DOTS TB से कैसे बचे “kaise bache TB se”

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DOTS TB से कैसे बचे  “kaise bache TB se”

T.B बीमारी क्या है ?  “ye ek bimari hai kya ?”

TB यानी छय रोग एक संक्रमण रोग है जो कि किटाणुऔ के कारण फेलता है.

 

टीवी के लक्षण क्या है ?  “TB ke Symptoms kya hain?”

3 सप्ताह से ज्यादा अगर आपको खांसी, बुखार विशेषतौर से शाम को बढ़ने वाला बुखार, छाती में दर्द वजन का घटना, भूख में कमी बलगम के साथ खून आना ये सब टी.बी के लक्ष्ण हैं.

 

टी.बी की जांच कहा होती है ?  “TB ka treatment kaha hota hai ?”

आपको 3 सप्ताह से खांसी हो रही है तो आप अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाये जहां बलगम की जांच होती है. वहां बलगम के नमूनों की निशुल्क जांच कराएं.

 

टी.बी की जांच क्या निशुल्क  है ? “TB ka treatment kya free hai ?”

जी हाँ भारत सरकार द्वरा ये निशुल्क है. टी.बी का इलाज और टी.बी  की जांच सरकारी अस्पताल में निशुल्क किया जाता है.

 

टी.बी का उपचार कहां होता है ?  “TB ka treatment kaha hota hai ?”

रोगी को अपने घर के नजदीक जो उप स्वास्थ्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं चिकित्सालयों में DOTS पद्धति के अंतर्गत किया जाता है.

 

उपचार विधि  “treatment method”

प्रथम 2 से 3 माह स्वास्थ्य पर स्वास्थ्य की कमिं की सीधी देखभाल सप्ताह में तीन बार औषधियों का सेवन कराया जाता है. बाकी के जो 4-5 माह मैं रोगी को 1 सप्ताह के लिए औषधियां दी जाती है. जिसमें पहला खुराक चिकित्सा कर्मी के सामने ही खानी पड़ती है और शेष थोड़ा घर के लिए ही दी जाती है. नियम से आप अपने घर में खाएं नियम के अनुसार हम अगर औषधियों का सेवन करेंगे तो टीवी से हमें छुटकारा मिल सकता है.

 

बचाव के साधन  “how to protect from TB”

बच्चों के जन्म से 1 माह के अंतर B.C.G  का टीका लगवाना जरूरी है. टीवी के मरीज को खांसते छींकते समय मुंह पर रुमाल रखना चाहिए जिससे कि किसी और को इन्फेक्शन ना पहुंचे. मरीजों को चाहिए कि जगह-जगह न थूंके के छह रोग का पूरी तरह से इलाज करवाना ही सबसे बड़ा इलाज का साधन है. टीवी रोग के निदान के लिए एक्सरे करवाना बलगम की जांच की अपेक्षा महगा तथा कम भरोसेमंद होता है. कुछ रोगियों को एक एक्सरे दूसरा जांच करवाना जरूरी होता है. जैसे FNAG BLOPSY, CT SCAN की आवश्यकता पड़ सकती है.

 

क्या सभी प्रकार के रोगियों के लिए कारगार है ?  “kya Sbhi types ke patient ka treatment hota hai”

DOTS द्धति के अलावा सभी प्रकार के रोगियों को तीन समूह से विभाजित कर उसका उपचारित किया जाता है. सभी प्रकार के छय रोगों का इलाज किया जाता है. यह पक्का इलाज पद्धति से संभव है.

 

ड्रॉप्स के टी.बी  के अंतर्गत टी.बी की चिकित्सा क्या है ?

आजकल तो ऐसी शक्तिशाली औषधियाँ मौजूद है जिससे हम टी.बी का रोग जाता है. वह ठीक हो जाता है परंतु जो व्यक्ति सामान्यत पूर्ण अवधी तक नियम से अपनी दवाइयां नहीं लेंगे तो सीधी देखरेख के कम अवधि चिकित्सा टी.बी के मरीजों को पूरी तरह से मुक्ति सुनिश्चित करने का सबसे अच्छा तरीका है.

 

यह विधि स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व स्तर पर टीवी के नियंत्रण के लिए अपनाई गई है. एक विश्वसनीय विधान यह  दिया है कि जिससे रोगियों को 1 दिन सप्ताह में छोड़कर बाकी के 3 दिन कार्यकर्ता के माध्यम से दवाइयों का उपयोग किया जाता है. DOTS विधि के अनुसार चिकित्सा के तीन वर्ग है पहला, दूसरा और तीसरा सभी वर्ग में चिकित्सा का गहन निरंतर पक्ष होते हैं.

 

गहन पक्ष के दौरान विशेष ध्यान हमें रखने की जरूरत है तथा हमें यह सुनिश्चित करना है कि टी.बी का मरीज को  पहला खुराक दवाई का स्वास्थ्य कार्यकर्ता स्वयं सेवक समाज के कार्य करने वाले जैसे कि स्वास्थ्य केंद्र के कार्यकर्ताओं को जो निजी चिकित्सा की देखरेख में रहते हैं उनसे लेनी चैये और जो आपकी दो खुराक हैं उसे आप अपने आप लेले. जो पिछले सप्ताह में काम किया गया खाली ब्लास्टर पैक अपने साथ जरूर लाएं और सप्ताह में तीन बार औषधियों का सेवन कराया जाता है. जितना जरूरी 3 दिन की चिकित्सा है उतनी जरूरी है वो उतना ही प्रभावि रहा है. जितने प्रतिदिन की दवाई जरुरी है उतने दिन यह हमारा फर्ज है कि हम चिकित्सा देखरेख में रहे.

 

मरीज को पहली खुराक चिकित्सा अधिकारी के सामने लेनी चाहिए. अगर मरीज नियम के अनुसार चिकित्सा में औषधियां लेने नहीं पहुंचता तो यह हमारा उत्तर दायित्व नहीं है कि हम मरीज को खोजकर उसे उसका परामर्श समझाएं. उस दिन और अगले दिन भी मरीज को औषधि का सेवन नियम के अनुसार करवानी चाहिए.

जो रोगी प्रथम वर्ग के होते हैं उसको 22 खुराक और दूसरे पकार के रोगी जो है उसे 34 खुराक पूरी होने पर रोगी के 2 नोमुने की जांच करवानी चाहिए. उसके सभी खुराक पूरी होने पर जांच नतीजा आने पर यदि आपका बलगम सकर्मक है तो रोगी को नियम से औषधि देना प्रारंभ कर देना चाहिए. बलगम में आपकी यदि संक्रमण है तो उपचार करने वाली औषधियों के देनेवाले की दवाई और बढ़ा देनी चाहिए.

 

औषधियों को नियम से खाएं अपना पूरा ध्यान रखें और चिकनी चीजें ना खाएं और हरी सब्जी का सेवन करें और जूस पियें. चिकित्सा अधिकारी के देखरेख में रहे. बिना उसके सलाह के दूसरी दवाई ना ले खानपान का पूरा ध्यान देना चाहिए. टी.बी के मरीज को परहेज करने से आप ठीक हो जाएंगे. टी.बी का मरीज अपने परिवार से दूर रहें क्योंकि उसके खांसने और झींकने से उसके परिवार वाले भी बीमारी का शिकार बन सकते हैं. कही भी खांसते और छींकते समय जरूर दूर रहें क्योंकि कीटाणु हवा के द्वारा दूसरे लोगों में जा सकता है. टी.बी के मरीज को अपना बिस्टर अलग रखना चैये और रात को अलग ही सोना चैये क्योंकि रात को जब उसको खांसी और चिंक आयेगी तोह अगर कोई उसके साथ सू रहा होगा तोह उसको भी बीमारी पकड सकती है. टी.बी के मरीज को अपने कपडे डेली गरम पानी से धुलने चाहिए और साफ़ सफाई से रहना चाहिए.

 

ध्यान रखे जो ऊपर बताये गये टी.बी के लक्ष्ण उनको ध्यान मैं रखे और अगर ऐसी कोई भी सम्भावना लगती है तो तुरंत चिकित्साल्य जाये कोई भी आलास न करे क्योंकि यह बहुत खतरनाक साबीत हो सकता है. इसलिए जो भी ऊपर बताया हजी उसको एकदम ध्यान से पढ़े और अपने जिंदगी मे उतारे.

 


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