चर्म रोग का इलाज (charm rog ka ilaj)

चर्म रोग का इलाज (charm rog ka ilaj)

 

आपको अगर चर्म रोग है, तो इस बीमारी के कारण कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है . बारिश  या फिर गर्मी के मौसम में इस तरह की समस्या  अधिक होती है. इस मौसम में हमें अपने त्वचा का बचाव करना बहुत जरुरी है नही तो चर्म रोग होने की संभावना हो जाती है . हम आपको चर्म रोग से बचने के लिए कुछ विशेष जानकारी दे रहे हैं.

चर्म रोग के कारण:-

  • केमिकल चीजों का ज्यादा प्रयोग करना जैसे साबुन,चुना और डिटर्जेंट .
  • पेट में अधिक समस्या होने से भी चर्म रोग होता है .
  • रक्त विकार होने की वजह से भी यह होता है
  • महिलाओं में भी यह समस्या हो जाती है अगर उनको सही समय पर मासिक धर्म (periods) न आये .
  • जो मरीज पहले से ही चर्म रोग से ग्रसित है उसके कपडे पहनने से भी ये रोग हो सकता है .

 

 

चर्म रोग के लक्षण :-

  • इस समस्या में चेहरे या स्किन पर छोटे छोटे दाने निकलने लगते है .और धीरे धीरे ये लाल रंग में बदल जाते है . फिर उसमे खुजली होने लगती है और ज्यादा खुजली होने पर इसमें जलन भी होने लगती है . ये दाग पूरे शरीर  पर हो जाता है फिर हल्का बुखार हो जाता है .

 

चर्म रोग से बचने के घरेलु उपाए-

 

जैसे कि गेंदा का फूल  ये फल गहरे पीले रंग और नारंगी रंग का होता है. यह हमारी त्वचा की समस्याओं के लिए प्रभाव शाली घरेलू  उपाए है. यह छोटे मोटे कटे  हुए शरीर पर या जलने या फिर मच्छर के काटने से रुखी त्वचा आदि के लिए शानदार घरेलू  उपचार है . गेंदे में एंटी बोवेलियल और एंटी वायरल गुण होते हैं.  हमारे शरीर में सूजन  है तो यह सूजन  को कम करने में मदद करता है. यह हमारी त्वचा के लिए हर प्रकार से लाभदायक है

 

गेंदे की पत्ती और पानी (Gende kii patti or Paani)-

 

हम गेंदे की पत्ती को पानी में उबाल कर उसी से दिन में कम से कम दो तीन बार आप आपना चेहरा धोएं . आपकी एवने की समस्या दूर हो जाती है, और साथ में इसका सेवन किया जाए तो हमें ये आंतरिक शक्ति प्रदान करवाता है, और इसी के साथ ही यह केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली पर भी यह बबुने के फूल सकारात्मक असर डालता है.यह एक्जिमा में भी बहुत ज्यादा मददगार होता है. केमोमाइल या बबुने के फूल सेबनी हर्बल टी दिन में 3 बार सेवन करें तो आपको काफी फायदा  पहुंचता है. इसके साथ ही एक्जोमाओ सोरायसिस जैसी बिमारियों से छुटकारा पाने से यह फूल हमारी काफी मदद करता है. आप एक सफ़ेद कपड़ा ले और  केमोमाइल टी में डुबोकर आप अपने त्वचा के संक्रमक हिस्से पर लगाने से आप को काफी लाभ मिलता है. उस प्रक्रिया को पन्द्रह पन्द्रह मिनट के लिए दिन में चार से छह बार करना चाहिए. यह केमोमाइल जो है कई अंडर आई( under eye ) moisturizer  में भी प्रयोग किया जाता है. इसे डार्क सर्कल (dark circle ) हमारे दूर होते हैं.

 

कमके के फूल (Kamke ke Phool)

 

कमके के फूल और पत्ते बहुत ही लाभकारी माने जाते हैं. इस फूल के पत्ते और जड़ सदियों से हमारी त्वचा सम्बन्धी रोगों को ठीक करने में इस्तेमाल करते आ रहे हैं. यह फूल अगर आपकी त्वचा में कहीं कट गया हो , जल गया हो तो वहां लगाने से कई प्रकार से लाभकारी होता है. इसमें मौजूद तत्व त्वचा द्वारा काफी तेजी से अवशोषित कर लिए जाते है जिससे कारण स्वस्थ कोशिकायों का निर्माण होता है. और इसी में हमारी त्वचा को आराम पहुचने वाले तत्व पाए जाते हैं. अगर आपकी त्वचा में कभी जख्म हो जाए तो आप कमके फूल कि जड़ो का पाउडर बना कर उसे आप गर्मपानी में मिला लें. और गाढ़ा सा पेस्ट बना लें. फिर इस पेस्ट को आप साफ कपड़े में फैला दें, अब इस कपड़े को जख्मों पर लगाने से हमें चमत्कारी लाभ मिलता है अगर आप रात में इसे बांध कर सो जाएं, तो सुबह  काफी आराम मिलता है. इसे कभी खाया नहीं जाता नहीं तो ये हमरे लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है.

आपको बहुत बड़ा जख्म है तो बड़े जख्म में इसे नहीं लगाया जाता, क्योंकि इससे त्वचा की उपरी परत तो ठीक हो जाती है लेकिन भीतर जो कोशिकायें हैं वह पूरी तरह ठीक नहीं हो पाती हैं.

 

अलसी के बीज(alsi ke beej)-

अलसी के जो बीज  होते हैं  बीजों में  ओमेगा थ्री फैंटी एसिड होता है, जो हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसमें सूजन  को कम करने वाले तत्व मौजूद होते हैं. यह हमारी स्किन डिसऑर्डर ( skin disorder ) जैसी एक्जिमा (agzima ) और सोरासिस (sorasis ) को भी ठीक करने में हमारी मदद करता है. आप दिन में एक दो अलसी के बीज का तेल सेवन करने पर त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है. अलसी के बीज का तेल हम किसी अन्य अहार में ले तो ज्यादा ठीक रहेगा

 

अन्य उपाए (Any Upay)

 

हल्दी ,लाल चंदन ,नीम की छाल ,चिरायता बड्डे ,आवंला और अड्से के पत्ते को एक सामान मात्रा में लीजिए सभी को बराबर- बराबर मात्रा में लीजिए. इन सभी सामानों को पानी में भिगो दीजिये, जब ये अच्छी तरह  से फुल जाए तो इसे पीस कर ढीला पेस्ट बना लों .इसके चार गुना मात्रा में तिल का तेल को तेल के चार गुना मात्रा में पानी लो फिर इस सबको बड़े बर्तन में अच्छे से मिलाकर मंद आंच में तब तक पकाएं जब तक सारा पानी भाप बन कर उड़ न जाए. फिर ठंडा होने पर इसका सेवन करें. आपके शरीर में जहां जहां  खुजली ही रही ही वहां लगाएं या फिर पुरे शरीर में इस पेस्ट को लगाते रहिए. आपकी त्वचा का चर्म रोग ठीक हो जायेगा. अगर हमारा चर्म रोग ठीक नहीं होता ही व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार हो जाता है. आपको चर्म रोग की समस्या है तो आप चिकित्सक से सलाह जरूर लें और दवा कराएं.

 

 

 

अस्थमा का उपचार

अस्थमा एक श्वास संबंधी बीमारी है | अस्थमा के रोगियों को   मौसम परिवर्तन की  कई समस्याओ का सामना करना पड़ता है| इतना ही नही अस्थमा के रोगियों को धूल , मिटटी, प्रदूषण,  इत्यादि से बचकर रहना पड़ता है| अगर आप को अस्थमा है तो आपको अस्थमा का उपचार के लिए आम तौर पर दवाइयों का ही प्रयोग किया जाता है, लेकिन जिन व्यक्तियों पर अस्थमा को दवाई काम करना ही बंद कर देती है  जिस कारण वश में उस  व्यक्ति को इन्हेलर दिया जाता है इतना ही नहीं जिन व्यक्तियों को अस्थमा की शिकायत है उन्हें लापरवाही नहीं करनी चाहिए, अपने पूरे  खाने पीने का ख्याल रखना  पड़ता  है|

अस्थमा  में काफी  को लेने की  भ्रान्ति –

वैसे में अस्थमा के रोगियों को डॉक्टर चाय और कॉफ़ी से परहेज रखने को कहता है, अभी तक हम  आम आदमियों का भी यही विचार था कि वाकई में अस्थमा के रोगियों को चाय और कॉफ़ी अस्थमा के रोगियों को नुकसान पहुचा सकती है लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है ,दरअसल अस्थमा से जुड़े हुए भ्रम  है अब हम यह जानने की कोशिश करे कॉफ़ी से अस्थमा का इलाज कैसे संभव है| यह सच है कि हम अब अस्थमा की रोगियों को कॉफ़ी आराम से दे सकते है बिना किसी शंका  के, क्योकि  अस्थमा के रोगियों के लिए नुकसान पहुचाने के अलावा यह कॉफ़ी फायदा दे सकती है | आप जानते है की हाल ही में  एक शोध में यह बात सामने आ चुकी है कि कैफीन में जो तत्व मौजूद है उसमे अस्थमा की दवा  हो सकती है| इस दवा के  इस्तेमाल से  अस्थमा के रोगियों द्वारा  अस्थमा नियंत्रण के लिए किया जाता है और कुछ शोधो के द्वारा अस्थमा से बहुत परेशान व्यक्तियों की कॉफ़ी दी गई है, जिससे सकारात्मक रूप में हमें प्रभावी लक्षण पाये गए है यानी की अब आप भी अस्थमा के रोगियों को कॉफ़ी के उपचार में आप भी कॉफ़ी का सेवन कर सकते है|

ध्यान रखने योग्य बाते –

सबसे पहले आप यह बात सुनिश्चित कर ले कि आपको कैसी कॉफ़ी पीनी है| अस्थमा के मरीज अपने पसंद की कॉफ़ी ले जिससे कि आपको स्वाद आए  और आपको ऐसा प्रतीत न हो कि आप किसी के कारण कॉफ़ी का सेवन कर रहे है जब आपको यह लगे कि आपको अस्थमा बीमारी की आशंका  है या फिर अटैक  पड़ने की लक्षण दिखे तो आप एक कॉफ़ी बनाइये और आप कॉफ़ी में १/३ हिस्सा ही कॉफ़ी को पिए.  वैसा आप कॉफ़ी का इस्तेमाल करेगे तो आपको भरपूर मात्रा में कैफीन मिल जायेगा जब आपने  कॉफ़ी पी ली   है, तो हमें १० मिनट के बाद तक इन्तजार  करे और आप इसे बात पर ध्यान जरुर रखे कि कॉफ़ी पीने पर आपके कोई सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है, अगर कॉफ़ी पीने पर कोई असर नहीं दिखाई दिया तो आप फिर से १/३ कॉफ़ी फिर से बना कर पीनी होगी, एक बार आपको फिर से १० मिनट के अन्दर यह महसूस करे की आपको दूसरी  कॉफ़ी पीने का क्या प्रभाव पड़ा | आप अगर एक भी अस्थमा के लक्षणों को महसूस कर रहे है और आपके पास कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं है तो आपको फिर से थोड़ी बहुत कॉफ़ी का सेवन फिर से करना पडेगा फिर उसके बाद आप आराम करे आप अब तीसरी बार कॉफ़ी पी चुके है अब आप कैसा महसूस कर रहे है इस पर अब ध्यान दे  ( इतना कुछ करने पर भी अस्थमा के रोगियी को आराम नही मिलता तो आप यह देखिये  की अस्थमा के लक्षण कैसे है इतने पर भी आपकी हालत बहुत ख़राब हैं तो आपको और भी मेडिसन की जरूरत पड़ सकती  है| हमारे  कहने का अर्थ यह है कि यदि हम अस्थमा के शुरुआत में इसके लक्षण पहचाने ले तो आपको कॉफ़ी से ही आराम मिल सकता है यदि आपकी हालत बहुत ज्यादा बिगड़ गई हो तो यह कॉफ़ी से ही पता लगाया जा सकता है की कॉफ़ी पीने से आपके ऊपर कोई असर नहीं है आपको हालत ज्यादा बिगड़ गई है | यह बीमारी किसी उम्र में हो सकती है इस बीमारी का कोई समय नही है अस्थमा की बीमारी बच्चो में भी हो जाती है यह अस्थमा की बीमारी बहुत देती है| अस्थमा की बीमारी जब व्यक्तियों को बढ़ जाती है तो उन्हें साँस लेने और निकलने में भी रोगियों को बहुत परेशानी बढ़ जाती है| इस बीमारी में खांसी  आने लगती है| नाक से जब हम साँस लेते है तो नाक बजने लगता है सुबह और शाम में मौसम ठंडा होता है उस समय पर अस्थमा के रोगी को साँस लेने में परेशानी होती है इस बीमारी को पूरी तरह से ठीक करना मुश्किल है| इस बीमारी में हम एलर्जी से बच के रहे ध्रूमपान गन्दगी दूषित  हवा अपना बचाव करना चाहिए हमें ज्यादा कसरत नही करनी चाहिए मानसिक तनाव के वजह से काफी तकलीफ होती है अस्थमा की बीमारी परहेज खानपान में इलर्जी से बचे और अपनी दवा , समय पर लेना चाहिए जिससे भी व्यक्ति सामान्य जीवन जी सके |

 

 

 

 

 

अस्थमा के लक्षण (Ashtma ke Lakshan) in Hindi

 अस्थमा के लक्षण (Ashtma ke Lakshan)- हमारे घर के अंदर और घर के बाहर कुछ ऐसी चीजें होती हैं जिसके कारण हमें अस्थमा की शिकायत हो सकती है. इनके कुछ कारण ये हैं:-

हवा प्रदूषण  (Hawa Pradhushan)- हवा में प्रदुषण बहुत ज्यादा है. प्रदूषण   ही अस्थमा का प्रमुख कारण माना जाता है. आज कल  ये जो प्रदूषित हवा है यह हमारे सांस  नलिका में जाती है और वहां से अस्थमा  की शरुआत होती है. आज कल जो गाडियों से धुआं निकतला है वह हमारी हवा को  दूषित कर देता है.

धूम्रपान (dhomrapaan)- धूम्रपान  करना या धूम्रपान  करने वाले व्यक्ति के पास न खड़े रहें. हम इस बात को याद रखें धूम्रपान  कोई भी करे लेकिन सिगरेट – बीडी से निकला धुआं जो है, वह हर व्यक्ति के उपर उसका बुरा असर पड़ता है. जैसे परफ्यूम  स्प्रे  हो साबुन , जेल इत्यादि की  तेज  गंध, आपको जिस गंध से एलर्जी हो उस गंध  से हमें तकलीफ पहुंच सकती है.   फूल के पराग के जो  कण होते हैं उससे भी अस्थमा हो सकता है, दीवार पर लगाये हुए तेल आदि  का जो रंग है उससे भी अस्थमा हो जाता है.

वातावरण में बदलाव के कारण-  

वातावरण के वजह से भी हमें अस्थमा का हमला हो सकता है, या फिर हमारी अस्थमा बढ़ भी सकती है | अगर अचानक बादल आ जाये या फिर अचानक बरसात हो जाये या फिर मौसम ठंडा या ठंडी हवा में साँस लेने के कारण भी यह अस्थमा हो सकता है |

मानसिक उतेजना – अगर आप जोर जोर से हंस  रहे है अत्यधिक चिल्ला रहे हो , रो रहे है रोते समय तेजी के साथ लम्बी साँस लेने के कारण भी अस्थमा से हम परहेज हो सकते है |

गहरी साँस लेने से- अस्थमा वाले मरीज को अत्यधिक कसरत नहीं करनी चाहिए  हम व्यायाम करे फिर खेलते समय गहरी साँस ले इसके कारण भी अस्थमा का हमला हमारे शरीर पर हो सकता है| हम किसी कारण वश  आवेश  जाने के कारण भी के मरीजो को मानसिक उतेजना के कारण भी अस्थमा हो सकता है जिन बच्चो को अस्थमा की शिकायत है उन्हें खेलने से आधे घंटे पहले उन्हें अस्थमा की दवाई ले लेनी चाहिए

घर के अन्दर प्रदूषण  से- हमारे घर के अन्दर भी कुछ वैसी चीज़ हैं, जिसके कारण भी व्यक्ति को अस्थमा की शिकायत हो सकती है| हम अपने घर में कुछ जैसे पालतू जानवर पालते है, उनके बाल  से ही अस्थमा की शिकायत हो सकती है हमारे घर की जो चीज़ है गीली  होने से भी उसमे ऊगने वाले फंगस जो होते है उनसे भी अस्थमा का हमला हो सकता है| तिलचट्टा (कॉकरोच) खाल हो या फिर छोटे किटाणु (House Dust Mite), खाना का भी कुछ ऐसे पदार्थ होते है जिनके कारण हमें एलर्जी हो सकती है कुछ ऐसे पदार्थ है दूध, मछली, टमाटर, अंडा आदि खाने के पदार्थ होते है अगर हमारा खाना मिलावटी है तो उससे भी हो सकता है| कुछ कपडे धोने के साबुन है डिटर्जेंट इत्यादि की ऐलर्जी हो सकती है घर के अन्दर जैसे धूप  हैं हम साफ सफाई करते समय धूल कचरा साफ करते है उससे भी हमें ऐलर्जी हो सकती है|

(बीमारी) कुछ बीमारी व्यक्तियों को हमारे नाक कान और गले से होने वाली बीमारी का शुरुआती  दौर में हम अपनी इलाज न करवाये | ये तो इसके कारण भी बीमारी हो सकता है उसका संक्रामक  साँस वाली नालिका  में जब वो फलने लगता है तो हमारे शरीर के अस्थमा बढ़ सकता है| हमें अगर खट्टी डकार  आ रही है हमारा खाना आधा पचा हुआ  है, खाना हमें अच्छे ढंग से जब नही पच   पता तो हमें खट्टी डकार  आती है हमारा खाना दूसरे नालिका  में से श्वसन नलिका में जा सकता है और इने सब कारणों से अस्थमा हो सकता है |

हार्मोन्स में बदलाव- हमारे शरीर के मासिक धर्म , गर्भावस्था, के दौरान स्त्रियों में हारमोंस के बदलाव कारण भी हमें अस्थमा की बीमारी हो सकता है|  कुछ ऐसी दवाइयां होती है जिनके कारण ही हमें अस्थमा बढ़ सकता है| जैसे की एस्प्रिन,  आईबुप्रोफेन, इत्यादि दर्द नामक दवाइयां है श्वसनी दमा एक फेफड़ो  की समस्या है जहाँ हवा के रास्ते यानि के श्वसनी अवरुद्ध होती है या बाधित होती है, यह हमारे साँस वाले रस्ते में रुकावट लाता है, और हमारे साँस में हवा के स्तर में कमी होने के वजह से मरीज को घुटन होने लगते है जिससे की उसे लेने में बहुत तकलीफ होती है व्यक्ति की प्रतीक्षा प्रणाली और एलर्जी के लिए प्रतिरोधक उच्च स्तर श्रावणी में हवा के बहाव के रुकावट का कारण बनता है|

हालाकि  हमारे साँस की मांसपेसियो दिल के ऑक्सीजन पंप करने के लिए बहुत ज्यादा परिश्रम करती है वे समय के अनुसार हमें जब ज्यादा तनाव हो जाते है उसके कारण भी अधिक कमजोर हो जाता है हमारे मांसपेसियो पर साँस और हवा का आना और जाना प्रकिया के करने के तनाव स्तर के बावजूद रक्त वाहिकाए हवा के बहाव के कारण सहायता करने में असमर्थ होती है| इसके परिणाम स्वरुप साँस हमारी प्रभावित होती है और मांसपेसियो को ऐठन और साँस दीवार पर सूजन  आता  है जिसके कारण हमारी शरीर में बलगम का श्राव होकर साँस मार्ग अवरुद्ध होता है |हड्डी और शुष्क हवा धुआ प्रदुषण परगकिरण धूल, तनाव, चिंता, और साँस सक्रमण जैसे एलर्जी किरणों से आप में दमा के विकास की होती है अस्थमा के मरीज अपनी एलर्जी का खुद ध्यान रखे हमें किसी चीज़ से एलर्जी ज्यादा अपने आप को बचा कर रखे डॉक्टर की सलाह से दवा  ले |

अस्थमा की बीमारी को आप हल्के में ना ले . उसे एक गंभीर बीमारी के रूप में समझे और तुरंत उसके लक्षण दिखने पर इसका इलाज कराए.वैसे तो हमने आपको बता ही दिया है की इसके लक्षण क्या है तो इस लिए इसे ध्यान से पढ़े और समझे. की इसका इलाज कैसे हो सकता है . इसके बारे में खुद भी जागरूक रहे और दूसरे को भी जागरूक करे.

एड्स का इलाज़

एड्स के बारे में आप जानते ही होगे की ये एक बहुत गंभीर और जानलेवा बीमारी है . यह एक ऐसी बीमारी है जो रोग प्रतिरोधक शक्ति कम कर के इस बीमारी का लक्षण देता है. यह रोग ऐसा है की इसमें व्यक्ति अपनी प्रतिकार शक्ति खो देता है . पीडित व्यक्ति के शरीर को प्रतिरोध के क्षमता कम होने के कारण अवसरवादी संक्रमण जैसे की सर्दी ,खासी,टी बी आदि रोग आसानी से हो जाते हैं, और इन रोगों का इलाज करना कठिन है. यह रोग विषाणु के संक्रमण से होता है. यह एक ऐसा विषाणु रोग है जो हमारी प्रतिकार शक्ति कम कर देता है .

संक्रमण होने के बाद इस रोग की स्थिति तक पहुचने और लक्षण दिखने मे ८ या १० साल या उससे या उससे भी आधिक समय लग सकता है. कई सालो तक तो व्यक्ति को पता ही नही लगता की उसे हुआ क्या है सबसे पहले कमजोरी होने के कारण उसके शरीर के रोगों से लड़ने की शक्ति कम होने लगती है जब तक आपको इस रोग की जानकारी होगी तब तक शायद बहूत देर हो जाए क्यूंकि जाँच करवाने के तीन साल के अन्दर ही रोगी अपना दम तोड़ने लगता है


एड्स के कारन –
यह रोग संक्रमण से होता है अगर आप के मुह में छाले या मसूड़ों से खून बह रहा हो तब भी ये संक्रमण फ़ैल सकता है. जिस व्यक्ति को एड्स है उस रोगी पर प्रयोग किये हुये इंजेक्शन को अगर आप दूसरे व्यक्ति को लगवाते है तो उससे भी यह रोग हो सकता है . क्योकि वह इंजेक्शन रोगी को लग चुका है ,इसलिए हमें रोगी के प्रयोग किया हुआ इंजेक्शन दूसरे व्यक्ति को नहीं लगाना चाहिए . एड्स के रोगी का खून कभी भी हमें दूसरे व्यक्ति के इस्तमाल के लिए नहीं प्रयोग करना चाहिए या फिर जिस माँ को यह रोग है तो बच्चे को माँ से दूर रखने की कोशिश करे क्योकि बच्चा माँ का दूध न पिए . उस माँ का दूध बच्चे को कभी नहीं पिलाओ और जिस माँ को यह रोग है तो जन्म लेने वाले शिशु को भी हो सकता है . मैं आपको एक उदहारण देते है जैसे आप दाढ़ी बनवा रहे है, या फिर अपने शरीर में टैटू लगवा रहे है, तो उसके लिए आप सुई का इस्तेमाल तो करेंगे ही , तो उसे अपने शरीर में छेद करवाएंगे इसी तरह उस सुई जो की आप प्रयोग में ला रहे है उस सुई से अगर आप किसी दुसरे इंसान के शरीर में छेद करेंगे तो उसे भी HIV हो सकता है .हालाँकि रोगी के हाथ मिलने पर ये रोग नही होता है |


रोगी को आप गले लगाओ या कस कर पकड़ लो इससे भी ये रोग नही होता है . रोग से ग्रस्त रोगी के साथ रहने से या फिर उसके साथ खाना खाने से भी नही होता है. छिकने या खासने से भी यह रोग नही होता . मच्छर के काटने से भी नही फैलता है ,आंसू या रोगी के थूक से भी कोई प्रभाव नही पड़ता है |
रोगी के लक्षण –

रोगी के शरीर का वजन बहुत ही कम होना और आपको बहुत समय तक खासी का आना और आपको बुखार की शिकायत बार बार होने लगे. लासिकाओ और आपके ग्रन्थियो में सूजन का आना , हफ्ते से ज्यादा समय तक दस्त होना, रात को पसीना आना, याददाश्त कमजोर होना , हमारे शरीर में बराबर दर्द लगा रहे, मानसिक रोग होना आदि यह बीमारी बहुत ही खतरनाक बीमारी है यह बीमारी से हम परेशान रहते है. हमें खाने पीने में परहेज करना पड़ता है .दवाई समय पर लेनी चाहिए .
एक आधुनिक चिकित्सा में भी HIV के रोगों के लिए अभी तक कोई इलाज नही है . एंटी रेक्टो एंटीरेटोवाइरल थैरेपी का हाल ही में एड्स के इलाज के बारे में ही इसका प्रयोग किया गया है. हालाँकि इसके बाते में साथ कई साइडइफ़ेक्ट मतलब कि प्रतिरोध के विकास जुड़े हुये है और यह जो प्रतिरोधक इलाज है. यह बहुत ही महगा इलाज है अधिकांशतः आयुर्वैदिक उपचार ही काफी किफायती उपचार है. इस आयुर्वैदिक उपचार के साथ साथ हमें पौष्टिक आहार और योगा-व्यायाम हमें नियमित रूप से इसे अपनाना चाहिए .
एड्स के प्रबंधक के लिए यह बहुत ही महतवपूर्ण बात है. HIV के रोगियों के उपचार के लिए आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी बूटियां में अवाला का और उसमे तुलसी को भी मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वैदिक दवाइयां में रोगियों के एड्स के ही वायरस होते है. वह बहुत ही खतरनाक होते है उन खतरनाक वायरस को ख़त्म करने के लिए इम्यून डेवलपर या फिर हमारे शरीर के विकास करने के लिए यह किया जा सकता है. वायरस किलर के रूप में आयुर्वैदिक विभिन्न प्रकार का है. आयुर्वैदिक दवाइयां कुछ ऐसी हैं:- एरी यह जो सक्षमा शातिशाली वायरस किलर है. जो कि HIV वायरस को अच्छी तरह से मार सकती है. ये दवाइयां हमारी सेहत के लिए सयुंक्त हो सकता है. एलोपैथिक दवाओ के साथ वे कई दवाइयां मिलाई जा सकती है हालाँकि ये आयुर्वेदिक दवाये इम्युनिटी को बढाती है. CD में चार सेल के बाद साथ में ८ कोशिकl जो है उनसे लड़ने के लिए इन्हें जाना जाते है. जैसे की चवनप्रास, अश्व्गंधक रसायन , कनमण रसायन , शोनिधा कम बस्कारा आदि दवाएँ है. यह दवा हमारे शरीर के अन्दर की गन्दगी को साफ करने में मदद करती है. कोशिकाओ को भी साफ करती है. जैसे की शोनिधा बस्कारा ननार्थ आदि l कशिराबाला कुछ आयुर्वैदिक दवा ऐसी है. जो कि प्रतीक्षा को बढाती है और हमारी बाड़ी में कलिसर रूप में साफ करती है.
आयुर्वैदिक दवाएं जल्दी असर नही करती है. परन्तु आयुर्वैदिक दवा HIV के रोगियों के लिए उपयोगी है. पर यह दवा अच्छी तरह से रोगियों की पूरी इलाज नही करती . इनके लिए चाहिए anti ritroviral इन रोगियों के लिए एक ऐसी दवा की जाँच की गयी है. जो की चार दवा को मिला कर तैयार की गयी है. इसे दवा के इस्तेमाल करने के बाद यह कहा जा रहा है की ये दावा रोगियों के लिए बहुत महतवपूर्ण दवा है. इस दवा से रोगी सुरक्षित रहेगे.
हमारे शरीर में HIV जैसा भयंकर इन्फेक्शन होता है तो यह जीन बहुत ही ज्यादा सक्रिय होता है और तो छोडो आश्चर्य वाली यह बात है कि ये खुद ही इम्यून सिस्टम को बिलकुल ही बंद कर देता हैं . इसलिए कहा जाता है कि यह वायरस जो होता हैं इसे HIV और habtaitis ,बी सी और टी बी जैसे भयंकर बीमारी या इन्फेक्शन का इलाज हो सकता है . HIV और टी बी के जो वायरस होते है. वह वायरस इतना शरीर को तंग कर देता है कि शरीर को ज्यादा ही थका देते है फिर ठीक होने के बाद उनसे लड़ने के लिए हथियार डाल देता है|

HIV से सावधान रहे लापरवाही न करे. हमें दवा समय समय पर लेना चाहिये. अपना ध्यान रखे. इन्फेक्शन से बच के रहे . प्रतिरोधक क्षमता को हमें इतना बढ़ा देना चाहिये कि हमारे कामयाबी सिस्टम का जो वायरस होता है | उसे नाकाम कर देता है . हमें अपने खान पान और रहन सहन में सावधानी बरतनी चाहिए जिससे की इन्फेक्शन न फैले बीमारी से दूर रहे |