, जैसे :

  • किसी भी प्रकार के तनाव या चिंता से दूर रहना चाहिए।
  • पर्याप्त नींद शरीर के लिए आवश्यक है. दिन में कम से कम 7-8 घंटे तक सोना चाहिए।
  • पौष्टिक आहार लेना चाहिए।
  • कोई बीमारी होने पर तुरंत उसका इलाज करवाना चाहिए।

मोटापा घटाने के घरेलू उपाय

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मोटापा एक ऐसी बीमारी है जो स्त्री, पुरुष व बच्चे, किसी को भी हो सकती है। मोटापे के कारण व्यक्ति की सुन्दरता प्रभावित होती है।ऐसे बहुत से लोग हैं जो मोटापे की समस्या से त्रस्त है।मोटापे के कारण लोगों को चलने, साँस लेने और बैठने में परेशानी होती है।शरीर में दो तरह की वसा कोशिकाएं होती हैं, सफेद वसा (White Fat) और भूरी वसा (Brown Fat)।सफेद वसा कोशिकाएं शरीर में अतिरिक्त कैलोरी (Calorie) को जमा रखती हैं जबकिभूरी वसा होर्मोन (Hormone) और जींस (Genes) की क्रियाशीलता से गर्मी उत्पन्न करके वसा (Fat) को जलाकर उसे ऊर्जा (Energy) के रूप में परिवर्तित कर देती है।इसलिए मोटापा कम करने के लिए शरीर में भूरी वसा की मात्रा को बढ़ाना चाहिए।मोटापे को विभिन्न बीमारियों का जनक माना जाता है, जैसे, दिल की बीमारी, जोड़ों में दर्द, गठिया रोग, मधुमेह, रक्तचाप, दमा आदि।

मोटापे के कारण

  • मोटापे का कारण है फास्टफूड (Fast food), चॉकलेट (chocolate), आइसक्रीम (Ice cream) , कोल्डड्रिंक (Cold drink), मद्दपान (Alcohol), अधिक चर्बीयुक्त आहार आदि का सेवन करना।
  • व्यायाम न करना, परिश्रम न करना भी मोटापे का कारण है।शारीरिक क्रियाएं सही ढंग से न होने पर शरीर में चर्बी जमा हो जाती है, जो मोटापे का लक्षण है।
  • वंशानुगतकारणसेभी कुछ लोग मोटे होते हैं।
  • कुछ लोग तनाव से राहत पाने के लिए भूख न लगने पर भी खाना खाते रहते है, जिससे वजन बढ़ जाता है।
  • कभी-कभी स्टेरॉयड (Steroid), नींद की गोली (Sleeping Pills) जैसी दवाइयों के प्रभावस्वरूप भी मोटापे की समस्या उत्पन्न होती है।

मोटापा कम करने के घरेलू नुस्खें

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  1. तेज हरी मिर्च : तेज हरी मिर्च खाने से शरीर की मेटाबोलिक (Metabolic) क्रियाशीलता बढ़ती है और शरीर में जमी चर्बी घटती है।तेज मिर्च में कैप्सिनोइड्स पाया जाता है जो ब्राउन फैट (Brown Fat) या भूरी वसा उत्पन्न करने में सहायक होता है। भूरी वसा के उत्पन्न होने से मोटापा कम होता है।
  2. हल्दी : हल्दी के कई गुणों में से एक गुण यह भी है कि यह शरीर के वसा (Fat) को जलाने का काम करती है।हल्दी शरीर में वसा को पनपने नहीं देती, अतः मोटापा कम करने के लिए भोजन में इसका प्रयोग आवश्यक है।
  3. पुदीना : पुदीने के पत्तों से बनी चाय पीकर वजन घटाया जा सकता है। पुदीने से हाजमा सही रहता है और यह वसा (Fat) को कम करने में मदद करती है।इसका एक और गुण यह भी है कि यदि कुछ भी खाने से पहले पुदीने के पत्तों को सूंघा जाये तो इससे भूख कम हो जाती है और कम खाने से वजन भी कम होता है।
  4. खाने से पहले पानी : पानी वजन घटाने में सहायक होता है। पानी पीने से 1-2 घंटों के अन्दर 24%-30% कीमेटाबोलिज्म (Metabolism) में वृद्धि होती है, जिससे कैलोरीज़ (Calories) घटता है।खाना खाने से करीब आधा घंटा पहले पानी पीने से कैलोरीज की मात्रा कम होती है, खाना अच्छे से पचता है, व्यक्ति को भूख कम लगती है जिसके कारण वो कम खाता है और वजन भी घटता है।
  5. सेब : सेबभूरी वसा ( Brown Fat) के उत्पादन में सहायक होता है और शरीर से अतिरिक्त चर्बी को दूर रखता है।दिन में एक या दो सेब खाने से वजन घटता है।
  6. सुबह का नाश्ता कभी न छोड़े : मोटापा कम करने के लिए सुबह के नाश्ते को कभी न छोड़े, ऐसा करने से शरीर को काफी नुक्सान पहुँचता है और साथ ही वजन भी बढ़ता है।नाश्ता न करने पर आपका दिमाग प्राकृतिक रूप से ऐसे भोजन की तरफ आकर्षित होता है जो कैलोरी(Calorie) से भरा होता है, इससे न केवल स्वास्थ्य भी खराब होता है बल्कि वजन भी बढ़ता है।
  7. ग्रीन टी : ग्रीन टी के सेवन से वजन घटता है और मोटापा कम होता है।ग्रीन टी में थोड़ी-सी मात्रा में कैफीन (Caffeine) होती है जिससे मेटाबोलिज्म (Metabolism) में वृद्धि होती है।इसके अतिरिक्त इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स (Anti-Oxidants) कैफीन के साथ काम करके शरीर की वसा (Fat) को जलाने मेंमदद करता है।इस बात का ध्यान रखें कि इसमें चीनी और कैलोरी युक्त अन्य उत्पाद न मिलायें।
  8. कॉफी :बिना चीनी, दूध या कैलोरी युक्त अन्य उत्पाद के कॉफी (Coffee) का सेवन फायदेमंद होता है। कॉफी में मौजूद कैफीन (Caffeine) से शरीर का मेटाबोलिज्म (Metabolism) काफी हद तक बढ़ जाता है और इससे शरीर की वसा (Fat) जल जाती है।
  9. अतिरिक्त मात्रा में चीनी का सेवन न करें : खानपान में अतिरिक्त चीनी का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।अतिरिक्त चीनी के सेवन से मोटापे के अलावा मधुमेह तथा ह्रदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।यदि आप वजन घटना चाहते हैं तो अतिरिक्त चीनी का सेवन बंद कर दे।
  • भरपूर मात्रा में फल और सब्जियों का सेवन : वजन घटाने के लिए पर्याप्त मात्रा में फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इनमें कैलोरी (Calorie) की मात्रा कम होती है और ये आमतौर पर फाइबर (Fiber) से भरपूर होती हैं, जो वजन घटाने में सहायक होते हैं।
  1. जामुन : जामुन एंटी ऑक्सीडेंट्स (Anti Oxidants) से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा होता ही है साथ ही यह फैट कटर (Fat cutter) भी है अर्थात इसके सेवन से चर्बी काफी हद तक कम हो जाती है।जामुनशरीर की चर्बी की कोशिकाओं में मौजूद जींस (Genes) की कार्यशीलता को प्रभावित करता है जिससे वजन नहीं बढ़ता।
  • नींबू पानी : हर सुबह उठकर एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस मिलाकर एक घोल तैयार करें और उसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर उसका सेवन करें।नींबू के औषधीय गुण के कारण वजन कम होगा और मोटापे की समस्या भी नहीं रहेगी।
  1. दिनचर्या : यदि आप मोटापे की समस्या से त्रस्त हैं तो आपके लिए यह जरुरी है कि आप अपनी दिनचर्या में बदलाव लायें।हर सुबह जल्दी उठकर लगभग पैंतालीस मिनट तकबाहर टहलने के लिए जायें या फिर आधा घंटा दौड़े, ऐसा करने से आपकी कैलोरी घटेगी और आपका मोटापा भी कम होगा। घर लौटने पर एक से दो गिलास पानी पिये फिर आधे घंटे बाद नाश्ता करें।ध्यान रहें नाश्ते में अधिक कैलोरी वाले खाद्य का सेवन न करें, और नाश्ते में केला छोड़कर अन्य फल जरुर खायें। ज्यादा पेट भरकर नाश्ता न करें. आप अपना खाद्य एक-दो घंटें के अन्तराल में लेते रहियें। दोपहर के भोजन के साथ सलाद जरुर लें।सलाद भोजन को पचाने में मदद करता है और वजन भी कम करता है।शाम को बहुत अधिक कुछ न खायें।रात का खाना जल्दी खायें, कोशिश करें कि लगभग रात के नौ बजे के भीतर आप अपना रात का खाना खा लें, और खाने के लगभग तीन घंटे के बाद आप सोने जाएँ, ऐसा करने से आपका खाना अच्छे से पचेगा।
  2. व्यायाम करें :व्यायाम करने से पसीना होता है जिससे शरीर का फैट कम होता है और मोटापा की समस्या से निजात पाया जा सकता है।आप जिम या व्यायाम केंद्र जाकर भी व्यायाम कर सकते है, अथवा घर पर भी व्यायाम कर सकते हैं।सेतुबंध, भेकासन, धनुरासन, उत्तानपदासन, सूर्य नमस्कार जैसी योग क्रियाएं करके आप अपना मोटापा कम कर सकते हैं।
  • मशरूम : मशरूम मोटापा कम करने का एक प्रभावी उपाय है। मशरूम में अधिक मात्रा में पानी और प्रोटीन होता है जो वजन को कम करता है।आप मशरूम की सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं या मशरूम का रस निकालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं।
  1. पत्तागोभी : पत्तागोभी वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।आप पत्तागोभी का सूप बनाकर भी उसका सेवन कर सकते हैं या पत्तागोभी की सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं अथवा इसे सलाद में भी शामिल कर सकते है।
  2. पपीता :पपीता अतिरिक्त चर्बी को कम करता है। नियमित रूप से पपीता खाने से वजन कम होता है।पर इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि गर्भवती महिलाएं पपीता बिल्कुल न खाएँ, इससे गर्भ को नुक्सान पहुँच सकता है।
  3. छाछ : मोटापा कम करने के लिए छाछ पीना बहुत ही लाभदायक होता है।आप छाछ का सेवन आँवले और हल्दी के चूर्ण के साथ भी कर सकते है अथवा ऐसे भी बिना चीनी के छाछ का सेवन कर सकते है।इससे मोटापा कम होता है।
Saturated Fat
Saturated Fat

मोटापा कम करना एक प्रतिस्पर्धात्मक कार्य है।अत्यधिक मोटापे के कारण व्यक्ति को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं।उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप अपना वजन और मोटापा कम कर सकते हैं।मोटापा कम करने के लिए सही और उपयुक्त आहार (Diet) की जरुरत है, इसलिए आप किसी अच्छे आहार विशेषज्ञ (Dietician)की सलाह लेकर एक डायट चार्ट (Diet Chart) बना लें और उसी के अनुसार अपना खाद्य ग्रहण करें, ऐसा करने से आपका वजन और मोटापा कम हो जायेगा। कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देने से न ही वजन बढ़ेगा और न ही मोटापे की समस्या होगी, जैसे :

  • स्नैक्स, फास्टफूड, शराब, चीनी, घी, मक्खन, कोल्डड्रिंक, आलू जैसे अत्यधिक कैलोरी वाले खानपान से परहेज करें।
  • अपना खाना चबाकर खाए और खाने के लगभग आधे घंटे बाद पानी पिये, इससे पाचन तंत्र सही रहता है और वजन भी नियंत्रण में रहता है।
  • अधिक मात्रा में ठंडा पानी पीने और ठंडाआहार ग्रहण करने से भी वजन बढ़ता है।अतः ठन्डे खानपान से परहेज करें।
  • दिन में कम से कम आठ घंटे तक सोयें। नींद पूरी न होने पर भूख भी ज्यादा लगती है और व्यक्ति अस्वस्थ भी हो जाता है।
  • तनाव और चिंता से दूर रहें। ऐसा देखा गया है कि अत्यधिक चिंता के कारण व्यक्ति अधिक खाता है जिससे उसका वजन बढ़ जाता है।
  • कोशिश करें आईने के सामने बैठकर खाने की, ऐसा करना से आप खुद को देख पायेंगे और आपका खाना भी कम हो जायेगा।
  • प्रोटीन से भरपूर भोजन करने से आपके शरीर में मेटाबोलिज्म की मात्रा बढ़ेगी।प्रोटीन युक्त खाद्य खाने से आपका पेट भी भरेगा और आपको संतुष्टि भी मिलेगी साथ ही आप हर रोज 441 कैलोरी कम लेंगे।
  • मलाई रहित दही का सेवन करें जिससे आपके शरीर में कैल्शियम की बढ़ोत्तरी भी होगी साथ ही आपका वजन भी कम होगा।

मौसमी बुखार या वायरल फीवर (Viral Fever) के लिए घरेलू उपाय

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बदलते मौसम के साथ हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिसके कारण बुखार, खाँसी, सर्दी जैसे रोग हमारे शरीर को जकड़ने लगते हैं।बदलते मौसम के साथ मौसमी बुखार, जिसे अंग्रेजी में वायरल फीवर (Viral fever) कहते है, होने की सम्भावना सबसे अधिक होती है।मौसमी बुखार आम बुखार जैसा ही लगता है, लेकिन इसके होने पर शरीर का तापमान जल्दी कम नहीं होता और लगभग पांच से छै घंटे के अंतराल में बुखार लौटकर आता है।मौसमी बुखार होने पर शरीर का तापमान तेजी से बढ़कर 100 से 103 डिग्री तक हो जाता है। इस तरह का बुखार होने पर व्यक्ति बहुत थकान महसूस करता है।किसी प्रकार के जीवाणु या संक्रमण के कारण इस तरह का बुखार हो सकता है।ठंडा लगने पर भी इस तरह का बुखार हो सकता है। मौसमी बुखार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है।इस प्रकार का बुखार होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण देखे जाते हैं, जैसे :

  • इस बुखार के प्रभावस्वरूप जीभ का स्वाद चला जाता है।
  • इस तरह के बुखार में सिर में तेज दर्द होता है।
  • मांसपेशियों और हड्डियों के जोड़ों में भी दर्द होता है।
  • मौसमी बुखार होने पर खाँसी, जुकाम, उल्टी, दस्त जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

मौसमी बुखार के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : मौसमी बुखार होने पर सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते। तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो मौसमी बुखार के उपचार के लिए उत्तम है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें।अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।इसी काढ़ेमें शहद डालकर उसका हर दो घंटे में सेवन करें। इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  2. धनिया की चाय : धनिया में मौसमी बुखार जैसे रोग को खत्म करने की क्षमता है।धनिया में मौजूद प्रतिरोधक तत्व शरीर को बुखार से लड़ने की शक्ति देता है।मौसमी बुखार में धनिया की चाय बहुत ही असरदार औषधि है।एक मध्यम आकर के बर्तन में एक गिलास पानी लें और उसमें एक बड़े चम्मच धनिया के दानें या बीज डालकर उबालें। फिर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में दूध और चीनी डालें।फिर इसका गरम-गरम चाय की तरह सेवन करें। इस कारगर घरेलू नुस्खें से मौसमी बुखार में आराम मिलेगा।
  3. चावल का स्टार्च(Starch) :चावल का स्टार्च शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र को बढ़ाकर शरीर को स्वस्थ रखता है। यह एक पारंपरिक उपाय है।मौसमी बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए यह विशेष रूप से एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय माना जाता है।चावल का स्टार्च बनाना कोई बहुत मुश्किल कार्य नहीं है।लगभग हर किसी के घर में चावल पकता है।चावल पकने के बाद जिस पानी को छानकर फेंक दिया जाता है, वही पानी स्टार्च है जो बुखार में लाभदायक होता है।चावल पकने के बाद पके हुए चावल के पानी को एक बर्तन में छान लें।अब उसमें स्वाद अनुसार नमक डालकर, यदि आप चाहे तो काली मिर्च भी डाल सकते हैं, उसका गरम-गरम सेवन करें. इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  4. सूखी अदरक का मिश्रण : अदरक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो मौसमी बुखार के लक्षणों को कम करता है।बुखार से पीड़ित व्यक्ति के लिए सूखी अदरक का सेवन करना लाभदायक है।एक बर्तन में एक कप पानी डालकर उसमें दो मध्यम आकर के सूखे अदरक के टुकड़े या उसी परिमाण में सौंठ का चूर्ण डालकर उबालें। इसके बाद उस उबलते हुए पानी में एक-एक करके पीसी हुई हल्दी और काली मिर्च डालकर थोड़ी-देर के लिए फिर से उबालें। उसके बाद आँच से उतारकर उसमें शहद डालकर दिन में चार बार थोड़ा-थोड़ा करके पीने से बुखार में आराम मिलेगा।
  5. मेथी का पानी :मेथी के बीज रसोईघर में आसानी से उपलब्ध एक मसाला है। किन्तु इसमें विशेष प्रकार के औषधीय गुण हैं जो मौसमी बुखार में राहत दिलाती हैं।आधा कप पानी में एक बड़ा चम्मच साफ मेथी के बीज रातभर भीगोकर रखें।सुबह उसी पानी को छानकर दो घंटे के अन्तराल पर पीने से बुखार मेंआराम मिलेगा।
  6. सिरके का प्रयोग :सिरके के प्रयोग से भी बुखार को कम किया जा सकता है।आप अपने नहाने के पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर नहा सकते हैं, इससे आपके शरीर का तापमान कम होगा।इसके अलावा आप आलू के तीन-चार टुकडों को सिरके में डूबोकर अपने माथे पर रख सकते हैं, इससे भी शरीर का तापमान नियंत्रित होगा और बुखार में आराम मिलेगा।
  7. लहसुन :लहसुन के तेल को लगाने से बुखार में आराम मिलता है।एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो-तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल से रोगी के हथेली, पैरों, छाती पर अच्छे से मालिश करें, इससे बुखार में आराम मिलेगा। इसके अतिरिक्त आप किसी भी प्रकार के ठोस या तरल भोजन में लहसुन का प्रयोग करके उसका सेवन भी कर सकते हैं। दिन में दो बार यदि गर्म पानी के साथ दो से तीन लहसुन की कलियों का सेवन किया जाये तो बुखार में फर्क पड़ेगा। लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) तत्व हैं जो शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है और बुखार को कम करने में मदद करता है।
  8. शहद और लौंग : शुद्ध शहद में औषधीय गुण है जो बुखार के लिए लाभदायक है। शहद में लौंग के चूर्ण को मिलाकर लेने से बुखार कम होता है। दो से चार लौंग को गर्म तवे पर रख कर थोड़ा-सा भून लें, फिर उसे पीसकर चूर्ण बना लें।अब एक चम्मच शुद्ध शहद में आधा चम्मच लौंग का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार उसका सेवन करें।इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  9. पानी की पट्टी : मौसमी बुखार होने पर शरीर का तापमान रह-रहकर बढ़ जाता है, और जल्दी कम नहीं होता। ऐसे में ठन्डे पानी में साफ कपड़ा भीगोकर उसे सिर पर रखने से और बारी-बारी बदलते रहने से बुखार कम हो जाता है और शरीर का तापमान संतुलित रहता है।
  • डॉक्टर की सलाह लें :यदि बुखार चार से पाँच दिनों में भी न उतरे तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और उपयुक्त जांच करवानी चाहिए। कभी-कभी मौसमी बुखार जैसे दिखने वाले बुखार का कारण कुछ और भी हो सकता है।डेंगू, टाइफाएड या अन्य कोई संक्रमण भी बुखार का कारण हो सकता है।ऐसे में डॉक्टर से जांच करवाना जरुरी है।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर मौसमी बुखार को कम किया जा सकता है और इन नुस्खों के प्रयोग से बुखार में आराम भी मिलाता है।मौसमी बुखार मूल रूप से सात दिनों का मेहमान होता है जो शरीर को कमजोर कर देता है। ऐसे में आपको कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए जिससे आप स्वस्थ और तंदरुस्त रहें और दूसरों में बुखार का जीवाणु न फैले, जैसे :

  • मौसमी बुखार होने पर दूध के उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।
  • इस बुखार में लाल मांसऔर ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि बुखार में इस तरह के खाद्य को पचाना मुश्किल होता है, और इससे पेट की समस्या या दस्त हो सकता है।
  • बुखार होने पर तंबाकू, शराब, धूम्रपान से बचना चाहिए।
  • इस समय शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए नियमित समय के अन्तराल में पानी पीना आवश्यक होता है।पानी पीने से शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।यदि सादा पानी पीने में अच्छा न लगें तो आप पानी में चीनी और नमक डालकर घोल तैयार करके भी पी सकते हैं अथवा मेडिकल स्टोर(Medical store) में उपलब्ध ओ.आर.एस (O.R.S)पाउडर को पानी में मिलाकर भी पी सकते हैं।
  • ठन्डे पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। बुखार में ठंडा पानी, दही आदि का सेवन न करें, इससे तकलीफ और भी बढ़ जाती है।
  • खाली बदन या खाली पैर नहीं घूमना चाहिए, इससे बुखार बढ़ सकता है।
  • बुखार होने पर ज्यादा से ज्यादा समय शरीर को आराम देना चाहिए।
  • मौसमी बुखार होने पर जीभ का स्वाद नष्ट हो जाता है और खाने की इच्छा भी नहीं रहती, लेकिन बुखार में उपयुक्त भोजन का सेवन जरुर करें, क्योंकि भोजन न करने से शरीर कमजोर हो जाता है और बुखार कम नहीं होता।
  • बिना किसी चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवाई नहीं लेनी चाहिए। बहुत से लोग सोचते हैं कि बुखार होने पर बुखार कम करने की कोई भी दवाई लेने से बुखार ठीक हो जायेगा।लेकिन दवाई के मामले में चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है, क्योंकि यह जानना भी जरुरी है कि हमारे शरीर के लिए कौन-सी दवाई उपयुक्त है, अन्यथा चिकित्सक के पैसे बचाने या खुद चिकित्सक बनने के चक्कर में आपका शरीर क्षतिग्रस्त भी हो सकता है।
  • चूँकि मौसमी बुखार एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है, इसलिए रोगी को अलग कमरे में सुलाएं, उनके पास जाने से पहने मास्क पहन लें, रोगी द्वारा इस्तेमाल किये गए चीजों का प्रयोग न करें, रोगी का जूठन भी न खायें, साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।

माइग्रेन के घरेलू उपचार

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माइग्रेन एक गंभीर बीमारी है जिसमें रोगी को बेचैन कर देने वाला सिरदर्द होता है ।  माइग्रेन का दर्द बहुत ही तेज होता है जिसमें सिर के एक भाग में ही तेज दर्द होने लगता है ।  इसे अर्धकपारी भी कहते है । यह दर्द अपने-आप शुरू होता है और कई बार तो दवाई लेने पर भी यह दर्द नहीं जाता । कभी-कभी सिरदर्द के अधिक बढ़ जाने पर उल्टियाँ भी आ सकती है । माइग्रेन के कुछ रोगियों को दर्द होने पर आवाज और रोशनी से भी समस्या होने लगती है । यह दर्द सिर से शुरू होकर आँख, जबड़े और कनपटी तक फैल जाता है ।

यह दर्द कई हफ्तों या महीनों तक या फिर सालों तक एक खास अन्तराल में होता है । यह दर्द कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है । आज तो यह बीमारी बहुत ही आम बीमारी हो चुकी है । माइग्रेन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; बहुत अधिक चिंता करना, देर रात तक काम करना, मानसिक दुर्बलता, जुकाम, कब्ज, हिस्टीरिया (Histeria), नशीली पदार्थ और शराब का सेवन आदि । कुछ घरेलू उपचारों के माध्यम से माइग्रेन के दर्द से निजात पाया जा सकता है ।

माइग्रेन के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. सेब का सिरका : सेब का सिरका माइग्रेन के दर्द को दूर करने में सहयता करता है । इतना ही नहीं सेब का सिरका शरीर संबंधी कई रोगों के लिए लाभदायक हैं, जैसे; रक्तचाप को नियंत्रित करना, रक्त में चीनी की मात्रा को नियंत्रित करना, हड्डियों के दर्द को कम करना, वजन घटाने में मदद करना, कब्ज से मुक्ति दिलाना आदि । माइग्रेन के उपचार के लिए एक चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिलायें । उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोजाना दिन में एक बार पीने से माइग्रेन के दर्द से मुक्ति मिलती है ।
  2. अदरक : माइग्रेन के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अदरक का प्रयोग बहुत ही असरदार है । अदरक में प्रतिजीवाणु पाये जाते हैं, जो माइग्रेन के दर्द को मिटाने में सहायक होते हैं । दो से तीन कप पानी में एक अदरक का टुकड़ा बारीक काटकर उबाल लें, फिर उसे छानकर, उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से माइग्रेन के दर्द से राहत मिलती है ।
  3. अलसी के बीज (Flaxseed) : अलसी के बीजों में पाये जाने वाले ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acid) और फाइबर (Fiber) माइग्रेन के दर्द को कम करने में सहायक है । सुबह खाली पेट दो चम्मच अलसी के बीज चबाकर खा सकते हैं अथवा अलसी के तेल का प्रयोग भी कर सकते हैं । इसके सेवन से पेट भी साफ रहता है ।
  4. मछली का तेल : मछली के तेल का सेवन करने से माइग्रेन का दर्द कम होता है । मछली का तेल रक्तचाप को नियंत्रित करके दिल की धड़कनों को सुचारू रूप से चलाता है । मछली के तेल में भी ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acid) की मात्रा पायी जाती है । बाजार से मछली खरीदते समय मछली का तेल जरुर लें और उसे साफ करके तौलकर खा सकते है ।
  5. अंगूर : अंगूर का रस माइग्रेन के दर्द से मुक्ति दिलाने का काफी महत्वपूर्ण विकल्प है । आप साबुत अंगूर का सेवन कर सकते हैं अथवा अंगूर को पीसकर उसका रस निकालकर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में पानी और शहद मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं ।
  6. बंधगोभी की पत्तियां : बंधगोभी के पौधे की पत्तियां माइग्रेन के दर्द का प्रभावी उपचार है । बंधगोभी के पौधे के कुछ पत्तियों को मसले और उन्हें एक कपड़े में डालकर सिर के आसपास बांध लें । इसे कुछ समय तक बांध कर रखें । आप इसे बांधकर सो भी सकते हैं । इससे आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी ।
  7. लहसुन : लहसुन में जलनरोधी और एंटीबायोटिक (Antibiotic) गुण होते हैं और यह माइग्रेन का काफी बेहतरीन उपचार है । कुछ लहसुन की कलियों को पीसकर एक लेप तैयार करके माथे पर लगाने से दर्द कम हो जाता है । इसके अलावा सुबह खाली पेट लहसुन की दो कलियों को चबाकर खा सकते हैं । आप अपने भोजन में भी लहसुन को शामिल करके माइग्रेन के दर्द से निजात पा सकते हैं ।
  8. तुलसी : तुलसी के पत्तों की खुशबू-भर से ही माइग्रेन का दर्द काफी हद तक ठीक हो जाता है । तुलसी दर्द को ठीक करने में मदद करता है । आप तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को चबाकर खा सकते है । इससे जुकाम की समस्या से भी राहत मिलेगी । इसके अलावा आप तुलसी की चाय बनाकर भी पी सकते हैं । एक कप पानी में दस से बारह तुलसी के ताजे पत्तों को डालकर धीमी आँच पर उबालें । फिर पानी के हल्का ठंडा होने पर छान लें । उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीयें । इस उपचार को निरंतर करने से माइग्रेन के दर्द से आपको राहत मिलेगी ।
  9. धनिया के बीज : एक कप पानी को उबालें, फिर उसमें एक चम्मच धनिया के बीज मिलाये और फिर पानी से उठने वाले भाँप को सूंघें । इससे माइग्रेन के दर्द से काफी हद तक छुटकारा मिल जाता है । वैकल्पिक तौर पर आप धनिया के कुछ बीजों को चबाकर भी खा अकते हैं या फिर अपने भोजन में भी इसे शामिल कर सकते हैं ।
  10. योग : रोजाना नियमित रूप से योग या व्यायाम करने से माइग्रेन की समस्या से आपको राहत मिल सकती है ।
  11. हिंग : हिंग में भी माइग्रेन के दर्द को कम करने की क्षमता है । तीन से चार चम्मच पानी में हिंग को घोलकर उसके गंध को सूंघ सकते हैं अथवा थोड़े-से पानी के साथ हिंग मिलाकर एक लेप तैयार करके उसे अपने सिर पर लगा सकते हैं । ये दोनों तरीके माइग्रेन के दर्द को कम करने में मददगार हैं ।
  12. कपूर : कपूर माइग्रेन के दर्द को कम करने में मदद करता है । थोड़े-से घी में कपूर मिलाकर माथे पर लगाने से माइग्रेन के दर्द से निजात मिल सकता है ।
  13. नींबू का छिलका : नींबू के छिलके में भी माइग्रेन के दर्द को कम करने की क्षमता है । नींबू के छिलके को पीसकर एक लेप तैयार कर लें । उसी लेप को माथे पर लगाने से माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिलता है ।
  14. दूध : वसा (Fat) रहित दूध या उससे बने पदार्थ माइग्रेन के दर्द को ठीक करने में सहयक है । इसमें विटामिन बी (Vitamin B) होता है जो कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करती है । इसलिए आप वसा रहित दूध का सेवन करके माइग्रेन के दर्द से निजात पा सकते हैं ।
  15. हरी पत्तेदार सब्जियां : हरी पत्तेदार सब्जियों में मैग्नीशियम (Magnesium) की मात्रा अधिक होती है जो माइग्रेन के दर्द को ठीक करने में मदद करता है । अतः अपने रोजाना के खाद्य में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें ।
  16. लैवेंडर तेल (Lavender Oil) : लैवेंडर तेल की खुशबू इतनी अच्छी होती है कि इसकी सुगंध से ही माइग्रेन का दर्द कम हो जाता है । दो कप उबलते हुए पानी में दो से चार बूंद लैवेंडर के तेल को मिलायें, फिर पानी से उठने वाली भाँप को सूंघें । इस उपचार से आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी ।
  17. मक्खन और मिश्री : मक्खन में मिश्री मिलाकर चबा चबाकर खाने से माइग्रेन के दर्द से राहत मिलती है ।
  18. कालीमिर्च : पाँच से छः कालीमिर्च चबा चबाकर खायें और फिर ऊपर से दो चम्मच देशी घी पीयें । इस उपचार से माइग्रेन धीरे-धीरे ठीक हो जाता है ।
  19. गाजर का रस : माइग्रेन में गाजर बहुत ही लाभकारी होता है । आप गाजर का रस निकालकर पी सकते है, या फिर गाजर के रस को चकुंदर के रस के साथ भी ले सकते है अथवा पालक के पत्तियों के रस के साथ भी ले सकते है । इसके नियमित सेवन से माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिल सकता है ।
  20. गुड़ : माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए बारह ग्राम गुड़ को छः ग्राम देशी घी के साथ खा सकते हैं । इसके निरंतर सेवन से माइग्रेन के दर्द से निजात मिल सकता है ।
  21. कॉफ़ी (Coffee) : माइग्रेन के दर्द का प्रभाव एक कप कॉफ़ी पीने से कम हो जाता है । कॉफ़ी में मौजूद कैफीन (Caffeine) न सिर्फ माइग्रेन के कारकों को रोकता है बल्कि इसे पैदा करने वाली रक्त की धमनियों को भी संकुचित करता है । इसलिए माइग्रेन का दर्द होने पर उससे राहत पाने के लिए एक कप कॉफ़ी का सेवन करें ।
  22. बादाम : माइग्रेन का दर्द होने पर बादाम चबाकर खा सकते हैं । इससे माइग्रेन के दर्द से तुरंत राहत मिल जायेगी ।
  23. पुदीना : पुदीना में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व माइग्रेन के दर्द को दूर करने में मददगार है । आप पुदीने की चाय बनाकर पी सकते है । एक कप पानी में पुदीने के दस से बारह ताजे पत्तों को डालकर, धीमी आँच पर उबालें । फिर उसे छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी । आप पुदीने के तेल को अपने माथे पर लगाकर हलके हाथों से मालिश भी कर सकते हैं । इससे भी माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिलता है ।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिल सकता है । यदि इन उपायों को अपनाकर भी दर्द बरकार रहें तो डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जांच करवाएं । माइग्रेन की बीमारी होने पर कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, जैसे :

  • किसी भी तरह के खट्टे पदार्थों का सेवन न करें । अचार, पानी-पूरी, आलूबुखारा और इन जैसे पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें । इससे माइग्रेन का दर्द बढ़ सकता है ।
  • बाहर का अस्वास्थ्यकर खाना बिल्कुल न खायें । आजकल जंक फूड (Junk food) का बोलबाला है, लेकिन इस तरह के खाद्य माइग्रेन के रोगियों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं ।
  • धूम्रपान और मद्यपान बिल्कुल न करें । माइग्रेन के रोगियों को किसी भी तरह के नशीली पदार्थों से दूर रहना चाहिए ।
  • माइग्रेन के रोगी को ध्वनि और प्रदूषित जगहों से दूर रहना चाहिए ।
  • माइग्रेन के रोगी को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए ।
  • पूरी नींद लें और ज्यादा से ज्यादा पानी पीयें ।

बवासीर के लिए घरेलू उपचार

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बवासीर या पाइल्स एक खतरनाक बीमारी है।गुदा-भाग में वाहिकाओं की वे संरचनाएं हैं जो मल नियंत्रण में सहायता करती हैं।जब वे सूज जाते हैं या बड़े हो जाते हैं तो वे रोगजनक या बवासीर हो जाते हैं।इस रोग में गुदा-भाग की भीतरी दीवार में मौजूद खून की नसें सूजकर फूल जाती हैं। इससे उनमें कमजोरी आ जाती है और मलत्याग के वक्त जोड़ लगाने से या कड़े मल के रगड़ के कारण खून की नसों में दरार पड़ जाती है और उसमें से खून बहने लगता है। इस बीमारी में गुदाभाग में मस्से हो जाते हैं।मलत्याग के समय इन मस्सों में असहनीय पीड़ा होती है।बवासीर के कुछ लक्षण हैं, जैसे; मलद्वार के आस-पास खुजली होना; उठते, बैठते और चलते समय गुदा-भाग में दर्द होना; मलत्याग के समय कष्ट होना; मलद्वार के आस-पास पीड़ादायक सूजन होना; मलत्याग के बाद रक्त का स्राव होना; मलत्याग के बाद मस्सों का बाहर निकलना; कफ या श्लेष्मिक द्रव का स्राव होना; लम्बे समय तक कब्ज रहना इत्यादि।आम तौर पर बवासीर के दो प्रकार बताये गए हैं,अंदरूनी बवासीर और बाहरी बवासीर।

अंदरूनी बवासीर में मलद्वार के भीतर मस्सा हो जाता है और अगर रोगी को साथ में कब्ज भी हो तो मलत्याग के समय जोर लगाने पर यह मस्सा छिल जाता है और मलद्वार से खून आने लगते है,साथ ही असहनीय पीड़ा होने लगती है। इसमें सूजन को छुआ नहीं जा सकता पर महसूस किया जा सकता है।बाहरी बवासीर में मस्सा बाहर की तरफ होता है और इस स्थिति में दर्द नहीं होता, परन्तु मलत्याग के समय मस्से पर रगड़ की वजह से बहुत अधिक खुजली व पीड़ा होती है।इस स्थिति में सूजन को महसूस किया जा सकता है।बवासीर की दो अवस्थाएँ हैं, खूनी और बादी। खूनी बवासीर में किसी तरह का दर्द नहीं होता, सिर्फ खून निकलता है।इस अवस्था में मस्सा अन्दर की तरफ होता है जो मलत्याग के समय जोर देने से बाहर आने लगता है।कभी-कभी मस्सा अपने-आप ही अन्दर चला जाता है लेकिन स्थिति ख़राब होने पर या यह रोग बहुत पुराना होने पर हाथ से दबाकर ही मस्से को अन्दर की तरफ किया जा सकता है। कभी-कभी तो हाथ से दबाने से भी मस्सा अन्दर नहीं जाता।बादी बवासीर की स्थिति में पेट ख़राब रहता है, कब्ज बना रहता है, गैस बनती है। इसमें जलन, दर्द, खुजली, शरीर में बेचैनी इत्यादि होती हैं।

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इसमें मस्सा अन्दर की तरफ होता है।मस्सा अंदर होने की वजह से मलाशय का रास्ता छोटा पड़ता है और नसें फट जाती है और वहां घाव हो जाता है।इस रोग को फिशर (Fisher) भी कहते है, जिसमें असहनीय पीड़ा और जलन होती है।बवासीर पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है, जिसे अंग्रेजी में फिस्टुला (Fistula) कहते है।भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है।कुछ दिन बाद इसी रस्ते से पखाना भी आने लगता है। भगन्दर की आखरी अवस्था में धमनियां फट जाती हैं और बवासीर कैंसर का रूप ले लेता है जिसे रेक्टम कैंसर (Rectum Cancer) कहते है और जो जानलेवा साबित होता है। बवासीर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; लम्बे समय तक शौच को रोकना; कब्ज की समस्या होना; अधिक मसालेदार खाद्य का सेवन करना; देर रात तक जागना; लगातार खड़े रहना या एक ही जगह बैठे रहना; आनुवांशिकता इत्यादि।

बवासीर से राहत के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. ठंडी सेंक : बवासीर होने पर ठंडी सेंक देने से दर्द कम होता है और यह खुजली से भी तुरंत आराम दिलाती है।ठंडी सेंक सूजन को कम करने में मदद करता है जिससे मलत्याग करने में आसानी होती है।एक साफ कपड़े में बर्फ के कुछ टुकड़े लेकर उसका प्रयोग बवासीर के ऊपर करें।दिन में कई बार इसका उपयोग करें।रोजाना नियमित रूप से दिन में तीन बार दस मिनट तक इसका प्रयोग करें।इससे बवासीर से राहत मिलेगी।
  2. एलोवेरा (Aloe Vera) : बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने में एलोवेरा एक बेहतरीन उपाय है। बवासीर का प्राथमिक स्तर होने पर एलोवेरा के प्रयोग से वह सम्पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है।यह अंदरूनी और बाहरी बवासीर, दोनों के लिए ही फायदेमंद है। एलोवेरा का एक पत्ता काटकर उसके अन्दर से रस निकाल लें, फिर उसी रस का प्रयोग बवासीर के ऊपर करें।इसके अलावा आप एलोवेरा की पत्ती के किनारे से सारे काँटें निकालकर फेंक दें।अब उस पत्ती को छोटे-छोटे टुकडों में काटकर एक बर्तन में रखकर फ्रिज (Fridge) में रख दें।ठंडा होने पर उसी ठन्डे एलोवेरा का प्रयोग बवासीर के ऊपर करें। इससे जलन और सूजन कम हो जायेगी।
  3. नींबू का रस : नींबू में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो बवासीर की समस्या से निपटने में काफी मददगार है।एक रुई की मदद से ताजे नींबू के रस का प्रयोग सीधे सूजन वाली जगह पर किया जा सकता है।इससे बवासीर का दर्द कम हो जायेगा।इसके अलावा आप डेढ़ चम्मच नींबू का रस, अदरक का रस, पुदीने का रस और शहद मिलाकर दिन में एक बार इसका सेवन भी कर सकते है।इससे भी बवासीर से राहत मिलेगी।
  4. जैतून का तेल (Olive oil) : बवासीर के उपचार के लिए जैतून का तेल एक बेहतरीन उपाय है।जैतून के तेल में जलनरोधी गुण हैं।यह रक्त की धमनियों की लोच में वृद्धि करता है।यह मल की कठोरता को भी काफी हद तक कम करता है. रोजाना अपने खाद्य के साथ एक चम्मच जैतून के तेल का सेवन कर सकते हैं।इसके अलावा कुछ बेर के पत्तों से रस निकालकर उसे जैतून के तेल के साथ मिलाकर बवासीर के ऊपर लगाने से दर्द और सूजन से राहत मिलेगी।
  5. किशमिश : रात को सौ ग्राम किशमिश पानी में भीगो दें।सुबह किशमिश के साथ उसी पानी का सेवन करें।रोजाना नियमित रूप से इस उपचार का प्रयोग करने से पाचन तंत्र सही रहता है एवं कब्ज और बवासीर की समस्या से राहत मिलती है।
  6. बड़ी इलायची : बड़ी इलायची बवासीर को दूर करने का बहुत ही अच्छा उपचार है।पचास ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर भुन लीजिए।ठंडी होने पर उसे पीसकर एक वायुरोधी डब्बे में रख दीजिए।रोजाना सुबह बड़ी इलायची के इसी चूर्ण को पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर से राहत मिलती है।
  7. छाछ : छाछ बवासीर के इलाज का एक बेहतरीन विकल्प है।एक गिलास छाछ में एक-चौथाई चम्मच अजवाइन का चूर्ण और एक ग्राम काला नमक मिलाकर रोजाना दोपहर के खाने के बाद लेने से बवासीर की समस्या से राहत मिलेगी।छाछ बवासीर के दर्द को कम करता है और शरीर में नमी को बनाये रखता है।
  8. सेब का सिरका :सेब का सिरका बवासीर की समस्या को दूर करने में मदद करता है।बाहरी बवासीर के उपचार के लिए थोड़ी-सी रुई लेकर उसे सेब के सिरके में भीगोकर प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।पहले आपको थोड़ी जलन जरुर होगी, लेकिन इस प्रयोग से खुजली और दर्द दोनों ही कम हो जायेगा। इसके अलावा अंदरूनी बवासीर के लिए एक कप पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से खून निकलने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
  9. फाइबर (Fiber) युक्त भोजन :खाना आसानी से पचाने के लिए और मलाशय को स्वस्थ रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन का सेवन फायदेमंद है। फाइबर युक्त खाद्य मल को नर्म करने और आँतों की सारी प्रणाली को साफ-सुथरा रखने में सहायता करते हैं तथा कब्ज की समस्या से भी राहत मिलती है।दाल, सूखे मेवे, पटसन के बीज, बीन्स, ब्रोकोली, नाशपाती, पपीता, विभिन्न सब्जियाँ, फल इत्यादि फाइबर युक्त आहार हैं।
  • जीरा : बवासीर के कई दुष्परिणामों से निपटने के लिए जीरा मददगार है। जीरे को भुनकर उसका चूर्ण बना लें।रोजाना एक चम्मच जीरे का चूर्ण एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से बवासीर से राहत मिलती है।आप छाछ के साथ भी जीरे का चूर्ण मिलाकर उसका सेवन कर सकते हैं।दो लीटर छाछ में पचास ग्राम जीरा पाउडर और थोड़ा-सा नमक मिलायें।प्यास लगने पर इसी पेय का सेवन करें।एक हफ्ते तक यह प्रयोग करने से बवासीर के मस्से ठीक हो जाते है।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर बवासीर से राहत मिल सकती है।बवासीर को शुरूआती दौर में ही आसानी से ठीक किया जा सकता है, इसलिए बवासीर की शंका होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाना बेहद जरुरी है। बवासीर होने पर कभी-कभी ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है।इसलिए यह रोग होने पर कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी हैं, जैसे :

  • यह रोग कब्ज की समस्या के कारण हो सकता है, अतः रेशेदार सब्जियों, फलों और सलाद का सेवन करें क्योंकि इस तरह के खाद्य कब्ज को खत्म करने में सहायक हैं।
  • तेज मिर्च और मसालेदार खाद्य का सेवन न करें।
  • दिनभर में 6-7 गिलास पानी जरुर पीयें ताकि पाचन तंत्र सही रूप से कार्य करें।
  • चाय, कॉफी का अधिक सेवन न करें।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • जब भी कभी मलत्याग का वेग आता है तो उसे रोककर न रखें और मलत्याग के समय ज्यादा जोर न लगायें।
  • अधिक देर तक एक ही जगह बैठे या खड़े न रहें।
  • पूरी नींद लें।
  • योगासन के द्वारा इस रोग से राहत मिल सकती है अतः नियमित रूप से योगासन करें।

डेंगू के लिए घरेलू उपचार

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हर साल करोड़ों लोगों को प्रभावित करने वालेविभिन्न वायरल (Viral) रोगों में डेंगू सबसे खतरनाक रोग है।इस रोग के वायरस (Virus) चार प्रकार के होते हैं जिन्हें सिरोटाइप कहा जाता है।जब कोई रोगी डेंगू के बुखार से ठीक हो जाता है तब उसे उस विशेष प्रकार के डेंगू वायरस से लम्बे समय तक प्रतिरोधक क्षमता मिल जाती है लेकिन अन्य तीन प्रकार के डेंगू वायरस से दोबारा डेंगू होने का डर रहता है। दूसरी बार होने वाला डेंगू काफी गंभीर हो सकता है जिसे डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic fever) कहते है।डेंगू हवा, पानी, साथ खाने से या छूने से नहीं फैलता।

यह रोग एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) नामक मादा मच्छर के काटने से होता है।डेंगू के वायरस का प्रसार एक चक्र के अंतर्गत होता है।जब मादा एडीज एजिप्टी मच्छर संक्रमित या डेंगू के शिकार व्यक्तिको काटता है तो उसके अन्दर वही वायरस चला जाता है और जब यही मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तब यह वायरस उस स्वस्थ व्यक्ति में चला जाता है और इसी तरह यह चक्र निरंतर चलता रहता है।एडीज एजिप्टी मच्छर की कुछ खास विशेषताएं होती हैं, जैसे; यह दिन में ज्यादा सक्रिय होते हैं, इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं, ये ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते, ठन्डे या छाँव वाले जगहों पर रहते हैं, घर के अन्दर रखे हुए साफ पानी में प्रजनन करते हैं, अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 मीटर की दूरी के अन्दर ही उड़ते हैं,

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गटर या रास्ते में जमा प्रदूषित पानी में कम प्रजनन करते हैं, पानी के सूखने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनों तक जीवित रह सकते हैं।डेंगू के लिए कोई निश्चित दवाई नहीं है।हर साल भारत में इस बीमारी के कारण कई लोगों की मृत्यु हो जाती हैं।डेंगू के मरीजों की मृत्यु खून में प्लेटलेट (Platelet) की कमी के कारण होती है।कभी-कभी बाहर से भी प्लेटलेट चढ़ाया जाता है ताकि खून में प्लेटलेट की मात्रा सही रहें। डेंगू के वायरस का काम ही होता है खून में प्लेटलेट की संख्या को कम करना।डेंगू के लक्षण तीन से सात दिनों के अन्दर विकसित होते हैं। डेंगू के लक्षण निम्नलिखित हैं :

  • अचानक तीव्र ज्वर या बुखार
  • सिर और आँखों में दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में भयानक दर्द
  • त्वचा पर लाल चकत्ते बनना
  • ठंड लगना
  • भूख न लगना
  • गले में खराश
  • दस्त लगना
  • उल्टी होना
  • असामन्य रूप से कान, मसूड़ों और पेशाब आदि से खून निकलना

डेंगू के लिए घरेलू नुस्खें

source: stylecraze.com
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  1. पपीते की पत्ती : डेंगू के बुखार के लिए पपीते की पत्तियां बहुत ही असरदार हैं। पपीते के पत्तों में मौजूद पपैन एंजाइम (Papain enzyme) खून में प्लेटलेट (Platelet) की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। डेंगू के उपचार के लिए कुछ पपीते की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें।वही रस दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच रोगी को देते रहें।
  2. मेथी के पत्ते :मेथी के पत्ते डेंगू के बुखार को ठीक करने में सहायक हैं। मेथी के कुछ साफ पत्तों को पानी में उबाल लें, फिर उस पानी को छानकर चाय की तरह रोगी को पिलाये।इसके सेवन से शरीर के विषाक्त पदार्थ निकल जाते है और डेंगू का वायरस (Virus) भी खत्म हो जाता है। इसके अलावा मेथी के दाने के चूर्ण को पानी के साथ मिलाकर भी रोगी को दे सकते हैं।
  3. संतरा : विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध संतरा पाचन शक्ति को ठीक करता है और साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। डेंगू के रोगी के लिए संतरे का रस पीना आवश्यक है।
  4. तुलसी और कालीमिर्च :तुलसी के पत्तों और दो ग्राम कालीमिर्च को पानी में उबालकर पीने से डेंगू के बुखार में फर्क पड़ता है। यह पेय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाती है और जीवाणु प्रतिरोधक तत्व के रूप में कार्य करती है।डेंगू के रोगी को दिन में तीन से चार बार इस पेय का सेवन करायें।
  5. धनिया पत्ती : डेंगू के बुखार से राहत दिलाने में धनिया पत्ती मदद करता है।थोड़ी-सी मात्रा में धनिया पत्ती लेकर उसे साफ पानी में धो लें, फिर उन्हीं पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें।दिन में तीन से चार बार रोगी को यह रस देते रहें. इससे बुखार कम हो जाता है।
  6. आँवला :आँवला विटामिन सी (Vitamin C) का श्रेष्ठ श्रोत है।यह खून को साफ करके आयरन (Iron) की मात्रा को बढ़ाने में सहायता करता है।शरीर में खून की सही मात्रा होने से डेंगू के वायरस धीरे-धीरे नष्ट हो जाते हैं।रोगी को दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच आँवले का रस पिलाये।
  7. एलोवेरा :एलोवेरा लीवर (Lever) को स्वस्थ रखता है और पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है, साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। एलोवेरा के एक पत्ते को काटकर उसका रस निकाल लें, ध्यान रहें कि पत्ती से निकलने वाले पीले रस का प्रयोग बिल्कुल न करें।रोगी को दिन में दो बार एक चम्मच एलोवेरा का रस पिलाये। इससे शरीर के विषाक्त तत्व बाहर निकल जाते हैं और डेंगू के वायरस (Virus) भी खत्म हो जाते है।
  8. गिलोय : गिलोय का काढ़ा बुखार, जुकाम और खाँसी को दूर करने में बहुत उपयोगी है। दो कप पानी में गिलोय की कुछ जड़ें और तुलसी के कुछ पत्ते डालकर तब तक उबाले जब तक कि पानी आधा न हो जाये।फिर उस काढ़े को रोगी को पिलाये।गिलोय प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर को हर तरह के संक्रमण से बचाता है।
  9. हल्दी :डेंगू के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों के दर्द के लिए हल्दी बहुत उपयोगी है।एक गिलास दूध में एक से दो चम्मच हल्दी के चूर्ण को मिलाकर रोगी को पिलाने से रोगी को दर्द से राहत मिलेगी।
  • गोल्डनसील :गोल्डनसील में डेंगू के वायरस (Virus) को खत्म करने की क्षमता है। इस बूटी को कूटकर सीधे चबा भी सकते हैं या फिर इसे पीसकर उसका रस निकालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं।
  • चिरायता : चिरायता एक तरह की बूटी है जो स्वाद में बहुत कड़वा होता है।यह पाचन तंत्र को ठीक करने के साथ डेंगू के बुखार को कम करने में भी मदद करता है।इस बूटी को अच्छे से धोकर रातभर पानी में भीगोकर रखें।सुबह इसी पानी को छानकर रोगी को पिलाये।इसके निरंतर प्रयोग से बुखार कम हो जायेगा और रोगी को भी आराम मिलेगा।इसके अलावा एक चम्मच चिरायता के चूर्ण को पानी में मिलाकर भी पिला सकते हैं।
  • अनार : अनार खून को साफ करके शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है साथ ही यह डेंगू के बुखार के लिए बहुत उपयोगी है।डेंगू के रोगी को अनार का रस पिलाये।
  • नीम के पत्ते :नीम के पत्ते डेंगू के बुखार को ठीक करने के साथ प्लेटलेट की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद करता है। कुछ नीम के पत्ते लेकर उसे अच्छे से धो लें।फिर उन्हें पीसकर उसके रस को दिन में तीन से चार बार, एक से दो चम्मच रोगी को पिलाये। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
  • पानी : डेंगू होने पर शरीर में पानी का अभाव होता है जिसके कारण दस्त भी हो सकता।इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि रोगी को समय-समय पर पानी पिलाया जाये।पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पेशाब के माध्यम से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।
  • जौ का पौधा या घास (Barley Grass) :जौ का पौधा या घास प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने में मदद करता है।इसे पीसकर इसके रस को रोगी को पिलाने से डेंगू का बुखार भी कम होगा और कमजोरी भी नहीं रहेगी।यह डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic fever) के लिए भी उपयोगी है।

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उपर्युक्त घरलू नुस्खों के द्वारा डेंगू की बीमारी से राहत मिलेगी। यदि तीन से चार दिनोंमें बुखार न उतरे तो चिकित्सक की सलाह लेकर उपयुक्त जांच करवायें।अपने खून की जांच करवाकर आपको पता चल सकता है कि आपके बुखार का कारण क्या है।इसके अलावा कुछ बातों का ध्यान रखना अत्यावश्यक हैं, जैसे :

  • डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए।
  • बुखार या सिरदर्द के लिए एस्पिरिन (Aspirin) या ब्रूफेन (Brufen) जैसी दवाइयाँ बिल्कुल न लें।बुखार के लिए डॉक्टर की सलाह से मात्र पेरासिटामोल (Paracetamol) ही लेना उपयुक्त है।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से अपनी खून में प्लेटलेट (Platelet) की मात्रा की जाँच करवाते रहें।
  • रोगी को पर्याप्त मात्रा में आहार और पानी का सेवन करना चाहिए।
  • घर के अन्दर और आस-पास पानी जमा न होने दें। यदि आप किसी बर्तन, ड्रम या बाल्टी में पानी जमा करके रखते हैं तो उसे हमेशा ढककर रखें।
  • घर में कीटनाशक का छिड़काव करें।
  • कूलर का काम न होने पर उसमें जमा पानी निकालकर सूखा दें।जरुरत पड़ने पर रोजाना नियमित रूप से कूलर का पानी बदलते रहें।
  • खिड़की और दरवाजे पर जाली लगाकर रखें।
  • किसी भी खुली जगह में जैसे गड्ढे, गमले आदि में पानी जमा न होने दें और अगर पानी जमा हो तो उसमें मिट्टी डाल दें।
  • रात को सोते वक्त मच्छरदानी लगाकर सोये।
  • मच्छर विरोधी उपकरणों का इस्तेमाल करें, जैसे, मच्छर भगाने वाला इलेक्ट्रिक बैट (Electric Bat), क्रीम (Cream), सिट्रॉनेला आयल (Cirtonela Oil) आदि।
  • अगर बच्चे बाहर खेलने जाते है, यहां तक कि स्कूल जाने से पहले भी उनके उनके शरीर और कपड़ों पर मच्छर भगाने वाली क्रीम (Cream) जरुर लगायें।
  • शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने।

खाज या एक्जिमा (Eczema) के घरेलू उपचार

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खाज या एक्जिमा एक प्रकार का चर्म रोग है। इस रोग में नमी के अभाव के कारण त्वचा शुष्क हो जाती है। शुष्कता के कारण जीवाणुओं के लिए त्वचा के भीतर घुसना आसान हो जाता है।गंभीर मामलों में पस और रक्त का स्राव भी होने लगता है। समय पर इलाज न करवाने से यह शरीर में तेजी से फैलता है। यह किसी भी उम्र में और किसी को भी हो सकता है।इस रोग के कई लक्षण हैं, जैसे; खुजली होना और चमड़ी का लाल हो जाना एवं खुजाने पर लक्षण और भी तेज हो जाना; चमड़ी का सुखापड़ जाना और उससे पपड़ी निकलना; कभी-कभी खुजली के बाद फफोले आ जाना और फफोले के फूटने पर चमड़ी में एक चिकनापन आ जाना; कुछ विशिष्ट दवाइयों का प्रभाव, साबुन, शैम्पू तेल इत्यादि के प्रति चमड़ी का अतिसंवेदनशील हो जाना आदि।बहुदा लोगों में खाज या एक्जिमा की शुरुआत का मुख्य कारण एलर्जी होता है। साबुन, डिटर्जेंट, नेल पोलिश (Nail polish), क्रीम (Cream), कपड़ों के रोएँ, परफ्यूम (Perfume), मरकरी (Mercury), निकिल (Nickel)आदि।इसके अलावा गलत खान-पान, खून की खराबी, लीवर की खराबी आदि के कारण भी खाज की समस्या हो सकती है।

खाज या एक्जिमा के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. एलोवेरा (Aloe Vera) : एलोवेरा एक्जिमा या खाज की खुजली को शांत करके त्वचा को नमी प्रदान करने में सहायक होता है। एलोवेरा पौधे की एक पत्ती को काट लें।पत्ती को काटने के समय उसके नीचे से पीले रंग का रस निकलता है। पत्ते के उस भाग को काटकर फेंक दें।फिर उस पत्ती को बीच में से काटकर उसमें से जल जैसा रस निकाल लें।एक्जिमा ग्रस्त त्वचा पर उस रस को लगाकर सूखने दें। सूखने के बाद उस जगह को गुनगुने पानी से धो लें।आप नित्य प्रयोग के लिए एलोवेरा के कुछ पत्तों को फ्रिज में भी रख सकते हैं।इसके निरंतर प्रयोग से एक्जिमा की समस्या से राहत मिलेगी।
  2. जई या ओट्स (Oats) :जई में सूजन विरोधी और खुजली विरोधी तत्व हैं, जो एक्जिमा या खाज से राहत दिलाती है। आप थोड़ी-सी मात्रा में जई लेकर उसे पानी के साथ मिलाकर एक लेप तैयार कर लें। उसी लेप को एक्जिमा से प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।सूखने के बाद गुनगुने पानी से धो लें।इससे एक्जिमा की समस्या में बहुत फर्क पड़ेगा।इसके अलावा घुटनों तक लम्बे नायलॉन (Nylon) के मोज़े को जई से भरकर अपने बाथरूम के नल के साथ बांध दें ताकि नल खोलने पर पानी जई से होता हुआ बाल्टी में गिरे। फिर उसी पानी से नहाएं। इसके निरंतर प्रयोग से एक्जिमा की समस्या से राहत मिलेगी।
  3. जैविक (Organic) नारियल तेल :जैविक नारियल का तेल एक्जिमा को ठीक करने में मदद करता है।यह किसी भी मेडिकल स्टोर (Medical store), सुपरमार्केट (Supermarket) या हेल्थ फूड स्टोर (Health food store) में उपलब्ध है।इस बात की जांच जरुर कर लें कि उस जैविक नारियलतेल को 116 डिग्री से कम तापमान पर प्रोसेस (Process) किया गया हो, इससे तेल के पोषक तत्व, एंजाइम (Enzyme) और मिनरल्स (Minerals) सुरक्षित रहते हैं। इसे शीत दबाव जैविक नारियल तेल (Cold compressed organic coconut oil ) कहते है।इस तेल को प्रभावित क्षेत्रों और अपनी रुखी त्वचा पर लगाकर दस से पंद्रह मिनट तक छोड़ दें ताकि तेल आपकी त्वचा के भीतर अच्छे से समा जाये।यह तेल थोड़ी गाढ़ी होती है लेकिन आपकी त्वचा के संपर्क में आने से अच्छे से फैल जाता है।दिन में दो से तीन बार इस तेल का प्रयोग करें और तब तक प्रयोग करें जब तक आपको एक्जिमा या खाज की समस्या से राहत नहीं मिल जाती।इसके निरंतर प्रयोग से एक्जिमा के कारण होने वाली खुजली, सूजन और उसके दाग ठीक हो जाते हैं।
  4. नहाने के लिए गर्म पानी और बेकिंग सोडा (Baking soda):यदि आप एक्जिमा या खाज की समस्या के शिकार हैं तो रोजाना नहाने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें।ठंडा पानी आपकी त्वचा को रुखा बना देती है, वहीँ गुनगुने पानी से नहाने से आपकी त्वचा की नमी बनी रहेगी। खुजली को कम करने के लिए आप अपने नहाने के पानी में बेकिंग सोडा का प्रयोग कर सकते हैं।एक से डेढ़ चम्मच बेकिंग सोडा को बाल्टी भर गुनगुने पानी में मिलाकर नहाने से खुजली की समस्या से राहत मिलेगी।
  5. विटामिन ई कैप्सूल (Vitamin Ecapsule) :एक्जिमा की समस्या से राहत पाने के लिए आप विटामिन ई कैप्सूलका प्रयोग कर सकते हैं।किसी भी मेडिकल स्टोर (Medical store) में उपलब्ध विटामिन ई कैप्सूल खरीदकर उसे तोड़कर उसके भीतर के तेल को निकाल लें।फिर उसी तेल को प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।बेहतर परिणाम के लिए दिन में तीन बार इस उपचार का प्रयोग करें। इसके निरंतर प्रयोग से खाज की समस्या से राहत मिलेगी।
  6. शुद्ध शहद : त्वचा जनित समस्याओं के लिए शुद्ध शहद बहुत ही लाभदायक है। यह खाज की समस्या से भी छूटकारा दिलाता है।पहले आप प्रभावित क्षेत्रों को अच्छे से धोकर पोंछ लें। फिर शुद्ध शहद को सीधे एक्जिमा से प्रभावित क्षेत्रों पर लगाकर दस मिनट के लिए छोड़ दें।निर्धारित समय के बाद गुनगुने पानी से जगह को धो लें। बेहतर परिणाम के लिए दिन में तीन से चार बार इसका प्रयोग करें।
  7. हल्दी और नीम :त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए नीम और हल्दी रामबाण औषधि हैं।यह दोनों ही त्वचा की जलन, सूजन आदि समस्याओं को दूर करता हैं।कुछ साफ नीम के पत्तों को पीसकर रस निकाल लें और उसी रस में एक चम्मच जैविक (Organic) हल्दी पाउडर मिलाकर एक लेप तैयार कर लें।अब इसी लेप में एक चम्मच जैविक (Organic) जैतून का तेल या जैविक नारियल का तेल मिला लें।फिर उस लेप को प्रभावित क्षेत्रों पर लगाकर तीस मिनट के लिए छोड़ दें।उसके बादहलके गर्म पानी से जगह को धो लें।निरंतर दस दिनों तक दिन में दो बार इस उपाय को करने से एक महीने में फर्क दिखेगा।
  8. सेब का सिरका :सेब के सिरके में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो एक्जिमा का बेहतरीन उपचार है।एक से दो चम्मच सेब के सिरके में उसी मात्रा में पानी मिलाकर उस मिश्रण को प्रभावित क्षेत्रों पर लगाकर तीस मिनट तक छोड़ दें। उसके बाद हलके गर्म पानी से जगह को धो लें।एक हफ्ते तक लगातार इसका प्रयोग करने से खाज की समस्या से राहत मिलेगी।
  9. सही भोजन खायें :अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सही खान-पान बहुत आवश्यक है।पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें. हरी सब्जियां, तरह-तरह के फल, सूखे मेवे, मछली आदि का सेवन करें।इससे आपका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और खाज की समस्या भी दूर हो जायेगी।एक्जिमा की समस्या होने परडेयरी उत्पादों (Dairy products) से परहेज करें, क्योंकि इस तरह का खाद्य एक्जिमा की समस्या को बढ़ा देता है।
  • सेंधा नमक (Epsom salt) : सेंधा नमक खाज और त्वचा के रूखेपन को कम करने में सहायक होता है। एक बाल्टी में हल्का गर्म पानी लेकर उसमें दो चम्मच सेंधा नमक और जैविक(Organic) जैतून के तेल या जैविक नारियल के तेल की कुछ बूंदे डालकर अच्छे से मिला लें।फिर उसी पानी से नहाएं।सेंधा नमक में मैग्नीशियम सल्फेट ( Magnesium Sulphate) होता है जो प्राकृतिक रूप से त्वचा की जलन और खुजली को कम करता है।इस प्रक्रिया से आपकी सूजन भी कम हो जायेगी।
  • जैविक (Organic) खीरा : खीरा एक्जिमा की जलन और खुजली को कम करके त्वचा को ठंडक पहुंचता है। आप खीरे को पतले और गोलाकार रूप में काटकर प्रभावित क्षेत्रों पर एक घंटे तक लगाकर रखियें ताकि खीरे का रस आपकी त्वचा में समा जाये। सूखने के बाद गुनगुने पानी से उस जगह को धो लीजिए या फिर नहा लीजिए।इसके अलावा खीरे का रस निकालकर रुई की मदद से उसे खाज पर लगा सकते हैं।निरंतर इसका प्रयोग करने से एक्जिमा या खाज की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।
  1. शुद्ध जैतून का तेल : शुद्ध जैतून के तेल में सूजन विरोधी तत्व है जो खाज की समस्या और चमड़े का लाल होना कम करता है। पर्याप्त मात्रा में जैतून का तेल लेकर प्रभावित क्षेत्रों पर लगाकर तीन से चार के लिए छोड़ दें।उसके बाद तेल को अच्छे से अपनी त्वचा पर फैला दें ताकि तेल आपकी त्वचा में समा जाए।इसके बाद गुनगुने पानी में एक साफ कपड़ा भीगोकर उससे अपनी त्वचा पर लगाये गए तेल को अच्छे से पोंछ लें। निरंतर इस प्रक्रिया को करने से खाज या एक्जिमा की समस्या से राहत मिलेगी।

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उपर्युक्त घरेलू और प्राकृतिक नुस्खों का प्रयोग करके खाज की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन यदि इन उपायों का प्रयोग करके भी खाज की समस्या बनी रहती है या फिर खुजाने पर रक्त का स्राव होने लगता है तो तुरंत किसी चर्म विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाएं। खाज की समस्या होने पर उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ बातों पर ध्यान रखना आवश्यक हैं, जैसे :

  • आपको अगर किसी भी पदार्थ से एलर्जी है तो ऐसे पदार्थों से परहेज करें, चाहे वह खाद्य पदार्थ हो, धात्विक पदार्थ हो, कपड़े हो, सौन्दर्य के प्रसाधन हो या साबुन वगैरह हो।
  • धूल कण, मौसमी पराग कण, बालों की रुसी आदि एक्जिमा को उत्पन्न करने वाले कारक हैं।अतः ऐसे चीजों से सावधान रहें।अपने घर और आस-पास के वातारण को साफ रखें, साथ ही खुद को भी साफ-सुथरा रखें।
  • बैक्टीरिया, फंगस, वायरस से बचें। बीमार व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचे।
  • मानसिक तनाव और चिंता के कारण एक्जिमा बढ़ सकता है, अतः तनाव और चिंता से दूर रहें।
  • बार-बार नहाने से बचे, क्योंकि इससे त्वचा की नमी निकल जाती है और एक्जिमा की समस्या बढ़ सकती है।नहाने के बाद त्वचा में नमी बनाये रखने के लिए ऐसे किसी क्रीम या तेल का उपयोग करें जिससे आपको एलर्जी न हो।
  • पूरी नींद लें।इस बात का भी ध्यान रखें कि रात को जिस कमरे में आप सोयेंगे वहां अँधेरा और ठंडक रहें। सोते वक्त अपने मोबाइल को खुद से दूर रखें।
  • आपको किस वस्तु से एलर्जी है, यह जानने के लिए अच्छी जगह से अपना एलर्जी टेस्ट (Allergy test) करवाएं।

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