एड्स का इलाज़

0

एड्स के बारे में आप जानते ही होगे की ये एक बहुत गंभीर और जानलेवा बीमारी है . यह एक ऐसी बीमारी है जो रोग प्रतिरोधक शक्ति कम कर के इस बीमारी का लक्षण देता है. यह रोग ऐसा है की इसमें व्यक्ति अपनी प्रतिकार शक्ति खो देता है . पीडित व्यक्ति के शरीर को प्रतिरोध के क्षमता कम होने के कारण अवसरवादी संक्रमण जैसे की सर्दी ,खासी,टी बी आदि रोग आसानी से हो जाते हैं, और इन रोगों का इलाज करना कठिन है. यह रोग विषाणु के संक्रमण से होता है. यह एक ऐसा विषाणु रोग है जो हमारी प्रतिकार शक्ति कम कर देता है .

संक्रमण होने के बाद इस रोग की स्थिति तक पहुचने और लक्षण दिखने मे ८ या १० साल या उससे या उससे भी आधिक समय लग सकता है. कई सालो तक तो व्यक्ति को पता ही नही लगता की उसे हुआ क्या है सबसे पहले कमजोरी होने के कारण उसके शरीर के रोगों से लड़ने की शक्ति कम होने लगती है जब तक आपको इस रोग की जानकारी होगी तब तक शायद बहूत देर हो जाए क्यूंकि जाँच करवाने के तीन साल के अन्दर ही रोगी अपना दम तोड़ने लगता है


एड्स के कारन –
यह रोग संक्रमण से होता है अगर आप के मुह में छाले या मसूड़ों से खून बह रहा हो तब भी ये संक्रमण फ़ैल सकता है. जिस व्यक्ति को एड्स है उस रोगी पर प्रयोग किये हुये इंजेक्शन को अगर आप दूसरे व्यक्ति को लगवाते है तो उससे भी यह रोग हो सकता है . क्योकि वह इंजेक्शन रोगी को लग चुका है ,इसलिए हमें रोगी के प्रयोग किया हुआ इंजेक्शन दूसरे व्यक्ति को नहीं लगाना चाहिए . एड्स के रोगी का खून कभी भी हमें दूसरे व्यक्ति के इस्तमाल के लिए नहीं प्रयोग करना चाहिए या फिर जिस माँ को यह रोग है तो बच्चे को माँ से दूर रखने की कोशिश करे क्योकि बच्चा माँ का दूध न पिए . उस माँ का दूध बच्चे को कभी नहीं पिलाओ और जिस माँ को यह रोग है तो जन्म लेने वाले शिशु को भी हो सकता है . मैं आपको एक उदहारण देते है जैसे आप दाढ़ी बनवा रहे है, या फिर अपने शरीर में टैटू लगवा रहे है, तो उसके लिए आप सुई का इस्तेमाल तो करेंगे ही , तो उसे अपने शरीर में छेद करवाएंगे इसी तरह उस सुई जो की आप प्रयोग में ला रहे है उस सुई से अगर आप किसी दुसरे इंसान के शरीर में छेद करेंगे तो उसे भी HIV हो सकता है .हालाँकि रोगी के हाथ मिलने पर ये रोग नही होता है |


रोगी को आप गले लगाओ या कस कर पकड़ लो इससे भी ये रोग नही होता है . रोग से ग्रस्त रोगी के साथ रहने से या फिर उसके साथ खाना खाने से भी नही होता है. छिकने या खासने से भी यह रोग नही होता . मच्छर के काटने से भी नही फैलता है ,आंसू या रोगी के थूक से भी कोई प्रभाव नही पड़ता है |
रोगी के लक्षण –

रोगी के शरीर का वजन बहुत ही कम होना और आपको बहुत समय तक खासी का आना और आपको बुखार की शिकायत बार बार होने लगे. लासिकाओ और आपके ग्रन्थियो में सूजन का आना , हफ्ते से ज्यादा समय तक दस्त होना, रात को पसीना आना, याददाश्त कमजोर होना , हमारे शरीर में बराबर दर्द लगा रहे, मानसिक रोग होना आदि यह बीमारी बहुत ही खतरनाक बीमारी है यह बीमारी से हम परेशान रहते है. हमें खाने पीने में परहेज करना पड़ता है .दवाई समय पर लेनी चाहिए .
एक आधुनिक चिकित्सा में भी HIV के रोगों के लिए अभी तक कोई इलाज नही है . एंटी रेक्टो एंटीरेटोवाइरल थैरेपी का हाल ही में एड्स के इलाज के बारे में ही इसका प्रयोग किया गया है. हालाँकि इसके बाते में साथ कई साइडइफ़ेक्ट मतलब कि प्रतिरोध के विकास जुड़े हुये है और यह जो प्रतिरोधक इलाज है. यह बहुत ही महगा इलाज है अधिकांशतः आयुर्वैदिक उपचार ही काफी किफायती उपचार है. इस आयुर्वैदिक उपचार के साथ साथ हमें पौष्टिक आहार और योगा-व्यायाम हमें नियमित रूप से इसे अपनाना चाहिए .
एड्स के प्रबंधक के लिए यह बहुत ही महतवपूर्ण बात है. HIV के रोगियों के उपचार के लिए आम तौर पर इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी बूटियां में अवाला का और उसमे तुलसी को भी मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वैदिक दवाइयां में रोगियों के एड्स के ही वायरस होते है. वह बहुत ही खतरनाक होते है उन खतरनाक वायरस को ख़त्म करने के लिए इम्यून डेवलपर या फिर हमारे शरीर के विकास करने के लिए यह किया जा सकता है. वायरस किलर के रूप में आयुर्वैदिक विभिन्न प्रकार का है. आयुर्वैदिक दवाइयां कुछ ऐसी हैं:- एरी यह जो सक्षमा शातिशाली वायरस किलर है. जो कि HIV वायरस को अच्छी तरह से मार सकती है. ये दवाइयां हमारी सेहत के लिए सयुंक्त हो सकता है. एलोपैथिक दवाओ के साथ वे कई दवाइयां मिलाई जा सकती है हालाँकि ये आयुर्वेदिक दवाये इम्युनिटी को बढाती है. CD में चार सेल के बाद साथ में ८ कोशिकl जो है उनसे लड़ने के लिए इन्हें जाना जाते है. जैसे की चवनप्रास, अश्व्गंधक रसायन , कनमण रसायन , शोनिधा कम बस्कारा आदि दवाएँ है. यह दवा हमारे शरीर के अन्दर की गन्दगी को साफ करने में मदद करती है. कोशिकाओ को भी साफ करती है. जैसे की शोनिधा बस्कारा ननार्थ आदि l कशिराबाला कुछ आयुर्वैदिक दवा ऐसी है. जो कि प्रतीक्षा को बढाती है और हमारी बाड़ी में कलिसर रूप में साफ करती है.
आयुर्वैदिक दवाएं जल्दी असर नही करती है. परन्तु आयुर्वैदिक दवा HIV के रोगियों के लिए उपयोगी है. पर यह दवा अच्छी तरह से रोगियों की पूरी इलाज नही करती . इनके लिए चाहिए anti ritroviral इन रोगियों के लिए एक ऐसी दवा की जाँच की गयी है. जो की चार दवा को मिला कर तैयार की गयी है. इसे दवा के इस्तेमाल करने के बाद यह कहा जा रहा है की ये दावा रोगियों के लिए बहुत महतवपूर्ण दवा है. इस दवा से रोगी सुरक्षित रहेगे.
हमारे शरीर में HIV जैसा भयंकर इन्फेक्शन होता है तो यह जीन बहुत ही ज्यादा सक्रिय होता है और तो छोडो आश्चर्य वाली यह बात है कि ये खुद ही इम्यून सिस्टम को बिलकुल ही बंद कर देता हैं . इसलिए कहा जाता है कि यह वायरस जो होता हैं इसे HIV और habtaitis ,बी सी और टी बी जैसे भयंकर बीमारी या इन्फेक्शन का इलाज हो सकता है . HIV और टी बी के जो वायरस होते है. वह वायरस इतना शरीर को तंग कर देता है कि शरीर को ज्यादा ही थका देते है फिर ठीक होने के बाद उनसे लड़ने के लिए हथियार डाल देता है|

HIV से सावधान रहे लापरवाही न करे. हमें दवा समय समय पर लेना चाहिये. अपना ध्यान रखे. इन्फेक्शन से बच के रहे . प्रतिरोधक क्षमता को हमें इतना बढ़ा देना चाहिये कि हमारे कामयाबी सिस्टम का जो वायरस होता है | उसे नाकाम कर देता है . हमें अपने खान पान और रहन सहन में सावधानी बरतनी चाहिए जिससे की इन्फेक्शन न फैले बीमारी से दूर रहे |

loading...

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.