सफेद बालों को काला करने के घरेलू उपाय

घने काले बाल हर किसी की चाहत है।परन्तु उम्र बढ़ने के साथ हमारे बाल सफेद होने लगते हैं। लेकिन आजकल केवल उम्र बढ़ने के कारण ही नहीं बल्कि असमय भी बाल सफेद हो रहें हैं। आज की भाग-दौड़ वाली जिंदगी में अनियमित खान-पान, पोषण का अभाव, तनाव, चिंता आदि के कारण भी कम उम्र में ही बाल सफेद हो रहें हैं जिससे आज का युवा वर्ग त्रस्त हैं।आज के युवा वर्ग के सम्मुख अन्य समस्याओं के साथ बालों का सफेद होना भी एक समस्या बन चुकी है।कुछ लोग इस समस्या से निजात पाने के लिए पार्लर जाते हैं तो कुछ सफेद बालों को छिपाने के लिए बाजार में बिकने वाली रसायन युक्त बालों के रंगों का प्रयोग करते हैं जो बालों के लये हानिकारक हैं।पार्लर में भी हेयर ट्रीटमेंट (Hair treatment) के नाम पर बालों का नुकसान ही करते हैं।बेहतर यही है कि बालों को सेफद करने के लिए घरेलू और प्राकृतिक नुस्खों का प्रयोग करें, इससे आपके बाल काले, घने और लम्बे होंगे और बालों का कोई नुकसान भी नहीं होगा।

असमय बाल सफेद होने के कारण

  • जैसा कि पहले ही कहा गया है कि आज के भाग-दौड़ और व्यस्त जिंदगी में बहुत से लोग हैं जो समय पर खाना नहीं खाते और अधिक समय बाहर का खाना ही खाते हैं, इससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है और शरीर में पोषण का अभाव भी हो जाता है जिसका प्रभाव हमारे शरीर के विभिन्न भागों पर पड़ता है।हमारे बाल भी इस पोषण के अभाव में सफेद हो जाते है।
  • आजकल बाजार में बिकने वाले शैम्पू और बालों के तेल में रसायन की मात्रा अधिक होती है इसलिए बहुत ज्यादा शैम्पू और तेल लगाने से भी उन रसायनों के प्रभावस्वरूप बाल सफेद हो जाते हैं।
  • आज की व्यस्तता भरी जिंदगी में तनाव ने सभी को घेर रखा है।लेकिन यही तनाव और चिंता बाल सफेद होने के कारण हैं।
  • अधिक मात्रा में धूम्रपान और मद्यपान करना भी बाल सफेद होने के कारण हैं।
  • प्रदूषण के कारण भी बाल असमय सफेद हो जाते हैं।
  • कभी-कभी आनुवंशिता भी बाल सफेद होने का कारण हैं।

सफेद बाल काले करने के घरेलू नुस्खें

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  1. मेहँदी : अपने बालों की आवश्यकतानुसार ताजी मेहँदी का लेप तैयार करें, फिर उसमें तीन चम्मच करोंदे का चूर्ण और एक चम्मच कॉफी थोड़े से पानी के साथ मिलाकर डालें और अच्छे से मिलाएं। फिर उस लेप को अपने बालों में लगाकर दो घंटे तक छोड़ दें।इसके बाद बालों को धोकर किसी अच्छे शैम्पू से दुबारा बालों को धो लें। यह बालों को रंगने का एक बहतरीन और प्राकृतिक उपाय है, साथ ही इसके निरंतर प्रयोग से बाल सफेद नहीं होंगे।

इसके अतिरिक्त आप ताजी मेहँदी और आंवला के चूर्ण को चाय के पानी में मिलाकर रातभर भीगोकर रखें। अगली सुबह उसमें ब्राह्मी का चूर्ण, भृंगराज का चूर्ण, एक अंडा, उसी अनुपात में दही और नींबू का रस मिलाएं और इससे अपने पूरे बालों और जड़ों में मालिश करें और आधे घंटे बाद अच्छे से धो लें। इससे आपके बाल घने, काले और चमकदार बनेंगे।इसके अलावा आप मेहँदी का प्रयोग कुछ इस तरह भी कर सकते हैं। ताजी मेहँदी में कुछ मेथी के दानों को पीसकर मिला लें। फिर उसमें तुलसी का रस और सुखी चाय की पत्तियों को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें और उसे अपने बालों पर लगाकर दो घंटे के लिए छोड़ दें। फिर किसी अच्छे शैम्पू से अपने बालों को धो लें।ऐसा करने से भी सफेद बालों की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा।

  1. चाय : पर्याप्त मात्रा में पानी और चाय की पत्ती लें।पानी को गर्म करके उसमें चाय की पत्ती मिलाएं।फिर पानी को ठंडा करके अपने बालों में लगायें और एक घंटे तक छोड़ दें।एक घंटे बाद अपने बालों को अच्छे शैम्पू से धो लें।इस प्रयोग से बाल लम्बे समय तक घने और काले रहेंगे।
  2. लौकी : लौकी के कुछ टुकडों को सुखाकर उसे तीन दिनों तक नारियल के तेल में भीगोकर रखें।उसके बाद उस तेल को गर्म करें और उस गर्म तेल से ही बालों की जड़ों में मालिश करें, इससे बालों की खोयी हुई मेलानिन (Melanin) वापस आ जाती है और बाल चमकदार, मजबूत, घने और काले बनते हैं।
  3. बालों की जड़ों में अधिक गर्मी का प्रयोग न करें : अत्यधिक गर्मी भी बालों को नुकसान पहुँचता है। कुछ लोग खासकर लड़कियां, बालों के फैशन (Fashion) के लिए हीटिंग आयरन (Heating Iron) का प्रयोग करती हैं जिससे बाल क्षतिग्रस्त होते हैं।शुरुआत में शायद कोई फर्क महसूस न हो या आपको अच्छा भी लग सकता है लेकिन इसके निरंतर प्रयोग से आपके बाल सफेद हो सकते हैं।अतः इस बात को सुनिश्चित करें कि ऐसे किसी स्टाइलिंग उत्पाद का प्रयोग ना करें जो आपके बालों को गर्मी प्रदान करें।
  4. नींबू और आंवला :एक नींबू के रस में चार चम्मच आँवले का चूर्ण और थोड़ा-सा पानी मिलाईये और इसे अपने बालों के जड़ों में लगाकर बीस से पच्चीस मिनट तक छोड़ दें।फिर निर्धारित अवधि के बाद अच्छे से अपने बाल धो लें।इस बात का ध्यान रहें कि उसी दिन आप शैम्पू न करें।हफ्ते में चार दिन इसका प्रयोग करने से कुछ ही महीनों में आपके सफेद बाल काले हो जायेंगे साथ ही बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा।
  5. शुद्ध देशी घी : शुद्ध देशी घी से बालों की जड़ों में मालिश करने से सफेद बालों से छुटकारा मिलता है और बाल भी घने और मजबूत बनते हैं। हफ्ते में दो दिन शुद्ध देशी घी का प्रयोग अपने बालों पर करें।
  6. तिल का तेल : एक जगह लगभग 75 मिली लीटर तिल का तेल लेकर उसमें लगभग 25 मिली लीटर लौकी का रस मिलाएं और थोड़ी देर के लिए धूप में रखें।रात को सोने जाने से पहले इस तेल को अपने बालों में लगाकर हलके हाथों से मालिश करें और सुबह अच्छे से बाल धो लें।इस तेल का प्रयोग करने से सफेद बाल काले और लम्बे हो जाते हैं।
  7. प्याज : प्याज बालों के लिए बहुत उपयोगी है।दो प्याज अच्छे से पीसकर एक पेस्ट बना लें और उसका प्रयोग अपने बालों पर करें।लगाने के एक घंटे बाद बालों को अच्छे शैम्पू से धो लें।इसका निरंतर एक महीने तक प्रयोग करने से सफेद बाल से निजात पाया जा सकता है और बाल भी घने और मजबूत बनते हैं।
  8. नारियल का तेल : नारियल का तेल बालों के लिए बहुत उपयोगी है और यदि उसमें अश्वगंधा और भृंगराज मिला दी जाए तब इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। बालों की आवश्यकतानुसार नारियल का तेल लें और उसमें थोड़ी-सी मात्रा में भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें मिलाकर एक पेस्ट बना लें।अब अपने बालों की जड़ों में पंद्रह मिनट तक उसी पेस्ट से मालिश करें।तीस से चालीस मिनट बाद अच्छे से बाल और सिर धो लें।इस प्रयोग से आपके बाल काले होने लगेंगे।
  • आंवला : बालों को कालाकरने का एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय है आंवला। सबसे पहले एक आँवले को पानी में अच्छी तरह से उबाल लें। उसके बाद पानी से आँवले को निकालकर उसे पीस लें। उसी पीसे हुए आँवले को अपने बालों की जड़ों में लगायें और लगभग तीस मिनट तक लगा रहने दें और फिर अच्छे से अपने बाल धो लें।महीने में चार बार इसका प्रयोग करने से आपके सफेद बाल प्राकृतिक रूप से काले, घने और चमकदारहो जायेंगे।
  1. कलौंजी : सफेद बालों को काला करने के लिए कलौंजी भी लाभदायक है। एक लीटर पानी में पचास ग्राम कलौंजी को अच्छे तरह से उबाल लें और फिर उस पानी को छानकर ठंडा कर लें और उसी पानी से अपने बाल धोएं। लगभग हर दूसरे दिन ऐसा करने से कुछ महीनों के अन्दर ही आपके बाल काले, घने और लम्बे हो जायेंगे।
  2. अदरक : अदरक बालों के लिए लाभदायक है।अपने बालों के आवश्यकतानुसार अदरक लें और उसे कद्दूकस करके उसमें शुद्ध शहद मिलाकर उसका प्रयोग अपने बालों पर करें। हफ्ते में दो बार इसका प्रयोग करने से बालों का पकना कम हो जायेगा।
  • टमाटर : टमाटर को हाथों से मसलकर उसका रस निकाल लें, अब उसमें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दही, नींबू का रस और नीलगिरी का तेल मिलाएं और उसका प्रयोग अपने बालों पर करें। इस प्रयोग से बाल घने और काले बनेंगे।

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उपर्युक्त घरेलू और प्राकृतिक नुस्खों को अपनाकर आप सफेद बालों की समस्या से निजात पा सकते हैं।असमय या कम उम्र में होने वाले सफेद बाल यदि इन नुस्खों के प्रयोग से भी काले न हों, तो आप किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लें और चिकित्सा करवाएं। खुद की देखभाल का जिम्मा हमी पर है, इसलिए यदि कुछ बातों पर ध्यान देंगे तो हम खुद को आकर्षक और खुबसूरत बना सकेंगे।बालों का मसला हों तो इन बातों का ध्यान रखन आवश्यक हैं, जैसे :

  • अत्यधिक तेल, मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए।
  • बाहर का खाने से परहेज करें, जितना हो सके घर का बना खाना ही खाएं।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • शैम्पू के बाद कंडीशनर (Conditioner) का प्रयोग जरुर करें, ध्यान रहें कंडीशनर सिर्फ बालों पर ही लगायें, जड़ों में नहीं।
  • तनाव और चिंता कम करें।
  • अपने सिर और बालों को हमेशा साफ रखें, धूल और गंदगी जमा न होने दें।
  • गीले बालों में कंघी कभी न करें।
  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें। फलों और हरी सब्जियों का सेवन करें।
  • रसायन युक्त शैम्पू और तेल से बचें।
  • दिनभर में सात से आठ गिलास पानी जरुर पीयें।

वजन बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय

आज एक ओर जहाँ बहुत से लोग मोटापे से परेशान हैं वहीँ दूसरी ओर ऐसे भी लोग हैं जो दुबलेपन या वजन कम होने की समस्या से जूझ रहें हैं। चाहे वजन ज्यादा हो या कम, लेकिन ये दोनों ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनता हैं।वजन कम होने का अर्थ है शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव होना जो आपके पारिवारिक और सामाजिक जीवन को काफी नुकसान पहुंचा सकती हैं।वजन कम करने की तरह ही वजन बढ़ाना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।वजन बढ़ाने के लिए ऐसे आहार लेने चाहिए जिसमें सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), प्रोटीन (Protein), फैट (Fat) और मिनरल (Mineral) हो। कुछ लोग सोचते हैं कि तला और वसायुक्त आहार लेने से वजन आसानी से बड़जायेगा, लेकिन वास्तव में वजन बढ़ाने के लिए सही आहार और व्यायाम की आवश्यकता होती हैं।

दुबलेपन के कारण :

  • ज्यादा उपवास करने से पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और खाने की इच्छा नष्ट हो जाती है।
  • पौष्टिक आहार ग्रहण न करने से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अभाव हो जाता है जिसके कारण वजन घटने लगता है।
  • खाने के प्रति अरुचि होने से सही और उपयुक्त खाद्य शरीर को नहीं मिलता जिससे वजन कम हो जाता है।
  • मानसिक एवं भावनात्मक तनाव और चिंता की वजह से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है।
  • व्यायाम न करना भी दुबलेपन का कारण हो सकता है।
  • कई बीमारियाँ भी दुबलेपन का कारण हो सकती हैं, जैसे, खून की कमी (Anaemia), टी.बी (Tuberculosis), हायपर थाइरोइड (Hyper Thyroid), क्रोनिक डायरिया(Chronic Diarrhoea), मधुमेह (Diabetes)आदि।

दुबलेपन से निजात पाने और वजन बढ़ाने के लिए घरेलू नुस्खें :

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  1. सूखे मेवे : सूखे मेवे को कैलोरी (Calorie), वसा (Fat), कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) और फाइबर (Fibre) का अच्छा स्रोत माना जाता हैं। इसलिए दुबलेपन के त्रस्त लोगों को अपने आहर में किशमिश, बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता, अंजीर जैसे सूखे मेवे को शामिल करना चाहिए।
  2. चीज़ (Cheese) : चीज़ में भरपूर मात्रा में वसा (Fat) होता है और ये वजन बढ़ानेके लिए उपयोगी है।आप अपने खाने में चीज़ का प्रयोग कर सकते हैं, इससे आपका खाना भी स्वादिष्ट होगा और चीज़ में पायी जाने वाली कैलोरी (Calorie), प्रोटीन (Protein), कैल्शियम (Calcium) से आपका वजन भी बढ़ेगा तथा आपको दुबलेपन की समस्या से छुटकारा भी मिल जायेगा।
  3. पीनट बटर (Peanut Butter) : पीनट बटर प्रोटीन (Protein) और वसा (Fat) का एक समृद्ध स्रोत है तथा उन लोगों के लिए उपयुक्त हैं जो अपना वजन बढ़ाना चाहते हैं साथ ही इसमें पाये जाने वाले आवश्यक पोषक तत्व ह्रदय के लिए के अच्छा होता है।
  4. आलू : आलू एक सामान्य सब्जी, लेकिन यह कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), स्टार्च (Starch) और फाइबर (Fibre)का समृद्ध स्रोत है तथा वजन बढ़ाने में सहायक है। अतः अपने खाद्य में आलू को शामिल करें क्योंकि यह वजन बढ़ाने का एक आसान उपाय है।
  5. पास्ता (Pasta) : पास्ता एक स्वादिष्ट और कैलोरी (Calorie) से भरा हुआ आहार है। यह कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) का भी अच्छा स्रोत है।एक कप मैकरोनी (Macaroni) में लगभग 390 कैलोरीज़ (Calories) होती है।आप पास्ता में चीज़, तरह-तरह की सब्जियां डालकर भी खा सकते हैं।यह वजन बढ़ाने में सहायक होता है।
  6. मक्खन (Butter) :मक्खन या बटर में भरपूर मात्रा में वसा (Fat) है जो वजन बढ़ाने में सहायक है।आप भोजन बनाने में बटर का प्रयोग कर सकते है, ब्रेड या तले हुए पदार्थों के साथ भी बटर का सेवन कर सकते है।
  7. फल : आम, पका हुआ पपीता, केला, अनानस, खरबूजा, अनार, तरबूजजैसे फल वजन बढ़ाने में सहायक हैं।इन फलों में प्राकृतिक शर्करा होती है जो ऊर्जा का अच्छा स्रोत है।आप सलाद में, मिठाई में या साबुत फलों का सेवन भी कर सकते हैं।इसके अतिरिक्त दूध के साथ केले व आम का शेक (Shake) बनाकर भी पी सकते हैं।
  8. अंडे : अंडे कैलोरी (Calorie) से समृद्ध होते हैं तथा इनमें प्रोटीन (Protein) और पोषक तत्व की प्रचुर मात्रा होती हैं।एक अंडे में लगभग 70 कैलोरीज़ (Calories) तथा 5 ग्राम वसा (Fat) होती है। अंडा ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega 3 fatty acid) से भी समृद्ध है और इसमें अच्छे कोलेस्ट्रोल (Good Cholesterol) की मात्रा अधिक होती है।अतः रोजाना सुबह नाश्ते में एक अंडा खाने से तेजी से वजन बढ़ता है।
  9. मांस : मांस प्रोटीन का बहुत अच्छा स्रोत है।इसे पकाकर या भुनकर खाने से वजन तेजी से बढ़ता है।आप बिना चर्बी के लाल मांस (Red Meat) का भी सेवन कर सकते है।
  10. बीन्स (Beans) : यदि आप शाकाहारी हैतो शरीर में प्रोटीन (Protein) की मात्रा बढ़ाने के लिए आप बीन्स का सेवन कर सकते है। एक कटोरी बीन्स में 300 कैलोरी (Calorie) होती हैं।बीन्स बहुत ही पौष्टिक सब्जी है जो आपको स्वस्थ रखने के साथ आपके वजन को भी बढ़ाता है।
  11. अदरक : अदरक पाचन तंत्र में गर्मी पैदा करके शरीर के भीतर खून के बहाव को तीव्र करता है जिससे भूख बढ़ जाती है।इसलिए अदरक वजन बढ़ाने का एक कारगर उपाय है। अदरक का रस बहुत ही लाभदायक है। आप रोजाना अदरक की बनी चाय भी पी सकते हैं या अदरक का एक टुकड़ा मुँह में रखकर उसका रस भी चूस सकते है। ऐसा करने से आपकी खाने की इच्छा तीव्र होगी।
  12. अवोकाडो (Avocado) : यह एक बहुत ही स्वादिष्ट सब्जी होने के साथ वसा (Fat) का एक अच्छा स्रोत भी है।इसमें अधिक मात्रा में पोटैशियम (Potassium), फोलिक एसिड (Folic acid) और विटामिन ई (Vitamin E) पाया जाता हैं।आप इस सब्जी को सलाद (Salad) के साथ, मांस के साथ या घर पर बने पिज्ज़ा के साथ भी ले सकते हैं।
  13. दही :दही में प्रोटीन (Protein) की मात्रा अधिक होती है। वजन बढ़ाने के लिए आप मलाई युक्त दही का सेवन कर सकते है या दही में विभिन्न फलों को मिलाकर भी उसका सेवन कर सकते है।दुबले-पतले लोगों को अपने रोज के खाद्य दही को शामिल करना चाहिए।
  14. सोयाबीन्स (Soybeans) :सोयाबीन्स में भरपूर प्रोटीन (Protein), कैल्शियम (Calcium), फाइबर (Fibre), कैलोरीज़ (Calories), आयरन (Iron), विटामिन बी (Vitamin B), एमिनो एसिड (Amino acid) पाया जाता है। वैसे सोयाबीन्स वजन घटाने और बढ़ाने, दोनों ही क्षेत्रों में फायदेमंद हैं।
  15. राजमा : राजमा में प्रोटीन (Protein) की मात्रा अधिक होती है, इसलिए जो लोग शाकाहारी हैं वे मांस-मछली-अंडे की जगह राजमा का सेवन भी कर सकते है। राजमा के सेवन से शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति होती हैं और यह वजन बढ़ाने में भी सहायक होता है।
  16. पनीर : दूध के उत्पादों में से पनीर भी एक है जिसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन (Protein) और कुछ मात्रा में कैलोरी (Calorie) भी होती है।पनीर के सेवन से भी दुबलेपन की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
  • दाल : अपने रोजाना के खाद्य में दाल को शामिल करें। दाल में पाई जाने वाली प्रोटीन (Protein), कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates), फाइबर (Fibre) वजन को संतुलित रखता है। ये ज्यादा वजन वाले और कम वजन वाले लोगों के लिए लाभदायक है।
  1. नारियल का दूध : नारियल का दूध एक तरफ जायके को बढ़ाकर भोजन को स्वादिष्ट बनाता है तो दूसरी तरफ इसमें भरपूर मात्रा में पाई जाने वाली कैलोरी (Calorie)वजन को बढ़ाने में सहायक होता है।
  2. दूध में शहद : शहद वजन को संतुलित रखता है।यदि आपका वजन अधिक है तो तो शहद उसे कम करता है और यदि कम है तो उसे बढ़ाता है। रोज रात को सोने जाने से पहले या नाश्ते में दूध में शहद मिलाकर पीने से वजन बढ़ता है साथ ही इससे पाचन तंत्र भी स्वस्थ रहता है।
  • अश्वगंधा और शतावरी :अश्वगंधा और शतावरी वजन बढ़ाने का आयुर्वेदिक उपाय हैं. अश्वगंधा और शतावरी के चूर्ण को मिलाकर, उसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिला लीजिए। रात को सोने जाने से पहले या व्यायाम के बाद पहले एक चम्मच इस चूर्ण को मुँह में डालें फिर उसे अच्छे से खाने के बाद एक गिलास गर्म दूध पी लें। रोजाना इसका सेवन करने से एक महीने में ही शरीर का रूप-रंग और डील-डौल बदल जायेगा।
  • च्यवनप्राश : च्यवनप्राश स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा है ही साथ ही यह वजन बढ़ाने में भी सहायक है।सुबह-शाम दूध के साथ च्यवनप्राश का सेवन करना दुबले-पतले लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद है।
  • व्यायाम और योग क्रियाएं : व्यायाम सिर्फ वजन घटाता ही नहीं है बल्कि बढ़ाता है।दुबले-पतले लोगों को वजन बढ़ाने के लिए रोजाना व्यायाम करना चाहिएक्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है। यदि आप दुबलेपन की समस्या से त्रस्त है तो आप पुश अप, रोल डाउन जैसे व्यायाम कर सकते हैं।योग क्रियायों के द्वारा भी वजन बढ़ाया जा सकता हैं। योग से शारीरिक और मानसिक विकास होता हैं।सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, श्वासन योग क्रियायों द्वारा भी दुबलेपन की समस्या से निजात पा सकते है।व्यायाम और योग आपकी भूख को बढ़ाता है और आपको स्वस्थ रखता है।अतः वजन बढ़ाने के लिए रोजाना व्यायाम करना जरुरी है।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को आजमाकर आप अपना वजन बढ़ा सकते हैं।यदि इन नुस्खों का प्रयोग करके भी कोई फर्क नहीं पड़ता या किसी बीमारी के कारण वजन घटता है, तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लें।किसी अच्छे आहार विशेषज्ञ (Dietician) द्वारा बताये गए आहार चार्ट (Diet Chart) के अनुसार ही अपना आहार ग्रहण करें।कुछ सावधानियों को बरतने से दुबलेपन की समस्या उत्पन्न ही नहीं होगी, जैसे :

  • किसी भी प्रकार के तनाव या चिंता से दूर रहना चाहिए।
  • पर्याप्त नींद शरीर के लिए आवश्यक है. दिन में कम से कम 7-8 घंटे तक सोना चाहिए।
  • पौष्टिक आहार लेना चाहिए।
  • कोई बीमारी होने पर तुरंत उसका इलाज करवाना चाहिए।

रुसी हटाने के घरेलू उपचार

रुसी सिर की एक आम समस्या है जो जीवाणु और फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection) के कारण होती है । मलास्सेज़िया (Malassezia) नामक फंगस (Fungus) के कारण रुसी की समस्या उत्पन्न होती है । रुसी एक ऐसी समस्या है जो बालों की जड़ों में सफेद रंग की एक परत को उत्पन्न करता है । यह परत मृत कोशिकाएं होती हैं जिससे सिर में खुजली होती है । सिर को निरंतर खुजलाने से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती है और बाल झड़ने लगते हैं । रुसी दो तरह के होते हैं : एक जब सिर की त्वचा रुखी होती है और दूसरा जब सिर की त्वचा तैलीय होती है । रुसी की समस्या बहुतों को होती हैं । रुसी होने पर वे झड़कर कपड़ों पर भी गिरते हैं जिससे व्यक्ति को शर्मिंदगी होती है साथ ही यह उसके व्यक्तित्व को भी प्रभावित करता है । रुसी के कारण कुछ अन्य समस्या भी उत्पन्न होते हैं, जैसे, बालों का पतला होना, अधिक खुजलाने से बालों की जड़ों में दाने पड़ना, मुंहासे आदि । रुसी होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • हमारे सिर की त्वचा में नई कोशिकाएं निरंतर उत्पन्न होती रहती है और यदि सिर की त्वचा को साफ न रख जाये तब वहा मृत कोशिकाएं इकट्ठी हो जाती है जो रुसी का रूप ले लेती है ।
  • आज के फैशन (Fashion) के अनुरूप कई लोग, खासकर युवा पीढ़ी अपने बालों में तरह-तरह के प्रयोग करते हैं जिसके कारण रुसी की समस्या उत्पन्न होती है । जैसे, हेयर स्प्रे (Hair spray) का प्रयोग, रंगों का प्रयोग, हेयर स्ट्रेटनिंग (Hair straightning), हेयर ड्रायर (Hair dryer) का अत्यधिक प्रयोग आदि ।
  • उपयुक्त खान-पान न होने के कारण हमारा पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और उसका प्रभाव हमारे शरीर के विभिन्न भागों पर पड़ता है । बालों पर भी उसके प्रभाव को देखा जा सकता है और इसके कारण रुसी की समस्या उत्पन्न हो सकती है ।
  • अत्यधिक चिंता और एक्जिमा (Eczema) एवं त्वचा संबंधी बीमारी के कारण रुसी की समस्या उत्पन्न हो सकती है ।

रुसी हटाने के घरेलू नुस्खें

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  1. धनिया : धनिया में बालों के लिए आवश्यक प्रोटीन (Protein) और विटामिन (Vitamin) होता है जो न केवल बालों को गिरने से बचाता है बल्कि नए बालों की वृद्धि में मदद करता है । ताजे धनिया के पत्तों को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और फिर उसी लेप को अपने सिर और बालों में लगायें । लगभग पैंतालीस मिनट बाद किसी अच्छे शैम्पू (Shampoo) से बालों को धो लें । इसके निरंतर प्रयोग से रुसी की समस्या भी खत्म हो जायेगी और बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा ।
  2. प्याज : प्याज में मौजूद सल्फर (Sulphur) सिर में रक्त के प्रवाह को तेज करता है बालों के परिमाण के अनुरूप प्याज लेकर उसे अच्छे से पीसकर रस निकाल लें । उसी रस को अपने सिर और बालों में लगाकर सूखने तक इंतजार करें, फिर किसी अच्छे शैम्पू (Shampoo) से बालों को धो लें । इससे रुसी की समस्या भी नहीं रहेगी और बाल भी मजबूत होंगे ।
  3. नीम : जीवाणु विरोधक नीम रुसी की समस्या से निजात दिलाने में कारगर है साथ ही यह बालों का झड़ना भी कम करता है । चार कप पानी में नीम के 10 से 15 पत्तों को उबालें । फिर पानी को ठंडा करके छान लें । उसी पानी से अपने बालों को धोये । हफ्ते में दो से तीन बार इस उपचार को करने से फर्क दिखेगा ।
  4. जैतून का तेल : रुखी सिर की त्वचा के उपचार के लिए जैतून के तेल का प्रयोग किया जा सकता है । यह एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर (Moisturizer) की तरह है जो सिर की त्वचा को नमी प्रदान करता है । पहले जैतून के तेल को गर्म कर लें, फिर उसी गर्म तेल से अपने सिर की मालिश करें । फिर अपने सिर को गर्म तौलिए से अच्छे से ढक लें । पैंतालीस मिनट बाद अपने बालों में शैम्पू (Shampoo) कर लें और कंडीशनर (Conditioner) लगा लें । इस उपचार को निरंतर करने से सिर की त्वचा में नमी बनी रहेगी और रुसी की समस्या भी नहीं रहेगी एवं बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा ।
  5. बेकिंग सोडा (Baking soda) : बेकिंग सोडा मृत कोशिकाओं को हटाता है और सिर की त्वचा से अत्यधिक तेल को निकाल देता है । यह उस फंगस (Fungus) को भी उत्पन्न नहीं होने देता जो रुसी का कारण है । पहले अपने बालों को थोड़ा गीला कर लें और फिर अपने बालों की जड़ों में बेकिंग सोडा लगायें । पाँच मिनट बाद अपने बालों को गुनगुने पानी से अच्छे से धो लें । इस उपचार के बाद शैम्पू (Shampoo) न करें । निरंतर एक महीने तक और हफ्ते में एक बार इस उपचार को करने से रुसी की समस्या दूर हो जायेगी ।
  6. सेब का सिरका : सेब का सिरका रुसी से छुटकारा दिलाने में कारगर है । यह प्राकृतिक रूप से बालों को साफ करके रोमछिद्रों को खोलने में मदद करता है । दो चम्मच सेब का सिरका लें और उसमें बराबर मात्रा में पानी और टी ट्री आयल (Tea tree oil) की 15 से 20 बूंदे मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर लें । इसी मिश्रण को अपने सिर पर लगाकर हलके हाथों से मालिश करें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करें । इसके निरंतर प्रयोग से कुछ ही दिनों में रुसी की समस्या दूर हो जायेगी और बाल झड़ना भी कम हो जायेगा ।
  7. नारियल का तेल : नारियल का तेल अपने फंगस (Fungus) विरोधी गुण के कारण रुसी को दूर करने में मदद करता है । यह सिर की त्वचा को पोषण देता है और खुजली से राहत दिलाता है । दो से तीन चम्मच नारियल का तेल लेकर उसमें एक से डेढ़ चम्मच नींबू का रस मिलायें । उस मिश्रण को अपने बालों की जड़ों में लगाकर हलके हाथों से मालिश करें । करीबन बीस मिनट बाद अपने बालों को धो लें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करें । कुछ ही दिनों में रुसी भी दूर हो जायेगी और बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा ।
  8. दही : बालों के लिए दही बहुत ही उपयोगी है । यह रुसी की समस्या को दूर करने में भी कारगर है । दही को अच्छे से फेंट लें, फिर उसे अपने बालों और उसके जड़ों पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें । सूखने के बाद पहले पानी से बालों को धो लें फिर बालों में शैम्पू (Shampoo) कर लें । इसके अलावा आप दही में मेथी मिलाकर भी अपने बालों में लगा सकते हैं । रातभर मेथी के दानों को पानी में भीगोकर रखें । सुबह उन्हीं मेथी के दानों को पीस लें फिर उन्हें दही के साथ मिलाकर एक लेप तैयार कर लें । फिर उसी लेप को अपने बालों और उसके जड़ों में लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें । निर्धारित समय के बाद अपने बालों को पहले पानी से धो लें फिर बालों में शैम्पू कर लें । इन दोनों तरीकों से आप दही का इस्तेमाल कर सकते हैं । इसके निरंतर प्रयोग से रुसी की समस्या दूर हो जायेगी, बाल झड़ने कम हो जायेंगे और साथ ही आपके बाल आकर्षक दिखेंगे ।
  9. मेथी : मेथी के बीजों में प्रोटीन (Protein) पाया जाता है जो बालों की जड़ों में पोषण पहुँचाता है । मेथी को बीजों को रातभर पानी में भीगोकर रखें । सुबह उन बीजों को पीसकर एक लेप तैयार कर लें और उसी लेप को अपने सिर पर अच्छे से लगा लें । एक घंटे बाद अपने सिर और बालों को शैम्पू (Shampoo) से अच्छे-से धो लें । हफ्ते में दो बार इस उपचार को करने से कुछ ही दिनों में असर दिखने लगेगा । इसके अलावा आप मेथी के बीजों को नारियल के तेल में भुन लें । फिर उस तेल को छानकर मेथी को अलग कर लें और उसी तेल को अपने बालों की जड़ों में लगाकर धीरे-धीरे मालिश करें । एक महीने तक इसके निरंतर प्रयोग से रुसी की समस्या दूर हो जायेगी और बाल झड़ने कम हो जायेंगे ।
  10. नींबू : नींबू रुसी के लिए रामबाण औषधि है । दो से तीन चम्मच नींबू के रस में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर अपने बालों की जड़ों में लगायें । इसके अलावा आप एक कप अरंडी के तेल या बादाम के तेल में दो नींबू का रस मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके एक बोतल में रख दें । रात को सोने जाने से पहले उसी मिश्रण से अपने सिर पर मालिश करें । सुबह अपने बालों को अच्छे से धोने के बाद शैम्पू (Shampoo) कर लें । इससे रुसी की समस्या तो दूर होगी ही साथ ही बालों का झड़ना भी कम हो जायेगा और बाल आकर्षक दिखने लगेंगे ।
  11. एलोवेरा (Aloe Vera) : बालों की समस्या के लिए एलोवेरा बहुत ही कारगर है । एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसके अन्दर के रस को निकालकर एक छोटी-सी कटोरी में रख लें । फिर उसी रस को बालों की जड़ों में लगाकर अच्छे से मालिश करें । यह बालों की जड़ों में बंद हुए छिद्रों को खोल देता है । इसके निरंतर प्रयोग से रुसी की दूर हो जायेगी और बाल झड़ने भी कम हो जायेंगे ।

Aloe-Vera-leaves

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर रुसी की समस्या से निजात पाया जा सकता है । यदि किसी बीमारी के परिणामस्वरूप रुसी की समस्या हो तो किसी त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाएं । रुसी से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक हैं, जैसे :

  • रुसी होने पर किसी अच्छे रुसी विरोधी शैम्पू (Shampoo) का प्रयोग करें । अपने सिर की त्वचा को हमेशा साफ रखें ।
  • अपने बालों को अच्छे से कंघी करें ताकि रुसी बालों से झड़कर गिर जाये ।
  • अधिक मात्रा में पानी पीयें जिससे शरीर से टोक्सिन (Toxin) बाहर निकल जाये ।
  • विटामिन बी (Vitamin B), जिंक (Zinc) और ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty acid) समृद्ध आहार का सेवन करें । अपने खाद्य में हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें. बाहर के खाने से परहेज करें ।
  • मानसिक चिंता और तनाव से दूर रहें । पूरी नींद ले, कम-से-कम आठ घंटों तक सोये ।
  • बाहर निकलते समय अपने सिर को ढक लें ताकि सिर की त्वचा और बालों को प्रदूषण, धूप और धूल से बचाया जा सकें ।
  • अपने बालों में रासायनिक तत्वों का प्रयोग न करें ।
  • दूसरों की कंघी का प्रयोग न करें और न ही अपनी कंघी दूसरों को दें ।
  • शैम्पू (Shampoo) करने के बाद कंडीशनर (Conditioner) का प्रयोग करें ।
  • गीले बालों को न ही कंघी करें और न ही बांधकर रखें ।

मोटापा घटाने के घरेलू उपाय

मोटापा एक ऐसी बीमारी है जो स्त्री, पुरुष व बच्चे, किसी को भी हो सकती है। मोटापे के कारण व्यक्ति की सुन्दरता प्रभावित होती है।ऐसे बहुत से लोग हैं जो मोटापे की समस्या से त्रस्त है।मोटापे के कारण लोगों को चलने, साँस लेने और बैठने में परेशानी होती है।शरीर में दो तरह की वसा कोशिकाएं होती हैं, सफेद वसा (White Fat) और भूरी वसा (Brown Fat)।सफेद वसा कोशिकाएं शरीर में अतिरिक्त कैलोरी (Calorie) को जमा रखती हैं जबकिभूरी वसा होर्मोन (Hormone) और जींस (Genes) की क्रियाशीलता से गर्मी उत्पन्न करके वसा (Fat) को जलाकर उसे ऊर्जा (Energy) के रूप में परिवर्तित कर देती है।इसलिए मोटापा कम करने के लिए शरीर में भूरी वसा की मात्रा को बढ़ाना चाहिए।मोटापे को विभिन्न बीमारियों का जनक माना जाता है, जैसे, दिल की बीमारी, जोड़ों में दर्द, गठिया रोग, मधुमेह, रक्तचाप, दमा आदि।

मोटापे के कारण

  • मोटापे का कारण है फास्टफूड (Fast food), चॉकलेट (chocolate), आइसक्रीम (Ice cream) , कोल्डड्रिंक (Cold drink), मद्दपान (Alcohol), अधिक चर्बीयुक्त आहार आदि का सेवन करना।
  • व्यायाम न करना, परिश्रम न करना भी मोटापे का कारण है।शारीरिक क्रियाएं सही ढंग से न होने पर शरीर में चर्बी जमा हो जाती है, जो मोटापे का लक्षण है।
  • वंशानुगतकारणसेभी कुछ लोग मोटे होते हैं।
  • कुछ लोग तनाव से राहत पाने के लिए भूख न लगने पर भी खाना खाते रहते है, जिससे वजन बढ़ जाता है।
  • कभी-कभी स्टेरॉयड (Steroid), नींद की गोली (Sleeping Pills) जैसी दवाइयों के प्रभावस्वरूप भी मोटापे की समस्या उत्पन्न होती है।

मोटापा कम करने के घरेलू नुस्खें

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  1. तेज हरी मिर्च : तेज हरी मिर्च खाने से शरीर की मेटाबोलिक (Metabolic) क्रियाशीलता बढ़ती है और शरीर में जमी चर्बी घटती है।तेज मिर्च में कैप्सिनोइड्स पाया जाता है जो ब्राउन फैट (Brown Fat) या भूरी वसा उत्पन्न करने में सहायक होता है। भूरी वसा के उत्पन्न होने से मोटापा कम होता है।
  2. हल्दी : हल्दी के कई गुणों में से एक गुण यह भी है कि यह शरीर के वसा (Fat) को जलाने का काम करती है।हल्दी शरीर में वसा को पनपने नहीं देती, अतः मोटापा कम करने के लिए भोजन में इसका प्रयोग आवश्यक है।
  3. पुदीना : पुदीने के पत्तों से बनी चाय पीकर वजन घटाया जा सकता है। पुदीने से हाजमा सही रहता है और यह वसा (Fat) को कम करने में मदद करती है।इसका एक और गुण यह भी है कि यदि कुछ भी खाने से पहले पुदीने के पत्तों को सूंघा जाये तो इससे भूख कम हो जाती है और कम खाने से वजन भी कम होता है।
  4. खाने से पहले पानी : पानी वजन घटाने में सहायक होता है। पानी पीने से 1-2 घंटों के अन्दर 24%-30% कीमेटाबोलिज्म (Metabolism) में वृद्धि होती है, जिससे कैलोरीज़ (Calories) घटता है।खाना खाने से करीब आधा घंटा पहले पानी पीने से कैलोरीज की मात्रा कम होती है, खाना अच्छे से पचता है, व्यक्ति को भूख कम लगती है जिसके कारण वो कम खाता है और वजन भी घटता है।
  5. सेब : सेबभूरी वसा ( Brown Fat) के उत्पादन में सहायक होता है और शरीर से अतिरिक्त चर्बी को दूर रखता है।दिन में एक या दो सेब खाने से वजन घटता है।
  6. सुबह का नाश्ता कभी न छोड़े : मोटापा कम करने के लिए सुबह के नाश्ते को कभी न छोड़े, ऐसा करने से शरीर को काफी नुक्सान पहुँचता है और साथ ही वजन भी बढ़ता है।नाश्ता न करने पर आपका दिमाग प्राकृतिक रूप से ऐसे भोजन की तरफ आकर्षित होता है जो कैलोरी(Calorie) से भरा होता है, इससे न केवल स्वास्थ्य भी खराब होता है बल्कि वजन भी बढ़ता है।
  7. ग्रीन टी : ग्रीन टी के सेवन से वजन घटता है और मोटापा कम होता है।ग्रीन टी में थोड़ी-सी मात्रा में कैफीन (Caffeine) होती है जिससे मेटाबोलिज्म (Metabolism) में वृद्धि होती है।इसके अतिरिक्त इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स (Anti-Oxidants) कैफीन के साथ काम करके शरीर की वसा (Fat) को जलाने मेंमदद करता है।इस बात का ध्यान रखें कि इसमें चीनी और कैलोरी युक्त अन्य उत्पाद न मिलायें।
  8. कॉफी :बिना चीनी, दूध या कैलोरी युक्त अन्य उत्पाद के कॉफी (Coffee) का सेवन फायदेमंद होता है। कॉफी में मौजूद कैफीन (Caffeine) से शरीर का मेटाबोलिज्म (Metabolism) काफी हद तक बढ़ जाता है और इससे शरीर की वसा (Fat) जल जाती है।
  9. अतिरिक्त मात्रा में चीनी का सेवन न करें : खानपान में अतिरिक्त चीनी का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।अतिरिक्त चीनी के सेवन से मोटापे के अलावा मधुमेह तथा ह्रदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है।यदि आप वजन घटना चाहते हैं तो अतिरिक्त चीनी का सेवन बंद कर दे।
  • भरपूर मात्रा में फल और सब्जियों का सेवन : वजन घटाने के लिए पर्याप्त मात्रा में फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इनमें कैलोरी (Calorie) की मात्रा कम होती है और ये आमतौर पर फाइबर (Fiber) से भरपूर होती हैं, जो वजन घटाने में सहायक होते हैं।
  1. जामुन : जामुन एंटी ऑक्सीडेंट्स (Anti Oxidants) से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य के लिए तो अच्छा होता ही है साथ ही यह फैट कटर (Fat cutter) भी है अर्थात इसके सेवन से चर्बी काफी हद तक कम हो जाती है।जामुनशरीर की चर्बी की कोशिकाओं में मौजूद जींस (Genes) की कार्यशीलता को प्रभावित करता है जिससे वजन नहीं बढ़ता।
  • नींबू पानी : हर सुबह उठकर एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस मिलाकर एक घोल तैयार करें और उसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर उसका सेवन करें।नींबू के औषधीय गुण के कारण वजन कम होगा और मोटापे की समस्या भी नहीं रहेगी।
  1. दिनचर्या : यदि आप मोटापे की समस्या से त्रस्त हैं तो आपके लिए यह जरुरी है कि आप अपनी दिनचर्या में बदलाव लायें।हर सुबह जल्दी उठकर लगभग पैंतालीस मिनट तकबाहर टहलने के लिए जायें या फिर आधा घंटा दौड़े, ऐसा करने से आपकी कैलोरी घटेगी और आपका मोटापा भी कम होगा। घर लौटने पर एक से दो गिलास पानी पिये फिर आधे घंटे बाद नाश्ता करें।ध्यान रहें नाश्ते में अधिक कैलोरी वाले खाद्य का सेवन न करें, और नाश्ते में केला छोड़कर अन्य फल जरुर खायें। ज्यादा पेट भरकर नाश्ता न करें. आप अपना खाद्य एक-दो घंटें के अन्तराल में लेते रहियें। दोपहर के भोजन के साथ सलाद जरुर लें।सलाद भोजन को पचाने में मदद करता है और वजन भी कम करता है।शाम को बहुत अधिक कुछ न खायें।रात का खाना जल्दी खायें, कोशिश करें कि लगभग रात के नौ बजे के भीतर आप अपना रात का खाना खा लें, और खाने के लगभग तीन घंटे के बाद आप सोने जाएँ, ऐसा करने से आपका खाना अच्छे से पचेगा।
  2. व्यायाम करें :व्यायाम करने से पसीना होता है जिससे शरीर का फैट कम होता है और मोटापा की समस्या से निजात पाया जा सकता है।आप जिम या व्यायाम केंद्र जाकर भी व्यायाम कर सकते है, अथवा घर पर भी व्यायाम कर सकते हैं।सेतुबंध, भेकासन, धनुरासन, उत्तानपदासन, सूर्य नमस्कार जैसी योग क्रियाएं करके आप अपना मोटापा कम कर सकते हैं।
  • मशरूम : मशरूम मोटापा कम करने का एक प्रभावी उपाय है। मशरूम में अधिक मात्रा में पानी और प्रोटीन होता है जो वजन को कम करता है।आप मशरूम की सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं या मशरूम का रस निकालकर भी उसका सेवन कर सकते हैं।
  1. पत्तागोभी : पत्तागोभी वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।आप पत्तागोभी का सूप बनाकर भी उसका सेवन कर सकते हैं या पत्तागोभी की सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं अथवा इसे सलाद में भी शामिल कर सकते है।
  2. पपीता :पपीता अतिरिक्त चर्बी को कम करता है। नियमित रूप से पपीता खाने से वजन कम होता है।पर इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि गर्भवती महिलाएं पपीता बिल्कुल न खाएँ, इससे गर्भ को नुक्सान पहुँच सकता है।
  3. छाछ : मोटापा कम करने के लिए छाछ पीना बहुत ही लाभदायक होता है।आप छाछ का सेवन आँवले और हल्दी के चूर्ण के साथ भी कर सकते है अथवा ऐसे भी बिना चीनी के छाछ का सेवन कर सकते है।इससे मोटापा कम होता है।
Saturated Fat
Saturated Fat

मोटापा कम करना एक प्रतिस्पर्धात्मक कार्य है।अत्यधिक मोटापे के कारण व्यक्ति को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता हैं।उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप अपना वजन और मोटापा कम कर सकते हैं।मोटापा कम करने के लिए सही और उपयुक्त आहार (Diet) की जरुरत है, इसलिए आप किसी अच्छे आहार विशेषज्ञ (Dietician)की सलाह लेकर एक डायट चार्ट (Diet Chart) बना लें और उसी के अनुसार अपना खाद्य ग्रहण करें, ऐसा करने से आपका वजन और मोटापा कम हो जायेगा। कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देने से न ही वजन बढ़ेगा और न ही मोटापे की समस्या होगी, जैसे :

  • स्नैक्स, फास्टफूड, शराब, चीनी, घी, मक्खन, कोल्डड्रिंक, आलू जैसे अत्यधिक कैलोरी वाले खानपान से परहेज करें।
  • अपना खाना चबाकर खाए और खाने के लगभग आधे घंटे बाद पानी पिये, इससे पाचन तंत्र सही रहता है और वजन भी नियंत्रण में रहता है।
  • अधिक मात्रा में ठंडा पानी पीने और ठंडाआहार ग्रहण करने से भी वजन बढ़ता है।अतः ठन्डे खानपान से परहेज करें।
  • दिन में कम से कम आठ घंटे तक सोयें। नींद पूरी न होने पर भूख भी ज्यादा लगती है और व्यक्ति अस्वस्थ भी हो जाता है।
  • तनाव और चिंता से दूर रहें। ऐसा देखा गया है कि अत्यधिक चिंता के कारण व्यक्ति अधिक खाता है जिससे उसका वजन बढ़ जाता है।
  • कोशिश करें आईने के सामने बैठकर खाने की, ऐसा करना से आप खुद को देख पायेंगे और आपका खाना भी कम हो जायेगा।
  • प्रोटीन से भरपूर भोजन करने से आपके शरीर में मेटाबोलिज्म की मात्रा बढ़ेगी।प्रोटीन युक्त खाद्य खाने से आपका पेट भी भरेगा और आपको संतुष्टि भी मिलेगी साथ ही आप हर रोज 441 कैलोरी कम लेंगे।
  • मलाई रहित दही का सेवन करें जिससे आपके शरीर में कैल्शियम की बढ़ोत्तरी भी होगी साथ ही आपका वजन भी कम होगा।

मौसमी बुखार या वायरल फीवर (Viral Fever) के लिए घरेलू उपाय

बदलते मौसम के साथ हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिसके कारण बुखार, खाँसी, सर्दी जैसे रोग हमारे शरीर को जकड़ने लगते हैं।बदलते मौसम के साथ मौसमी बुखार, जिसे अंग्रेजी में वायरल फीवर (Viral fever) कहते है, होने की सम्भावना सबसे अधिक होती है।मौसमी बुखार आम बुखार जैसा ही लगता है, लेकिन इसके होने पर शरीर का तापमान जल्दी कम नहीं होता और लगभग पांच से छै घंटे के अंतराल में बुखार लौटकर आता है।मौसमी बुखार होने पर शरीर का तापमान तेजी से बढ़कर 100 से 103 डिग्री तक हो जाता है। इस तरह का बुखार होने पर व्यक्ति बहुत थकान महसूस करता है।किसी प्रकार के जीवाणु या संक्रमण के कारण इस तरह का बुखार हो सकता है।ठंडा लगने पर भी इस तरह का बुखार हो सकता है। मौसमी बुखार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलता है।इस प्रकार का बुखार होने पर शरीर में कई तरह के लक्षण देखे जाते हैं, जैसे :

  • इस बुखार के प्रभावस्वरूप जीभ का स्वाद चला जाता है।
  • इस तरह के बुखार में सिर में तेज दर्द होता है।
  • मांसपेशियों और हड्डियों के जोड़ों में भी दर्द होता है।
  • मौसमी बुखार होने पर खाँसी, जुकाम, उल्टी, दस्त जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

मौसमी बुखार के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : मौसमी बुखार होने पर सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते। तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो मौसमी बुखार के उपचार के लिए उत्तम है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें।अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।इसी काढ़ेमें शहद डालकर उसका हर दो घंटे में सेवन करें। इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  2. धनिया की चाय : धनिया में मौसमी बुखार जैसे रोग को खत्म करने की क्षमता है।धनिया में मौजूद प्रतिरोधक तत्व शरीर को बुखार से लड़ने की शक्ति देता है।मौसमी बुखार में धनिया की चाय बहुत ही असरदार औषधि है।एक मध्यम आकर के बर्तन में एक गिलास पानी लें और उसमें एक बड़े चम्मच धनिया के दानें या बीज डालकर उबालें। फिर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में दूध और चीनी डालें।फिर इसका गरम-गरम चाय की तरह सेवन करें। इस कारगर घरेलू नुस्खें से मौसमी बुखार में आराम मिलेगा।
  3. चावल का स्टार्च(Starch) :चावल का स्टार्च शरीर की प्रतिरक्षा तंत्र को बढ़ाकर शरीर को स्वस्थ रखता है। यह एक पारंपरिक उपाय है।मौसमी बुखार से पीड़ित बच्चों और बड़े लोगों के लिए यह विशेष रूप से एक प्राकृतिक पौष्टिक पेय माना जाता है।चावल का स्टार्च बनाना कोई बहुत मुश्किल कार्य नहीं है।लगभग हर किसी के घर में चावल पकता है।चावल पकने के बाद जिस पानी को छानकर फेंक दिया जाता है, वही पानी स्टार्च है जो बुखार में लाभदायक होता है।चावल पकने के बाद पके हुए चावल के पानी को एक बर्तन में छान लें।अब उसमें स्वाद अनुसार नमक डालकर, यदि आप चाहे तो काली मिर्च भी डाल सकते हैं, उसका गरम-गरम सेवन करें. इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  4. सूखी अदरक का मिश्रण : अदरक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो मौसमी बुखार के लक्षणों को कम करता है।बुखार से पीड़ित व्यक्ति के लिए सूखी अदरक का सेवन करना लाभदायक है।एक बर्तन में एक कप पानी डालकर उसमें दो मध्यम आकर के सूखे अदरक के टुकड़े या उसी परिमाण में सौंठ का चूर्ण डालकर उबालें। इसके बाद उस उबलते हुए पानी में एक-एक करके पीसी हुई हल्दी और काली मिर्च डालकर थोड़ी-देर के लिए फिर से उबालें। उसके बाद आँच से उतारकर उसमें शहद डालकर दिन में चार बार थोड़ा-थोड़ा करके पीने से बुखार में आराम मिलेगा।
  5. मेथी का पानी :मेथी के बीज रसोईघर में आसानी से उपलब्ध एक मसाला है। किन्तु इसमें विशेष प्रकार के औषधीय गुण हैं जो मौसमी बुखार में राहत दिलाती हैं।आधा कप पानी में एक बड़ा चम्मच साफ मेथी के बीज रातभर भीगोकर रखें।सुबह उसी पानी को छानकर दो घंटे के अन्तराल पर पीने से बुखार मेंआराम मिलेगा।
  6. सिरके का प्रयोग :सिरके के प्रयोग से भी बुखार को कम किया जा सकता है।आप अपने नहाने के पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर नहा सकते हैं, इससे आपके शरीर का तापमान कम होगा।इसके अलावा आप आलू के तीन-चार टुकडों को सिरके में डूबोकर अपने माथे पर रख सकते हैं, इससे भी शरीर का तापमान नियंत्रित होगा और बुखार में आराम मिलेगा।
  7. लहसुन :लहसुन के तेल को लगाने से बुखार में आराम मिलता है।एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो-तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल से रोगी के हथेली, पैरों, छाती पर अच्छे से मालिश करें, इससे बुखार में आराम मिलेगा। इसके अतिरिक्त आप किसी भी प्रकार के ठोस या तरल भोजन में लहसुन का प्रयोग करके उसका सेवन भी कर सकते हैं। दिन में दो बार यदि गर्म पानी के साथ दो से तीन लहसुन की कलियों का सेवन किया जाये तो बुखार में फर्क पड़ेगा। लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) तत्व हैं जो शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है और बुखार को कम करने में मदद करता है।
  8. शहद और लौंग : शुद्ध शहद में औषधीय गुण है जो बुखार के लिए लाभदायक है। शहद में लौंग के चूर्ण को मिलाकर लेने से बुखार कम होता है। दो से चार लौंग को गर्म तवे पर रख कर थोड़ा-सा भून लें, फिर उसे पीसकर चूर्ण बना लें।अब एक चम्मच शुद्ध शहद में आधा चम्मच लौंग का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार उसका सेवन करें।इससे बुखार में राहत मिलेगी।
  9. पानी की पट्टी : मौसमी बुखार होने पर शरीर का तापमान रह-रहकर बढ़ जाता है, और जल्दी कम नहीं होता। ऐसे में ठन्डे पानी में साफ कपड़ा भीगोकर उसे सिर पर रखने से और बारी-बारी बदलते रहने से बुखार कम हो जाता है और शरीर का तापमान संतुलित रहता है।
  • डॉक्टर की सलाह लें :यदि बुखार चार से पाँच दिनों में भी न उतरे तो आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और उपयुक्त जांच करवानी चाहिए। कभी-कभी मौसमी बुखार जैसे दिखने वाले बुखार का कारण कुछ और भी हो सकता है।डेंगू, टाइफाएड या अन्य कोई संक्रमण भी बुखार का कारण हो सकता है।ऐसे में डॉक्टर से जांच करवाना जरुरी है।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर मौसमी बुखार को कम किया जा सकता है और इन नुस्खों के प्रयोग से बुखार में आराम भी मिलाता है।मौसमी बुखार मूल रूप से सात दिनों का मेहमान होता है जो शरीर को कमजोर कर देता है। ऐसे में आपको कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए जिससे आप स्वस्थ और तंदरुस्त रहें और दूसरों में बुखार का जीवाणु न फैले, जैसे :

  • मौसमी बुखार होने पर दूध के उत्पादों के सेवन से बचना चाहिए।
  • इस बुखार में लाल मांसऔर ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि बुखार में इस तरह के खाद्य को पचाना मुश्किल होता है, और इससे पेट की समस्या या दस्त हो सकता है।
  • बुखार होने पर तंबाकू, शराब, धूम्रपान से बचना चाहिए।
  • इस समय शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए नियमित समय के अन्तराल में पानी पीना आवश्यक होता है।पानी पीने से शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।यदि सादा पानी पीने में अच्छा न लगें तो आप पानी में चीनी और नमक डालकर घोल तैयार करके भी पी सकते हैं अथवा मेडिकल स्टोर(Medical store) में उपलब्ध ओ.आर.एस (O.R.S)पाउडर को पानी में मिलाकर भी पी सकते हैं।
  • ठन्डे पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। बुखार में ठंडा पानी, दही आदि का सेवन न करें, इससे तकलीफ और भी बढ़ जाती है।
  • खाली बदन या खाली पैर नहीं घूमना चाहिए, इससे बुखार बढ़ सकता है।
  • बुखार होने पर ज्यादा से ज्यादा समय शरीर को आराम देना चाहिए।
  • मौसमी बुखार होने पर जीभ का स्वाद नष्ट हो जाता है और खाने की इच्छा भी नहीं रहती, लेकिन बुखार में उपयुक्त भोजन का सेवन जरुर करें, क्योंकि भोजन न करने से शरीर कमजोर हो जाता है और बुखार कम नहीं होता।
  • बिना किसी चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवाई नहीं लेनी चाहिए। बहुत से लोग सोचते हैं कि बुखार होने पर बुखार कम करने की कोई भी दवाई लेने से बुखार ठीक हो जायेगा।लेकिन दवाई के मामले में चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है, क्योंकि यह जानना भी जरुरी है कि हमारे शरीर के लिए कौन-सी दवाई उपयुक्त है, अन्यथा चिकित्सक के पैसे बचाने या खुद चिकित्सक बनने के चक्कर में आपका शरीर क्षतिग्रस्त भी हो सकता है।
  • चूँकि मौसमी बुखार एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है, इसलिए रोगी को अलग कमरे में सुलाएं, उनके पास जाने से पहने मास्क पहन लें, रोगी द्वारा इस्तेमाल किये गए चीजों का प्रयोग न करें, रोगी का जूठन भी न खायें, साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।

मुंहासे दूर करने के घरेलू उपाय

मुंहासे त्वचा पर होने वाली एक प्रकार की सूजन है, जो तब होती है जब त्वचा की तेल ग्रंथियां जीवाणु से ग्रस्त हो जाती हैं।मुंहासे की समस्या से काफी लोग परेशान रहते हैं।बढ़ते उम्र के साथ मुंहासे की समस्या को देखा जाताहै। किशोरावस्था में मुंहासे होना आम बात है, लेकिन कई बार उस अवस्था को पार करने के बाद भी मुंहासे की समस्या बरकरार रहती है।कभी-कभी गले और पीठ पर भी मुंहासों को देखा जा सकता हैं जो दर्दनाक गांठे की तरह हो जाती है और जिसमें प्रायः मवाद भी आ जाता है। ये कोई बीमारी नहीं है लेकिन मुंहासे होने पर युवा लड़के और लड़कियों को शर्मिंदगी होती हैं और इसके कारण वे अपना आत्मविश्वास खो देते हैं।मुंहासे होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • तैलीय त्वचा के तेल ग्रंथियों से तेल का जब जरुरत से ज्यादा उत्स होने लगता है तो वही तेल धूल, मिट्टी, प्रदूषण आदि से उत्पन्न जीवाणु के साथ मिलकर त्वचा के छिद्रों को बंद करके मुंहासों को जन्म देता है।
  • इसके अतिरिक्त त्वचा की मृत कोशिकाओं को न हटाने से भी त्वचा के छिद्र बंद हो जाते हैं और मुंहासों की उत्पत्ति होती हैं।
  • बढ़ते उम्र के साथ शारीरिक और हॉर्मोन (Hormone) मेंबदलाव के कारण सिबेशियस (Sebaceous) ग्रंथि उत्तेजित होती है जिससे त्वचा की तेल ग्रंथियों से तेल की उत्पत्ति अधिक मात्रा में होने लगती है और मुंहासे आने लगते हैं।
  • मेकअप लगाने के बाद यदि उसे ठीक से साफ न किया जाये तो उसमें शामिल रसायनों के कारण भी मुंहासे हो सकते हैं।
  • कभी-कभी शरीर में पौष्टिकता के अभाव के कारण भी मुंहासे आ सकते हैं।

मुंहासे हटाने के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. बर्फ का प्रयोग : मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए कुछ बर्फ के टुकड़े लेकर मुंहासों पर लगाने से मुहासों वाले भाग में रक्त का संचार तेज हो जाता है, और ठंड के कारण जीवाणु भी मर जाते हैं।आप बर्फ के टुकड़ों को सीधे भी लगा सकते हैं या फिर साफ कपड़े में लपेटकर भी मुंहासों पर बर्फ लगा सकते हैं। इस प्रक्रिया से मुंहासे कम हो जायेंगे।
  2. शहद : शुद्ध शहद के उपयोग से मुंहासों से निजात पाया जा सकता है। शहद मुंहासों पर तुरंत असर करता है।एक छोटी-सी कटोरी में आप अपने जरुरत के अनुसार शहद लें, अब उस शहद में रुई को डूबोकर मुंहासों और अपनी पूरी त्वचा पर लगायें।आधे घंटे तक रखने के बाद गुनगुने पानी से अपना मुँह धो लें। इसके निरंतर प्रयोग से आपका चेहरा साफ हो जायेगा, त्वचा के छिद्र भी खुल जायेंगे और मुंहासे भी खत्म हो जायेंगे।
  3. नींबू : मुंहासे ठीक करने में नींबू की अहम् भूमिका है।नींबू में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा अधिक होती है जिसके प्रयोग से मुंहासे जल्दी सूख जाते हैं।एक जगह आधे नींबू का रस निचोड़ लें और उसमें दुगुनी मात्रा में ग्लिसरीनमिलाकर उसे उँगलियों की मदद से अपने मुंहासे वाले भाग पर लगायें, इससे आपके मुंहासों के मवाद सूख जायेंगे और सूजन भी कम हो जायेगा साथ ही चेहरे पर निखार भी आ जायेगा।
  4. गर्म पानी का भाप : गर्म पानी का भाप लेने से त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते हैं जो त्वचा के लिए जरुरी है। इससे त्वचा का मैल और अतिरिक्त तेल जो मुंहासों के कारण हैं, वो भी निकल जाते है।एक बड़े बर्तन में एक लीटर पानी डालकर उबालें फिर आँच बंद करके उस पानी को अपने चेहरे के सामने रखें, इस दौरान अपने सिर और गर्म पानी के उस बर्तन को एक बड़े कपड़े से ढक लें ताकि भाप उड़ न जाये। अपने चेहरे को झुकाकर अच्छे से भाप लें। उसके बाद अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें और तेल रहित मॉइस्चराइजर (Moisturiser) को अपने चेहरे पर लगायें।इस प्रक्रिया को निरंतर करने से चेहरे के मुंहासे आसानी से दूर हो सकते हैं।
  5. अंडा : अंडे का सफेद भाग मुंहासों को कम करने में सहायक होता है।एक अंडा फोड़कर उसके सफेद भाग को अलग कर लें, फिर उसे मुंहासों या मुंहासों से हुए दाग पर लगायें।दस से पंद्रह मिनट के बाद ठन्डे पानी से धो लें।इस उपाय से आपके मुंहासे भी कम होंगे साथ ही साथ मुंहासों के निशानों से भी आपको मुक्ति मिलेगी।
  6. बेकिंग सोडा (Baking soda) : बेकिंग सोडा भी मुंहासों को कम करने का एक कारगर उपाय है।आवश्यकतानुसार बेकिंग सोडा लेकर उसे थोड़े-से पानी के साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें और उस पेस्ट को मुंहासों और प्रभावित जगहों पर लगायें।इसके प्रयोग से मुंहासे जड़ से मिट जायेंगी और मुंहासों का कोई निशान भी नहीं रहेगा।
  7. टमाटर :टमाटर विटामिन ए (Vitamin A) से समृद्ध है जो त्वचा को पोषण देने में मदद करता है।टमाटर को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में पानी मिलाकर एक लुगदी रूपी मिश्रण तैयार कर लीजिए।इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाकर बीस मिनट तक छोड़ दें और फिर निर्धारित समय के बाद गुनगुने पानी से अपना चेहरा धो लें। इससे मुंहासे और उसके दाग दोनों ही मिट जायेंगे।
  8. नीम : नीम अपने जीवाणु प्रतिरोधक गुण के कारण जाना जाता है।इसे प्राकृतिक एस्ट्रिंजेंट (Astringent) की तरह इस्तेमाल किया जाता है।नीम की पत्तियों को पीस लें, अब उसमें एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी, आधा चम्मच हल्दी तथा उबटन तैयार करने के लिए आवश्यकतानुसार कच्चा दूध मिलायें। इन सबको अच्छे से मिलाकर अपनी त्वचा पर लगायें।इसके प्रयोग से मुंहासे भी कम होंगे और हर किस्म का दाग भी मिट जायेगा।
  9. चन्दन : चन्दन और गुलाबजल का मिश्रण मुंहासों को दूर करता है। तीन चम्मच चन्दन का पाउडर लें और उसमें आवश्यकतानुसार गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें।इसे अपनी उँगलियों की मदद से अपने चेहरे पर लगायें और पंद्रह मिनट तक छोड़ दें, फिर पानी से चेहरा धो लें। आप चन्दन के पाउडर की जगह पीसे हुआ चन्दन का भी प्रयोग कर सकते हैं।इसके निरंतर प्रयोग से आपके मुंहासे कम होंगे और आपको दाग-धब्बों से मुक्त त्वचा मिलेगी।
  • जायफल : यदि आप अपने चेहरे पर मुंहासे और उसके दाग से चिंतित हैं तो तुरंत परिणाम पाने के लिए जायफल का प्रयोग करें।दो चम्मच कच्चे दूध में रातभर थोड़ी-सी केसर भीगोकर रखें।सुबह इस मिश्रण में एक चम्मच जायफल का चूर्ण डालकर अच्छे से मिलाकर एक उबटन तैयार कर लें, फिर उस उबटन का प्रयोग मुंहासों और अपने पूरे चेहरे पर करें।बीस मिनट तक रखने के बाद अपना चेहरा धो लें।रोजाना इसका प्रयोग करने से आपको मुंहासे और दाग रहित त्वचा मिलेगी और आपके चेहरे पर भी निखार आ जायेगा।
  • मेथी के बीज : मेथी के बीजों में ऐसे एंजाइम्स (Enzymes) पाए जाते हैं जो त्वचा की रंगत को फीका पड़ने नहीं देता। थोड़े से दूध में एक चम्मच मेथी के बीज रातभर भीगोकर रखें।सुबह उसी को महीन पीसकर उबटन तैयार करके अपने चेहरे, गले और गर्दन पर लगायें।पच्चीस से तीस मिनट बाद अपने चेहरे को हाथों से स्क्रब (Scrub) करते हुए पानी से धो लें।इससे आपके मुंहासे और चेहरे के दाग-धब्बे मिट जायेंगे।
  • दही और खीरे का उबटन : दही त्वचा को नमी देने के साथ चेहरे के किसी भी दाग-धब्बे को हल्का करने में सहायक होता है। खीरा चेहरे को साफ करके ताजगी प्रदान करता है।खीरे के कुछ टुकड़ों को पीसकर उसमें एक चम्मच दही मिलाकर एक उबटन तैयार कर लें।अब उसी उबटन को मुंहासों और प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें और बीस मिनट के लिए छोड़ दें। निर्धारित समय के बाद अपना चेहरा धो लें।हफ्ते में तीन दिन इस उबटन का प्रयोग करें और पंद्रह दिनों में फर्क महसूस करें।
  • धनिया या पुदीना का रस : धनिया और पुदीना त्वचा के लिए बहुत ही लाभदायक हैं। ये दोनों ही मुंहासों को कम करने और चेहरे के दाग को हटाने में सहायक हैं।दो से तीन चम्मच धनिया के पत्तों अथवा पुदीना के पत्तों का रस लेकर उसमें बहुत ही थोड़ी-सी मात्रा में हल्दी मिलाएं, और रोजाना रात को सोने जाने से पहले इस मिश्रण को लगायें। पंद्रह मिनट बाद अपना चेहरा धो लें।रोजाना प्रयोग से आपके मुंहासे दूर हो जायेंगे और चेहरा भी बेदाग हो जायेगा।
  1. एलोवेरा और हल्दी : एलोवेरा और हल्दी दोनों में ही जीवाणु प्रतिरोधक गुण है साथ ही ये दोनों त्वचा की रंगत को फीका पड़ने नहीं देते।थोड़ी-सी पीसी हुई हल्दी में एक चम्मच एलोवेरा का रस मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें और उसे अपने चेहरे और मुंहासों पर लगायें।बीस मिनट बाद अपना चेहरा धो लें।इसके निरंतर प्रयोग से मुंहासे कम होंगे और त्वचा की रंगत भी वापस आ जायेगी।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों के प्रयोग से आपको मुंहासों और मुंहासों के कारण होने वाले दाग-धब्बों से छुटकारा मिल जायेगा और आपको बेदाग और निखरी हुई त्वचा मिल जायेगी।यदि इन नुस्खों के प्रयोग के बाद भी मुंहासे निकलना कम न हों तो आप किसी अच्छे त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लें और उचित इलाज करवाएं।चेहरा हमारे व्यक्तित्व को दमदार बनाता है, अतः उसकी देखभाल करना हमारा दायित्व है। मुंहासे होने पर कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी हैं, जैसे :

  • यदि चेहरे पर एक के बाद एक मुंहासे निकलने लगें तब किसी भी तरह के स्क्रबर (Scrubber) का प्रयोग न करें, इससे मुंहासे बढ़ सकते हैं।
  • मुंहासे होने पर उसे हाथ या नाख़ून से न ही स्पर्श करें और न ही दबाएँ, इससे मुंहासों के निशान बन सकते हैं।
  • ज्यादा मात्रा में पानी पीयें इससे आपका पाचन तंत्र सही रहेगा।
  • अधिक मात्रा में बाहर का खाना या मसालेदार खाना न खायें।
  • पौष्टिक आहार का सेवन करें।
  • यदि आप किसी कारण से मेकअप का प्रयोग करते हैं तो बाद में उसे अच्छे से जरुर निकाल दें।
  • मानसिक तनाव से दूर रहें और पूरे आठ घंटे तक सोयें।

माइग्रेन के घरेलू उपचार

माइग्रेन एक गंभीर बीमारी है जिसमें रोगी को बेचैन कर देने वाला सिरदर्द होता है ।  माइग्रेन का दर्द बहुत ही तेज होता है जिसमें सिर के एक भाग में ही तेज दर्द होने लगता है ।  इसे अर्धकपारी भी कहते है । यह दर्द अपने-आप शुरू होता है और कई बार तो दवाई लेने पर भी यह दर्द नहीं जाता । कभी-कभी सिरदर्द के अधिक बढ़ जाने पर उल्टियाँ भी आ सकती है । माइग्रेन के कुछ रोगियों को दर्द होने पर आवाज और रोशनी से भी समस्या होने लगती है । यह दर्द सिर से शुरू होकर आँख, जबड़े और कनपटी तक फैल जाता है ।

यह दर्द कई हफ्तों या महीनों तक या फिर सालों तक एक खास अन्तराल में होता है । यह दर्द कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है । आज तो यह बीमारी बहुत ही आम बीमारी हो चुकी है । माइग्रेन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; बहुत अधिक चिंता करना, देर रात तक काम करना, मानसिक दुर्बलता, जुकाम, कब्ज, हिस्टीरिया (Histeria), नशीली पदार्थ और शराब का सेवन आदि । कुछ घरेलू उपचारों के माध्यम से माइग्रेन के दर्द से निजात पाया जा सकता है ।

माइग्रेन के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. सेब का सिरका : सेब का सिरका माइग्रेन के दर्द को दूर करने में सहयता करता है । इतना ही नहीं सेब का सिरका शरीर संबंधी कई रोगों के लिए लाभदायक हैं, जैसे; रक्तचाप को नियंत्रित करना, रक्त में चीनी की मात्रा को नियंत्रित करना, हड्डियों के दर्द को कम करना, वजन घटाने में मदद करना, कब्ज से मुक्ति दिलाना आदि । माइग्रेन के उपचार के लिए एक चम्मच सेब के सिरके को एक गिलास पानी में मिलायें । उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोजाना दिन में एक बार पीने से माइग्रेन के दर्द से मुक्ति मिलती है ।
  2. अदरक : माइग्रेन के दर्द से छुटकारा पाने के लिए अदरक का प्रयोग बहुत ही असरदार है । अदरक में प्रतिजीवाणु पाये जाते हैं, जो माइग्रेन के दर्द को मिटाने में सहायक होते हैं । दो से तीन कप पानी में एक अदरक का टुकड़ा बारीक काटकर उबाल लें, फिर उसे छानकर, उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से माइग्रेन के दर्द से राहत मिलती है ।
  3. अलसी के बीज (Flaxseed) : अलसी के बीजों में पाये जाने वाले ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acid) और फाइबर (Fiber) माइग्रेन के दर्द को कम करने में सहायक है । सुबह खाली पेट दो चम्मच अलसी के बीज चबाकर खा सकते हैं अथवा अलसी के तेल का प्रयोग भी कर सकते हैं । इसके सेवन से पेट भी साफ रहता है ।
  4. मछली का तेल : मछली के तेल का सेवन करने से माइग्रेन का दर्द कम होता है । मछली का तेल रक्तचाप को नियंत्रित करके दिल की धड़कनों को सुचारू रूप से चलाता है । मछली के तेल में भी ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega-3 fatty acid) की मात्रा पायी जाती है । बाजार से मछली खरीदते समय मछली का तेल जरुर लें और उसे साफ करके तौलकर खा सकते है ।
  5. अंगूर : अंगूर का रस माइग्रेन के दर्द से मुक्ति दिलाने का काफी महत्वपूर्ण विकल्प है । आप साबुत अंगूर का सेवन कर सकते हैं अथवा अंगूर को पीसकर उसका रस निकालकर उसमें थोड़ी-सी मात्रा में पानी और शहद मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं ।
  6. बंधगोभी की पत्तियां : बंधगोभी के पौधे की पत्तियां माइग्रेन के दर्द का प्रभावी उपचार है । बंधगोभी के पौधे के कुछ पत्तियों को मसले और उन्हें एक कपड़े में डालकर सिर के आसपास बांध लें । इसे कुछ समय तक बांध कर रखें । आप इसे बांधकर सो भी सकते हैं । इससे आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी ।
  7. लहसुन : लहसुन में जलनरोधी और एंटीबायोटिक (Antibiotic) गुण होते हैं और यह माइग्रेन का काफी बेहतरीन उपचार है । कुछ लहसुन की कलियों को पीसकर एक लेप तैयार करके माथे पर लगाने से दर्द कम हो जाता है । इसके अलावा सुबह खाली पेट लहसुन की दो कलियों को चबाकर खा सकते हैं । आप अपने भोजन में भी लहसुन को शामिल करके माइग्रेन के दर्द से निजात पा सकते हैं ।
  8. तुलसी : तुलसी के पत्तों की खुशबू-भर से ही माइग्रेन का दर्द काफी हद तक ठीक हो जाता है । तुलसी दर्द को ठीक करने में मदद करता है । आप तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को चबाकर खा सकते है । इससे जुकाम की समस्या से भी राहत मिलेगी । इसके अलावा आप तुलसी की चाय बनाकर भी पी सकते हैं । एक कप पानी में दस से बारह तुलसी के ताजे पत्तों को डालकर धीमी आँच पर उबालें । फिर पानी के हल्का ठंडा होने पर छान लें । उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीयें । इस उपचार को निरंतर करने से माइग्रेन के दर्द से आपको राहत मिलेगी ।
  9. धनिया के बीज : एक कप पानी को उबालें, फिर उसमें एक चम्मच धनिया के बीज मिलाये और फिर पानी से उठने वाले भाँप को सूंघें । इससे माइग्रेन के दर्द से काफी हद तक छुटकारा मिल जाता है । वैकल्पिक तौर पर आप धनिया के कुछ बीजों को चबाकर भी खा अकते हैं या फिर अपने भोजन में भी इसे शामिल कर सकते हैं ।
  10. योग : रोजाना नियमित रूप से योग या व्यायाम करने से माइग्रेन की समस्या से आपको राहत मिल सकती है ।
  11. हिंग : हिंग में भी माइग्रेन के दर्द को कम करने की क्षमता है । तीन से चार चम्मच पानी में हिंग को घोलकर उसके गंध को सूंघ सकते हैं अथवा थोड़े-से पानी के साथ हिंग मिलाकर एक लेप तैयार करके उसे अपने सिर पर लगा सकते हैं । ये दोनों तरीके माइग्रेन के दर्द को कम करने में मददगार हैं ।
  12. कपूर : कपूर माइग्रेन के दर्द को कम करने में मदद करता है । थोड़े-से घी में कपूर मिलाकर माथे पर लगाने से माइग्रेन के दर्द से निजात मिल सकता है ।
  13. नींबू का छिलका : नींबू के छिलके में भी माइग्रेन के दर्द को कम करने की क्षमता है । नींबू के छिलके को पीसकर एक लेप तैयार कर लें । उसी लेप को माथे पर लगाने से माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिलता है ।
  14. दूध : वसा (Fat) रहित दूध या उससे बने पदार्थ माइग्रेन के दर्द को ठीक करने में सहयक है । इसमें विटामिन बी (Vitamin B) होता है जो कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करती है । इसलिए आप वसा रहित दूध का सेवन करके माइग्रेन के दर्द से निजात पा सकते हैं ।
  15. हरी पत्तेदार सब्जियां : हरी पत्तेदार सब्जियों में मैग्नीशियम (Magnesium) की मात्रा अधिक होती है जो माइग्रेन के दर्द को ठीक करने में मदद करता है । अतः अपने रोजाना के खाद्य में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें ।
  16. लैवेंडर तेल (Lavender Oil) : लैवेंडर तेल की खुशबू इतनी अच्छी होती है कि इसकी सुगंध से ही माइग्रेन का दर्द कम हो जाता है । दो कप उबलते हुए पानी में दो से चार बूंद लैवेंडर के तेल को मिलायें, फिर पानी से उठने वाली भाँप को सूंघें । इस उपचार से आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी ।
  17. मक्खन और मिश्री : मक्खन में मिश्री मिलाकर चबा चबाकर खाने से माइग्रेन के दर्द से राहत मिलती है ।
  18. कालीमिर्च : पाँच से छः कालीमिर्च चबा चबाकर खायें और फिर ऊपर से दो चम्मच देशी घी पीयें । इस उपचार से माइग्रेन धीरे-धीरे ठीक हो जाता है ।
  19. गाजर का रस : माइग्रेन में गाजर बहुत ही लाभकारी होता है । आप गाजर का रस निकालकर पी सकते है, या फिर गाजर के रस को चकुंदर के रस के साथ भी ले सकते है अथवा पालक के पत्तियों के रस के साथ भी ले सकते है । इसके नियमित सेवन से माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिल सकता है ।
  20. गुड़ : माइग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए बारह ग्राम गुड़ को छः ग्राम देशी घी के साथ खा सकते हैं । इसके निरंतर सेवन से माइग्रेन के दर्द से निजात मिल सकता है ।
  21. कॉफ़ी (Coffee) : माइग्रेन के दर्द का प्रभाव एक कप कॉफ़ी पीने से कम हो जाता है । कॉफ़ी में मौजूद कैफीन (Caffeine) न सिर्फ माइग्रेन के कारकों को रोकता है बल्कि इसे पैदा करने वाली रक्त की धमनियों को भी संकुचित करता है । इसलिए माइग्रेन का दर्द होने पर उससे राहत पाने के लिए एक कप कॉफ़ी का सेवन करें ।
  22. बादाम : माइग्रेन का दर्द होने पर बादाम चबाकर खा सकते हैं । इससे माइग्रेन के दर्द से तुरंत राहत मिल जायेगी ।
  23. पुदीना : पुदीना में पाये जाने वाले आवश्यक तत्व माइग्रेन के दर्द को दूर करने में मददगार है । आप पुदीने की चाय बनाकर पी सकते है । एक कप पानी में पुदीने के दस से बारह ताजे पत्तों को डालकर, धीमी आँच पर उबालें । फिर उसे छानकर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से माइग्रेन के दर्द से राहत मिलेगी । आप पुदीने के तेल को अपने माथे पर लगाकर हलके हाथों से मालिश भी कर सकते हैं । इससे भी माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिलता है ।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिल सकता है । यदि इन उपायों को अपनाकर भी दर्द बरकार रहें तो डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जांच करवाएं । माइग्रेन की बीमारी होने पर कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए, जैसे :

  • किसी भी तरह के खट्टे पदार्थों का सेवन न करें । अचार, पानी-पूरी, आलूबुखारा और इन जैसे पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें । इससे माइग्रेन का दर्द बढ़ सकता है ।
  • बाहर का अस्वास्थ्यकर खाना बिल्कुल न खायें । आजकल जंक फूड (Junk food) का बोलबाला है, लेकिन इस तरह के खाद्य माइग्रेन के रोगियों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं ।
  • धूम्रपान और मद्यपान बिल्कुल न करें । माइग्रेन के रोगियों को किसी भी तरह के नशीली पदार्थों से दूर रहना चाहिए ।
  • माइग्रेन के रोगी को ध्वनि और प्रदूषित जगहों से दूर रहना चाहिए ।
  • माइग्रेन के रोगी को ज्यादा से ज्यादा आराम करना चाहिए ।
  • पूरी नींद लें और ज्यादा से ज्यादा पानी पीयें ।

बवासीर के लिए घरेलू उपचार

बवासीर या पाइल्स एक खतरनाक बीमारी है।गुदा-भाग में वाहिकाओं की वे संरचनाएं हैं जो मल नियंत्रण में सहायता करती हैं।जब वे सूज जाते हैं या बड़े हो जाते हैं तो वे रोगजनक या बवासीर हो जाते हैं।इस रोग में गुदा-भाग की भीतरी दीवार में मौजूद खून की नसें सूजकर फूल जाती हैं। इससे उनमें कमजोरी आ जाती है और मलत्याग के वक्त जोड़ लगाने से या कड़े मल के रगड़ के कारण खून की नसों में दरार पड़ जाती है और उसमें से खून बहने लगता है। इस बीमारी में गुदाभाग में मस्से हो जाते हैं।मलत्याग के समय इन मस्सों में असहनीय पीड़ा होती है।बवासीर के कुछ लक्षण हैं, जैसे; मलद्वार के आस-पास खुजली होना; उठते, बैठते और चलते समय गुदा-भाग में दर्द होना; मलत्याग के समय कष्ट होना; मलद्वार के आस-पास पीड़ादायक सूजन होना; मलत्याग के बाद रक्त का स्राव होना; मलत्याग के बाद मस्सों का बाहर निकलना; कफ या श्लेष्मिक द्रव का स्राव होना; लम्बे समय तक कब्ज रहना इत्यादि।आम तौर पर बवासीर के दो प्रकार बताये गए हैं,अंदरूनी बवासीर और बाहरी बवासीर।

अंदरूनी बवासीर में मलद्वार के भीतर मस्सा हो जाता है और अगर रोगी को साथ में कब्ज भी हो तो मलत्याग के समय जोर लगाने पर यह मस्सा छिल जाता है और मलद्वार से खून आने लगते है,साथ ही असहनीय पीड़ा होने लगती है। इसमें सूजन को छुआ नहीं जा सकता पर महसूस किया जा सकता है।बाहरी बवासीर में मस्सा बाहर की तरफ होता है और इस स्थिति में दर्द नहीं होता, परन्तु मलत्याग के समय मस्से पर रगड़ की वजह से बहुत अधिक खुजली व पीड़ा होती है।इस स्थिति में सूजन को महसूस किया जा सकता है।बवासीर की दो अवस्थाएँ हैं, खूनी और बादी। खूनी बवासीर में किसी तरह का दर्द नहीं होता, सिर्फ खून निकलता है।इस अवस्था में मस्सा अन्दर की तरफ होता है जो मलत्याग के समय जोर देने से बाहर आने लगता है।कभी-कभी मस्सा अपने-आप ही अन्दर चला जाता है लेकिन स्थिति ख़राब होने पर या यह रोग बहुत पुराना होने पर हाथ से दबाकर ही मस्से को अन्दर की तरफ किया जा सकता है। कभी-कभी तो हाथ से दबाने से भी मस्सा अन्दर नहीं जाता।बादी बवासीर की स्थिति में पेट ख़राब रहता है, कब्ज बना रहता है, गैस बनती है। इसमें जलन, दर्द, खुजली, शरीर में बेचैनी इत्यादि होती हैं।

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इसमें मस्सा अन्दर की तरफ होता है।मस्सा अंदर होने की वजह से मलाशय का रास्ता छोटा पड़ता है और नसें फट जाती है और वहां घाव हो जाता है।इस रोग को फिशर (Fisher) भी कहते है, जिसमें असहनीय पीड़ा और जलन होती है।बवासीर पुराना होने पर भगन्दर हो जाता है, जिसे अंग्रेजी में फिस्टुला (Fistula) कहते है।भगन्दर में पखाने के रास्ते के बगल से एक छेद हो जाता है जो पखाने की नली में चला जाता है और फोड़े की शक्ल में फटता, बहता और सूखता रहता है।कुछ दिन बाद इसी रस्ते से पखाना भी आने लगता है। भगन्दर की आखरी अवस्था में धमनियां फट जाती हैं और बवासीर कैंसर का रूप ले लेता है जिसे रेक्टम कैंसर (Rectum Cancer) कहते है और जो जानलेवा साबित होता है। बवासीर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे; लम्बे समय तक शौच को रोकना; कब्ज की समस्या होना; अधिक मसालेदार खाद्य का सेवन करना; देर रात तक जागना; लगातार खड़े रहना या एक ही जगह बैठे रहना; आनुवांशिकता इत्यादि।

बवासीर से राहत के लिए घरेलू नुस्खें

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  1. ठंडी सेंक : बवासीर होने पर ठंडी सेंक देने से दर्द कम होता है और यह खुजली से भी तुरंत आराम दिलाती है।ठंडी सेंक सूजन को कम करने में मदद करता है जिससे मलत्याग करने में आसानी होती है।एक साफ कपड़े में बर्फ के कुछ टुकड़े लेकर उसका प्रयोग बवासीर के ऊपर करें।दिन में कई बार इसका उपयोग करें।रोजाना नियमित रूप से दिन में तीन बार दस मिनट तक इसका प्रयोग करें।इससे बवासीर से राहत मिलेगी।
  2. एलोवेरा (Aloe Vera) : बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने में एलोवेरा एक बेहतरीन उपाय है। बवासीर का प्राथमिक स्तर होने पर एलोवेरा के प्रयोग से वह सम्पूर्ण रूप से ठीक हो सकता है।यह अंदरूनी और बाहरी बवासीर, दोनों के लिए ही फायदेमंद है। एलोवेरा का एक पत्ता काटकर उसके अन्दर से रस निकाल लें, फिर उसी रस का प्रयोग बवासीर के ऊपर करें।इसके अलावा आप एलोवेरा की पत्ती के किनारे से सारे काँटें निकालकर फेंक दें।अब उस पत्ती को छोटे-छोटे टुकडों में काटकर एक बर्तन में रखकर फ्रिज (Fridge) में रख दें।ठंडा होने पर उसी ठन्डे एलोवेरा का प्रयोग बवासीर के ऊपर करें। इससे जलन और सूजन कम हो जायेगी।
  3. नींबू का रस : नींबू में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो बवासीर की समस्या से निपटने में काफी मददगार है।एक रुई की मदद से ताजे नींबू के रस का प्रयोग सीधे सूजन वाली जगह पर किया जा सकता है।इससे बवासीर का दर्द कम हो जायेगा।इसके अलावा आप डेढ़ चम्मच नींबू का रस, अदरक का रस, पुदीने का रस और शहद मिलाकर दिन में एक बार इसका सेवन भी कर सकते है।इससे भी बवासीर से राहत मिलेगी।
  4. जैतून का तेल (Olive oil) : बवासीर के उपचार के लिए जैतून का तेल एक बेहतरीन उपाय है।जैतून के तेल में जलनरोधी गुण हैं।यह रक्त की धमनियों की लोच में वृद्धि करता है।यह मल की कठोरता को भी काफी हद तक कम करता है. रोजाना अपने खाद्य के साथ एक चम्मच जैतून के तेल का सेवन कर सकते हैं।इसके अलावा कुछ बेर के पत्तों से रस निकालकर उसे जैतून के तेल के साथ मिलाकर बवासीर के ऊपर लगाने से दर्द और सूजन से राहत मिलेगी।
  5. किशमिश : रात को सौ ग्राम किशमिश पानी में भीगो दें।सुबह किशमिश के साथ उसी पानी का सेवन करें।रोजाना नियमित रूप से इस उपचार का प्रयोग करने से पाचन तंत्र सही रहता है एवं कब्ज और बवासीर की समस्या से राहत मिलती है।
  6. बड़ी इलायची : बड़ी इलायची बवासीर को दूर करने का बहुत ही अच्छा उपचार है।पचास ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर भुन लीजिए।ठंडी होने पर उसे पीसकर एक वायुरोधी डब्बे में रख दीजिए।रोजाना सुबह बड़ी इलायची के इसी चूर्ण को पानी के साथ खाली पेट लेने से बवासीर से राहत मिलती है।
  7. छाछ : छाछ बवासीर के इलाज का एक बेहतरीन विकल्प है।एक गिलास छाछ में एक-चौथाई चम्मच अजवाइन का चूर्ण और एक ग्राम काला नमक मिलाकर रोजाना दोपहर के खाने के बाद लेने से बवासीर की समस्या से राहत मिलेगी।छाछ बवासीर के दर्द को कम करता है और शरीर में नमी को बनाये रखता है।
  8. सेब का सिरका :सेब का सिरका बवासीर की समस्या को दूर करने में मदद करता है।बाहरी बवासीर के उपचार के लिए थोड़ी-सी रुई लेकर उसे सेब के सिरके में भीगोकर प्रभावित क्षेत्रों पर लगायें।पहले आपको थोड़ी जलन जरुर होगी, लेकिन इस प्रयोग से खुजली और दर्द दोनों ही कम हो जायेगा। इसके अलावा अंदरूनी बवासीर के लिए एक कप पानी में आधा चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से खून निकलने की समस्या से छुटकारा मिलता है।
  9. फाइबर (Fiber) युक्त भोजन :खाना आसानी से पचाने के लिए और मलाशय को स्वस्थ रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन का सेवन फायदेमंद है। फाइबर युक्त खाद्य मल को नर्म करने और आँतों की सारी प्रणाली को साफ-सुथरा रखने में सहायता करते हैं तथा कब्ज की समस्या से भी राहत मिलती है।दाल, सूखे मेवे, पटसन के बीज, बीन्स, ब्रोकोली, नाशपाती, पपीता, विभिन्न सब्जियाँ, फल इत्यादि फाइबर युक्त आहार हैं।
  • जीरा : बवासीर के कई दुष्परिणामों से निपटने के लिए जीरा मददगार है। जीरे को भुनकर उसका चूर्ण बना लें।रोजाना एक चम्मच जीरे का चूर्ण एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से बवासीर से राहत मिलती है।आप छाछ के साथ भी जीरे का चूर्ण मिलाकर उसका सेवन कर सकते हैं।दो लीटर छाछ में पचास ग्राम जीरा पाउडर और थोड़ा-सा नमक मिलायें।प्यास लगने पर इसी पेय का सेवन करें।एक हफ्ते तक यह प्रयोग करने से बवासीर के मस्से ठीक हो जाते है।

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उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर बवासीर से राहत मिल सकती है।बवासीर को शुरूआती दौर में ही आसानी से ठीक किया जा सकता है, इसलिए बवासीर की शंका होने पर डॉक्टर की सलाह लेकर उपयुक्त जाँच करवाना बेहद जरुरी है। बवासीर होने पर कभी-कभी ऑपरेशन भी करवाना पड़ सकता है।इसलिए यह रोग होने पर कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी हैं, जैसे :

  • यह रोग कब्ज की समस्या के कारण हो सकता है, अतः रेशेदार सब्जियों, फलों और सलाद का सेवन करें क्योंकि इस तरह के खाद्य कब्ज को खत्म करने में सहायक हैं।
  • तेज मिर्च और मसालेदार खाद्य का सेवन न करें।
  • दिनभर में 6-7 गिलास पानी जरुर पीयें ताकि पाचन तंत्र सही रूप से कार्य करें।
  • चाय, कॉफी का अधिक सेवन न करें।
  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • जब भी कभी मलत्याग का वेग आता है तो उसे रोककर न रखें और मलत्याग के समय ज्यादा जोर न लगायें।
  • अधिक देर तक एक ही जगह बैठे या खड़े न रहें।
  • पूरी नींद लें।
  • योगासन के द्वारा इस रोग से राहत मिल सकती है अतः नियमित रूप से योगासन करें।

मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) के लिए घरेलू उपचार

वर्तमान जीवन शैली में मधुमेह या डायबिटीज़ (Diabetes) बड़ी तेजी से फैल रहा है।संसार भर में मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, विशेष रूप से भारत में।मधुमेह एक ऐसा घातक रोग है जो कई असाध्य रोगों का जन्मदाता है, जैसे, दिल की बीमारी या दिल का दौरा पड़ना, गुर्दा खराब होना, अंधापन आदि। मधुमेह रोग तब उत्पन्न होता है जब आहार से अवशोषित शर्करा, कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाती है और रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ने लगता है। रक्त में शर्करा का स्तर तभी बढ़ता है जब शरीर पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन (Insulin) उत्पन्न नहीं कर पाता या जब शरीर की कोशिकाएं उत्पन्न हो रही इन्सुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करती।इन्सुलिन एक हॉर्मोन (Hormone) है जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) और वसा (Fat) के मेटाबोलिज्म (Metabolism) को नियंत्रित करता है।

मेटाबोलिज्म वह प्रक्रिया है जिसमें शरीर खाने को पचाता है ताकि शरीर को ऊर्जा (Energy) मिल सके और उसका सही विकास हो सके।हम जो खाना खाते है वो पेट में जाकर ऊर्जा में बदल जाता है जिसे ग्लूकोज़ (Glucose) कहते है। इस ग्लूकोज़ को हमारे शरीर में मौजूद लाखों कोशिकाओं के भीतर पहुँचाने का कार्य हमारा अग्न्याशय (Pancreas) करता है जो पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन उत्पन्न करता है। बिना इन्सुलिन के ग्लूकोज़ कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता और कोशिकाओं के अन्दर ग्लूकोज़ के पहुँचने के बाद हमारी कोशिकाएं उसी ग्लूकोज़ को जलाकर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। जब यह सम्पूर्ण प्रक्रिया सामान्य रूप से नहीं हो पाती तो व्यक्ति मधुमेह रोग से ग्रस्त हो जाता है।मधुमेह रोग के कुछ लक्षण होते हैं, जैसे, बार-बार पेशाब लगना, अधिक प्यास लगना, शरीर में घाव होने पर जल्दी ठीक न होना, बिना काम किये ही थकान महसूस करना, त्वचा में संक्रमण होना या खुजली होना, चीजों का धुंधला नजर आना, अचानक वजन घट जाना आदि। यदि इनमें से कुछ लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत रक्त में शर्करा की जाँच करवाएं।मधुमेह के कई कारण हो सकते हैं, जैसे :

  • यह रोग आनुवांशिक है। माता-पिता या परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्य से यह रोग दूसरी पीढ़ी में आ सकता है।
  • कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) या वसा (Fat) युक्त खाद्य पदर्थों जैसे, चीनी, गुड़, मिठाई, चॉकलेट, चावल, आलू, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, तला और मसालेदार खाना, घी, मक्खन, लाल मांसआदि का अधिक मात्रा में सेवन करने से यह रोग हो सकता है।
  • मद्यपान और धूम्रपान भी मधुमेह रोग का कारण है।
  • अनुचित दिनचर्या और जीवन शैली इस रोग के कारण हो सकते हैं। परिश्रम न करना, व्यायाम न करना, मानसिकतनाव, चिंता भी इस रोग के कारण हैं।

मधुमेह के कुछ प्रकार हैं, जैसे :

  • टाइप 1 डायबिटीज़ : यह तब होता है जब शरीर इन्सुलिन (Insulin) बनाना बंद कर देता है।ऐसे में मरीज को डॉक्टर की सलाह से इन्सुलिन का इंजेक्शन लेना पड़ता है।इसे इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज़ मेलिटस कहते है (Insulin dependent diabetes mellitus or IDDM)।
  • टाइप 2 डायबिटीज़ : यह तब होता है जब शरीर की कोशिकाएं उत्पन्न हो रही इन्सुलिन (Insulin) पर प्रतिक्रिया नहीं करती।इसे नॉन-इन्सुलिन-डिपेंडेंट डायबिटीज़ मेलिटस कहते है (Non-insulin-dependent diabetes mellitus or NIDDM)।
  • जैस्टेशनल डायबिटीज़ (Gestational diabetes) : यह मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं को होता है। ऐसा नहीं है कि इन महिलाओं को पहले से ही यह बीमारी हो, लेकिन गर्भावस्था के दौरान खून में ग्लूकोस की मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाने के कारण मधुमेह हो जाता है।2-3 प्रतिशत गर्भावस्था में ऐसा होता है।इसके दौरान गर्भावस्था में मधुमेह से संबंधित जटिलताएं बढ़ जाती हैं तथा भविष्य में माता और संतान को भी मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है।

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मधुमेह के लिए घरेलू नुस्खें : मधुमेह होने पर इसे जड़ से दूर करना मुश्किल हो जाता है पर कुछ घरेलू नुस्खों के द्वारा इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

  1. मेथी दाना :मेथी के दाने में प्रचुर मात्रा में फाइबर (Fibre) होता है जो मधुमेह के लिए बहुत ही उपयोगी है।रातभर एक से दो चम्मच साफ मेथी के दाने पानी में भीगोकर रखें। सुबह खाली पेट दानों के साथ उसी पानी का सेवन करें। इसके अलावा मेथी का प्रयोग अपने खाद्य पदार्थों में भी कर सकते हैं या फिर मेथी के दानों को पीसकर चूर्ण बनाकर हल्के गर्म दूध या पानी के साथ भी ले सकते हैं। कुछ महीनों तक नियमित रूप से मेथी के दानों का सेवन करने से शर्करा का स्तर कम हो जाता है।
  2. व्यायाम : व्यायाम से रक्त में शर्करा स्तर कम हो जाता है तथा ग्लूकोज़ का उपयोग करने के लिए शारीरिक क्षमता पैदा होती है।इसके अलावा प्रतिघंटा 6 कि.मी. की गति से चलने पर 30 मिनट में 135 कैलोरी (Calorie) घटता है और साईकिल चलाने से लगभग 200 कैलोरी घटती है। इसलिए मधुमेह होने पर रोजाना नियमित रूप से व्यायाम करना, चलना और हो सके तो साईकिल चलाना अत्यावश्यक हैं।
  3. आंवला : आंवला विटामिन सी (Vitamin C) से समृद्ध है जो अग्न्याशय (Pancreas) की कार्यक्षमता को बढ़ाकर इन्सुलिन के उत्पन्न होने में मदद करता है।आँवले का बीज निकालकर उसे पीस लें और उसका रस निकाल लें। फिर एक गिलास गुनगुने पानी में दो चम्मच आँवले का रस मिलाकर पीयें।इसके अलावा एक कप करेले के रस में एक चम्मच आँवले का रस मिलाकर भी पी सकते हैं।रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।
  4. हरी चाय या ग्रीन टी (Green Tea) : रोजाना खाली पेट हरी चाय पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।हरी चाय में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) होता है जो शरीर के टोक्सिन (Toxin) को दूर करने में मदद करता है साथ ही रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में भी सहायक है।
  5. जामुन : जामुन मधुमेह का एक बेहतरीन उपचार है।जामुन के पेड़ का हर भाग इस रोग के लिए बहुत ही लाभदायक हैं।जामुन के पेड़ के पत्ते, छाल, फल, बीज, सभी शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखता है।आप साबुत जामुन खा सकते हैं अथवा जामुन के पत्तों या उसके बीजों कोपीसकर चूर्ण बनाकर एक गिलास गुनगुने पानी के साथ लें सकते हैं।
  6. तुलसी :तुलसी मेंएंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) है जो शरीर को स्वस्थ रखता है, साथ ही इसमें आवश्यक तत्व हैं जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। रोजाना खाली पेट दो चम्मच ताजे और साफ तुलसी के पत्तों का रस पीने से मधुमेह में फायदा होता है।
  7. आम के पत्ते : आम के पत्ते मधुमेह का एक और बेहतरीन उपचार है।15 ताजे और साफ आम के पत्तों को एक गिलास पानी में रातभर भीगोकर रखें। सुबह उसी पानी को छानकर खाली पेट पीने से शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है।इसके अलावा आप आम के कुछ पत्तों को छाँव में सुखाकर उसे पीसकर चूर्ण बना लें। रोजाना दिन में दो बार डेढ़ चम्मच उस चूर्ण का सेवन करने से मधुमेह में फर्क पड़ेगा।
  8. करेला :करेला मधुमेह को नियंत्रित रखने का बहुत ही अच्छा उपचार है।यह अग्न्याशय (Pancreas) से इन्सुलिन(Insulin)के स्राव को बढ़ाता।एक करेले का बीज निकालकर उसे पीसकर रस निकाल लें और उसमें थोड़ा-सा पानी मिलाकर रोजाना सुबह खाली पेट पीयें।नियमित रूप से कम-से-कम दो महीनों तक इसका सेवन करें।इसके अलावा आप अपने रोजाना के डाइट (Diet) में करेले की सब्जी को शामिल कर सकते हैं।
  9. नीम :नीम रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।रोजाना एक गिलास नीम के पत्तों का रस पीने से मधुमेह में फर्क पड़ता है।
  • दालचीनी : दालचीनी इन्सुलिन के कार्य को गति प्रदान करने में मदद करता है। इसमें बायोएक्टिव (Bioactive) तत्व हैं जो मधुमेह को नियंत्रित करता है।लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि अत्यधिक मात्रा में दालचीनी का सेवन करने से लीवर को क्षति पहुँच सकता है।इसलिए पूरे दिन में एक से दो चाय चम्मच (Teaspoon) से अधिक दालचीनी का सेवन न करें। एक कप गुनगुने पानी में डेढ़ चाय चम्मच दालचीनी का चूर्ण मिलाकर रोजाना नियमित रूप से सेवन करें। इसके अलावा तीन से चार साबुत दालचीनी एक कप पानी के साथ उबालें और 20 मिनट तक उसे धीमी आँच पर पकाएं।फिर थोड़ा ठंडा होने पर उसे पीयें।इस पेय को रोजाना दिन में एक बार तब तक पीयें जब तक शर्करा का स्तर कम न हो।
  • करी पत्ता : करी पत्ता में मौजूद आवश्यक तत्व शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है।मधुमेह होने पर रोजाना 10-12 साफ और ताजे करी पत्ते का सेवन करने से फर्क पड़ता है।आप अपने खाद्य पदार्थों में भी करी पत्ता डाल सकते हैं या 15 हफ़्तों तक करी पत्ते के चूर्ण का सेवन भी कर सकते हैं।
  • ब्रोकोली : विटामिन ए और सी से समृद्ध ब्रोकोली रक्त में उच्च शर्करा के स्तर को कम करने और नियंत्रित रखने में मददगार है। ब्रोकोली की सब्जी बनाकर खा सकते हैं या सूप आदि के साथ भी इसका सेवन कर सकते हैं।
  • राजमा :राजमा में आवश्यक मिनरल (Minerals) हैं। इसके नियमित सेवन से मधुमेह और उसके दुष्प्रभावों को नियंत्रित किया जा सकता हैं।
  • बीन :बीन इन्सुलिन उत्पन्न करने में अग्न्याशय (Pancreas) की क्षमता को बढ़ा देता है। मधुमेह के शिकार लोगों को रोजाना बीन की सब्जी खानी चाहिए।

उपर्युक्त प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों के द्वारा रक्त में शर्करा के स्तर को कम करके मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता हैं।इसके अलावा मधुमेह के रोगी के लिए अच्छे चिकित्सक की सलाह लेना भी आवश्यक है, क्योंकि यह रोग होने पर कुछ दवाइयों का सेवन करना जरुरी है।इसके अतिरिक्त मधुमेह के रोगी को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे :

  • धूम्रपान और मद्यपान से परहेज करें।
  • मीठी चीजों, वसा (Fat) और कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) युक्त भोजन, बाहर का अस्वास्थ्यकर खाना न खायें। चावल, आलू, लाल मांस, मयदा जैसे पदार्थों का सेवन न करें।
  • फलों का सेवन करें पर आम, केला जैसे फलों का सेवन न करें।
  • समय पर खाना खायें।
  • बहुत अच्छा हो यदि किसी अच्छे खाद्य विशेषज्ञ से अपना डाइट चार्ट (Diet chart) बनाकर, उसके अनुरूप खाना खायें।
  • नियमित रूप से रक्त की जाँच करवाते रहें, हो सके तो खून में शर्करा का स्तर जांचने की मशीन खरीद कर घर पर ही रख लें और समय-समय पर खुद ही रक्त की जाँच करते रहें।

बच्चों की सर्दी-खाँसी के लिए घरेलू उपाय

सर्दी और खाँसी किसी भी उम्र में हो सकती है।बच्चों को अगर सर्दी-खाँसी हो जाती है, तो वो बहुत ही परेशान हो जाते हैं क्योंकि बच्चे तो अपनी समस्याओं को ठीक से बयां भी नहीं कर पाते।अक्सर शिशुओं में सर्दी और खाँसी की समस्या देखी जाती है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होती है।संक्रमित वायु के कारण या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण, ठंड लगने के कारणछोटे बच्चों में सर्दी और खाँसी की समस्या हो सकती है।जन्म लेने के बाद प्रायः सभी बच्चे इस समस्या के शिकार होते हैं।सर्दी और खाँसी से त्रस्त शिशु को बेचैनी-सी होती रहती है, यहां तक कि उसे स्तनपान करने में भी तकलीफ होती है।छोटे बच्चों को जब सर्दी और खाँसी की समस्या होती है तब उसमें कई सारे लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे :

  • 101 डिग्री तक बुखार होना।
  • आँखें लाल हो जाना।
  • गले में खराश होना।
  • जबड़ो और कान में दर्द होना।
  • निरंतर नाक बहना।
  • उल्टी होना।
  • भूख न लगना।
  • चिड़चिड़ापन और बेचैनी।

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बच्चों की सर्दी-खाँसी को दूर करने के घरेलू नुस्खें

  1. हल्दी : सर्दी और खाँसी के लिए हल्दी बहुत ही स्वस्थ और विश्वसनीय उपाय है। यदि बच्चा बहुत ही छोटा है और स्तनपान करता है तो उसे दूध पिलाते वक्त अपने स्तन पर थोड़ी-सी हल्दी का पाउडर लगा लें।इस तरह शिशु हल्दी वाले दूध का सेवन कर लेगा। यदि बच्चा बोतल से या गिलास से दूध पीता है तो या तो उसके बोतल में या फिर उसके गिलास में थोड़ी-सी मात्रा में हल्दी का पाउडर मिलाकर पिलायें।दिन में दो बार हल्दी वाला दूध पिलाने से बच्चे को सर्दी-खाँसी में राहत मिलेगी।
  2. भाँप : सर्दी और खाँसी में भाँप बेहतरीन उपाय है।गरम भाँप बलगम को दूर करता है।शिशु को भाँप दिलाने के लिए आप अपने बाथरूम को चारों तरफ से बंद करके उसमें गरम शावर (Shower) चला दें।जब बाथरूम में भाँप बन जाये तब शिशु को लेकर पंद्रह मिनट के लिए बाथरूम में बैठ जाये।इस तरह भाँप आपके शिशु के फेफड़े को साफ कर देगा और बंद नाक की समस्या भी खत्म हो जायेगी।यदि बच्चा थोड़ा बड़ा हो और खुद से भाँप ले सकता हो तो उसके लिए आप एक बर्तन में गर्म पानी करके उसके सिर और बर्तन को एक बड़े तौलिए से ढक दें और उसे जोर-जोर सेश्वास लेने को कहें।इससे बच्चे को सर्दी और खाँसी की समस्या में राहत मिलेगी। दिन में दो बार इस प्रक्रिया को करने से बच्चा जल्द ही ठीक हो जायेगा।
  3. स्तनपान : 6 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए माँ का दूध ही सर्दी-खाँसी की समस्या से छुटकारा दिलाता है।माँ का दूध शिशु को किसी भी प्रकार के संक्रमण से लड़ने की शक्ति देता है।
  4. अजवाइन : अजवाइन में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है जो सर्दी और खाँसी को दूर करने में मदद करता है। एक कपड़े के टुकड़े में थोड़ी-सी अजवाइन लेकर एक पोटली बना लें और उस पोटली को तवे पर रखकर हल्का गर्म कर लें। फिर उस पोटली को अपने बच्चे की छाती पर रखकर उससे गर्म भाँप दें।दो बातों का धयान रखें, एक यह कि भाँप देते बच्चे का बदन पूरी तरह से ढका हुआ हो और दूसरा यह कि पोटली इतनी गर्म न हो कि बच्चे की मुलायम त्वचा जल जाये। इस प्रक्रिया को दो से तीन दिनों तक दोहराने से सर्दी-खाँसी में फर्क पड़ेगा।गर्म अजवाइन का गंध बलगम को दूर करता है।इसके अतिरिक्त आप सरसों के तेल में अजवाइन मिलाकर भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए पहले एक कटोरी में थोड़ा-सा सरसों का तेल गर्म कर लें, फिर आँच बंद करके उसी गर्म तेल में थोड़ी-सी मात्रा में अजवाइन मिला दें।उस दौरान उठने वाला भाँप बच्चे को दें, उससे बहुत फर्क पड़ेगा, साथ ही अजवाइन युक्त सरसों के तेल से बच्चे की हथेली, छाती, पैर और पूरे बदन में मालिश करें, इससे बच्चे को बंद नाक, बलगम, जुकाम, खाँसी की समस्या में राहत मिलेगी। दिन में दो बार इसी तेल से मालिश करने से दो से तीन दिनों में ही फर्क दिखेगा।
  5. गर्म सूप (Soup) :बच्चा यदि थोड़ा बड़ा हो, अर्थात केवल स्तनपान पर ही न हो और अन्य खाद्य पदार्थों का भी सेवन करता हो, तो आप उसे गर्म सूप पिला सकते है।सब्जियों का सूप या चिकेन (Chicken) सूप पिलाने से जुकाम और खाँसी में फर्क पड़ेगा साथ ही बच्चे की प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होगी और वो तंदरुस्त रहेगा।
  6. अदरक :सर्दी और खाँसी की समस्या में अदरक एक प्रभावी उपाय है। 6 कप पानी में आधा कप बारीक कटा हुआ अदरक और दालचीनी के दो छोटे टुकड़े डालकर बीस मिनट तक धीमी आँच पर पकाएं। उसके बाद उसे छानकर उसमें एक चम्मच शहद या एक चम्मच मिश्री का चूर्ण डालकर बच्चे को पिलायें।एक साल से अधिक उम्र के बच्चे को दिन में तीन से चार बार थोड़ा-थोड़ा करके पिलाने से उसे सर्दी और खाँसी में राहत मिलेगी।रात को सोने जाने से पहले अदरक के इस चाय का सेवन कराने से बच्चे की रात की नींद भी अच्छी होगी और जुकाम एवं खाँसी से छुटकारा भी मिलेगा।
  7. तुलसी के पत्ते का काढ़ा : एकसाल से अधिक उम्र के बच्चे को तुलसी के पत्ते का काढ़ा भी पिला सकते हैं।सर्दी और खाँसी में सबसे प्रभावी और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली औषधि है, तुलसी के पत्ते।तुलसी में जीवाणु प्रतिरोधक गुण है।एक बर्तन में एक लीटर पानी डालें। अब उसमें एक-एक करके करीब पच्चीस से तीस ताजा और साफ तुलसी के पत्ते, दस से बारह पीसी हुई काली मिर्च, चार से पाँच लौंग, दो तेजपत्ता, दो से तीन दालचीनी के छोटे टुकड़े, और आधा चम्मच पीसा हुआ अदरक डालकर अच्छे से तब तक उबालें जब तक पानी घट कर आधा न हो जाये।फिर इस काढ़े को छान लें फिर आधे कप काढ़े में दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार अपने बच्चे को पिलायें।इससे बलगम की समस्या भी खत्म हो जाती है और सर्दी में भी राहत मिलती है।
  8. लहसुन : लहसुन के तेल को लगाने से जुकाम और खाँसी में आराम मिलता है। एक छोटी कटोरी में दो से तीन चम्मच सरसों का तेल डालें साथ ही उसमें लहसुन की दो से तीन कलियाँ डालकर गर्म करें, अब उसी तेल को बच्चे की हथेली, छाती और नाक पर अच्छे से लगायें।इससे सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होगी।
  9. गुड़, काली मिर्च और जीरा : तीन साल से अधिक उम्र के बच्चों को गुड़, काली मिर्च और जीरे के मिश्रण का सेवन कराने से सर्दी और खाँसी की समस्या दूर होती है। एक गिलास गर्म पानी में आधी चम्मच पीसी हुई काली मिर्च, आधा चम्मच पीसा हुआ जीरा और एक चम्मच गुड़ मिलाकर एक मिश्रण तैयार करके बच्चे को उसका सेवन कराने से जुकाम और सर्दी की समस्या दूर हो जाती है। यह मिश्रण छाती में जमे बलगम को निकालने के साथ सर्दी और खाँसी का भी अच्छा उपचार है।
  • नींबू और शहद :सर्दी और खाँसी की समस्या में आप बच्चे कोनींबू के रस में शहद मिलाकर पिला सकते हैं।इससे जुकाम और खाँसी की समस्या दूर होती है और बच्चे को आराम मिलता है।यदि बच्चा एक साल से अधिक उम्र का हो तो आप एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नींबू का रस निचोड़ लें और फिर उसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को पिलायें।यदि बच्चा एक साल से कम उम्र का हो तो एक चम्मच नींबू के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर पिलायें।नींबू में विटामिन सी (Vitamin C) की मात्रा अधिक होती है जो सर्दी और खाँसी के जीवाणुओं से लड़ने में सक्षम है और शहद बलगम हो हटाकर छाती को साफ करता है।
  • पानी : इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि आपके बच्चे के शरीर में पानी का अभाव न हो। इसलिए समय-समय पर उसे पानी पिलाते रहें।पानी मल-मूत्र के द्वारा बच्चे के शरीर से हर तरह के जीवाणु को निकालकर उसे बंद नाक, बलगम, छाती जमने आदि की समस्या से बचाता है।आप पानी को हल्का गर्म करके भी अपने बच्चे को पिला सकते हैं।
  1. डॉक्टर की सलाह : बच्चे को अगर सर्दी-खाँसी के कारण साँस लेने में दिक्कत हो रही हो या वो अत्यधिक मात्रा में उल्टी कर रहा हो अथवा उसके शरीर का तापमान कम न हो रहा हो तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और उपयुक्त जाँच करवायें।

उपर्युक्त घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप बच्चे को सर्दी और खाँसी की समस्या से निजात दिला सकते हैं। वैसे तो विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को पहले दो से तीन सालों में आठ से दस बार जुकाम और खाँसी हो सकता है, इसलिए सर्दी-खाँसी की समस्या बच्चों में आम है।ऐसी स्थिति में बच्चे की तकलीफ को कम करने के लिए कुछ बिन्दुओं पर ध्यान देना आवश्यक हैं, जैसे :

  • बच्चे को जुकाम और खाँसी होने पर उसकी छाती को खुला न रखें और उसके शरीर को ढक कर रखें ताकि किसी भी तरह से उसे ठंड न लगें।
  • यदि आपके घर में कोई बीमार हो या जुकाम और खाँसी का शिकार हो तो उसे बच्चे के पास न जाने दें।
  • अगर आपके घर में कोई धूम्रपान करता हो तो उसे बाहर जाने को कहें, बच्चे के सामने बिल्कुल धूम्रपान न करें।
  • बच्चे का नाक बंद होने पर आप डॉक्टर की सलाह लेकर नेसल ड्रॉप (Nasal Drop) का प्रयोग कर सकते हैं।